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एपिसोड 7 —“ओरिजिनल चेंबर”

firoj saifi · Sci-Fi Horror · 19 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR
Chapter
7 of 7
Category
Sci-Fi Horror
Reading time
19 min
Words
3704
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

अंधेरा।

चारों तरफ सिर्फ अंधेरा।

माया को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था।

न कोई दीवार।

न कोई फर्श।

न कोई दरवा

सिर्फ एक ऐसी खामोशी, जो खामोशी से भी ज्यादा डरावनी थी।

उसे अपनी सांस सुनाई दे रही थी।

धीमी।

भारी।

डरी हुई।

माया ने हाथ आगे बढ़ाया।

कुछ नहीं।

उसने दूसरा कदम उठाया।

फिर तीसरा।

अचानक—

**ठक।**

उसका पैर किसी कठोर चीज से टकराया।

माया रुक गई।

उसने नीचे हाथ लगाया।

ठंडी धातु।

उसने वस्तु उठाई।

एक पुरानी जेब-घड़ी।

उसका शीशा टूटा हुआ था।

सुइयां अटकी हुई थीं।

**3:17।**

माया का दिल तेजी से धड़कने लगा।

“फिर वही समय...”

उसने घड़ी को पलटकर देखा।

पीछे काले अक्षरों में कुछ लिखा था—

**“जो इस समय वापस आता है, वह वही नहीं रहता।”**

माया की उंगलियां ठंडी पड़ गईं।

अचानक उसके पीछे किसी के कदमों की आवाज आई।

**ठक...**

माया ने धीरे से सिर घुमाया।

कुछ नहीं।

फिर—

**ठक... ठक...**

इस बार आवाज उसके बिल्कुल पीछे से आई।

माया तेजी से पलटी।

एक आदमी खड़ा था।

काले कपड़े।

शांत चेहरा।

आंखों में अजीब खालीपन।

**एड्रियन।**

माया पीछे हट गई।

“तुम...”

एड्रियन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—

“स्वागत है, माया।”

माया ने बिना सोचे घड़ी उसकी तरफ फेंक दी।

घड़ी उसके शरीर से आर-पार निकल गई।

वह फर्श पर गिरकर टूट गई।

माया की सांस रुक गई।

“तुम इंसान नहीं हो।”

एड्रियन ने नीचे पड़ी घड़ी को देखा।

फिर माया की तरफ।

“बहुत देर लगी तुम्हें समझने में।”

“तुमने मुझे यहां क्यों लाया?”

“मैंने?”

एड्रियन ने सिर थोड़ा झुकाया।

“तुम खुद आई हो।”

“झूठ।”

“तुम्हें हमेशा लगता है कि तुम फैसले खुद लेती हो।”

वह धीरे-धीरे उसके करीब आया।

“लेकिन तुम्हारे ज्यादातर फैसले तुम्हारे भीतर किसी और ने लिए हैं।”

माया ने पूछा—

“किसने?”

एड्रियन चुप रहा।

फिर उसने सामने की तरफ इशारा किया।

“देखो।”

अंधेरे में अचानक हल्की रोशनी जली।

पहले एक छोटी सी रोशनी।

फिर दूसरी।

फिर तीसरी।

और कुछ ही सेकंड में पूरा अंधेरा विशाल नीली रोशनी से भर गया।

माया ने सामने देखा—

और उसकी सांस अटक गई।

वह एक विशाल गोलाकार कमरा था।

इतना बड़ा कि उसकी सीमा दिखाई नहीं दे रही थी।

दीवारें काले पत्थर की थीं।

छत अंधेरे में खोई हुई थी।

लेकिन सबसे डरावनी चीज दीवारें नहीं थीं।

दीवारों पर लगी थीं—

**तस्वीरें।**

सैकड़ों तस्वीरें।

हर तस्वीर में एक बच्चा।

अलग उम्र।

अलग चेहरा।

लेकिन हर बच्चे की आंखों पर—

**काली पट्टी।**

माया धीरे-धीरे आगे बढ़ी।

हर तस्वीर के नीचे एक नंबर था।

**01**

**02**

**03**

**04**

...

**121**

**122**

**123**

**124**

**125**

**126**

और आखिर में—

**127।**

माया उस तस्वीर के सामने जाकर रुक गई।

उसकी उंगलियां कांप रही थीं।

“ये कौन हैं?”

एड्रियन ने शांत आवाज में कहा—

“प्रयास।”

“किस चीज के?”

