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भाग 5 — पचास साल का इंतज़ार
Piyashi Atma · Village Horror · 4 मिनट
**"मेरे बापू अगले वीरवार वापस उसी रूट पर गए।"**
देवीलाल ने डायरी बंद करते हुए कहा,
**"सबने मना किया। ड्राइवर खुद नहीं आया। कहा—पागल हो गया है, आँधी के डर से। मगर बापू गए और बीराण पर गाड़ी रुकी और दरवाज़े खुले और..."**
दिशा ने धीरे से पूछा,
**"और वो चढ़े?"**
**"140 के 140 चढ़े।"**
देवीलाल की आँखें नम हो गईं।
**"बापू कहते थे, उस रात गाड़ी में उन्होंने सबसे अजीब सफर किया। वो लोग कितने सहज थे, कितने खुश। कोई बदला नहीं माँग रहा था, कोई गाली नहीं दे रहा था। बस सब इतना कह रहे थे—'गाड़ी आ गई... गाड़ी आ गई... बस अब पहुँच जाएँगे।'**
**"और टर्मिनस पर उतरकर वो उस खंभे के आगे गायब हो गए। और अगले वीरवार..."**
दिशा ने बात पूरी की।
**"फिर वहीं थे।"**
**"फिर वहीं।"**
देवीलाल ने रेत की तरफ देखा।
**"पचास साल से हर वीरवार। मेरे बापू ने उनकी सेवा की—चालीस साल तक। चाय वाले से लेकर स्टेशन मास्टर तक, सबसे बात करते थे। और मरते-मरते मुझसे कहा—'देवीलाल, गाड़ी बीराण पर रुकनी चाहिए। ये हमारे खानदान का ऋण है। जब तक कोई इनकी शादी नहीं करवा देता...'"**
**"शादी?"** दिशा ने पूछा, **"हीरा बाई की शादी? मगर दूल्हा तो रामसर में होगा। पचास साल पहले वो तो..."**
देवीलाल चुप हो गया।
और उसकी चुप्पी में दिशा ने महसूस किया कि कुछ है, जो वो नहीं बता रहा।
**"देवीलाल जी, दूल्हा कौन था?"**
देवीलाल ने बहुत धीरे से कहा—
**"दूल्हा रामसर का था। श्रवण मास्टर जी का बेटा। और उस रात वो बीराण आ रहा था—शादी के लिए। मगर वो गाँव वालों के साथ नहीं आ रहा था। वो शहर से सीधा उसी गाड़ी से आ रहा था..."**
दिशा का दिल धक-सा रह गया।
**"...उसी गाड़ी से, जो बीराण पर नहीं रुकी थी।"**
**"हाँ।"**
देवीलाल ने सिर हिलाया।
**"दूल्हा उसी गाड़ी में था, जिसने उसके पूरे ससुराल को रेत में डूबते छोड़ दिया। और गाड़ी जब रामसर पहुँची, तो उसे खबर मिली। और वो उसी रात..."**
देवीलाल कुछ पल के लिए रुक गया।
**"...पागल हो गया।"**
दिशा ने अपना मुँह हाथ से ढक लिया।
**"और पचास साल से..."**
देवीलाल की आवाज़ अब बहुत धीमी थी।
**"पचास साल से वो अथासी साल का बूढ़ा हर वीरवार रामसर स्टेशन के उस पुराने फाटक पर खड़ा होता है। एक पुरानी शेरवानी बंडल में लिए। और हर उतरने वाली भीड़ को देखता है और पूछता है—"**
उसकी आवाज़ भर्रा गई।
**"'हीरा आई क्या?'"**
✦ ✦ ✦
दिशा उसी शाम उस फाटक पर गई।
और वहाँ उसे मिला वो बूढ़ा—
जिसे पूरा रामसर **"पागल श्रवण"** कहता था।
अथासी साल का। सूखा शरीर। सफेद दाढ़ी।
और हाथ में एक पुराना, तेलिया-सा बंडल, जिसे उसने मुट्ठी में कसकर पकड़ा हुआ था—जैसे उसमें किसी की जान हो।
दिशा उसके पास बैठी और पूछा—
**"बाबा, किसका इंतज़ार है?"**
बूढ़े ने उसे देखा।
और उसकी आँखों में दिशा ने वो देखा, जो उसने कहानियों में पढ़ा था, मगर कभी सच में नहीं देखा था—
**पचास साल की एक ही रात।**
**"हीरा का इंतज़ार है, बेटी।"**
उसने बिल्कुल साफ आवाज़ में कहा। वो पागल बिल्कुल नहीं लगता था।
**"मेरी शादी थी 14 मार्च 1971 को। मैं गाड़ी से जा रहा था बीराण। और आँधी आई। लोगों ने कहा—बीराण डूब गया। सब मर गए।**
**मगर मैं जानता हूँ..."**
उसने अपना बंडल खोला।
अंदर एक पुरानी शेरवानी थी।
और उसके ऊपर एक जोड़ी लाल चूड़ियाँ।
और एक पुरानी पोटली—मिठाई की—जो अब पत्थर बन चुकी थी।
**"मैं जानता हूँ, वो आती है हर वीरवार।"**
उसने कहा,
**"मुझे मालूम हुआ बाद में कि वो सब गाड़ी में चढ़ते हैं हर वीरवार और इसी फाटक से उतरते हैं। और मैं हर वीरवार यहाँ खड़ा होता हूँ। मगर, बेटी..."**
वो कुछ पल चुप रहा।
**"...वो मुझे दिखती नहीं।"**
दिशा की आँखें बूढ़े के चेहरे पर टिक गईं।
**"मैं ज़िंदा हूँ। वो नहीं।**
**और ज़िंदा और मुर्दा के बीच—**
**ये फाटक है।**
**जो मैं पचास साल से पार नहीं कर पा रहा।"**
दिशा की आँखों से आँसू बह निकले।
उसने उस बूढ़े का सूखा हाथ पकड़ा।
**"बाबा..."** उसने कहा, **"गाड़ी बंद होने वाली है। सुनने में आया है, अगले महीने ये रूट हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। और अंतिम गाड़ी अगले वीरवार है।"**
वो बूढ़े की आँखों में देखती रही।
फिर धीरे से बोली—
**"उस वीरवार आप इस फाटक पर खड़े रहना।**
**मैं लाऊँगी उसे।**
**और पचास साल की ये शादी—**
**मैं करवाऊँगी।"**
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
- Chapter
- 5 of 10
- Category
- Village Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 712
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- 5 parts free · 5 unlock with coins
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