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भाग 25: विएना कैसल का पतन और ओकवुड की ओर वापसी
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 8 मिनट
विएना कैसल के उस सबसे गहरे और खौफनाक तहखाने 'द ट्रायल ऑफ ब्लड एंड ऐश' की दीवारों के ढहने के साथ ही, सदियों से चले आ रहे उस प्राचीन पिशाची साम्राज्य की नींव भी अंदर से हिल चुकी थी। काउंटरैस एलिज़ाबेथ वॉन स्टाइन और उसके गुप्त अंगरक्षकों की हार ने यह साबित कर दिया था कि 'हाई कौंसिल ऑफ इटरनल्स' के वे कठोर और निर्दयी कानून अब व्लाद और नताशा के अटूट बंधन के आगे पूरी तरह बेअसर हो चुके थे।
तहखाने के मलबे और धुएँ के बीच से जब व्लाद और नताशा बाहर मुख्य हॉल में आए, तो वहाँ का नज़ारा पूरी तरह बदल चुका था। जिन ऊँची दीर्घाओं और गलियारों में कभी कौंसिल के कुलीन पिशाच और काले नकाब पहने न्यायकर्ता घमंड से बैठा करते थे, वहाँ अब एक खामोश दहशत और भगदड़ का माहौल था।
कौंसिल का बिखरता साम्राज्य और विक्टर का रुख
मुख्य हॉल के उस विशाल प्रांगण में, जहाँ नीली लौ वाली मोमबत्तियाँ कभी डरावनी परछाइयाँ बनाती थीं, अब केवल टूटे हुए झूमरों के अवशेष और संगमरमर के टुकड़ों का ढेर बिछा हुआ था।
काउंटरैस एलिज़ाबेथ अपने सिंहासन के पास लड़खड़ाते हुए खड़ी थी। उसके चेहरे का वह पुराना अभिमान अब पूरी तरह टूट चुका था। उसकी आँखों में गुस्से के साथ-साथ एक अनजाना सा खौफ तैर रहा था—उस पिशाच का खौफ जिसे उसने तीन सौ साल तक तहखानों और अभिशापों में कैद रखने की साजिश रची थी।
"तुम... तुम दोनों इस कैसल को कभी जीवित नहीं छोड़ पाओगे!" एलिज़ाबेथ ने काँपते हुए स्वर में अपनी छड़ी को फर्श पर पटकते हुए चिल्लाया। "कौंसिल के बाकी कुल और उनकी सेनाएँ अभी भी रास्ते में हैं! यह जीत तुम्हारी एक अस्थायी भूल है!"
व्लाद ने अपनी लंबी और मजबूत चाल से आगे बढ़ते हुए काउंटरैस की तरफ देखा। उसकी आँखों में अब कोई क्रोध नहीं था, बल्कि एक ठंडी और प्रलयकारी शांति थी—ऐसी शांति जो किसी तूफान के थमने के बाद आती है।
"एलिज़ाबेथ, तुम्हारी यह कौंसिल और इसके ये झूठे नियम डर और अंधकार की बुनियाद पर टिके थे," व्लाद की भारी और मखमली आवाज़ उस विशाल हॉल की हर टूटी हुई दीवार से टकराकर गूँजी। "तुम लोगों ने सदियों तक इंसानों और पिशाचों के बीच नफरत की दीवारें खड़ी की हैं। आज वह दीवार हमेशा के लिए ढह चुकी है।"
तभी, हॉल के एक कोने से विक्टर रॉथ्सचाइल्ड अपनी शांत और नपे-तुले कदमों के साथ बाहर आया। उसके हाथ में वह चमड़े का ब्रीफकेस और कुछ पुराने दस्तावेज़ थे। उसने काउंटरैस की तरफ देखा, फिर अपनी नज़रों को व्लाद और नताशा की ओर घुमाया।
"काउंटरैस, अब खेल वाकई खत्म हो चुका है," विक्टर ने बहुत ही व्यावसायिक और बेबाक लहजे में कहा। "कौंसिल के वित्तीय खाते, गुप्त अनुबंध और वे सभी दस्तावेज जो इस घाटी और ब्लैकवुड मैनर के खिलाफ रचे गए थे, अब मेरे नियंत्रण में हैं। 'हाई कौंसिल' का अस्तित्व अब केवल कागजों तक सीमित रह गया है।"
