PretikaHaunted Placesदरवाज़े के उस पार — Season 2

एपिसोड 7 — दरवाज़े के उस पार

firoj saifi · Haunted Places · 1 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
दरवाज़े के उस पार — Season 2
Chapter
7 of 8
Category
Haunted Places
Reading time
1 min
Words
185
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

दरवाज़े के दूसरी ओर एक लंबा अंधकारमय गलियारा था।

दीवारों पर उन सभी लोगों की तस्वीरें थीं जो वर्षों पहले हवेली में लापता हुए थे।

माही आगे बढ़ी।

उसे कनक दिखाई दी।

लेकिन कनक अब भयावह नहीं थी।

उसने कहा,

"माही, वापस जाओ।"

"आप यहाँ क्यों हैं?"

कनक ने उत्तर दिया,

"मैं तो जा चुकी हूँ। यह कोई और है।"

अचानक पीछे देवेंद्र प्रकट हुआ।

उसका चेहरा अब मानव जैसा नहीं था।

वह उस अंधकार का हिस्सा बन चुका था।

"तुम्हारे परिवार ने मुझे कैद किया था।"

अरमान ने कहा,

"हमने नहीं।"

देवेंद्र हँसा।

"लेकिन तुम्हारे परिवार ने जो किया, उसकी कीमत किसी को तो चुकानी होगी।"

माही आगे बढ़ी।

"यदि बदला लेना है तो मुझसे लो। मेरे परिवार को छोड़ दो।"

देवेंद्र कुछ क्षण चुप रहा।

फिर बोला,

"क्या तुम जानते हो इस दरवाज़े की सबसे बड़ी शक्ति क्या है?"

माही ने सिर हिलाया।

"यह मनुष्य के भय को वास्तविकता में बदल देता है।"

माही ने आँखें बंद कर लीं।

उसने भय को स्वीकार करना बंद कर दिया।

कनक की आवाज़ आई—

"यही इसकी कमजोरी है।"

माही ने आँखें खोलीं।

उसने दरवाज़े की ओर देखा और कहा,

"तुम मेरे भय नहीं हो।"

दरवाज़ा काँपने लगा।

देवेंद्र चीखा।

दीवारें टूटने लगीं।

अंधकार पीछे हटने लगा।

लेकिन अंतिम क्षण में देवेंद्र मुस्कुराया।

"तुमने मुझे बंद कर दिया..."

उसकी आवाज़ गूँज उठी।

"...लेकिन दरवाज़ा नहीं।"

""""एपिसोड 8""""

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