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भाग 1: ब्लैकवुड मैनर में आगमन और कोहरे की घाटी
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 5 मिनट
भाग 1: ब्लैकवुड मैनर में आगमन और कोहरे की घाटी
ओकवुड वैली की भौगोलिक बनावट ही कुछ ऐसी थी कि वहाँ सूरज की किरणें भी जमीन तक पहुँचने से पहले घने कोहरे की चादर में दम तोड़ देती थीं। शहर की चकाचौंध, आधुनिक शोरगुल और भीड़भाड़ से मीलों दूर, यह घाटी सदियों से रहस्यों की गोद में सोई हुई थी। इस वीरान और रहस्यमयी जगह के बीचों-बीच खड़ी थी एक ऐसी इमारत, जिसे देखने भर से रीढ़ में सिहरन दौड़ जाए—'ब्लैकवुड मैनर'।
गोथिक वास्तुकला का यह बेजोड़ नमूना समय के थपेड़ों के बीच अपनी काली मीनारों और नुकीली छतों के साथ किसी दानव की तरह खड़ा था। इसकी दीवारें पुरानी हो चुकी थीं जिन पर काली काई और सूखी बेलें इस तरह फैली थीं मानो हवेली ने खुद को डरावने साए में लपेट रखा हो।
इस हवेली की देहरी पर कदम रखने वाली युवती का नाम नताशा था। नताशा शहर के एक प्रतिष्ठित संस्थान से प्राचीन पांडुलिपियों (Ancient Manuscripts) और दुर्लभ पुस्तकों के संरक्षण (Conservation) में विशेषज्ञता प्राप्त कर चुकी थी। उसे ब्लैकवुड मैनर के नए और बेहद एकांतप्रिय मालिक की लाइब्रेरी को व्यवस्थित करने का छह महीने का अनुबंध मिला था। शुरुआत में उसके दोस्तों और सहकर्मियों ने उसे चेतावनी दी थी कि उस हवेली के बारे में शहर में तरह-तरह की अजीब कहानियाँ प्रचलित हैं—कहा जाता था कि वहाँ जो भी जाता है, वह शहर की सामान्य दुनिया में वापस नहीं लौटता। लेकिन नताशा एक व्यावहारिक और तार्किक विचारों वाली लड़की थी। उसे लगा कि ये सब कोरी अफवाहें हैं जो पुरानी इमारतों के साथ अक्सर जुड़ी होती हैं।
जब उसकी पुरानी किराए की कार हवेली के लोहे के विशाल गेट के सामने रुकी, तो हवा में अजीब सी ठंडक घुल गई। गेट पर जंग लगे बड़े-बड़े ताले थे, लेकिन जैसे ही नताशा ने कार से उतरकर आगे बढ़ने की कोशिश की, गेट अपने आप धीमी और भारी घरघराहट के साथ खुल गया। किसी इंसान के होने का दूर-दूर तक कोई नामोनिशान नहीं था। केवल चीड़ और देवदार के ऊंचे पेड़ों के बीच से गुजरती हवा की सरसराहट सन्नाटे को चीर रही थी।
नताशा ने लंबी साँस ली, अपना सूटकेस उठाया और मुख्य द्वार की तरफ बढ़ी। हवेली के भारी ओक लकड़ी के दरवाजे पर लोहे का एक बड़ा सा खटटका (Knocker) लगा हुआ था, जो एक डरावने शेर के चेहरे के आकार का था। इससे पहले कि वह दरवाजा खटखटाती, दरवाजा अपने आप धीरे से चीखती हुई आवाज के साथ खुल गया।
अंदर का नजारा किसी भव्य संग्रहालय जैसा कम और किसी सदियों पुराने शाही मकबरे जैसा ज्यादा लग रहा था। विशाल हॉल में संगमरमर का फर्श था, जिस पर एक भारी लाल कालीन बिछा हुआ था। दीवारों पर काले फ्रेम में जड़े हुए पुराने पूर्वजों के तैल चित्र (Portraits) टंगे थे। उन तस्वीरों की आँखें ऐसी थीं कि जिधर भी नताशा जाती, उसे ऐसा लगता मानो वे तस्वीरें उसे ही घूर रही हों। हवेली के भीतर रोशनी का एकमात्र जरिया बड़ी-बड़ी खिड़कियों से छनकर आ रहा धुंधला प्रकाश था, क्योंकि अंदर जल रहे पुराने झूमर (Chandeliers) की पीली रोशनी उस विशालता को रोशन करने में नाकाम साबित हो रही थी।
