Pretika › Horror › सेक्सी प्रेत
सेक्सी प्रेत (31)
Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट
धमाका
ऐसा लगा जैसे पूरी इमारत अंदर से फट गई हो।
धूल।
चिंगारियाँ।
लोहे की चीखती आवाज़ें।
कबीर हवा में उछला… दीवार से टकराया… फर्श पर गिरा।
कुछ सेकंड तक उसे कुछ सुनाई नहीं दिया।
सिर्फ़ एक तेज़ सीटी जैसी आवाज़…
ईईईईईईई…
उसने आँखें खोलीं।
सब धुंधला था।
“न… नंदिनी…!”
उसकी आवाज़ टूटी हुई निकली।
उसने घुटनों के बल उठकर इधर-उधर देखा।
मशीन आधी टूट चुकी थी।
स्क्रीन चटक गई थी।
तार जल रहे थे।
चिंगारियाँ उड़ रही थीं।
लेकिन…
मशीन बंद नहीं हुई थी।
वो और तेज़ चल रही थी।
जैसे मरते-मरते आखिरी साँस में पागल हो गई हो।
“कबीर…!”
राघव की आवाज़ आई।
वो एक स्तंभ के पीछे गिरा पड़ा था।
माथे से खून बह रहा था।
शेखर पास में बेहोश।
“तूने… क्या किया?” राघव ने कराहते हुए पूछा।
कबीर की नजर मशीन पर गई।
उसने बटन पूरा बंद नहीं किया था।
उसने सिस्टम ओवरलोड कर दिया था।
“अगर इसे सीधे बंद करता…”
वो हाँफते हुए बोला—
“तो छाया-भक्षक बच जाता…”
“इसलिए… मैंने फीडबैक लूप चालू किया…”
राघव समझ गया।
“मतलब…?”
“जो डर ये खींचेगा…
उसी से खुद जलेगा…”
अचानक—
ठंडी हँसी।
“चालाक हो गए हो… कबीर…”
काले धुएँ का गुबार फिर इकट्ठा हुआ।
छाया-भक्षक।
लेकिन अब वो स्थिर नहीं था।
उसका शरीर टूट रहा था।
जैसे सिग्नल डिस्टर्ब हो।
चेहरा बनता… बिगड़ता…
हाथ लंबा… फिर धुआँ…
“तुम समझते हो… मुझे मशीन से मार दोगे…?”
उसकी आवाज़ कई आवाज़ों में बदल गई।
औरतें।
बच्चे।
बूढ़े।
सैकड़ों चीखें एक साथ।
“मैं डर हूँ…
मैं तब तक जिंदा हूँ…
जब तक तुम डरते हो…”
कबीर खड़ा हो गया।
पहली बार…
उसकी आँखों में डर नहीं था।
सिर्फ गुस्सा।
“गलती यही है तेरी…”
वो धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा।
“मैं अब डर नहीं रहा…”
छाया-भक्षक ने झपट्टा मारा।
काली भुजा उसके सीने में घुस गई।
सर्दी।
जैसे बर्फ दिल में घुस गई हो।
उसके दिमाग में फ्लैश—
बचपन का हादसा।
माँ की मौत।
अकेलापन।
नंदिनी का खून।
हर दर्द।
हर डर।
सब एक साथ।
वो चीखा।
“हाँ… यही चाहिए…!”
छाया-भक्षक गुर्राया।
“डर… दर्द… निराशा…”
मशीन की सुइयाँ तेज़ी से घूमने लगीं।
ऊर्जा बढ़ी।
लाल से सफेद।
सफेद से नीली।
तभी—
एक गर्म हाथ उसके हाथ पर।
“कबीर…”
वो आवाज़।
नंदिनी।
वो उसके सामने थी।
कमज़ोर।
लगभग पारदर्शी।
लेकिन मुस्कुरा रही थी।
“याद है… तुमने क्या कहा था?”
