Pretika › Village Horror › बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
भाग 4 — 1971 की रात
Piyashi Atma · Village Horror · 4 मिनट
टर्मिनस रामसर सुबह पाँच बजे आया।
दिशा ने एक अजीब नज़ारा देखा।
त्योहार वाले यात्री उतरने लगे—अपनी ट्रंकों और पोटलियों के साथ, कतार में, शांति से।
और वो सब प्लेटफॉर्म के उस पुराने खंभे की तरफ चले, जहाँ पुराना मीटर गेज का फाटक था।
और खंभे के आगे—
**धुंध थी।**
और वो धुंध में उतरते गए।
एक-एक करके।
और गायब होते गए।
आखिरी में दुल्हन उतरी—अपनी पोटली के साथ।
उतरते वक्त उसने मुड़कर गाड़ी की तरफ देखा—
और हाथ जोड़ दिए।
और धुंध साफ हुई।
**प्लेटफॉर्म खाली था।**
बस रॉकी खड़ा था—फाटक के पास।
दिशा ने उसे पुकारा,
**"रॉकी जी... आप ठीक हैं?"**
रॉकी बहुत धीरे से मुड़ा।
उसका चेहरा—
**वो चेहरा दिशा कभी नहीं भूलेगी।**
उसकी आँखें खाली थीं।
और उसके कंधे पर दो हाथ रखे थे—धुंधले, शीशे जैसे—जो अब धुंध में घुल रहे थे।
रॉकी ने बहुत थकी हुई आवाज़ में कहा,
**"वो कह रहे हैं... अगले वीरवार इंतज़ार करेंगे। मुझे उनके साथ चाय पीनी होगी। और इस बार..."**
उसकी ठुड्डी काँपी।
**"इस बार मुझे मना करने की इजाज़त नहीं होगी।"**
✦ ✦ ✦
दिशा ने उस दिन रामसर के पुराने रेलवे दफ्तर में रिकॉर्ड खंगाले।
और उसे मिली वो फाइल—
**14 मार्च 1971।**
> **"प्रलयंकारी आँधी — थार में 50 साल का सबसे बड़ा रेत का तूफ़ान। बीराण गाँव पूरी तरह धँसा। 140 से अधिक मृत्यु।**
>
> **विवरण:** बीराण गाँव लाइन के किनारे बसा छोटा गाँव था। उस रात गाँव की बेटी हीरा बाई की शादी थी। पूरा गाँव बारात लेकर रामसर जाना था—रात 10:47 की मरु मेल से।
>
> गाँव के सभी 140 लोग रात 9 बजे से ही बीराण हाल्ट के प्लेटफॉर्म पर इंतज़ार कर रहे थे, जब आँधी उठी।
>
> गवाहों के अनुसार, गाड़ी समय पर आई थी, मगर—
>
> **गाड़ी बीराण हाल्ट पर नहीं रुकी।"**
दिशा की आँखें उस आखिरी लाइन पर रुक गईं।
**नहीं रुकी।**
उसने काँपती उँगलियों से आगे पढ़ा—
> **"गाड़ी के तत्कालीन ड्राइवर के बयान में—**
>
> *'दृश्यता शून्य थी। प्लेटफॉर्म दिखाई नहीं दिया। सिग्नल नहीं मिला।'*
>
> मगर गाँव से दो ज़िंदा बचे लोगों ने बताया कि आँधी के बीच उन्होंने गाड़ी की लाइट देखी थी और पूरा गाँव चीखा था, हाथ हिलाए थे, लैंप फेंके थे।
>
> और गाड़ी—
>
> **उनके सामने से गुज़र गई।**
>
> आँधी तीन घंटे चली।
>
> जब रुकी, तो बीराण गाँव और उसका प्लेटफॉर्म—और उस पर इंतज़ार करता पूरा गाँव—
>
> **रेत के नीचे था।**
>
> गाड़ी के गार्ड, श्री घनश्यामलाल, ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था—
>
> *'मैंने ड्राइवर से गाड़ी रोकने को कहा था। मुझे प्लेटफॉर्म पर लोग दिखे थे।'*
>
> यह बयान रिकॉर्ड से—
>
> **हटा दिया गया।"**
✦ ✦ ✦
दिशा रिकॉर्ड रूम से निकली तो उसकी टाँगें काँप रही थीं।
**गार्ड घनश्यामलाल।**
उसने देवीलाल का पूरा नाम सुना था—
**देवीलाल घनश्यामलाल शर्मा।**
**बाप-बेटा।**
उसने देवीलाल को स्टेशन के पीछे पीपल के नीचे पाया और फाइल उसके सामने रख दी।
देवीलाल ने फाइल देखी और बहुत देर तक कुछ नहीं कहा।
फिर उसने अपने झोले से कपड़े में लिपटी एक पुरानी गठरी निकाली।
उसमें से एक डायरी निकाली।
**"मेरे बापू की डायरी।"** उसने कहा, **"मैं जानता था कोई एक दिन ये सब ढूँढ निकालेगा। पढ़िए आखिरी पन्ना।"**
दिशा ने पढ़ा—
### 14 मार्च 1971 — रात
> **"मैं आज लिख रहा हूँ क्योंकि मुझे डर है कि कल मैं लिखने लायक न रहूँ।**
>
> आज रात मेरी गाड़ी बीराण हाल्ट से गुज़री। आँधी थी। मगर मैंने देखा—प्लेटफॉर्म भरा हुआ था।
>
> लोग हाथ हिला रहे थे। लैंप फेंक रहे थे। बच्चे थे। औरतें थीं। एक दुल्हन थी।
>
> मैंने उसे देखा। अपनी लालटेन की रोशनी में।
>
> वो गाड़ी की तरफ दौड़ी। उसकी चूड़ियाँ चमकीं।
>
> मैंने ड्राइवर से कहा, 'रुको। लोग हैं।'
>
> उसने कहा, 'आँधी में रुकना खतरनाक है। गाड़ी पलट सकती है।'
>
> मैंने कहा, 'कम गति कर लो। बस धीमी कर लो।'
>
> वो नहीं माना।
>
> **गाड़ी गुज़र गई।**
>
> और मैं अपनी लालटेन लिए पिछले डिब्बे की खिड़की से देखता रहा।
>
> और प्लेटफॉर्म रेत में डूबता गया।
>
> और वो लोग हाथ हिलाते रहे।
>
> जब तक दिखते रहे।
>
> मैं, घनश्यामलाल, ये लिखकर प्रण लेता हूँ कि जब तक मैं ज़िंदा हूँ, मेरी गाड़ी बीराण पर रुकेगी और उन्हें चढ़ने देगी और उन्हें उनके सफर पर ले जाएगी।
>
> क्योंकि—
>
> **उस रात वो मरे नहीं थे।**
>
> **उस रात वो इंतज़ार कर रहे थे।**
>
> और जो इंतज़ार में मरता है, वो मरता नहीं—
>
> **वो इंतज़ार करता रहता है।"**
- Writer
- Piyashi Atma
- Story
- बीराण हाल्ट — सुनसान रूट की आखिरी गाड़ी
- Chapter
- 4 of 10
- Category
- Village Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 765
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- 5 parts free · 5 unlock with coins
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