Pretika › Ghost Stories › 🪞 behind the mirror
एपिसोड 8 मर चुका आदमी
firoj saifi · Ghost Stories · 15 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- 🪞 behind the mirror
- Chapter
- 8 of 8
- Category
- Ghost Stories
- Reading time
- 15 min
- Words
- 2890
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
एपिसोड 8 — **मर चुका आदमी**
कमरा पूरी तरह अंधेरे में डूबा हुआ था।
कुछ सेकंड तक सिर्फ मशीनों की धीमी आवाज़ सुनाई देती रही।
**बीप...**
**बीप...**
**बीप...**
फिर अचानक किसी के कदमों की आवाज़ आई।
धीरे।
बहुत धीरे।
**टक...**
**टक...**
**टक...**
Arjun दीवार से चिपका खड़ा था।
उसके सामने बूढ़ा Arjun खड़ा था।
वही चेहरा।
वही आँखें।
लेकिन उम्र लगभग साठ साल।
चेहरे पर गहरे घाव।
गर्दन के पास काली नसें।
और दाईं आँख के नीचे वही छोटा निशान जो Arjun के चेहरे पर था।
Arjun ने काँपती आवाज़ में पूछा—
“तुमने कहा था कि तुम मर चुके हो।”
बूढ़े Arjun ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“तो फिर तुम यहाँ कैसे हो?”
“क्योंकि मौत और याददाश्त... इस जगह में एक जैसी चीज़ें नहीं हैं।”
“मैं समझा नहीं।”
बूढ़े Arjun ने आसपास देखा।
“यह दुनिया उन लोगों को भी जिंदा रखती है जिन्हें असली दुनिया भूल चुकी है।”
Arjun ने पूछा—
“तुम मेरा भविष्य हो?”
बूढ़ा कुछ सेकंड चुप रहा।
फिर बोला—
“मैं तुम्हारा भविष्य भी हूँ... और तुम्हारा अतीत भी।”
Arjun पीछे हट गया।
“ये कैसे संभव है?”
बूढ़े Arjun ने अपनी हथेली उसकी ओर की।
उसकी हथेली पर वही गोल निशान था।
लेकिन उसके बीच एक और निशान बना था।
**आठ।**
“क्योंकि तुम समय में सीधे आगे नहीं बढ़ते।”
“तुम बार-बार उसी जगह लौटते हो।”
Arjun ने धीरे से पूछा—
“कहाँ?”
बूढ़े Arjun ने सामने अंधेरे में मौजूद उस विशाल mirror की ओर देखा।
“उसके अंदर।”
---
## 1. टैंक के अंदर का Devendra
अचानक कमरे में लाल emergency light जल उठी।
Arjun ने टैंक की तरफ देखा।
Devendra अब भी अंदर खड़े थे।
लेकिन उनके चेहरे पर कुछ बदल गया था।
उनकी आँखें काली थीं।
वे मुस्कुरा रहे थे।
“Arjun...”
आवाज़ सुनकर Arjun का शरीर जम गया।
यह उसके पिता की आवाज़ नहीं थी।
वह आवाज़ बहुत गहरी थी।
जैसे कई लोग एक साथ बोल रहे हों।
“तुम्हें लगता है मैं तुम्हारा दुश्मन हूँ?”
Arjun ने टैंक के पास जाकर कहा—
“तुम कौन हो?”
Devendra मुस्कुराए।
“तुम्हें सच में नहीं पता?”
“बताओ।”
“मैं वह हूँ जिसे तुम्हारे पिता ने बनाया।”
Arjun की सांस रुक गई।
“तुम मेरे पिता नहीं हो?”
Devendra ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“तो असली Devendra कहाँ हैं?”
कुछ सेकंड तक खामोशी रही।
फिर टैंक के अंदर खड़े व्यक्ति ने अपनी छाती पर हाथ रखा।
“यहीं।”
Arjun उलझ गया।
“क्या?”
“उनकी यादें मेरे अंदर हैं।”
“तो तुम...”