“दरवाजा खोलने के।”

“और ये बच्चे?”

“दरवाजे।”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“बच्चे दरवाजे नहीं होते।”

एड्रियन ने कहा—

“कुछ बच्चे पैदा ही दरवाजा बनने के लिए होते हैं।”

माया पीछे हट गई।

“तुमने इनके साथ क्या किया?”

एड्रियन की आंखों में कोई पछतावा नहीं था।

“हमने कोशिश की।”

“किसकी?”

“मृत्यु और जीवन के बीच की सीमा तोड़ने की।”

माया ने दीवार की तरफ देखा।

“कितने मरे?”

एड्रियन बोला—

“126।”

माया की नजर आखिरी तस्वीर पर गई।

**127।**

उसके नीचे कोई मृत्यु का निशान नहीं था।

बल्कि लिखा था—

**HOST ACCEPTED.**

माया का चेहरा सफेद पड़ गया।

“नहीं।”

एड्रियन ने कहा—

“हां।”

“यह मैं नहीं हूं।”

“है।”

“मैं कोई प्रयोग नहीं थी।”

“तुम सबसे बड़ा प्रयोग थीं।”

माया ने तस्वीर दीवार से खींच ली।

उसमें छह साल की माया थी।

वही चेहरा।

वही आंखें।

वही छोटे बाल।

लेकिन तस्वीर में उसकी आंखें कैमरे की तरफ नहीं थीं।

वह किसी ऐसी चीज को देख रही थी जो कैमरे के पीछे खड़ी थी।

माया ने तस्वीर उलट दी।

पीछे सिर्फ एक लाइन लिखी थी—

**“SUBJECT 127 — HOST ACCEPTED.”**

माया ने तस्वीर जमीन पर फेंक दी।

“मैं कोई Host नहीं हूं।”

एड्रियन मुस्कुराया।

“तुम्हें अभी भी यही लगता है?”

---

### 3:17

एड्रियन ने अपनी उंगलियां उठाईं।

कमरे की सारी तस्वीरें अचानक हिलने लगीं।

**सर्र... सर्र... सर्र...**

जैसे दीवारों के अंदर हजारों लोग सांस ले रहे हों।

माया पीछे हट गई।

फिर तस्वीरें गायब होने लगीं।

एक के बाद एक।

और उनकी जगह दीवारों पर दृश्य उभरने लगे।

पहला दृश्य—

एक अस्पताल।

माया की मां बिस्तर पर थी।

उसकी आंखों में आंसू थे।

एक डॉक्टर उसके सामने खड़ा था।

बिस्तर पर एक नवजात बच्ची थी।

छोटी।

शांत।

बिल्कुल शांत।

डॉक्टर ने बच्ची की नब्ज देखी।

फिर मशीन की तरफ देखा।

“दिल की धड़कन नहीं है।”

माया की मां रो पड़ी।

“नहीं...”

डॉक्टर ने सिर हिलाया।

“हमें अफसोस है।”

घड़ी—

**3:16।**

माया ने सांस रोक ली।

अगले ही पल—

**3:17।**

अस्पताल की सारी मशीनें एक साथ बंद हो गईं।

लाइट चली गई।

कमरा अंधेरे में डूब गया।

फिर—

एक आवाज।

बहुत छोटी।

बहुत धीमी।

बच्ची की आवाज।

**“आओ।”**

मशीनें फिर चालू हो गईं।

दिल की धड़कन वापस।

**बीप... बीप... बीप...**

डॉक्टर पीछे हट गया।

“यह असंभव है।”

माया की मां ने बच्ची को अपनी बाहों में उठा लिया।

बच्ची ने रोया नहीं।

उसने बस आंखें खोलीं।

और सीधे उस अंधेरे कोने की तरफ देखने लगी जहां कोई मौजूद नहीं था।

माया ने फुसफुसाकर कहा—

“मैंने ऐसा कभी नहीं देखा...”

एड्रियन बोला—

“क्योंकि तुम्हारी मां ने तुम्हारी यादें मिटा दी थीं।”

“मैं मर चुकी थी?”

“हां।”

“फिर मैं जिंदा कैसे हुई?”

एड्रियन ने उसकी आंखों में देखा।

“तुम जिंदा नहीं हुई।”

माया चुप रही।

“तो?”

“तुम वापस आई।”

“कहां से?”

