PretikaVillage Horrorबीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी

भाग 7 — बूढ़ा ड्राइवर

Piyashi Atma · Village Horror · 3 मिनट

Writer
Piyashi Atma
Story
बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
Chapter
7 of 10
Category
Village Horror
Reading time
3 min
Words
539
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

जयसलमेर का वृद्धाश्रम रेत के किनारे खड़ा था।

और उसकी सबसे आखिरी कोठरी में दिशा को मिले—

**रामस्वरूप मीणा।**

पच्चासी साल के।

बिस्तर पर।

और उनके बिस्तर के पास मेज पर—

एक खिलौना इंजन रखा था।

पुराना, क्लॉकवर्क वाला, जो चाबी से चलता था।

दिशा ने अपना परिचय दिया और वर्ष 1971 का नाम लिया—

और बूढ़े ड्राइवर के चेहरे से रंग उड़ गया।

**"पचास साल..."**

उन्होंने रेतीली आवाज़ में कहा,

**"पचास साल से मैं उस रात को रोज़ जीता हूँ, बेटी। लोग कहते हैं वक़्त सब भुला देता है। झूठ कहते हैं। वक़्त कुछ नहीं भुलाता। वक़्त बस उस रात को तुम्हारे सीने में और गहरा दबोचता है।"**

**"आपने गाड़ी क्यों नहीं रोकी थी?"**

बूढ़े ने आँखें बंद कीं।

**"मैं डर गया था।"**

उन्होंने बिना किसी बहाने के कहा,

**"आँधी बहुत बड़ी थी। मुझे लगा, रुकी तो गाड़ी पलट जाएगी। सात डिब्बे हवा में उठेंगे। मैंने गणित लगाया, बेटी। मशीन का गणित। और गणित ने कहा—निकल जा।**

**मगर मेरे सीने में एक और गणित था—**

**जो कह रहा था—रुक जा।**

**और मैंने मशीन की सुनी।**

**और इंसान की छोड़ दी।**

**और गाड़ी निकल गई।**

**और मैंने पिछले शीशे से देखा—**

एक लड़की लाल जोड़े में गाड़ी के पीछे दौड़ रही थी।

और उसके हाथों में चूड़ियाँ थीं।

और रेत उसे निगल रही थी।

और मैंने कुछ नहीं किया।"

कोठरी में बहुत देर तक सन्नाटा रहा।

फिर दिशा ने कहा—

**"मीणा जी, अगले वीरवार मरु मेल की अंतिम यात्रा है। उसके बाद ये रूट हमेशा के लिए बंद हो जाएगा। और उस गाड़ी में हर वीरवार एक दुल्हन चढ़ती है, जो पचास साल से अपनी शादी में जा रही है। और उसका दूल्हा, अथासी साल का होकर, अभी भी फाटक पर खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा है।"**

बूढ़े की आँखें खुल गईं।

**"मैं चाहती हूँ..."**

दिशा ने कहा,

**"...कि उस अंतिम गाड़ी को आप चलाएँ।"**

**"मैं पच्चासी साल का हूँ, बेटी। मैं इंजन के सामने खड़ा भी नहीं हो सकता।"**

**"मैं जानती हूँ, आप नहीं चला सकते।"**

दिशा ने उनका हाथ पकड़ा।

**"मगर आप बैठ सकते हैं इंजन में, असिस्टेंट ड्राइवर के साथ। और जब गाड़ी बीराण आएगी, तो आप उसे वहाँ रुकवा सकते हैं, जहाँ पचास साल पहले आपने उसे नहीं रोका था।**

**और आप उन लोगों को अपनी आवाज़ में—**

**सिर्फ दो शब्द कह सकते हैं—**

**जो उस रात कहने थे।"**

बूढ़े ड्राइवर की आँखों से आँसू बह निकले।

**"कौन से दो शब्द, बेटी?"**

दिशा ने धीरे से कहा—

**"मैं रुक गया।**

**और—**

**मुझे माफ़ कर दो।"**

✦ ✦ ✦

### अंतिम वीरवार

वीरवार आ गया।

**अंतिम वीरवार।**

दिशा दोपहर से रेवाड़ी स्टेशन पर थी।

और उसने वो नज़ारा देखा, जो उसने सोचा भी नहीं था—

**मरु मेल सजी हुई थी।**

देवीलाल और रामसर के उन कुछ रेल कर्मचारियों ने, जिन्हें दिशा की स्टोरी सुनाई थी, पूरी गाड़ी को गेंदे के फूलों से सजा दिया था।

डिब्बों पर पुराने अंदाज़ की कागज़ की तोरणें बँधी थीं।

और कोच S2 के ऊपर एक हाथ से लिखा बोर्ड लगा था—

> **मरु मेल — शुभ विवाह स्पेशल**
>
> **बीराण की बेटी हीरा बाई की शादी**
>
> **पचास वर्षों की प्रतीक्षा के बाद**

और प्लेटफॉर्म पर खड़े थे—

* जोधपुर से आया बानवे साल का बूढ़ा—बीराण का आखिरी ज़िंदा ग्रामीण।
* रामसर की अस्सी साल की बूढ़ी—जिसे कुएँ ने बचाया था।
* व्हीलचेयर पर बूढ़े ड्राइवर रामस्वरूप मीणा—अपने खिलौना इंजन के साथ।
* देवीलाल—अपने बापू की डायरी के साथ।
* और दिशा—
* एक पुराने बैग में अपना कैमरा लिए, जिसमें वो इतिहास रिकॉर्ड करने वाली थी।

गाड़ी चली।

शाम ढली।

रेत आई।

और रात **10:47** पर—

दूर रेत के बीच—

**वो चमकती हुई लाइन दिखाई दी।**

और इस बार—

प्लेटफॉर्म पर खड़ी भीड़—

गाड़ी को देखकर—

**ठिठक गई।**

क्योंकि गाड़ी—

**सजी हुई आ रही थी।**

**जैसे बारात आती है।**

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