“मैं Devendra की यादों से बना शरीर हूँ।”
बूढ़ा Arjun अचानक चिल्लाया—
“झूठ!”
टैंक के अंदर का Devendra उसकी ओर देखने लगा।
“तुम अभी भी मुझे देखकर डरते हो?”
बूढ़े Arjun की आँखों में गुस्सा भर गया।
“मैं जानता हूँ तुम क्या हो।”
“तो बताओ।”
“तुम उसके सबसे सफल प्रयोग हो।”
Devendra मुस्कुराए।
“नहीं।”
उन्होंने Arjun की तरफ देखा।
“मैं पहला सफल प्रयोग हूँ।”
कमरे की मशीनें अचानक तेज आवाज़ करने लगीं।
स्क्रीन पर कई शब्द दिखाई दिए—
**SUBJECT 00 — MEMORY CONSTRUCT**
**SUBJECT 01 — FAILED**
**SUBJECT 02 — FAILED**
**SUBJECT 03 — FAILED**
**SUBJECT 04 — FAILED**
**SUBJECT 05 — FAILED**
**SUBJECT 06 — FAILED**
**SUBJECT 07 — ARJUN**
**SUBJECT 08 — AARAV**
**SUBJECT 09 — PENDING**
Arjun ने स्क्रीन को घूरा।
“Experiment Nine अभी तक हुआ ही नहीं?”
बूढ़ा Arjun बोला—
“हुआ है।”
“कब?”
“अभी।”
अचानक स्क्रीन पर एक नया नाम दिखाई दिया।
**SUBJECT 09 — ARJUN SHARMA**
Arjun पीछे हट गया।
“लेकिन मैं तो Subject Seven था।”
बूढ़े Arjun ने उसकी तरफ देखा।
“तुम हमेशा यही समझते रहे।”
“सच क्या है?”
“तुम सातवें प्रयोग नहीं थे।”
वह कुछ सेकंड रुका।
“तुम... नौवें प्रयोग हो।”
---
## 2. सात चेहरे
कमरे की दीवारों पर लगे mirrors एक-एक करके रोशन होने लगे।
पहले mirror में एक बच्चा था।
दूसरे में एक जवान आदमी।
तीसरे में एक बूढ़ी महिला।
चौथे में एक सैनिक।
पाँचवें में एक छोटी लड़की।
छठे में एक आदमी जिसका चेहरा नहीं था।
सातवें mirror में...
Aarav।
Arjun ने उसे देखते ही mirror की तरफ कदम बढ़ाया।
“Aarav!”
Mirror वाला Aarav उसे देख रहा था।
उसने हाथ उठाया।
लेकिन उसके पीछे एक और चेहरा दिखाई दिया।
**Arjun का चेहरा।**
फिर तीसरा।
फिर चौथा।
कुछ ही सेकंड में mirror के अंदर सैकड़ों Arjun खड़े थे।
सबकी आँखें बंद।
सब शांत।
और फिर...
एक-एक करके सबने आँखें खोल दीं।
सभी ने एक साथ कहा—
“**हमें याद करो।**”
Arjun ने कान बंद कर लिए।
“बस!”
बूढ़े Arjun ने कहा—
“तुम्हें लगता है ये लोग कैद हैं।”
“क्या नहीं हैं?”
“ये कैद नहीं हैं।”
“फिर?”
“ये तुम्हारे संभावित जीवन हैं।”
Arjun ने उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
“हर बार जब तुमने कोई फैसला लिया... एक नया Arjun पैदा हुआ।”
“और बाकी?”
“वे दूसरी दुनिया में रह गए।”
Arjun ने डरते हुए पूछा—
“कितने Arjun हैं?”
बूढ़ा Arjun मुस्कुराया।
“जितनी बार तुमने खुद को बदला है।”
---
## 3. असली Aarav
अचानक कमरे के पीछे से एक आवाज़ आई।
“भैया...”