एड्रियन ने कमरे के बीच बने विशाल काले वृत्त की तरफ देखा।

“वहां से।”

माया उस वृत्त के करीब गई।

वह कोई साधारण काला गोला नहीं था।

उसके अंदर कुछ घूम रहा था।

जैसे पानी।

लेकिन पानी नहीं।

जैसे हजारों परछाइयां एक-दूसरे के ऊपर से गुजर रही हों।

कभी किसी बूढ़े आदमी का चेहरा।

कभी किसी बच्चे की आंखें।

कभी किसी औरत का हाथ।

माया ने पूछा—

“वह क्या है?”

एड्रियन ने कहा—

“एक जगह।”

“कहां की?”

“जहां समय खत्म हो जाता है।”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“मृत्यु?”

“उससे भी आगे।”

“स्वर्ग?”

“नहीं।”

“नरक?”

“नहीं।”

“तो फिर क्या?”

एड्रियन की आवाज बहुत धीमी हो गई।

**“वह जगह जहां वे लोग जाते हैं जिन्हें दुनिया ने अभी तक मरने नहीं दिया।”**

माया चुप रही।

एड्रियन ने कहा—

“वहां न समय है, न शरीर, न उम्र।”

“तो वहां क्या है?”

“यादें।”

“और?”

“आवाजें।”

“और?”

“अधूरी इच्छाएं।”

माया ने काले वृत्त को देखा।

“क्या लोग वहां से वापस आ सकते हैं?”

एड्रियन मुस्कुराया।

“अगर सही दरवाजा मिल जाए।”

माया ने पूछा—

“और Blackwell?”

एड्रियन ने कहा—

**“दरवाजा।”**

---

अचानक पीछे से जोरदार धमाका हुआ।

**धड़ाम!**

माया पलटी।

विशाल लोहे का दरवाजा बंद हो चुका था।

दूसरी तरफ किसी ने मुक्का मारा।

**धड़ाम!**

“माया!”

माया की आंखें फैल गईं।

“डेनियल!”

वह दौड़कर दरवाजे तक गई।

दूसरी तरफ डेनियल खड़ा था।

उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था।

“माया, पीछे हटो!”

“तुम अंदर क्यों नहीं आ सकते?”

“यह दरवाजा मुझे अंदर नहीं आने दे रहा।”

“एड्रियन!”

माया पीछे मुड़ी।

“उसे अंदर आने दो।”

एड्रियन शांत खड़ा रहा।

“वह अंदर नहीं आ सकता।”

“क्यों?”

एड्रियन ने दरवाजे की तरफ देखा।

“क्योंकि वह पहले ही एक बार यहां मर चुका है।”

माया का चेहरा बदल गया।

“क्या?”

डेनियल कुछ सेकंड चुप रहा।

फिर उसने दरवाजे के दूसरी तरफ से कहा—

“माया... उसकी बात मत सुनना।”

एड्रियन हंस पड़ा।

“तुम्हारा दोस्त बहुत अच्छा झूठ बोलता है।”

माया ने डेनियल से पूछा—

“क्या हुआ था 2004 में?”

डेनियल चुप।

“डेनियल!”

कुछ सेकंड तक सिर्फ उसकी सांस सुनाई देती रही।

फिर उसने कहा—

“मैं यहां था।”

“मुझे पता है।”

“नहीं।”

उसकी आवाज कांप गई।

“तुम्हें नहीं पता।”

माया ने पूछा—

“क्या?”

“मैं यहां सिर्फ तुम्हें बचाने नहीं आया था।”

माया स्थिर हो गई।

“तो?”

डेनियल ने आंखें बंद कर लीं।

“मैंने...”

वह रुक गया।

“मैंने तुम्हें यहां लाया था।”

माया को लगा जैसे जमीन उसके पैरों के नीचे से खिसक गई।

“क्या?”

“2004 में।”

“तुमने मुझे यहां लाया?”

“हां।”

“लेकिन तुमने कहा था कि तुम्हें कुछ याद नहीं!”

“क्योंकि मेरी यादें भी बदल दी गई थीं।”

एड्रियन धीरे-धीरे मुस्कुराया।

“अब सच सामने आ रहा है।”

माया ने दरवाजे पर हाथ रखा।

“तुमने मुझे यहां क्यों लाया?”

डेनियल की आवाज टूट रही थी।

“तुम्हारी मां ने कहा था...”

“क्या?”

“अगर मैं तुम्हें यहां नहीं लाऊंगा...”

