PretikaVillage Horrorबीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी

भाग 9 — पचास साल की शादी

Piyashi Atma · Village Horror · 3 मिनट

Writer
Piyashi Atma
Story
बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
Chapter
9 of 10
Category
Village Horror
Reading time
3 min
Words
456
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

रामसर टर्मिनस — रात 3:17।

प्लेटफॉर्म खाली था।

बस एक बूढ़ा खड़ा था—पुराने फाटक के पास—

अपनी पचास साल पुरानी शेरवानी में।

जो उसने उस दिन पहनी थी दिशा के आने के बाद।

और जो उस पर अब भी ठीक बैठती थी—

जैसे वक़्त ने उसे इसी दिन के लिए सलामत रखा हो।

**श्रवण।**

अथासी साल का दूल्हा।

गाड़ी आई, धीमी हुई और रुकी।

और उसके आगे देवीलाल चले।

उन्होंने अपनी पीतल की घंटी बजाई और ऐलान किया—

**पचास साल की सबसे देर से हुई घोषणा:**

> **"बीराण की बारात पहुँच गई है।**
>
> **हाथी, घोड़े, पालकी नहीं आए—**
>
> **मगर बारात आ गई है।**
>
> **दुल्हन उतर रही है।**
>
> **दूल्हे राजा, तैयार रहो।"**

दरवाज़ा खुला।

और हीरा बाई उतरीं।

पचास साल की रेत झाड़कर आई दुल्हन—लाल बाँधनी में, ओढ़नी झुकाए, चूड़ियाँ खनकाती हुई।

और वो चलीं फाटक की तरफ।

और फाटक पर श्रवण खड़ा था—

काँपता हुआ।

अपने हाथों में वो जोड़ी चूड़ियाँ लिए—

जो उसने पचास साल पहले उसके लिए ली थीं।

**"हीरा..."** उसने बुदबुदाया।

**"श्रवण सा..."** उसने कहा।

और उसकी आवाज़ अब रेतीली नहीं थी।

उसकी आवाज़ सोलह साल की थी।

और फाटक के दोनों तरफ—

ज़िंदा और मुर्दा—

पचास साल बाद—

आमने-सामने खड़े थे।

और उनके बीच—

दिशा, देवीलाल, बीराण के दो बूढ़े साक्षी और रामस्वरूप मीणा व्हीलचेयर पर—

सब खड़े थे।

✦ ✦ ✦

### शादी

शादी हुई।

वहीं प्लेटफॉर्म पर, उसी फाटक पर।

रामसर के पुराने पुजारी को देवीलाल बुला लाए थे।

दीये जलाए गए और गेंदे की मालाएँ बाँटी गईं।

और जब फेरों का वक़्त आया—

तो श्रवण ने अपनी काँपती उँगलियों से—

हीरा की कलाई पर—

वो चूड़ियाँ चढ़ाईं—

जो पचास साल से उसकी मुट्ठी में थीं।

चूड़ियाँ चढ़ीं।

खनकीं।

और उस खनक में दिशा ने सुना—

**पचास साल का एक पहाड़ टूटकर गिरने की आवाज़।**

और जब विदाई हुई—

तो हीरा बाई ने मुड़कर अपनी बारात को देखा।

140 चेहरों को—

जो उस रात उसके साथ मरे थे—

और जो पचास साल से उसके साथ सफर कर रहे थे।

और उन्होंने हाथ जोड़कर कहा—

> **"बापू, अम्मा, काका, सब...**
>
> **मेरी शादी हो गई।**
>
> **अब घर जाओ।**
>
> **अब कोई इंतज़ार नहीं रहा।**
>
> **अब गाड़ी अपने स्टेशन पहुँच गई।"**

और 140 लोगों ने—

एक साथ—

मुस्कुराकर—

सिर हिलाया।

और वो सब—

उस फाटक के आगे की धुंध में—

इस बार गायब नहीं हुए।

इस बार वो धुंध में—

**घुल गए।**

और धुंध के साथ—

वो रोशनी बनकर उठे।

और रात के आसमान में—

तारों के बीच—

**समाँ गए।**

और आखिरी में—

हीरा बाई ने मुड़कर—

अपने अथासी साल के दूल्हे को देखा।

और उसने उसका हाथ थामा।

और वो दोनों साथ चले—

धुंध में।

और श्रवण जाते-जाते—

एक बार मुड़ा।

और उसने दिशा को देखा।

देवीलाल को देखा।

और अपने सिर पर हाथ रखकर—

**आशीर्वाद दिया।**

और फिर—

वो भी रोशनी बन गया।

✦ ✦ ✦

सुबह रामसर वालों ने फाटक के पास—

एक बेंच पर—

रॉकी को पाया।

सोया हुआ।

गहरी नींद में।

और उसके पास—

एक कुल्हड़ रखा था।

जिसमें इस बार रेत नहीं—

**असली चाय थी।**

उसने आँख खोली तो पहली बात कही—

> **"उन्होंने मुझे माफ़ कर दिया।**
>
> **उन्होंने कहा, बुलावा पूरा हुआ।**
>
> **अब मैं जा सकता हूँ।**
>
> **और उन्होंने चाय पिलाई—**
>
> **असली वाली।**
>
> **विदाई वाली चाय।"**

रॉकी उस दिन के बाद बदल गया।

उसने अपनी फर्म से इस्तीफ़ा दिया और अगले महीने रामसर आकर—

**बीराण हाल्ट के लिए एक स्मारक की पहल शुरू की।**

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