Arjun पलटा।
छोटा Aarav वहाँ खड़ा था।
लेकिन इस बार उसके चेहरे पर कोई डर नहीं था।
वह शांत था।
उसकी आँखें सामान्य थीं।
Arjun उसके पास गया।
“तुम सच में Aarav हो?”
बच्चे ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“तुम्हें सब याद है?”
“सब नहीं।”
“क्या याद है?”
Aarav ने कहा—
“जिस दिन हम पैदा हुए थे।”
Arjun की सांस रुक गई।
“उस दिन क्या हुआ था?”
Aarav ने धीरे-धीरे बोलना शुरू किया।
“माँ रो रही थीं।”
“पापा बहुत खुश थे।”
“उन्होंने कहा था कि दोनों बच्चे स्वस्थ हैं।”
“लेकिन फिर कमरे की लाइट चली गई।”
“जब लाइट वापस आई...”
वह रुक गया।
“एक mirror कमरे में था।”
Arjun ने पूछा—
“वह mirror वहाँ पहले नहीं था?”
Aarav ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“फिर?”
“Mirror में हम दोनों नहीं थे।”
“कौन था?”
Aarav ने Arjun की ओर देखा।
“तुम।”
Arjun ने कहा—
“मैं तो कमरे में था।”
“हाँ।”
“फिर mirror में कौन-सा मैं था?”
Aarav ने जवाब दिया—
“जो अभी तक पैदा नहीं हुआ था।”
Arjun का चेहरा सफेद पड़ गया।
“ये संभव नहीं।”
Aarav ने कहा—
“पापा ने उसे देखकर कहा था...”
उसने Devendra की आवाज़ की नकल की—
“**यह बच्चा भविष्य से आया है।**”
बूढ़े Arjun ने आँखें बंद कर लीं।
“बस।”
Aarav ने उसकी तरफ देखा।
“आपको डर लग रहा है?”
बूढ़ा Arjun धीरे से बोला—
“मुझे नहीं।”
“तो किसे?”
बूढ़े Arjun ने Arjun की तरफ देखा।
“उसे।”
टैंक के अंदर खड़ा Devendra मुस्कुरा रहा था।
---
## 4. भविष्य की रात
अचानक Arjun के सामने एक नया दृश्य खुल गया।
एक शहर।
रात।
सड़कें खाली।
आसमान में अजीब तरह का काला बादल।
हजारों लोग सड़कों पर खड़े थे।
लेकिन किसी के चेहरे नहीं थे।
सभी लोग एक-दूसरे की ओर देख रहे थे।
फिर अचानक...
हर इंसान का चेहरा बदल गया।
सबके चेहरे पर Arjun का चेहरा आ गया।
Arjun ने घबराकर पूछा—
“ये क्या है?”
बूढ़ा Arjun बोला—
“वह रात।”
“कौन-सी रात?”
“जिस रात Mirror World बाहर आएगा।”
Arjun ने शहर को देखा।
इमारतों की खिड़कियों में mirrors थे।
हर mirror से वही faceless creature बाहर निकल रहा था।
“इसे कैसे रोकेंगे?”
बूढ़े Arjun ने कहा—
“एक ही तरीका है।”
“क्या?”
“तुम्हें अपना चेहरा छोड़ना होगा।”
Arjun चुप हो गया।
“मतलब?”
“तुम्हारी सारी यादें, तुम्हारी पहचान, तुम्हारा नाम...”
बूढ़ा Arjun उसकी ओर बढ़ा।
“सब कुछ।”
“और फिर?”
“तुम उस दुनिया के अंदर हमेशा के लिए रहोगे।”
Arjun ने पूछा—
“तुमने ऐसा किया था?”
बूढ़े Arjun ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“फिर तुम यहाँ कैसे हो?”
बूढ़ा Arjun मुस्कुराया।
“क्योंकि मैंने एक गलती की।”
“क्या?”