वह रुक गया।

“तो तुम मर जाओगी।”

माया ने धीरे से कहा—

“मेरी मां ने तुमसे मुझे यहां लाने को कहा था?”

“हां।”

“और तुम्हें पता था कि यहां क्या होगा?”

“नहीं।”

“तुमने मुझसे झूठ क्यों बोला?”

डेनियल ने कहा—

“क्योंकि मुझे डर था कि अगर तुम्हें याद आ गया...”

“तो?”

“तुम मुझे कभी माफ नहीं करोगी।”

माया की आंखों में आंसू आ गए।

“शायद तुम सही थे।”

---

अचानक कमरे की लाइटें बुझ गईं।

पूरा Original Chamber अंधेरे में डूब गया।

फिर किसी बच्चे की आवाज आई—

**“डेनियल...”**

डेनियल जम गया।

आवाज उसकी बहन की थी।

उसकी वही बहन जो वर्षों पहले मर चुकी थी।

“डेनियल...”

उसने आंखें बंद कर लीं।

“नहीं।”

आवाज फिर आई।

“तुमने मुझे बचाया क्यों नहीं?”

डेनियल कांपने लगा।

“तुम मेरी बहन नहीं हो।”

“तुमने मुझे मरने दिया।”

“चुप!”

“तुमने दरवाजा बंद कर दिया था।”

डेनियल पीछे हट गया।

“चुप!”

माया ने दरवाजे की दूसरी तरफ से उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की।

लेकिन दोनों के बीच लोहे की मोटी दीवार थी।

“डेनियल!”

“माया, मेरी बात सुनो।”

“क्या?”

“अगर मैं कुछ भी कहूं...”

उसने सांस ली।

“उस आवाज पर भरोसा मत करना।”

माया ने कहा—

“मैं तुम पर भरोसा करती हूं।”

डेनियल ने पहली बार उसकी तरफ देखा।

“यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी।”

अचानक उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा गया।

वह नीचे गिर गया।

“डेनियल!”

माया चीखी।

लेकिन तभी—

एड्रियन ने अपनी उंगली से हवा में एक निशान बनाया।

दरवाजा खुल गया।

माया ने बाहर देखा।

डेनियल वहां नहीं था।

उसकी जगह—

एक पुरानी कक्षा थी।

---

### वह बचपन जो कभी हुआ ही नहीं

छोटी माया एक स्कूल की बेंच पर बैठी थी।

उसकी उम्र छह साल थी।

उसके बगल में एक छोटा लड़का बैठा था।

**डेनियल।**

लेकिन वह भी छह साल का था।

माया ने धीरे से कहा—

“यह...”

एड्रियन उसके पीछे खड़ा था।

“तुम दोनों की पहली मुलाकात।”

माया ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“तुम्हें याद नहीं।”

“मुझे याद है।”

“तुम्हें जो याद है, वह सच नहीं।”

दृश्य में छोटी माया ने डेनियल की तरफ देखा।

“तुम्हें भी आवाजें सुनाई देती हैं?”

डेनियल ने सिर हिलाया।

“कौन-सी आवाजें?”

“जो रात में बुलाती हैं।”

“नहीं।”

माया मुस्कुराई।

“तो तुम भाग्यशाली हो।”

उसने अपनी जेब से एक कागज निकाला।

उस पर एक काला दरवाजा बना था।

डेनियल ने पूछा—

“यह क्या है?”

“मेरे पापा ने बनाया।”

“तुम्हारे पापा?”

“हां।”

“उन्होंने क्या कहा?”

छोटी माया ने कहा—

“एक दिन हम इस जगह जाएंगे।”

डेनियल ने पूछा—

“कहां?”

माया ने कागज पलटा।

पीछे एक शब्द लिखा था—

**BLACKWELL**

दृश्य खत्म।

माया की आंखें भर आईं।

“मेरे पिता मुझे Blackwell के बारे में बचपन से जानते थे?”

एड्रियन ने कहा—

“तुम्हारे जन्म से पहले से।”

“तो मेरी मां ने मेरी यादें क्यों मिटाईं?”

“क्योंकि उसे डर था कि तुम अपने पिता के पास वापस चली जाओगी।”

“क्यों?”

एड्रियन उसकी तरफ आया।

“क्योंकि तुम उससे जुड़ी थीं।”

“कैसे?”

