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भाग 8 — गाड़ी रुकी
Piyashi Atma · Village Horror · 3 मिनट
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
- Chapter
- 8 of 10
- Category
- Village Horror
- Reading time
- 3 min
- Words
- 555
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
**बीराण हाल्ट आ गया।**
गाड़ी धीमी हुई और रुक गई।
और एक पल के लिए—
**कुछ नहीं हुआ।**
प्लेटफॉर्म पर सजे गेंदे के फूलों को देखकर सैकड़ों लोग स्तब्ध खड़े थे, जैसे पचास साल बाद कोई उनके घर शगुन लेकर आया हो।
दरवाज़े खुले।
मगर इस बार कोई चढ़ा नहीं।
सब बस खड़े थे—गाड़ी को देखते हुए।
और तभी—
**इंजन का दरवाज़ा खुला।**
रामस्वरूप मीणा व्हीलचेयर से उतरे। असिस्टेंट के सहारे खड़े हुए—काँपती टाँगों पर।
और उन्होंने प्लेटफॉर्म की उस भीड़ को देखा।
**वही चेहरे।**
जो पचास साल पहले उनकी लालटेन की रोशनी में हाथ हिला रहे थे।
उन्होंने अपना पुराना सिर झुकाया।
फिर ज़मीन पर हाथ रखा।
और कहा—
ऐसी आवाज़ में, जो पचास साल की कैद को तोड़ती थी—
**"मैं रुक गया।**
**आज मैं रुक गया।**
**और मुझे...**
**मुझे माफ़ कर दो।"**
पूरी रेत सुन रही थी।
और फिर भीड़ में से एक बूढ़ा आगे आया।
पगड़ी वाला। सफेद दाढ़ी वाला। गाँव के पटेल जैसा।
उसने बहुत धीरे से कहा—
**"पचास साल लगा दिए, मीणा साहब।**
**मगर तुम रुक तो गए।**
**चढ़ो, अब सब।**
**बारात को देर हो रही है।"**
✦ ✦ ✦
भीड़ चढ़ने लगी।
मगर अब दिशा दरवाज़े पर खड़ी थी और उसका हाथ एक छोटे, ठंडे हाथ को थामे हुए था।
**गुड्डू।**
**"दीदी..."** उसने काँपते हुए पूछा, **"माँ यहाँ होंगी?"**
दिशा ने उसकी आँखों में देखा।
**"चलो, देखते हैं बेटा।"**
और दोनों प्लेटफॉर्म पर उतर गए।
भीड़ उमड़ रही थी—त्योहार के कपड़ों में।
दिशा गुड्डू का हाथ थामे उसमें से गुज़रने लगी, पुकारती हुई—
**"कोई है? किसी ने अपना बच्चा खोया है? किसी का बेटा उस रात गाड़ी में चढ़ गया था? किसी का गुड्डू..."**
और भीड़ में एक हलचल उठी।
और फिर—
एक औरत दौड़ती हुई आई।
हरी ओढ़नी।
आँखों में पचास साल के आँसू।
और उसने चीखकर कहा—
**"गुड्डू! मेरा गुड्डू!"**
बच्चे ने दिशा का हाथ छोड़ दिया।
और दौड़ा।
और माँ के आँचल में समा गया।
माँ ने उसे गोद में उठा लिया।
और दिशा ने देखा—
उठाते ही दोनों के चेहरे पर वो आ गया, जो पचास साल से नहीं आया था—
**रंग।**
माँ रो रही थीं और हँस रही थीं।
फिर दिशा की तरफ मुड़कर उन्होंने हाथ जोड़ दिए।
दिशा ने मुस्कुराकर कहा—
**"वादा पूरा हुआ, अम्मा।**
**बस एक बात—**
**उसे बहुत प्यार करना।**
**उसने गोद तो नहीं माँगी, मगर...**
**उसका हाथ बहुत ठंडा था।**
**पचास साल से।"**
✦ ✦ ✦
गाड़ी चलने ही वाली थी कि—
**आसमान बदल गया।**
दूर रेत के ऊपर एक काली दीवार उठी।
**आँधी।**
वही आँधी।
पचास साल पुरानी आँधी।
वही, जो आज फिर आई थी—
**आखिरी परीक्षा लेने।**
डिब्बों में हड़कंप मच गया।
देवीलाल दौड़े इंजन की तरफ।
**"मीणा साहब! आँधी आ रही है!"**
और इंजन के शीशे से रामस्वरूप मीणा बाहर झाँके।
उनके सामने वही काली दीवार थी।
वही गड़गड़ाहट।
वही रेत का भूत—
जो पचास साल पहले उन्हें भगा गया था।
मगर इस बार—
बूढ़े ड्राइवर ने अपने काँपते हाथ पहिए पर कसकर जमा लिए।
और उन्होंने असिस्टेंट से कहा—
**"गाड़ी नहीं रुकेगी, बेटा।**
**इस बार गाड़ी नहीं रुकेगी।**
**क्योंकि इस बार—**
**हमें शादी में जाना है।**
**चलाओ। आँधी के बीचों-बीच चलाओ।**
**मैं रास्ता दिखाता हूँ।**
**मुझे ये आँधी पचास साल से कंठस्थ है।"**
और गाड़ी आँधी में घुस गई।
तीन घंटे की वो रात दिशा कभी नहीं भूली।
बाहर रेत चीख रही थी। खिड़कियों पर हाथों जैसी दस्तकें दे रही थी।
और अंदर—
**अंदर शादी चल रही थी।**
बाँसुरी बज रही थी।
हारमोनिका भी बज उठा।
और जोधपुर वाला बानवे साल का बूढ़ा खड़ा होकर गा रहा था—
वो पुराना गीत, जो बीराण की औरतें विदाई में गाती थीं—
> **"चलरी बंबी, नाच घूमर,**
> **बापू री बेटी जाय।**
> **रेत म्हारी, म्हारो खून,**
> **गाड़ी म्हारो पाणी..."**
और डिब्बे के बीच—
**हीरा बाई बैठी थीं।**
अब वो शीशे में नहीं—
**सच में दिखाई दे रही थीं।**
लाल बाँधनी। झुकी हुई ओढ़नी। चूड़ियों से भरी कलाइयाँ।
और आँखों में पचास साल की उम्मीद—
जो अब घर पहुँचने वाली थी।
और जब आँधी पीछे रह गई—
तो आसमान साफ था।
तारों से भरा।
और दूर आगे—
**रामसर की रोशनियाँ टिमटिमा रही थीं।**