“क्या…?”
“तुम मुझे कुछ नहीं होने दोगे…”
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
“डर मत…”
नंदिनी बोली—
“ये हम दोनों की लड़ाई है…”
“मैं भागकर नहीं…
लड़कर जाऊँगी…”
उसने उसका हाथ कसकर पकड़ा।
अचानक—
मशीन की स्क्रीन पर नया रीडिंग आया—
DUAL SOURCE DETECTED
राघव चिल्लाया—
“ओह शिट…!”
“अब मशीन दोनों की ऊर्जा ले रही है!”
“ये या तो राक्षस को उड़ा देगी…
या तुम दोनों को!”
छाया-भक्षक पीछे हट गया।
पहली बार।
“नहीं… ये नहीं…!”
“तुम्हारी आत्माएँ… इतनी शुद्ध… इतनी मजबूत…”
“ये मुझे जला देंगी…!”
कबीर ने दाँत भींचे।
“यही प्लान है…”
उसने मशीन की ओर छलांग लगाई।
मेन लीवर पकड़ा।
पूरी ताकत से नीचे खींचा।
पूरी बिल्डिंग काँप गई।
लाइटें फटने लगीं।
काँच टूटे।
मशीन पागलों की तरह चीखने लगी।
ऊर्जा की सफेद लहर चारों तरफ फैल गई।
छाया-भक्षक चीखा।
ऐसी आवाज़…
जैसे हजारों आत्माएँ आज़ाद हो रही हों।
उसका शरीर जलने लगा।
धुआँ सफेद होने लगा।
चीखें… धीरे-धीरे… शांत।
नंदिनी कबीर को देख रही थी।
शांत।
सुकून भरी मुस्कान।
“लगता है… मेरा समय आ गया…”
“नहीं!” कबीर चिल्लाया।
“सुनो…”
वो उसके करीब आई।
उसकी उँगलियाँ उसके गाल को छू गईं।
ठंडी… पर कोमल।
“तुमने मुझे बदला नहीं…
मुक्ति दी है…”
“अब मैं डर नहीं हूँ…”
“अब मैं याद हूँ…”
कबीर रो पड़ा।
“मत जाओ…”
“अगर जन्म हुआ…
तो फिर मिलेंगे…”
उसने फुसफुसाया।
और फिर—
वो रोशनी में बदल गई।
धीरे-धीरे।
धुएँ की तरह नहीं…
सितारों की तरह।
हवा में घुल गई।
गायब।
मशीन फट गई।
पूरा बेसमेंट ढहने लगा।
राघव चिल्लाया—
“भागो!!”
तीनों किसी तरह सीढ़ियों की ओर भागे।
पीछे से आग।
धमाके।
गिरती छत।
बाहर निकलते ही—
पूरा रिसर्च सेंटर धड़ाम से गिर पड़ा।
धूल का बादल आसमान में उठ गया।
सब खत्म।
सुबह।
पहली किरण।
कबीर खामोश खड़ा था।
हवा अब ठंडी नहीं थी।
हल्की थी।
जैसे कोई बोझ हट गया हो।
अचानक…
उसके फोन में फोटो गैलरी खुली।
नंदिनी की पुरानी फोटो।
वो मुस्कुरा रही थी।
और स्क्रीन पर हल्की चमक आई।
जैसे किसी ने आखिरी बार अलविदा कहा हो।
कबीर ने आसमान की तरफ देखा।
धीमे से बोला—
“अब मैं नहीं डरूँगा…”
क्रमश:
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- सेक्सी प्रेत
- Chapter
- 31 of 32
- Category
- Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 715
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
और कहानियाँ · More stories
- काली रात का सच · Yogesh Kumar Maurya
- दरवाज़े के उस पार , Season 1 · firoj saifi
- नूर · Pretika
- द किंग ऑफ़ हेल (The King Of Hell) · Yogesh Kumar Maurya