“मैं वापस आ गया।”
---
## 5. Neil का सच
दूसरी ओर Neil अचानक उठ खड़ा हुआ।
वह अपनी जेब से एक पुरानी चाबी निकाल रहा था।
Kabir ने उसे देखा।
“ये चाबी कहाँ से मिली?”
Neil ने कहा—
“मेरे पास हमेशा से थी।”
“किसकी?”
Neil ने अपना सिर पकड़ लिया।
“मुझे नहीं पता।”
“तुम्हें याद नहीं?”
“नहीं।”
अचानक उसके दिमाग में एक दृश्य आया।
एक घर।
एक महिला।
एक छोटी बच्ची।
और Neil खुद...
एक mirror के सामने खड़ा था।
उसकी पत्नी Meera उसके पीछे खड़ी थी।
वह कह रही थी—
“अगर कभी मुझे भूल जाओ...”
Neil ने उसकी ओर देखा।
“मैं तुम्हें कैसे भूल सकता हूँ?”
Meera मुस्कुराई।
“क्योंकि वो ऐसा ही करता है।”
“कौन?”
Meera ने mirror की तरफ देखा।
“वही।”
Mirror में Neil का प्रतिबिंब नहीं था।
वहाँ एक दूसरा आदमी खड़ा था।
जिसके हाथ में कैमरा था।
वह कैमरा सीधे Neil की ओर कर रहा था।
**FLASH!**
दृश्य समाप्त।
Neil फर्श पर गिर पड़ा।
Kabir ने उसे उठाया।
“क्या याद आया?”
Neil ने काँपते हुए कहा—
“मैं यहाँ पहले भी आया हूँ।”
Kabir का चेहरा बदल गया।
“कब?”
“तेरह साल पहले।”
“क्या?”
Neil ने उसकी तरफ देखा।
“मैं Devendra के साथ काम करता था।”
Kabir कुछ बोल नहीं पाया।
“तुम्हें यह पता था?”
Neil ने पूछा।
Kabir ने सिर झुका लिया।
“हाँ।”
“फिर मुझे कुछ याद क्यों नहीं?”
Kabir ने जवाब दिया—
“क्योंकि तुम भी Experiment Seven का हिस्सा थे।”
Neil ने धीरे से कहा—
“मैं क्या था?”
Kabir ने कहा—
“Witness.”
Neil हँसा।
“नहीं।”
“क्या?”
“मैं witness नहीं था।”
उसने अपनी जेब से एक पुरानी फोटो निकाली।
फोटो में Devendra, Kabir और Neil तीनों खड़े थे।
उनके पीछे...
वह लड़की खड़ी थी।
लेकिन तस्वीर के नीचे एक तारीख थी—
**1997.**
Neil ने कहा—
“मैं उस समय पैदा भी नहीं हुआ था।”
Kabir की सांस रुक गई।
---
## 6. 1997
कमरे की दीवार पर अचानक एक पुरानी फिल्म चलने लगी।
साल—
**1997।**
एक छोटी प्रयोगशाला।
तीन आदमी।
Devendra।
Kabir।
और एक तीसरा व्यक्ति।
उसका चेहरा कैमरे से बाहर था।
Devendra कह रहे थे—
“Subject Zero हमें यादों के अंदर प्रवेश करने की क्षमता देता है।”
तीसरा आदमी बोला—
“अगर हम इसे नियंत्रित कर लें?”
“तो हम इंसान की हर याद बदल सकते हैं।”
Kabir ने पूछा—
“और अगर वह हमें नियंत्रित करने लगे?”
तीसरा आदमी हँसा।
“तो हम अपनी यादें बदल देंगे।”
फिर camera उसकी तरफ घूमता है।
Arjun की आँखें फैल जाती हैं।
वह आदमी...
**Neil था।**
लेकिन Neil उस समय लगभग बीस साल का दिखाई दे रहा था।
वर्तमान Neil कैमरे के सामने खड़ा होकर यह दृश्य देख रहा था।
उसके हाथ काँपने लगे।
“ये मैं हूँ...”