एलिज़ाबेथ ने गुस्से से चीखते हुए विक्टर की तरफ देखना चाहा, लेकिन उसके अपने ही अंगरक्षकों ने अब उसका साथ छोड़ दिया था। वे समझ चुके थे कि व्लाद और नताशा की उस रूहानी ताकत के सामने अब किसी भी तांत्रिक या पिशाची कानून का टिक पाना नामुमकिन था।
नताशा की अंतिम घोषणा और कैसल से मुक्ति
नताशा ने आगे बढ़कर हॉल के केंद्र में कदम रखा। उसके गले में हालांकि अब वह लाल माणिक वाला हार भौतिक रूप से नहीं था, लेकिन उसकी रूह के भीतर से फूटने वाली वह शुद्ध ऊर्जा पूरे प्रांगण को एक सुनहरी और गर्म रोशनी से नहला रही थी।
"हम यहाँ किसी साम्राज्य को हथियाने नहीं आए थे, काउंटरैस," नताशा की आवाज़ में एक अद्भुत दृढ़ता और मिठास थी। "हम सिर्फ यह साबित करने आए थे कि प्यार, विश्वास और सच किसी भी साज़िश या अभिशाप से ज्यादा ताकतवर होता है। आप लोगों ने डर को अपना हथियार बनाया, और आज वही डर आपके इस कैसल को लील चुका है।"
काउंटरैस एलिज़ाबेथ गुस्से और बेबसी के मारे पीछे हटते हुए अपने कक्ष के अंधेरे में ओझल हो गई। उसके जाने के साथ ही विएना कैसल का वह काला युग मानो हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
गैब्रिएल वैन होलेन, जो थोड़ी देर पहले कौंसिल का मुख्य अभियोजक बनकर व्लाद को चुनौती दे रहा था, अब हॉल के एक कोने में पड़े मलबे के पास बेसुध हालत में पड़ा था। व्लाद ने उसकी तरफ एक बार मुड़कर देखा तक नहीं—उसके जैसे शिकारी अब व्लाद और नताशा के इस महाकाव्य में कोई मायने नहीं रखते थे।
"चलो, नताशा..." व्लाद ने अपना हाथ आगे बढ़ाया। उसकी गहरी भूरी आँखों में अब केवल नताशा के लिए एक असीम प्यार और चैन था। "हमारा सफर इस वीरान कैसल में नहीं, बल्कि वहाँ शुरू हुआ था जहाँ हमारी रूहें आपस में जुड़ी थीं।"
नताशा ने बिना एक पल गंवाए अपना हाथ व्लाद के हाथ में रख दिया।
ओकवुड घाटी की ओर वापसी: एक नया सवेरा
विएना कैसल के उस प्रलयकारी पतन के बाद, वे दोनों उसी पुरानी विंटेज ट्रेन में सवार हुए, जो उन्हें वापस ओकवुड घाटी की तरफ ले जा रही थी। इस बार ट्रेन के डिब्बों में कोई डरावना कोहरा या नीली रोशनी नहीं थी, बल्कि खिड़कियों से बाहर ऑस्ट्रिया और यूरोप के खूबसूरत, हरे-भरे पहाड़ और सुबह की ताज़ा धूप अंदर आ रही थी।
सफर के दौरान नताशा ने अपना सिर व्लाद के कंधे पर टिका दिया। ट्रेन की हल्की-फुल्की खड़खड़ाहट और व्लाद के सीने की वह शांत गर्माहट उसे इस बात का अहसास करा रही थी कि उनका यह सफर अब किसी मंजिल पर पहुँच चुका था।
"व्लाद," नताशा ने अपनी आँखें बंद रखते हुए बहुत धीमी आवाज़ में पूछा, "क्या अब सब कुछ ठीक हो जाएगा? क्या ओकवुड की वह घाटी और ब्लैकवुड मैनर अब पूरी तरह सुरक्षित है?"