एड्रियन ने फुसफुसाया—

“तुम्हारी आत्मा का एक हिस्सा उसके पास था।”

माया ने कहा—

“मेरी आत्मा?”

“नहीं।”

एड्रियन ने सिर हिलाया।

“तुम्हारी परछाई।”

---

### मां की आवाज

Original Chamber के बीच काला वृत्त अचानक चमकने लगा।

उसके अंदर लहरें उठीं।

फिर एक चेहरा दिखाई दिया।

माया की मां।

उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

“माया...”

माया उसके पास दौड़ी।

“मम्मी!”

“मेरी बात सुनो।”

“आपने मुझसे झूठ क्यों बोला?”

“क्योंकि सच तुम्हें मार देता।”

“क्या सच?”

मां ने एड्रियन की तरफ देखा।

“उससे दूर रहो।”

माया ने पूछा—

“क्यों?”

“क्योंकि वह तुम्हें पूरा नहीं करना चाहता।”

“तो क्या चाहता है?”

उसकी मां की आवाज कांपने लगी।

“वह तुम्हें खाली करना चाहता है।”

माया ने समझा नहीं।

“क्या?”

“तुम्हारे अंदर जो है...”

मां ने आंखें बंद कर लीं।

“उसे बाहर निकालना चाहता है।”

माया ने पूछा—

“क्यों?”

“क्योंकि तभी वह वापस इंसान बन सकता है।”

एड्रियन अचानक चीख पड़ा—

“बस!”

पूरा कमरा हिल गया।

माया की मां का चेहरा गायब हो गया।

माया ने एड्रियन की तरफ देखा।

“तुम्हें इंसान बनना है?”

एड्रियन की आंखों में गुस्सा था।

“मैं पहले इंसान था।”

“अब नहीं हो।”

“मैंने मृत्यु को पार किया।”

“तुम मृत्यु से भागे।”

“मृत्यु कोई भगवान नहीं है!”

उसकी आवाज दीवारों से टकराई।

“वह सिर्फ एक दरवाजा है!”

माया ने कहा—

“और तुम उस दरवाजे के पीछे फंस गए।”

एड्रियन चुप हो गया।

फिर वह मुस्कुराया।

“अब तुम समझ रही हो।”

---

### पहला कमरा

अचानक जमीन कांपने लगी।

कमरे के बीच पत्थर की गोल संरचना टूटने लगी।

फर्श नीचे धंस गया।

एक विशाल सीढ़ी दिखाई दी।

सीढ़ियां अंधेरे में नीचे जा रही थीं।

बहुत नीचे।

इतनी नीचे कि उनकी आखिरी सीढ़ी दिखाई नहीं दे रही थी।

एड्रियन ने कहा—

“चलो।”

माया ने पूछा—

“कहां?”

“जहां से सब शुरू हुआ।”

“पहला कमरा?”

“हां।”

माया ने पीछे देखा।

डेनियल नहीं था।

“डेनियल?”

कोई जवाब नहीं।

“मुझे उसके पास जाना है।”

“वह अभी सुरक्षित है।”

“तुम्हें कैसे पता?”

“क्योंकि अगर वह मर गया होता तो तुम उसकी आवाज सुन रही होती।”

माया ने कुछ नहीं कहा।

वह सीढ़ियों से नीचे उतरने लगी।

एक।

दो।

तीन।

दस।

बीस।

पचास।

सौ।

हर सीढ़ी के साथ तापमान गिरता जा रहा था।

दीवारों पर अजीब चित्र बने थे।

एक आदमी।

एक बच्चा।

एक काला दरवाजा।

और घड़ी।

हर घड़ी में वही समय—

**3:17।**

माया ने दीवार छुई।

उसकी उंगलियों के नीचे कुछ धड़कने लगा।

जैसे दीवार जीवित हो।

उसने हाथ पीछे खींच लिया।

“यह जगह जिंदा है।”

एड्रियन बोला—

“Blackwell कभी सिर्फ एक घर नहीं था।”

“फिर क्या था?”

“एक प्रयोगशाला।”

“और यह सब?”

“प्रयोग का दिल।”

आखिरकार वे नीचे पहुंचे।

सामने एक छोटा कमरा था।

कमरा बाकी जगहों से बिल्कुल अलग था।

यहां कोई पत्थर नहीं था।

दीवारों पर लकड़ी लगी थी।

बीच में एक पुरानी मेज।

मेज पर—

एक डायरी।

माया ने उसे उठाया।

पहले पन्ने पर लिखा था—

**“ब्लैकवेल प्रयोग — पहला दिन।”**

अगला पन्ना।

**“विषय: एलिज़ाबेथ ब्लैकवेल।”**

माया रुक गई।

“एलिज़ाबेथ?”