Kabir ने कहा—
“हाँ।”
“लेकिन मैं तब पैदा भी नहीं हुआ था।”
बूढ़ा Arjun अचानक बोला—
“क्योंकि वह Neil नहीं था।”
सभी उसकी तरफ देखने लगे।
“तो कौन?”
बूढ़े Arjun ने कहा—
“Subject Zero.”
---
## 7. Subject Zero
कमरे की सारी लाइटें बुझ गईं।
एक अकेली spotlight जली।
उस रोशनी के अंदर Neil खड़ा था।
उसका शरीर काँप रहा था।
उसकी आँखें बंद थीं।
फिर उसने आँखें खोलीं।
उनमें अब कोई डर नहीं था।
उसने सीधे Arjun की तरफ देखा।
“आखिर तुमने मुझे पहचान लिया।”
Arjun पीछे हट गया।
“तुम कौन हो?”
Neil मुस्कुराया।
“मैं वह हूँ जिसने पहली बार mirror बनाया था।”
“लेकिन mirror तो मेरे पिता ने बनाया था।”
“उन्होंने सिर्फ उसे खोला।”
Neil ने अपना चेहरा छुआ।
“मैंने बनाया।”
Kabir ने चिल्लाकर कहा—
“नहीं!”
Neil ने उसकी ओर देखा।
“तुमने मुझे मार दिया था।”
Kabir पीछे हट गया।
“तुम मर गए थे।”
“नहीं।”
Neil आगे बढ़ा।
“तुमने मेरी यादें मिटा दी थीं।”
उसकी आवाज़ बदलने लगी।
“फिर मेरी यादों ने नया शरीर बनाया।”
Arjun ने धीरे से पूछा—
“क्या तुम वही creature हो?”
Neil मुस्कुराया।
“Creature?”
उसने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“फिर?”
Neil ने कहा—
“मैं उसका पिता हूँ।”
अचानक कमरे की दीवारें काँप उठीं।
हर mirror में एक ही चेहरा दिखाई देने लगा।
Neil का।
फिर वे चेहरे बदलकर Arjun के हो गए।
फिर Devendra के।
फिर Aarav के।
फिर उस लड़की के।
और फिर...
सभी चेहरों ने एक साथ कहा—
**“हम तुम्हारी यादें हैं।”**
---
## 8. माँ का आखिरी संदेश
Arjun के सामने अचानक उसकी माँ दिखाई दीं।
इस बार वह सामान्य थीं।
उनकी आँखों में आँसू थे।
“बेटा...”
Arjun उनकी ओर दौड़ा।
“माँ!”
लेकिन उनके और Arjun के बीच एक transparent mirror था।
Arjun ने उस पर हाथ रखा।
माँ ने भी अपना हाथ mirror पर रखा।
“मेरी बात ध्यान से सुनना।”
“माँ, मैं आपको घर लेकर जाऊँगा।”
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि मैं तुम्हारी माँ नहीं हूँ।”
Arjun की आँखें भर आईं।
“फिर आप कौन हैं?”
माँ ने कहा—
“मैं तुम्हारी माँ की आखिरी याद हूँ।”
Arjun स्तब्ध रह गया।
“क्या?”
“तुम्हारी असली माँ बहुत पहले मर चुकी थीं।”
“कब?”
“उस रात।”
“कौन-सी रात?”
माँ ने mirror की तरफ देखा।
“जब Devendra ने तुम्हें बचाने के लिए मुझे mirror के अंदर भेजा।”
Arjun ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
“तुम्हारे पिता ने सोचा था कि वह तुम्हें बचा लेंगे।”
“लेकिन?”
“Mirror ने मुझे खा लिया।”
“फिर मैं?”
माँ मुस्कुराईं।
“तुम्हें बाहर भेज दिया गया।”
“किसने?”
माँ ने पीछे देखा।
अंधेरे में वही लड़की खड़ी थी।
“उसने।”
Arjun ने लड़की को देखा।
“तुमने मुझे बाहर भेजा?”
