Pretika › Haunted Places › Raat ki khamoshi
PART 4 — बावड़ी
firoj saifi · Haunted Places · 1 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- Raat ki khamoshi
- Chapter
- 4 of 10
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 1 min
- Words
- 129
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
रात के 1 बजकर 13 मिनट।
आरव और मीरा पुरानी बावड़ी के सामने खड़े थे।
बावड़ी के चारों तरफ लाल धागे बंधे थे।
हर धागे पर एक नाम लिखा था।
कुछ नाम पुराने थे।
कुछ नए।
सबसे आखिरी धागे पर लिखा था—
“आरव।”
मीरा कहती है—
“हमें वापस जाना चाहिए।”
आरव सीढ़ियों से नीचे उतरता है।
नीचे पहुँचकर उसे पानी दिखाई देता है।
लेकिन पानी में उसका प्रतिबिंब नहीं था।
बल्कि…
रिया खड़ी थी।
भीगी हुई।
पीली आँखें।
वह पानी के अंदर से आरव को देख रही थी।
आरव चीखता है—
“रिया!”
रिया मुस्कुराती है।
और कहती है—
“तुमने मुझे बहुत देर कर दी, भैया।”
आरव पानी में उतरने लगता है।
मीरा उसे रोकती है।
अचानक पानी के अंदर से दर्जनों हाथ बाहर निकल आते हैं।
आरव पीछे गिर जाता है।
और उसी समय बावड़ी के अंदर से एक आवाज़ आती है—
“रिया नहीं है वो।”
आरव ऊपर देखता है।
सीढ़ियों के आखिरी छोर पर…
उसका पिता खड़ा था।
जिंदा।
""""पार्ट 5""""