एड्रियन ने कहा—

“Evelyn की मां।”

माया ने पढ़ना शुरू किया।

> “आज एलिज़ाबेथ ने पहली बार दावा किया कि उसकी बेटी मरने के बाद भी उससे बात करती है।”

अगला पन्ना।

> “उसने कहा कि Evelyn की आवाज दीवारों के अंदर से आती है।”

अगला।

> “आज हमने आवाज रिकॉर्ड की।”

अगला।

माया का चेहरा बदल गया।

> “आवाज Evelyn की नहीं थी।”

माया ने डायरी बंद कर दी।

“फिर किसकी थी?”

एड्रियन ने कहा—

“यही वह सवाल है जिसने Blackwell को जन्म दिया।”

“और जवाब?”

“आज तक किसी के पास नहीं।”

माया ने अगला पन्ना पलटा।

एक चित्र था।

एक छोटी बच्ची।

एक काला दरवाजा।

और दरवाजे के पीछे—

एक लंबी आकृति।

उसका चेहरा नहीं था।

नीचे लिखा था—

**THE FIRST HOST**

माया ने फुसफुसाकर पूछा—

“Evelyn?”

एड्रियन ने सिर हिलाया।

“हां।”

“तो Evelyn पहली Host थी?”

“हां।”

“और उसके बाद?”

“तुम।”

माया ने उसकी ओर देखा।

“लेकिन तुमने कहा था कि मैं पहली सफल Host हूं।”

एड्रियन की मुस्कान गायब हो गई।

“मैंने कहा था कि तुम आखिरी हो।”

माया के चेहरे का रंग उड़ गया।

“आखिरी?”

“क्योंकि अब तीसरे की जरूरत नहीं पड़ेगी।”

“क्यों?”

एड्रियन उसके बिल्कुल पास आया।

“क्योंकि तुम और Evelyn अब एक ही चीज हो।”

माया पीछे हट गई।

“नहीं।”

“तुम्हें याद नहीं?”

“क्या?”

“Evelyn कभी इस घर से गायब नहीं हुई थी।”

माया ने सांस रोक ली।

“तो वह कहां गई?”

एड्रियन ने उसकी आंखों में देखा।

“2004 में तुम्हारी मां जब तुम्हें लेकर यहां से निकली...”

वह रुका।

“Evelyn भी तुम्हारे साथ गई थी।”

माया के चेहरे पर भय उतर आया।

“वह मेरे साथ बाहर गई?”

“हां।”

“लेकिन मैंने उसे कभी नहीं देखा।”

एड्रियन ने कहा—

“क्योंकि वह तुम्हारे अंदर थी।”

---

### वह शरीर

माया के हाथ से डायरी गिर गई।

अचानक उसके दिमाग में तस्वीरें चमकने लगीं।

एक आईना।

उसमें उसका चेहरा।

फिर उसके पीछे एक छोटी लड़की।

रात में सुनाई देने वाली आवाज।

3:17 पर अचानक जागना।

वह सपना जिसमें एक बच्ची कहती थी—

**“तुम बहुत देर से आई हो।”**

माया ने सिर पकड़ लिया।

“नहीं...”

एड्रियन बोला—

“तुम्हें उसे बाहर निकालना होगा।”

“कैसे?”

“मुझे अपना शरीर दो।”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“क्या?”

“Evelyn को बाहर निकालने के लिए तुम्हारा शरीर खाली करना होगा।”

“और फिर?”

एड्रियन मुस्कुराया।

“फिर मैं उसमें वापस आ जाऊंगा।”

अब माया समझ गई।

“तुम मेरा शरीर चाहते हो।”

“नहीं।”

“तो?”

“मैं अपना शरीर वापस चाहता हूं।”

“तुम्हारा शरीर कहां है?”

एड्रियन ने कमरे की दीवार पर हाथ रखा।

दीवार खुल गई।

पीछे एक लंबा संकरा गलियारा था।

अंत में—

एक लोहे का दरवाजा।

एड्रियन ने उसे खोला।

अंदर एक विशाल कांच का कंटेनर था।

उसके अंदर एक शरीर रखा था।

बहुत पुराना।

लेकिन सड़ा हुआ नहीं।

जैसे समय ने उसे छुआ ही न हो।

माया धीरे-धीरे आगे बढ़ी।

फिर अचानक रुक गई।

उसकी सांस अटक गई।

वह शरीर—

**एड्रियन का था।**

माया पीछे हट गई।

“नहीं...”