लड़की ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“क्यों?”
“क्योंकि तुम मेरे भाई थे।”
Arjun की आँखें फैल गईं।
“तो तुम सच में मेरी बहन हो?”
लड़की मुस्कुराई।
“नहीं।”
उसकी मुस्कान धीरे-धीरे बदल गई।
“मैं तुम्हारी बहन की याद हूँ।”
“और तुम्हारी बहन?”
“मर गई।”
Arjun की सांस रुक गई।
“फिर तुम कौन हो?”
लड़की ने जवाब दिया—
“उसकी याद जिसने तुम्हें बचाने के लिए खुद को mirror में छोड़ दिया।”
फिर उसने अपना असली चेहरा दिखाया।
Arjun ने उसे देखते ही पहचान लिया।
वह एक छोटी बच्ची थी।
लगभग पाँच साल की।
और उसके हाथ में वही खिलौना था जिसे Arjun ने बचपन में देखा था।
उसकी बहन।
---
## 9. अंतिम चेतावनी
अचानक पूरा Mirror World हिलने लगा।
दीवारों में दरारें आने लगीं।
बूढ़ा Arjun चिल्लाया—
“समय खत्म हो गया!”
Arjun ने पूछा—
“क्या करना होगा?”
“तुम्हें चुनना होगा।”
“क्या?”
“अपना चेहरा।”
“मेरा चेहरा?”
“हाँ।”
“कौन-सा?”
बूढ़े Arjun ने तीन mirrors की ओर इशारा किया।
पहले में Arjun जैसा वह अभी था।
दूसरे में एक बूढ़ा Arjun।
तीसरे में...
एक faceless इंसान।
“पहला चेहरा चुनोगे तो तुम अपनी सारी यादें खो दोगे।”
“दूसरा?”
“तुम इस दुनिया में फँस जाओगे।”
“और तीसरा?”
बूढ़ा Arjun ने उसकी आँखों में देखा।
“तुम दुनिया से सभी mirrors मिटा दोगे।”
Arjun ने पूछा—
“उसकी कीमत?”
“तुम्हारा अस्तित्व।”
Arjun चुप हो गया।
Neil दूर से हँस रहा था।
“उसे मत चुनना।”
Arjun ने उसकी ओर देखा।
“क्यों?”
Neil ने कहा—
“क्योंकि दुनिया तुम्हें भूल जाएगी।”
Arjun ने पूछा—
“और अगर मैं कुछ न चुनूँ?”
Neil की मुस्कान गायब हो गई।
“तो मैं तुम्हारा चेहरा ले लूँगा।”
वह धीरे-धीरे Arjun की तरफ बढ़ा।
“और फिर...”
उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
“मैं असली दुनिया में चला जाऊँगा।”
Arjun पीछे हटता गया।
Neil अब बिल्कुल उसके सामने था।
“तुम्हें पता है सबसे मजेदार बात क्या है?”
“क्या?”
Neil मुस्कुराया।
“तुम्हारी दुनिया में किसी को पता भी नहीं चलेगा कि असली Arjun कौन था।”
उसने Arjun के चेहरे को छूने की कोशिश की।
लेकिन उसी क्षण...
Aarav ने पीछे से उसका हाथ पकड़ लिया।
Neil ने उसकी ओर देखा।
“तुम?”
Aarav ने धीरे से कहा—
“भैया को मत छूना।”
Neil हँसा।
“तुम तो सिर्फ एक याद हो।”
Aarav ने सिर उठाया।
“हाँ।”
फिर उसकी आँखें काली हो गईं।
“लेकिन मैं ऐसी याद हूँ...”
उसने Neil का हाथ जकड़ लिया।
“...जिसे तुम मिटा नहीं सकते।”
एक तेज रोशनी फटी।
Neil चीख उठा।
पूरा Mirror World हिल गया।
Arjun ने तीनों mirrors की तरफ देखा।
उसने आँखें बंद कीं।
और अपना हाथ तीसरे mirror पर रख दिया।
**Faceless Arjun।**
बूढ़े Arjun ने चिल्लाया—
“रुको!”
