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भाग 27: घाटी का नया संरक्षक और प्रेम का अनन्त चक्र
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट
ब्लैकवुड मैनर के उस गुप्त कपाट से मिले 'द ओरिजिनल्स ऑफ ओकवुड' के उस प्राचीन दस्तावेज और नीले स्फटिक ने व्लाद और नताशा के जीवन को एक बिल्कुल नया आयाम दे दिया था। यह अब केवल एक पिशाच और इंसानी पुनर्जन्म के मिलने की कहानी नहीं रह गई थी, बल्कि यह ओकवुड घाटी की उस आदिम प्रकृति और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का अटूट हिस्सा बन चुकी थी जो सदियों से इन दोनों की रूहों को एक-दूसरे के करीब खींचती आ रही थी।
ओकवुड घाटी का बदलता मिजाज
विएना कैसल की कौंसिल के पतन और गैब्रिएल तथा थॉमस जैसे किरदारों के पूरी तरह गायब हो जाने के बाद, ओकवुड घाटी का मौसम भी जैसे एक नए सुकून और सात्विक ऊर्जा में ढल चुका था। वह कुटिल और बर्फीला कोहरा जो हमेशा ब्लैकवुड मैनर की मीनारों को घेरे रहता था, अब छंट चुका था। उसकी जगह सुबह की ठंडी, भीगी हुई हवा और घाटी के जंगलों में खिलते हुए जंगली फूलों की महक ने ले ली थी।
ग्रैंड लाइब्रेरी की मेज़ पर उस नीले स्फटिक को रखे हुए तीन दिन बीत चुके थे। उस स्फटिक से निकलने वाली मद्धम नीली रोशनी ने लाइब्रेरी के माहौल को पूरी तरह बदल दिया था। अब वहाँ कोई भारीपन या डरावनी परछाइयाँ नहीं थीं, बल्कि एक अजीब सी दिव्य शांति थी।
नताशा सुबह उठकर उसी मेज़ के पास बैठी थी। उसने अपने हाथों में वह पुरानी काली डायरी ले रखी थी, जिसके पन्ने अब अपने आप एक शांत लय में पलट रहे थे। जिन पन्नों पर कभी खौफनाक भविष्यवाणियाँ और श्राप लिखे थे, वे अब पूरी तरह साफ और सुनहरे कागज़ में बदल चुके थे।
व्लाद लाइब्रेरी के दरवाजे पर खड़ा होकर चुपचाप नताशा को देख रहा था। उसने आज भी वही साधारण डार्क सूट पहन रखा था। उसकी पिशाची आँखें, जो कभी खून की तरह लाल अंगारे हुआ करती थीं, अब पूरी तरह शांत और इंसानी भावनाओं से परिपूर्ण गहरी भूरी हो चुकी थीं।
"तुम सुबह से उस डायरी को क्या देख रही हो, नताशा?" व्लाद ने अपनी मखमली और हल्की सी हँसी वाली आवाज़ में पूछा।
नताशा ने मुस्कुराते हुए सिर उठाया और डायरी को बंद करते हुए कहा, "मैं यह सोच रही हूँ, व्लाद, कि हम जिस अंधेरे से लड़ते-लड़ते यहाँ तक पहुँचे हैं, वह असल में कोई अभिशाप नहीं था। वह तो बस एक लंबी रात थी जिसके बाद यह खूबसूरत सवेरा आना तय था।"
व्लाद धीरे-धीरे चलकर नताशा के करीब आया। उसने अपना हाथ नताशा के कंधे पर रखा। उसके स्पर्श की गर्ماहट अब पूरी तरह एक जीवित और धड़कते हुए इंसान जैसी महसूस होती थी।
"अंधेरा और उजाला एक ही सिक्के के दो पहलू हैं, नताशा," व्लाद ने बहुत दार्शनिक और गहरे स्वर में कहा। "अगर मैंने वह तीन सौ साल का अकेलापन और दर्द न झेला होता, तो शायद आज इस सवेरे की कीमत और इस प्रेम की गहराई को मैं इस शिद्दत से महसूस नहीं कर पाता। तुम मेरी उस लंबी रात का सबसे खूबसूरत सवेरा हो।"
घाटी के लोगों का लौटना
दोपहर के वक्त, ब्लैकवुड मैनर के इतिहास में एक ऐसी घटना घटी जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
हवेली के मुख्य लोहे के गेट पर किसी ने बहुत ही संकोच के साथ घंटी बजाई—टन-टन...
नताशा और व्लाद चौंककर मुख्य हॉल की तरफ आए। व्लाद ने दरवाजा खोला तो बाहर ओकवुड गाँव के कुछ पुराने बुजुर्ग और स्थानीय लोग खड़े थे। उनके चेहरों पर वह पुराना डर या अविश्वास नहीं था, बल्कि एक अजीब सी झिझक और सम्मान का भाव था।
आगे खड़े एक बुजुर्ग, जिनका नाम मिस्टर हेंडरसन था, ने अपनी टोपी उतारकर झुकाव के साथ कहा, "क्षमा कीजिए, मि. वोल्कोव... और सुश्री नताशा। हम जानते हैं कि हमारे पूर्वजों ने और उस 'ऑर्डर ऑफ द सिल्वर क्रूसिबल' ने इस हवेली के साथ बहुत अन्याय किया था। वे डरते थे क्योंकि वे आपको समझ नहीं पाए थे।"
व्लाद ने अपनी गंभीर और शांत नजरों से उन गाँववालों को देखा। उसने बहुत ही नपे-तुले और शांत स्वर में पूछा, "अब तुम लोग यहाँ क्यों आए हो, हेंडरसन? क्या ओकवुड के उस पुराने समाज का कोई और साया अभी बाकी है?"