एड्रियन उसके पीछे खड़ा था।

“यही मेरा शरीर है।”

“फिर तुम क्या हो?”

एड्रियन ने जवाब नहीं दिया।

माया ने कांच के अंदर देखा।

एड्रियन का शरीर आंखें बंद किए पड़ा था।

लेकिन उसकी छाती पर कोई बैठा था।

एक छोटी बच्ची।

लगभग छह साल की।

सफेद कपड़े।

काले बाल।

पीली त्वचा।

और—

पूरी तरह काली आंखें।

माया के मुंह से निकला—

“Evelyn...”

बच्ची ने धीरे-धीरे सिर उठाया।

उसने सीधे माया की ओर देखा।

फिर मुस्कुराई।

**“तुम बहुत देर से आई हो।”**

माया पीछे हट गई।

“तुम... मेरे अंदर थीं?”

बच्ची ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसने सिर्फ अपना सिर कांच पर टिका दिया।

**टक।**

**टक।**

**टक।**

जैसे वह बाहर आने का इंतजार कर रही हो।

अचानक—

कांच के अंदर पड़ा एड्रियन का शरीर हिलने लगा।

माया जम गई।

पहले उसकी उंगलियां हिलीं।

फिर गर्दन।

फिर आंखें।

दोनों आंखें अचानक खुल गईं।

पूरी तरह काली।

माया पीछे हटती गई।

“यह कैसे...”

एड्रियन के शरीर ने धीरे-धीरे बैठना शुरू किया।

और उसी क्षण—

माया के पीछे खड़ा एड्रियन गायब हो गया।

माया पलटी।

कोई नहीं।

“एड्रियन?”

खामोशी।

फिर ऊपर से डेनियल की चीख गूंजी—

**“माया! भागो!”**

माया ने ऊपर देखा।

सीढ़ियां गायब थीं।

दरवाजा बंद था।

कमरा पूरी तरह सील हो चुका था।

कांच का कंटेनर धीरे-धीरे खुलने लगा।

**श्श्श्श्श...**

ठंडी धुंध बाहर फैल गई।

माया पीछे हटती गई।

एड्रियन का शरीर कंटेनर से नीचे उतरा।

उसके पैर जमीन पर पड़े।

**ठक।**

उसने सिर उठाया।

माया को देखा।

फिर मुस्कुराया।

लेकिन जो आवाज निकली—

वह एड्रियन की नहीं थी।

वह आवाज...

**माया की मां की थी।**

“बेटी...”

माया की आंखों में आंसू आ गए।

“मम्मी?”

शरीर ने एक कदम आगे बढ़ाया।

“मैंने तुमसे कहा था...”

माया कांपते हुए पीछे हटती रही।

“कहा था क्या?”

उसने हाथ आगे बढ़ाया।

“उस पर भरोसा मत करना।”

माया ने पूछा—

“किस पर?”

शरीर मुस्कुराया।

फिर बहुत धीरे से बोला—

**“मुझ पर।”**

माया जम गई।

क्योंकि उसी क्षण उसे एक और आवाज सुनाई दी।

उसके पीछे।

बहुत धीमी।

एक बच्ची की आवाज।

**“माया...”**

माया ने पलटकर देखा।

कमरे के कोने में छह साल की वही बच्ची खड़ी थी।

Evelyn।

लेकिन इस बार उसकी आंखें काली नहीं थीं।

वे बिल्कुल माया जैसी थीं।

बच्ची ने फुसफुसाकर कहा—

**“वह मेरी मां की आवाज चुरा चुका है।”**

माया का दिल रुकने जैसा हुआ।

उसने फिर कांच के कंटेनर की तरफ देखा।

एड्रियन का शरीर धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रहा था।

“मम्मी...?”

शरीर ने सिर टेढ़ा किया।

“बेटी...”

बच्ची ने पीछे से कहा—

“उसकी तरफ मत देखो।”

माया ने पूछा—

“तुम Evelyn हो?”

बच्ची चुप रही।

“मुझे सच बताओ।”

बच्ची की आंखों में आंसू आ गए।

“अगर मैं सच बता दूं...”

