Pretika › Jinn & Spirits › वेद्रान — एक इश्क़, एक श्राप

एपिसोड 10

Ballyansh · Jinn & Spirits · 5 मिनट

अध्याय 10
वेद्रान — एक इश्क़, एक श्राप

दोनों उस ठंडे माहौल में धीरे-धीरे कदम बढ़ा रही थीं। दोनों ने एक-दूसरे का हाथ कब थाम लिया, ये उन्हें भी पता नहीं चला।

दिया: मीरा! तुझे भी अजीब लग रहा है क्या?

मीरा: अजीब मतलब?

दिया: मन भारी-सा हो गया है। जैसे किसी ने जकड़ लिया हो?

मीरा: ऐसा लग रहा है, जैसे कोई हमें देख रहा हो। है न?

दिया: हाँ। तुझे भी ऐसा ही लग रहा है।

मीरा: तू डर मत। मैं हूँ न तेरे साथ। देख, यहाँ पर हमारे अलावा कोई नहीं है।

मीरा की खुद की हालत खराब थी, पर वो दिया के सामने खुद को कमज़ोर नहीं दिखाना चाहती थी।

मीरा (मन में): हे भगवान! मदद कीजिए।

दोनों खुद को दिलासा देते हुए चलती रहीं।

दिया: बीस मिनट से ज़्यादा हो गए हैं चलते हुए। तेरी हवेली कहाँ है?

मीरा: मुझे क्या पता? तुम तो ऐसे पूछ रही हो, जैसे मैं रोज़ वहीं रहती हूँ।

दोनों बात कर ही रही थीं कि उन्हें किसी जानवर की आवाज़ सुनाई दी। दोनों घबरा गईं। आवाज़ बेहद साफ़ और नज़दीक थी।

दोनों ने बातचीत बंद कर दी और भागना शुरू कर दिया। वे जंगल के गहरे हिस्से में पहुँच गईं।

भागते-भागते उनके हाथ भी छूट गए। दोनों अलग हो गईं। अब दिया अकेली थी और दूसरी तरफ मीरा डरते हुए लगातार भाग रही थी।

मीरा: बचाओ! कोई! प्लीज़ बचाओ!

कहते हुए वो एक पेड़ के नीचे पहुँचकर रुक गई। वो बुरी तरह हाँफ रही थी।

झाड़ियों में से आवाज़ आ रही थी। अचानक मीरा डर से चीख पड़ी। पर जैसे ही उसने उस ख़ूंखार जानवर को देखा, उसके होश उड़ गए।

और फिर वो रोते हुए हँस पड़ी।

क्योंकि सामने एक बकरी थी, जो मैं-मैं कर रही थी।

मीरा: बदमाश! तुम्हारे चक्कर में तो मेरी जान ही निकल जाती! और अब दिया भी खो गई। हे भगवान! दिया ठीक हो, बस। उसे ढूँढ़ती हूँ।

उधर दिया भी भाग रही थी। वो भी बचाओ-बचाओ चिल्ला रही थी।

अचानक किसी ने उसका हाथ पकड़ लिया।

दिया ज़ोर से चीख पड़ी। वो पैनिक कर रही थी। जिसने उसका हाथ पकड़ा था, वो उसका नाम पुकार रहा था, पर दिया होश में ही नहीं थी।

उसने दिया को ज़ोर से झटका दिया, तो वो होश में आई।

उसके सामने राजू उसे थामे खड़ा था।

राजू: दिया मैडम! होश में आइए।

दिया: राजू! तुम सच में हो। मैं बच गई!

कहकर वो उससे गले लग गई।

राजू चौंक गया, पर उसने उसे दूर नहीं किया। उसने उसके सिर पर हाथ फेरा।

राजू: शांत हो जाइए। मैं यहीं हूँ, आपके साथ।

दिया ने एक ठंडी और गहरी साँस ली।

वो राजू से दूर हुई और उसे हैरानी से देखने लगी।

दिया: तुम यहाँ क्या कर रहे हो? डरपोक कहीं के!

राजू: हद है! मैं यहाँ अपनी जान का रिस्क लेकर आया कि दोनों लड़कियाँ अकेली हैं, मदद करनी चाहिए। और मुझे ये टैग मिला—डरपोक!