"कोई है?" नताशा की आवाज उस खाली हॉल में गूँज उठी। उसकी अपनी ही आवाज उसे ही डरावनी और पराई लगी।
कोई जवाब नहीं मिला। केवल दूर किसी कोने से पानी की एक बूंद के टपकने की टप-टप आवाज सुनाई दे रही थी।
तभी सीढ़ियों के ऊपर से एक भारी, लेकिन बेहद सधा हुआ और शांत कदमों का शोर सुनाई दिया। नताशा ने ऊपर की ओर देखा। धुंधली परछाइयों और सीढ़ियों के आर्च के बीच से एक व्यक्ति नीचे उतर रहा था। जैसे-जैसे वह शख्स रोशनी के करीब आ रहा था, नताशा की सांसें थम सी गईं।
वह ब्लैकवुड मैनर का नया और रहस्यमय मालिक था—व्लाद वोल्कोव।
व्लाद ने पूरी तरह से काले रंग का लंबा कोट पहन रखा था। उसका कद लंबा और गठन बेहद शालीन था, लेकिन उसके व्यक्तित्व में एक अजीब सा ठहराव और खौफनाक आकर्षण था। उसके बाल काले और थोड़े बिखरे हुए थे, और उसका चेहरा ऐसा था मानो किसी कुशल शिल्पकार ने संगमरमर को तराश कर बनाया हो। लेकिन सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली और साथ ही डरावनी थीं उसकी आँखें—गहरी, अनगढ़ और ऐसी सम्मोहक कि उनमें देखने वाला इंसान अपनी सुधबुध खो बैठे।
व्लाद सीढ़ियों के आखिरी चरण पर रुका। उसके चेहरे पर कोई मुस्कान नहीं थी, बल्कि एक शांत और पैनी नजर थी जो सीधे नताशा के वजूद को चीरती हुई महसूस हो रही थी।
उसने अपनी मखमली, ठंडी और गहरी आवाज में कहा, "स्वागत है, नताशा। तुम्हारा इस वीराने में इंतज़ार बहुत लंबा हो गया था। मुझे उम्मीद है कि यहाँ पहुँचने में तुम्हें कोई असुविधा नहीं हुई।"
नताशा का गला सूख चुका था। उसने खुद को संभालते हुए कहा, "जी... धन्यवाद। मुझे यहाँ आने में थोड़ी परेशानी हुई, लेकिन मैं ठीक हूँ। मैं लाइब्रेरी का काम संभालने आई हूँ।"
व्लाद हल्के से मुस्कुराया, और उसकी मुस्कान में उसके नुकीले कैनाइन दांत एक पल के लिए बिजली की चमक की तरह कौंध गए। उसने कहा, "लाइब्रेरी... हाँ, वहाँ ऐसे राज दफ़्न हैं जो सदियों से किसी ने नहीं खोले। और मुझे यकीन है, नताशा, तुम उन राज़ों को बहुत जल्द समझ जाओगी।"
कमरे का तापमान अचानक कई डिग्री नीचे गिर गया। नताशा को ऐसा लगा मानो उस भव्य हवेली की दीवारों के पीछे कोई अदृश्य शक्ति उसे चारों तरफ से घेर रही हो। यह सिर्फ एक साधारण नौकरी की शुरुआत नहीं थी, बल्कि एक ऐसी दुनिया में प्रवेश था जहाँ से वापसी का कोई रास्ता नहीं था।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 1 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 5 min
- Words
- 911
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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