वह रुकी।

“तो तुम्हें याद आ जाएगा कि 2004 में तुमने मेरे साथ क्या किया था।”

माया की सांस रुक गई।

“मैंने?”

बच्ची ने धीरे से सिर हिलाया।

“तुमने मुझे अंदर बंद किया था।”

“कहां?”

बच्ची ने कमरे के बीच बने काले वृत्त की तरफ देखा।

“वहीं।”

माया ने पीछे देखा।

काला वृत्त अब पहले से ज्यादा बड़ा हो चुका था।

उसके अंदर हजारों चेहरे घूम रहे थे।

कुछ रो रहे थे।

कुछ चिल्ला रहे थे।

और कुछ—

माया को देख रहे थे।

फिर उनमें से एक चेहरा साफ दिखाई दिया।

**माया का अपना चेहरा।**

लेकिन उम्र लगभग तीस साल।

वह चेहरा माया को देखकर मुस्कुराया।

और उसके होंठ हिले—

**“तुम्हें यहां नहीं होना चाहिए था।”**

माया पीछे हट गई।

“यह कौन है?”

Evelyn ने कहा—

“तुम।”

“मैं?”

“तुम्हारा अगला रूप।”

“क्या?”

बच्ची ने कहा—

“Blackwell में समय सीधा नहीं चलता।”

माया की आंखें फैल गईं।

“तो वह कौन है?”

Evelyn ने काले वृत्त की तरफ देखा।

“वह माया है... जिसने हमें रोकने में बहुत देर कर दी।”

अचानक कमरे की सारी घड़ियां एक साथ बज उठीं।

**टिक।**

**टिक।**

**टिक।**

फिर—

सबकी सुइयां घूमने लगीं।

तेजी से।

3:14

3:15

3:16

और फिर—

**3:17।**

सारी घड़ियां एक साथ रुक गईं।

एड्रियन का शरीर माया के बिल्कुल सामने आ चुका था।

उसने हाथ उठाया।

माया पीछे नहीं हट सकी।

शरीर की आंखों में अब उसकी मां का चेहरा नहीं था।

उसमें—

**सैकड़ों चेहरे थे।**

माया ने चीखने की कोशिश की।

लेकिन आवाज नहीं निकली।

शरीर ने उसके कान के पास आकर फुसफुसाया—

**“अब याद करने का समय आ गया है।”**

और उसी क्षण—

माया के दिमाग में 2004 की आखिरी तस्वीर पूरी तरह खुल गई।

वह छह साल की थी।

उसकी मां उसके सामने रो रही थी।

डेनियल दरवाजे के पास खड़ा था।

Evelyn उसके पीछे थी।

और एक लंबी काली आकृति उनके बीच खड़ी थी।

माया की मां चिल्ला रही थी—

**“माया! दरवाजा बंद करो!”**

छोटी माया ने दरवाजे की ओर देखा।

फिर Evelyn की तरफ।

फिर उस काली आकृति की तरफ।

और उसने दरवाजा बंद कर दिया।

लेकिन दरवाजा बंद होने से पहले—

उस काली आकृति ने माया के कान में कुछ कहा था।

एक ऐसा शब्द...

जिसे माया ने पिछले बाईस सालों से भुला दिया था।

माया की आंखें अचानक खुल गईं।

वह शब्द उसके होंठों पर वापस आ गया।

**“आओ...”**

कमरे में खड़ी Evelyn ने डरकर आंखें बंद कर लीं।

काले वृत्त के अंदर सभी चेहरे एक साथ चीखने लगे।

और एड्रियन के शरीर ने मुस्कुराकर कहा—

**“अब तुम सच में याद करने लगी हो।”**

माया ने उसकी ओर देखा।

उसे अब समझ आ रहा था—

Blackwell उसे सिर्फ डराने के लिए नहीं बुला रहा था।

वह उसे वापस बुला रहा था।

क्योंकि यह घर...

कभी उसका पीछा नहीं कर रहा था।

**वह हमेशा से उसका इंतजार कर रहा था।**

और Original Chamber में बंद वह चीज...

अब जाग चुकी थी।

कमरे की आखिरी घड़ी की सुई धीरे-धीरे हिली।

**3:17 से 3:18।**

और जैसे ही समय आगे बढ़ा—

पूरे Blackwell Manor में पहली बार...

**सभी दरवाजे एक साथ खुल गए।**

**एपिसोड 7 समाप्त।**

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