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PART 5 — पिता

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

आरव की आँखों में आँसू आ जाते हैं।

“पापा?”

देवेंद्र मुस्कुराता है।

“तू सच में वापस आ गया।”

आरव उसके पास जाता है।

“आप मरे नहीं थे?”

देवेंद्र कहता है—

“मैं मर चुका हूँ।”

आरव रुक जाता है।

“फिर आप…”

“मैं यहाँ का हिस्सा हूँ।”

देवेंद्र बावड़ी की तरफ देखता है।

फिर कहता है—

“इस गाँव में रात को जो आवाज़ें सुनाई देती हैं… वो मरे हुए लोगों की नहीं हैं।”

“तो किसकी हैं?”

देवेंद्र की आँखें बावड़ी के अंधेरे में टिक जाती हैं।

“जो मरना नहीं चाहते।”

वह आरव को बताता है कि कई साल पहले गाँव में एक रस्म होती थी।

हर साल एक इंसान को बावड़ी में बंद किया जाता था।

ताकि गाँव सुरक्षित रहे।

लेकिन एक साल…

रस्म के लिए चुनी गई लड़की ने मरने से पहले श्राप दे दिया।

उसके बाद जो भी इस रस्म को रोकने की कोशिश करता…

वह रात में गायब हो जाता।

देवेंद्र ने रस्म रोक दी थी।

लेकिन उसकी कीमत…

रिया थी।

आरव चीखता है—

“आपने मेरी बहन को क्यों दिया?”

देवेंद्र की आँखों से आँसू निकलते हैं।

“क्योंकि उस रात मुझे तुम दोनों में से किसी एक को चुनना था।”

आरव के पैरों तले जमीन खिसक जाती है।

तभी मीरा पीछे से चिल्लाती है—

“आरव! आपके पापा अकेले नहीं हैं!”

देवेंद्र के पीछे…

सफेद कपड़ों में वही लड़की खड़ी थी।

और इस बार…

उसके चेहरे पर आँखें नहीं थीं।

""""पार्ट 6""""

Writer
firoj saifi
Story
Raat ki khamoshi
Chapter
5 of 10
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
232
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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