लेकिन Arjun ने हाथ नहीं हटाया।
“अगर मेरा अस्तित्व ही इस सबकी वजह है...”
उसने धीरे से कहा—
“तो शायद मुझे खत्म होना पड़ेगा।”
Mirror टूटने लगा।
दरारें फैलने लगीं।
Neil पीछे गिर गया।
लड़की चीखने लगी।
Kabir जमीन पर गिर पड़ा।
Aarav ने Arjun का हाथ पकड़ लिया।
“भैया!”
Arjun ने उसकी तरफ देखा।
“तुम घर जाना।”
Aarav रोते हुए बोला—
“आपके बिना नहीं।”
Arjun मुस्कुराया।
“तुम मुझे याद रखना।”
Aarav ने सिर हिलाया।
“मैं कभी नहीं भूलूँगा।”
Arjun ने कहा—
“यही मेरी आखिरी उम्मीद है।”
Mirror पूरी तरह टूट गया।
और उसी क्षण...
सारी दुनिया सफेद रोशनी में डूब गई।
---
## 10. लेकिन कहानी खत्म नहीं हुई
सुबह।
सूरज की रोशनी पुराने अस्पताल की टूटी खिड़कियों से अंदर आ रही थी।
Kabir अस्पताल के बाहर बैठा था।
Neil गायब था।
लड़की गायब थी।
बूढ़ा Arjun गायब था।
और Aarav...
वह सड़क के किनारे खड़ा था।
उसके हाथ में एक पुरानी तस्वीर थी।
तस्वीर में दो बच्चे थे।
एक का चेहरा साफ था।
दूसरे का चेहरा धुंधला।
Aarav ने तस्वीर को देखते हुए कहा—
“भैया...”
फिर अचानक उसे कुछ याद आया।
उसने पीछे देखा।
सड़क के दूसरी तरफ एक आदमी खड़ा था।
काले कपड़े।
सिर झुका हुआ।
Aarav धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।
आदमी ने सिर उठाया।
चेहरा...
**Arjun का था।**
Aarav की आँखों में आँसू आ गए।
“भैया?”
आदमी मुस्कुराया।
लेकिन उसकी आवाज़ Arjun की नहीं थी।
“तुमने मुझे याद रखा।”
Aarav पीछे हट गया।
“तुम कौन हो?”
आदमी ने कहा—
“मैं वह हूँ जो तुम्हारे भाई के बाद बचा।”
“Arjun कहाँ है?”
आदमी ने सड़क के किनारे पड़े एक छोटे mirror की तरफ देखा।
उस mirror में...
Arjun दिखाई दे रहा था।
वह अंदर से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था।
उसने हाथ काँच पर रखा।
Aarav ने दौड़कर mirror उठाया।
“भैया!”
Mirror के अंदर Arjun ने आँखें खोलीं।
उसके होंठ हिले—
“भागो।”
Aarav ने पूछा—
“क्यों?”
Arjun ने पीछे देखा।
उसके पीछे हजारों लोग खड़े थे।
सभी बिना चेहरे के।
और सबसे आगे...
Neil खड़ा था।
उसके हाथ में एक कैमरा था।
Neil ने camera उठाया।
**FLASH!**
Aarav ने आँखें बंद कर लीं।
जब उसने दोबारा आँखें खोलीं...
Mirror खाली था।
लेकिन सड़क के बीचोंबीच एक नई परछाई खड़ी थी।
वह परछाई...
Aarav की थी।
लेकिन उसका सिर...
**Arjun का था।**
दूर कहीं से एक आवाज़ आई—
“Experiment Nine complete.”
फिर दूसरी आवाज़—
“Experiment Ten begins.”
और इस बार...
आवाज़ किसी और की नहीं थी।
**Aarav की थी।**
# TO BE CONTINUED...
एपिसोड 8 समाप्त
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