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भाग 6 — रूट बिक रहा है
Piyashi Atma · Village Horror · 2 मिनट
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
- Chapter
- 6 of 10
- Category
- Village Horror
- Reading time
- 2 min
- Words
- 294
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
खबर सच थी।
रेलवे बोर्ड का पत्र आ चुका था—
> **"मरु मेल लाइन आर्थिक रूप से असंभव है। अंतिम यात्रा अगले वीरवार होगी। उसके बाद पटरियाँ उखाड़ी जाएँगी और ज़मीन नीलाम होगी।"**
और नीलामी में सबसे आगे खड़ा था—
वो आदमी, जिसकी फर्म रॉकी जैसे दलालों को रूट दिखाने भेजती थी।
दिशा ने अपनी पत्रिका के एडिटर को फोन किया।
**"मुझे एक हफ़्ता और दो। मेरी सबसे बड़ी स्टोरी पर काम कर रही हूँ।"**
**"किस पर?"**
**"उस गाड़ी पर..."**
दिशा ने फाटक की तरफ देखते हुए कहा, जहाँ अथासी साल का बूढ़ा अपना बंडल लिए खड़ा था।
**"...जो पचास साल से रुकने का इंतज़ार कर रही है।"**
✦ ✦ ✦
उस हफ़्ते दिशा ने तीन काम किए।
### पहला काम
उसने बीराण गाँव के दो ज़िंदा बचे लोगों को ढूँढा।
एक मिला जोधपुर में—बानवे साल का बूढ़ा, जो उस रात मौसी के घर गया हुआ था।
और एक मिली रामसर में ही—अस्सी साल की बूढ़ी, जो उस रात प्लेटफॉर्म पर थी। मगर आँधी में अपनी बहन का हाथ खोकर कुएँ में गिर गई थी और कुएँ ने उसे बचा लिया था।
दोनों से दिशा ने वो रात सुनी।
और दोनों ने एक ही बात कही—
**"गाड़ी आई थी, बेटी। हमने देखी थी उसकी लाइट दूर से। और हमने सोचा—बच गए।"**
### दूसरा काम
दिशा ने उस रात के ड्राइवर को ढूँढा।
**"रामस्वरूप मीणा — लोको पायलट, रिटायर्ड — जैसलमेर वृद्धाश्रम।"**
### तीसरा काम
उसने देवीलाल के साथ मिलकर किया।
उसने रेलवे बोर्ड को एक निवेदन भेजा—
जिसमें बस एक लाइन लिखी थी:
> **"अंतिम गाड़ी को एक रात और चलने दीजिए, क्योंकि उसमें ऐसे यात्री भी चढ़ेंगे, जो पचास साल से अपनी शादी में जा रहे हैं।"**
रेलवे बोर्ड ने जवाब नहीं दिया।
मगर देवीलाल ने कहा—
**"कोई बात नहीं, बेटी। अनुमति की ज़रूरत नहीं। इस रूट पर मैं चालीस साल से गार्ड हूँ। अंतिम गाड़ी मेरी है। और मेरी गाड़ी में—"**
उसने फाटक की तरफ देखा।
फिर धीमे से बोला—
**"जो चढ़ना चाहे—**
**चढ़ सकता है।"**