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भाग 24: द ट्रायल ऑफ ब्लड एंड ऐश (अग्नि परीक्षा)

Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 9 मिनट

विएना कैसल के उस विशाल और नीली रोशनी वाले न्यायालय से बाहर आने के बाद, विक्टर रॉथ्सचाइल्ड व्लाद और नताशा को एक संकरे, सीलन भरे और अंतहीन अंधेरे रास्ते की तरफ ले गया। रास्ते के दोनों तरफ लगे पुरानी मशालों के फानूस से टपकता हुआ मोम और हवा में तैरती सल्फर की गंध यह बता रही थी कि वे कैसल के सबसे निचले और प्रतिबंधित हिस्से—'द कालकोठरी ऑफ ब्लड एंड ऐश' (The Dungeon of Blood and Ash)—की ओर बढ़ रहे थे।
यह वह जगह थी जहाँ सदियों से उन लोगों को कैद किया जाता रहा था जिन्होंने 'हाई कौंसिल ऑफ इटरनल्स' के कानूनों को चुनौती दी थी। यहाँ न तो सूरज की किरण कभी पहुँचती थी और न ही समय का कोई हिसाब रहता था।
कालकोठरी का भयानक माहौल और विक्टर की चेतावनी
जैसे-जैसे वे नीचे उतर रहे थे, तापमान शून्य से भी कई गुना नीचे गिरता जा रहा था। दीवारों पर जमी बर्फ की परतें नीली रोशनी में चमक रही थीं। गैब्रिएल वैन होलेन और काउंटरैस एलिज़ाबेथ की साजिशों का साया इस जगह के कण-कण में महसूस हो रहा था।
विक्टर रॉथ्सचाइल्ड लोहे के एक भारी दरवाजे के सामने रुका। उसने अपनी जेब से एक प्राचीन चाबी निकालकर ताला खोला, और दरवाज़ा एक डरावनी घरघराहट के साथ खुल गया।
"यहीं तक मेरा साथ था, मि. वोल्कोव और सुश्री नताशा," विक्टर ने मुड़कर बहुत ही नपे-तुले और शांत स्वर में कहा। उसके चेहरे पर कोई व्यंग्य नहीं था, बल्कि एक अजीब सी तटस्थता थी। "कौंसिल के नियम कड़े हैं। 'द ट्रायल ऑफ ब्लड एंड ऐश' कोई साधारण सजा नहीं है। यह आपकी रूह, आपके विश्वास और आपके प्रेम की सबसे बड़ी कसौटी है। यदि आप दोनों में से किसी एक का भी दिल डगमगाया, तो यह कालकोठरी आप दोनों को हमेशा के लिए अपने भीतर दफ़न कर देगी।"
व्लाद ने विक्टर की आँखों में देखा और बहुत ठंडे स्वर में कहा, "रॉथ्सचाइल्ड, तुम्हारी कौंसिल और उसकी इन कालकोठरियों में इतनी ताकत नहीं है जो हमारे बीच के इस बंधन को तोड़ सके। जाओ और अपनी काउंटरैस से कह दो कि वह अपने सारे हथियार तैयार रखे।"
विक्टर ने हल्का सा सिर झुकाया, बिना एक शब्द कहे पीछे मुड़ गया, और लोहे का वह भारी दरवाज़ा बाहर से बंद कर दिया गया। क्रेक... क्लैंक! ताले के बंद होने की वह आवाज़ उस सूने तहखाने में गूँज उठी।
द ट्रायल ऑफ ब्लड एंड ऐश का पहला चरण: भ्रामक परछाइयाँ
कमरे के भीतर केवल एक ही प्रकाश का स्रोत था—बीचों-बीच रखी एक पत्थर की वेदी, जिस पर एक नीली आग सुलग रही थी। उस आग के चारों ओर का फर्श काले संगमरमर का था, जो किसी जमे हुए खून की तरह दिख रहा था।
नताशा ने अपने कदम उस ठंडे फर्श पर रखे। उसके गले के पास से वह लाल माणिक की ऊर्जा अब भी एक हल्की सी चमक के साथ उसकी रक्षा कर रही थी।
"व्लाद..." नताशा ने थोड़ा सा काँपते हुए कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में डर के बजाय एक जिज्ञासा और दृढ़ता थी। "यह परीक्षा कैसे शुरू होगी? हमें क्या करना होगा?"
