PretikaHaunted PlacesRaat ki khamoshi

PART 2 — बंद कमरा

firoj saifi · Haunted Places · 2 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
Raat ki khamoshi
Chapter
2 of 10
Category
Haunted Places
Reading time
2 min
Words
218
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

सुबह आरव की आँख खुलती है।

वह फर्श पर पड़ा था।

कमरे में सूरज की रोशनी आ रही थी।

रात की घटना उसे सपना लगती है।

लेकिन उसके हाथ में अभी भी वही कागज़ था।

आरव बाहर निकलता है।

घर के सामने एक बूढ़ी औरत खड़ी थी।

शारदा दादी।

वह आरव को देखकर घबरा जाती है।

“तू यहाँ क्यों आया?”

आरव कहता है—

“ये मेरे पिता का घर है।”

दादी कुछ सेकंड उसे देखती रहती हैं।

फिर कहती हैं—

“तेरे पिता का घर था।”

“क्या मतलब?”

दादी जवाब नहीं देतीं।

बस जाने लगती हैं।

आरव पीछे से पूछता है—

“मेरे पिता की मौत कैसे हुई थी?”

दादी रुक जाती हैं।

और बिना पलटे कहती हैं—

“जिस रात वो मरे… उस रात पूरे गाँव में एक भी कुत्ता नहीं भौंका था।”

फिर वह चली जाती हैं।

आरव घर में वापस आता है।

उसे एक बंद कमरा दिखाई देता है।

दरवाज़े पर बाहर से ताला लगा है।

उस पर लाल रंग से लिखा है—

“इसे मत खोलना।”

आरव ताला तोड़ देता है।

अंदर दीवारों पर दर्जनों तस्वीरें लगी थीं।

हर तस्वीर में…

एक ही लड़की।

काली आँखें।

लंबे बाल।

सफेद कपड़े।

आरव आखिरी तस्वीर के पास जाता है।

उसके नीचे तारीख लिखी थी—

10 अगस्त 2016

और तस्वीर के कोने में उसका पिता खड़ा था।

लेकिन तस्वीर में लड़की के पीछे…

एक छोटा बच्चा भी था।

आरव ने गौर से देखा।

वह बच्चा…

आरव खुद था।

तभी पीछे से दरवाज़ा बंद हो गया।

और अंधेरे में किसी ने कहा—

“तुम्हें याद नहीं है?”

आरव धीरे से पलटा।

कमरे में कोई नहीं था।

फिर आवाज़ आई—

“तुम उस रात यहाँ थे।”

"""""पार्ट 3""""

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