व्लाद ने अपने ठंडे हाथों से नताशा के बालों को बहुत कोमलता से सहलाया।
"हाँ, नताशा," व्लाद ने प्यार से जवाब दिया। "वह घाटी अब सिर्फ हमारी है। ब्लैकवुड मैनर की वे दीवारें, जो कभी डर और खौफ की गवाह हुआ करती थीं, अब हमारे उस अमर प्रेम और नए जीवन की कहानियाँ सुनाएंगी। वहाँ न कोई गुप्त समाज होगा, न कोई शिकारी, और न ही कोई कौंसिल।"
दो दिन और रातों का यह लंबा सफर तय करने के बाद, जब ट्रेन वापस ओकवुड घाटी के उस छोटे और शांत रेलवे स्टेशन पर रुकी, तो बाहर का मौसम पूरी तरह बदल चुका था।
वहाँ अब कोई बर्फीला और कुटिल कोहरा नहीं था। वसंत की पहली सुनहरी धूप ओकवुड के उन प्राचीन देवदार के जंगलों पर चमक रही थी। हवा में फूलों और भीगी हुई मिट्टी की ससौंधी महक थी—मानो प्रकृति खुद इस नए मिलन का स्वागत कर रही हो।
ब्लैकवुड मैनर की देहरी पर नया अध्याय
जब व्लाद और नताशा ने ब्लैकवुड मैनर के मुख्य लोहे के गेट पर कदम रखा, तो हवेली का वह विशाल और प्राचीन ढांचा किसी अभिशप्त खंडहर की तरह नहीं, बल्कि एक भव्य और जादुई महल की तरह चमक रहा था। मुख्य दरवाजे पर जमी पुरानी धूल अपने आप साफ हो चुकी थी, और बगीचे में सूखे हुए पेड़ों पर नए हरे पत्ते और सुंदर फूल खिलने लगे थे।
नताशा ने हवेली की देहरी पर पैर रखते ही चैन की एक लंबी साँस ली। उसने मुड़कर व्लाद की तरफ देखा। व्लाद के चेहरे पर वह सदियों पुराना बोझ और उदासी हमेशा के लिए मिट चुकी थी; उसकी जगह अब एक सच्चे और मुकम्मल प्रेमी की मुस्कान थी।
व्लाद ने हवेली का दरवाजा खोला और नताशा का हाथ थामकर उसे अंदर ले गया।
ग्रैंड लाइब्रेरी की महोगनी मेज़ पर रखी वह पुरानी काली डायरी अब बंद थी, और उसके ऊपर एक भी धूल का कण नहीं था। ऐसा लग रहा था मानो वह डायरी खुद अपने पन्नों पर एक नए और सुहाने अध्याय के लिखे जाने का इंतज़ार कर रही हो—एक ऐसा अध्याय जिसमें डर का कोई नामो-निशान नहीं था, बल्कि केवल दो रूहों का वह अमर प्रेम था जो हर दिन, हर पल, और हर जन्म के लिए अचल और अमर हो चुका था।
व्लाद ने नताशा को अपनी बाहों में समेट लिया और उसके माथे पर एक गहरा, अनन्त प्रेम का चुंबन दिया।
"मि. वैम्पायर अब हर दिन, हर पल तुम्हारे साथ हैं, नताशा," व्लाद ने उसके कान में फुसफुसाया।
नताशा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और मुस्कुराते हुए कहा, "और नताशा भी हमेशा आपके साथ है, व्लाद... हर जन्म के लिए।"
बाहर ओकवुड घाटी में सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था, लेकिन इस बार वह ढलना किसी अंधेरे की शुरुआत नहीं, बल्कि एक ऐसे अमर और अनंत सवेरे का संकेत था जिसका कोई अंत नहीं था।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 25 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 8 min
- Words
- 1404
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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