मिस्टर हेंडरसन ने सिर हिलाकर नफे से कहा, "नहीं, मि. वोल्कोव। थॉमस और उसके साथी हमेशा के लिए घाटी छोड़कर भाग चुके हैं। हम लोग यहाँ सिर्फ यह कहने आए हैं कि अब ओकवुड घाटी में कोई डर नहीं है। हमने देखा है कि कैसे इस हवेली के ऊपर से वह कुटिल कोहरा छंट गया है और यहाँ एक नया जीवन पनप रहा है। हम चाहते हैं कि हमारे बीच के वे पुराने भय और दीवारें हमेशा के लिए खत्म हों।"
नताशा ने आगे बढ़कर मुख्य दरवाजे के पास कदम रखा। उसके चेहरे पर एक बेहद प्यारी और आश्वस्त करने वाली मुस्कान थी।
"आप सबका स्वागत है," नताशा ने बहुत ही आत्मीयता से कहा। "ब्लैकवुड मैनर अब किसी डर या रहस्य का स्थान नहीं है। यह हम सबका घर है।"
गाँववालों के चेहरों पर एक राहत की सांस उभरी। उन्होंने कुछ ताजे फल और ओकवुड घाटी के जंगलों में उगने वाले फूलों के गुलदस्ते वेदी पर रखे और सम्मान के साथ विदा लिए। यह इस बात का सबूत था कि न केवल व्लाद और नताशा का आंतरिक युद्ध समाप्त हो चुका था, बल्कि सदियों से इंसानों और इस पिशाच के बीच चली आ रही खाई भी अब भर चुकी थी।
बागीचे में शाम और अनन्त का वादा
शाम ढलने लगी थी। ओकवुड घाटी पर आसमान में सूरज डूबते वक्त नारंगी और सुनहरे रंगों का एक अद्भुत ताना-बाना बुन रहा था।
ब्लैकवुड मैनर का वह विशाल बागीचा, जो कभी मृत और सूखा हुआ दिखाई देता था, अब चारों तरफ खिले हुए गुलाबों और हरियाली से जगमगा रहा था। बीचों-बीच उस फव्वारे से पानी की कल-कल बह रही थी, जो इस बात की गवाही दे रहा था कि हवेली की मिट्टी में अब जीवन का संचार हो चुका है।
नताशा और व्लाद उस बागीचे के संगमरमर के चबूतरे पर खड़े होकर दूर उन पहाड़ियों को देख रहे थे जहाँ से कभी वे कोहरे और परछाइयों के साये में आए थे।
व्लाद ने अपना एक हाथ नताशा की कमर के गिर्द रखा और दूसरे हाथ से नताशा की उंगलियों को अपनी उंगलियों में पिरो लिया।
"नताशा," व्लाद की मखमली और अत्यंत भावुक आवाज़ उस शाम की हवा में गूँजी। "तीन सौ साल पहले जब मैंने इस घाटी में नतालिया को खोया था, तब मुझे लगा था कि मेरा यह वजूद अब हमेशा के लिए वीरान हो चुका है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि नियति मुझे इतना बड़ा उपहार देगी।"
नताशा ने अपना सिर व्लाद के कंधे पर टिका दिया और अपनी आँखें बंद कर लीं।
"नियति ने हमें सिर्फ मिलाया नहीं है, व्लाद," नताशा ने बहुत ही कोमल और दृढ़ स्वर में कहा। "उसने हमें यह सिखाया है कि सच्चा प्रेम समय, मृत्यु और किसी भी अभिशाप की सीमाओं से परे होता है। हम न तो सिर्फ उस अतीत की नतालिया हैं और न ही कोई आधुनिक लाइब्रेरियन... हम वह ऊर्जा हैं जो इस ब्रह्मांड में हमेशा अमर रहेगी।"
व्लाद ने झुककर नताशा के माथे पर एक गहरा, अनन्त प्रेम का चुंबन दिया। उस चुंबन में कोई पिशाची प्यास या कोई डर नहीं था; उसमें केवल एक मुकम्मल प्रेमी का अपनी अर्धांगिनी के प्रति सर्वस्व समर्पण था।
बागीचे के उस कोने में रखा वह नीला स्फटिक जब सूरज की अंतिम किरण से टकराया, तो उससे एक हल्की सी सुनहरी और नीली रोशनी का वृत्त पूरे ब्लैकवुड मैनर के ऊपर फैल गया—मानो ओकवुड घाटी की वह प्राचीन प्रकृति खुद इस अमर प्रेम की इस महागाथा को अपनी अनंत गवाही दे रही हो।
हवेली की वे पुरानी दीवारें, जो कभी केवल दर्द और सन्नाटे की गवाह हुआ करती थीं, अब इस नए युग के आगमन पर मुस्कुरा रही थीं—एक ऐसा युग जहाँ 'मि. वैम्पायर' और उनकी प्रिय नताशा का यह अनन्त प्रेम हर दिन, हर पल, और हर जन्म के लिए अचल और अमर हो चुका था।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 27 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 7 min
- Words
- 1298
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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