व्लाद ने नताशा का हाथ कसकर अपने हाथ में थाम लिया। उसकी पिशाची आँखें अंधेरे के कोने-कोने को भांप रही थीं। "सावधान रहना, नताशा," व्लाद ने चेतावनी दी। "यह कालकोठरी इंसानी आंखों और कानों से नहीं खेलती; यह तुम्हारे दिमाग के सबसे गहरे कोनों में छिपे हुए डर, शक और तुम्हारी पुरानी यादों को तुम्हारे खिलाफ खड़ा कर देगी। कौंसिल चाहती है कि हम एक-दूसरे पर शक करें।"
व्लाद की बात पूरी होते ही, उस नीली आग की लपटें अचानक तेज हो गईं और पूरे कमरे में एक धुंध छा गई।
उस धुंध के बीच से कुछ आकृतियाँ उभरने लगीं। वे कोई बाहरी दुश्मन नहीं थे, बल्कि नताशा और व्लाद के अपने अतीत के साये थे।
एक तरफ, धुंध के उस कोहरे के बीच से नतालिया (वह तीन सौ साल पुरानी प्रेमिका जिसका चेहरा बिल्कुल नताशा जैसा था) बाहर आई। उसने वही पुराना सफेद लिबास पहन रखा था जिसके किनारे आग से जले हुए थे। उसकी आँखों में आँसू थे और उसने काँपते हुए स्वर में पुकारा—"व्लाद... तुमने मुझे उस आग में जलने के लिए अकेला छोड़ दिया था... क्या तुम इस नई नताशा के लिए मुझे भूल जाओगे?"
व्लाद का शरीर एक पल के लिए सुन्न पड़ गया। उसकी आँखें उस परछाई को देखकर चौंक गईं। सदियों पुराना वह दर्द एक बार फिर उसकी रूह को चीरने लगा।
"व्लाद, मत देखो!" नताशा ने तुरंत चिल्लाकर व्लाद का हाथ जोर से खींचा। "यह सच नहीं है! यह सिर्फ इस कालकोठरी का एक भ्रम है जो हमें तोड़ने के लिए रचा गया है!"
व्लाद ने अपनी आँखें बंद कर लीं और एक गहरी साँस ली। जब उसने दोबारा आँखें खोलीं, तो उसकी लालिमा शांत हो चुकी थी। उसने नताशा के चेहरे को अपने दोनों हाथों में थामा और दृढ़ता से कहा, "तुम बिल्कुल सही कह रही हो, नताशा। मेरा अतीत जल चुका है, और मेरा वर्तमान और भविष्य सिर्फ तुम्हारे साथ है।"
जैसे ही व्लाद ने यह शब्द कहे, नतालिया की वह परछाई हवा में धुएँ की तरह गायब हो गई।
दूसरा चरण: शक का जहर और अग्नि परीक्षा
लेकिन भ्रम का वह सिलसिला यहीं नहीं रुका। अगली ही पल, कमरे का दूसरा हिस्सा जगमगा उठा।
वहाँ गैब्रिएल वैन होलेन की परछाई प्रकट हुई, जिसके हाथ में वह प्राचीन चाँदी का खंजर था। गैब्रिएल की परछाई ने नताशा की तरफ देखकर उपहास उड़ाते हुए कहा—"सोचो मत, नताशा! यह पिशाच सिर्फ अपनी अमरता बचाने के लिए तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा है। जैसे ही यह चक्र पूरा होगा, यह तुम्हारा सारा खून चूसकर तुम्हें इसी तहखाने में छोड़ देगा। क्या तुम ऐसे राक्षस पर भरोसा करती हो?"
नताशा का दिल एक पल के लिए धड़कना भूल गया। उसके मन के उस कोने में, जहाँ कभी शंका और डर के बीज बोए गए थे, वह पुराना खत और थॉमस की बातें एक बार फिर गूँजने लगीं।
क्या व्लाद सचमुच...
नताशा ने पीछे हटना चाहा। उसके हाथ व्लाद के हाथों से थोड़े ढीले पड़ने लगे।
व्लाद ने नताशा की आँखों में उस उभरते हुए शक को भांप लिया। उसने बिना किसी गुस्से के, बहुत ही कोमलता से नताशा के कंधे को पकड़ा और उसकी आँखों में सीधे देखा।
"नताशा," व्लाद की आवाज़ में वह मखमली गहराई और असीम प्यार था जो किसी भी जादू या भ्रम को तोड़ सकता था। "अगर मेरे मन में तुम्हारे लिए ज़रा सा भी छल होता, तो मैं तुम्हें ओकवुड घाटी से इस विएना कैसल तक खींचकर नहीं लाता। मैंने सदियों अकेले तड़पना चुना था, लेकिन तुम्हारे आने के बाद मैंने जीना सीखा है। अगर इस कालकोठरी को मेरा अंत चाहिए, तो यह मुझे मिटा सकती है, लेकिन तुम पर कभी शक नहीं कर सकती।"
नताशा ने व्लाद की आँखों में उस अटूट सच्चाई को देखा। उसके दिल से वह शक का बादल एक झटके में छंट गया। उसने बिना एक पल गंवाए व्लाद को कसकर अपनी बाहों में भर लिया। "मुझे आप पर पूरा भरोसा है, व्लाद। हम इस भ्रम को मिलकर हराएंगे।"
नताशा के उस अगाध विश्वास के प्रकट होते ही, गैब्रिएल की वह परछाई और उस कालकोठरी की वह नीली आग एक तेज धमाके के साथ बुझ गई।
कालकोठरी का टूटना और कौंसिल का खौफ
अग्नि परीक्षा का वह दूसरा चरण समाप्त होते ही, उस तहखाने की काली संगमरमर की दीवारें थरथराने लगीं। दीवारों पर जमी बर्फ पिघलकर बहने लगी और ऊपर छत से पुराने पत्थरों के टुकड़े नीचे गिरने लगे।
धड़ऽऽऽ...!