दिया: बकवास मत करो। मैंने तुमसे मदद नहीं माँगी थी।

राजू: मीरा मैडम कहाँ हैं?

दिया: वो... मुझे नहीं पता।

दोनों घबरा गए और मीरा को पुकारने लगे।

शाम हो रही थी।

उधर अकेली मीरा उसी पेड़ के नीचे बकरी को थामे बैठी थी। वो रो रही थी।

मीरा: पापा! आपकी मीरा फँस गई है।

तभी उसे भालू जैसी दहाड़ सुनाई दी। उसे सुनते ही बकरी भाग गई।

मीरा: अरे, रुको! तुम कहाँ चली गई? अब मैं अकेले क्या करूँ?

अब मीरा की हालत और खराब हो गई। आवाज़ करीब आ रही थी।

मीरा उठकर भागने लगी।

मीरा: दिया! दिया! बचाओ, कोई!

मीरा अंधाधुंध भाग रही थी। अचानक उसके सामने कोई आ गया। मीरा उससे टकरा गई, पर उसने मीरा को गिरने नहीं दिया।

मीरा उससे गले लगकर रोती रही।

मीरा: बचाओ! प्लीज़! वो जानवर मुझे खा जाएगा!

भालू सामने था और दहाड़ रहा था।

तभी उस अजनबी ने अपना एक हाथ हवा में ऊपर उठाया और वो भालू वहाँ से वापस लौट गया।

मीरा जिससे गले लगकर खड़ी थी, उसने कहा।

आवाज़: भालू जा चुका है। तुम सुरक्षित हो।

मीरा ने सिर उठाकर सामने खड़े शख्स को देखा, तो उसकी आँखें हैरानी से फैल गईं।

काले रंग के कपड़े पहने वो जवान लड़का खामोश और ठंडी नज़रों से मीरा को देख रहा था।

मीरा एकटक उसे देखती रही।

इतनी देर से जो डर और बेचैनी वो महसूस कर रही थी, वो अचानक हवा हो गई थी।

मीरा अपनी सुध-बुध खोकर उसे देख रही थी।

मीरा को अंदाज़ा भी नहीं था कि उसके सामने वेद्रान खड़ा है।

मीरा (मन में): कोई इतना खूबसूरत कैसे हो सकता है? ये गलत है।

अजनबी: गलत क्या है इसमें?

मीरा अपने सेंस में आई। वो दो कदम पीछे हट गई। टेढ़ी और शक़ी नज़र से देखते हुए उसने पूछा।

मीरा (मन में): मैं क्या सोच रही थी? इसे कैसे पता?

मीरा: अ... कौन हो तुम? यहाँ इस ख़तरनाक जंगल में क्या कर रहे हो? वो भी अकेले?

वेद्रान: कुछ भी ख़तरनाक नहीं है। मेरे अलावा।

मीरा: क्या? देखो, मुझे गोल-गोल बातें समझ नहीं आतीं। समझे? तुम जो कोई भी हो, ज़रा मेरी मदद कर दो। मेरी दोस्त दिया इसी जंगल में है। चलो, उसे ढूँढ़कर यहाँ से निकल चलें।

वेद्रान ने कोई जवाब नहीं दिया। वो हल्का-सा मुस्कुराया और चलने लगा।

मीरा उसके साथ चलती रही।

मीरा को समझ नहीं आ रहा था कि वो उसे लगातार क्यों देख रही है।

मीरा (मन में): हो क्या गया है मुझे? एक अजनबी से मैं नज़र क्यों नहीं हटा पा रही? इसे देखकर सुकून क्यों मिल रहा है? ये क्या सोच रहा होगा? कि मैं कैसी लड़की हूँ?

मीरा को खुद पर हैरानी भी हो रही थी और गुस्सा भी आ रहा था।

Writer
Ballyansh
Story
वेद्रान — एक इश्क़, एक श्राप
Chapter
10 of 12
Category
Jinn & Spirits
Reading time
5 min
Words
926
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

← पिछला भाग  ·  अगला भाग →

वेद्रान — एक इश्क़, एक श्राप · सभी भाग →

और कहानियाँ · More stories