Pretika › Jinn & Spirits › वेद्रान — एक इश्क़, एक श्राप
Ep 2
Ballyansh · Jinn & Spirits · 3 मिनट
- Writer
- Ballyansh
- Story
- वेद्रान — एक इश्क़, एक श्राप
- Chapter
- 2 of 4
- Category
- Jinn & Spirits
- Reading time
- 3 min
- Words
- 443
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
अध्याय 2
मीरा भी अब असमंजस में थी कि आखिर हो क्या रहा है?
वह चुपचाप फेरों के लिए खड़ी हो गई। फेरे शुरू होते ही हवन कुंड में जल रही अग्नि धीरे-धीरे मद्धम होते-होते बुझ गई।
सभी लोग हक्के-बक्के रह गए। ललिता जी बिफर पड़ीं।
ललिता: ये हो क्या रहा है, अभिषेक के पापा! कुछ तो सही नहीं है। हमें ये शादी रोकनी चाहिए। अपशकुन पर अपशकुन हुए जा रहे हैं।
हरीश खन्ना: चुप रहो, ललिता! ये क्या बच्चों का खेल हो रहा है? बिशम्बर!
बिशम्बर: हरीश! मैं खुद भी परेशान हूँ। ये सब…?
पंडित: ये सब ठीक नहीं हो रहा।
मीरा घबराकर लगभग रोनी सूरत बनाकर अपने पिता से बोली।
मीरा: पापा! मुझे डर लग रहा है। ये सब क्यों हो रहा है?
विशम्बर: घबराओ मत, बेटा! मैं सब ठीक कर दूँगा।
हरीश: तुम चिंता मत करो, बिशम्बर! पंडित जी! आप फिर से अग्नि प्रज्वलित कीजिए।
अभिषेक: लेकिन! पापा! ये सब बहुत weird है।
हरीश: सब ठीक है। तू चुप कर।
सब फिर से शुरू किया गया।
पर तभी बिशम्बर मल्होत्रा का मोबाइल बज उठा। उसने देखा तो उसके मैनेजर का कॉल था। बिशम्बर ने उसी वक्त फोन उठा लिया। मैनेजर ने घबराई और डरी हुई आवाज़ में उससे बात की।
बिशम्बर का चेहरा पसीने से भर गया।
बिशम्बर: क्या? नहीं… नहीं…
कहते हुए वह बेहोश होकर गिर गया।
सब चौंक गए। मीरा मंडप से उतरकर अपने पिता की तरफ भागी।
फोन पर उसके मैनेजर ने बताया कि उनकी कपड़ा मिल, फैक्ट्री में आग लग गई है। सब कुछ खत्म हो गया। इस खबर को बिशम्बर बर्दाश्त नहीं कर पाया।
थोड़ी देर बाद सब हॉस्पिटल में थे। बिशम्बर ICU में था। मीरा का रो-रोकर बुरा हाल था। दिया उसे संभाले हुई थी।
हरीश खन्ना ने अभिषेक और उसकी माँ को घर भेज दिया। सारे मेहमान लौट गए थे।
बिशम्बर का मैनेजर वहीं खड़ा था। उसकी हालत भी लुटी-पिटी लग रही थी। अपना चश्मा साफ करते हुए वह मीरा के पास आया।
मैनेजर: मीरा मैम! आपको खुद को संभालना होगा। और फैक्ट्री के सभी कर्मचारियों से एक बार रूबरू होना होगा।
मीरा के पास नौकरानी गीता खड़ी थी। वह और दिया उसे चुप करवा रहे थे।
हरीश: मीरा बेटा! तुम शांत हो जाओ। बिशम्बर ठीक हो जाएगा। और तुम, मैनेजर! ये क्या कह रहे हो? अब क्या फायदा? सारी फैक्ट्री तो जल गई।
मीरा ने कोई जवाब नहीं दिया।
गीता ICU के बाहर बैठ गई। उसके चेहरे पर अजीब-सा डर था, जिसे दिया देख रही थी।
दिया: गीता काकी! क्या बात है? आप ठीक हैं?
गीता: हाँ, बेटा! मैं ठीक हूँ। बस भाई साहब की चिंता है। उन्हें होश आ जाए, बस।
दिया को अजीब लग रहा था। पर वह चुप रही।
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