कालकोठरी का वह मुख्य लोहे का दरवाजा, जिसे विक्टर बंद करके गया था, बाहर से किसी अदृश्य प्रलयकारी ताकत के दबाव से टूटकर अंदर आ गिरा।
दरवाजे के उस टूटे हुए मलबे के बीचों-बीच, काउंटरैस एलिज़ाबेथ वॉन स्टाइन खड़ी थी। उसके चेहरे पर उस अजेयता का घमंड पूरी तरह चकनाचूर हो चुका था। उसके पीछे गैब्रिएल और कुछ गुप्त अंगरक्षक हैरान और डरे हुए खड़े थे।
"यह... यह नामुमकिन है!" काउंटरैस एलिज़ाबेथ चिल्लाई, उसकी आवाज़ में कंपन था। "द ट्रायल ऑफ ब्लड एंड ऐश से आज तक कोई भी जीवित या अपने प्रेम को बचाकर बाहर नहीं निकल पाया है! तुम दोनों ने उस भ्रम को कैसे हरा दिया?!"
व्लाद नताशा का हाथ थामे हुए उस पत्थर की वेदी के पास से उठा। उसकी उपस्थिति में अब कोई लाचारी नहीं थी, बल्कि एक ऐसा प्रलयकारी आत्मविश्वास था जिसने उस कैसल के गार्ड्स को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
"तुमने और तुम्हारी इस सड़ी हुई कौंसिल ने हमेशा से यही समझा है, एलिज़ाबेथ, कि डर और भ्रम से इंसानों और पिशाचों की रूहों को गुलाम बनाया जा सकता है," व्लाद की आवाज़ उस तहखाने की हर दीवार से टकराकर गूँज रही थी। "लेकिन तुम यह भूल गई थीं कि सच्चा प्रेम और अटूट विश्वास किसी भी अभिशाप और किसी भी कालकोठरी से बहुत ज्यादा ताकतवर होता है।"
गैब्रिएल ने घबराते हुए अपनी बेल्ट से अपनी पिस्तौल निकालनी चाही, लेकिन व्लाद ने अपनी एक ही फूँक से हवा का ऐसा झोंका छोड़ा कि गैब्रिएल दूर जाकर दीवार से जा टकराया और उसकी पिस्तौल दूर फर्श पर फिसल गई।
"अब खेल खत्म हो चुका है, काउंटरैस," नताशा ने आगे बढ़कर कहा। उसकी आँखों में वह लाल माणिक जैसी चमक अब सीधे दिखाई दे रही थी। "हम इस विएना कैसल के किसी भी नियम या कालकोठरी के मोहताज नहीं हैं। यदि इस कौंसिल को हमसे कोई और चुनौती चाहिए, तो हम उसका सामना करने के लिए तैयार हैं।"
काउंटरैस एलिज़ाबेथ का चेहरा गुस्से और जिल्लत से पीला पड़ गया। वह जान चुकी थी कि व्लाद और नताशा को अब साधारण बन्धनों में नहीं बाँधा जा सकता था।
"तुम दोनों बच नहीं सकते..." एलिज़ाबेथ ने दाँत पीसते हुए कहा और पीछे मुड़कर अपने अंगरक्षकों के साथ अंधेरे गलियारे में गायब हो गई।
तहखाने का वह अंधेरा अब छँट चुका था। ऊपर की छतों से सुबह की पहली प्राकृतिक धूप उस कैसल के अंदर आने लगी थी—जो इस बात का सबूत था कि व्लाद और नताशा ने न केवल उस अग्नि परीक्षा को पार कर लिया था, बल्कि विएना कैसल के उस प्राचीन साम्राज्य की नींव को भी हिलाकर रख दिया था।
क्रमशः

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
Chapter
24 of 30
Category
Haunted Places
Reading time
9 min
Words
1646
Language
Hindi (हिंदी)
Price
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