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सेक्सी प्रेत (30)
Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट
रात के ढाई बजे।
शहर सो चुका था।
लेकिन कबीर की आँखों में नींद का नाम नहीं।
राघव की बिल्डिंग से निकलते वक्त उसने पीछे मुड़कर देखा।
तीसरी मंज़िल की खिड़की में…
एक पल को काली आकृति खड़ी थी।
स्थिर।
उन्हें जाते हुए देखती हुई।
फिर गायब।
उसके पेट में ठंडा डर उतर गया।
“ये खत्म नहीं हुआ…” उसने धीमे कहा।
राघव पीछे सीट पर काँप रहा था।
“उसने… उसने मेरी साँस खींच ली थी…”
“ऐसा लगा… मैं अंदर से खाली हो रहा हूँ…”
शेखर बोला —
“अब साफ है।”
“ये सिर्फ मारता नहीं…”
“आत्मा चूसता है।”
नंदिनी बाइक के साथ-साथ चल रही थी।
धीमे।
कमज़ोर।
उसकी रोशनी पहले जैसी नहीं रही।
अब वो धुंध जैसी दिखती थी।
जैसे किसी भी पल हवा में घुल जाएगी।
कबीर ने पूछा —
“तुम ठीक हो?”
वो मुस्कुराई।
“झूठ बोलूँ या सच?”
कबीर चुप।
“मैं खत्म हो रही हूँ…”
ये सुनकर उसका दिल बैठ गया।
“नहीं। मैं तुम्हें कुछ नहीं होने दूँगा।”
नंदिनी ने उसकी तरफ देखा।
“कबीर… मैं पहले ही मर चुकी हूँ…”
“अब बस… सही वजह चाहिए जाने की।”
ये शब्द उसके सीने में तीर जैसे लगे।
गाड़ी एक सुनसान मोड़ पर रुकी।
राघव ने लैपटॉप निकाला।
GPS ब्लिंक कर रहा था।
लाल डॉट।
शहर से बाहर।
जंगल की तरफ।
“यही है…” उसने कहा।
“पुराना मानसिक अस्पताल।”
सड़क धीरे-धीरे कच्ची हो गई।
दोनों तरफ झाड़ियाँ।
टूटी बाउंड्री।
लोहे का जंग लगा बोर्ड।
जिस पर आधा नाम बचा था —
“शा…डो रिस…र्च सें…टर”
हवा में अजीब गंध।
जैसे जली हुई दवा।
और सड़ी हुई यादें।
गेट खुद-ब-खुद चरमराया।
खुल गया।
किसी ने छुआ भी नहीं।
शेखर बुदबुदाया —
“मुझे ये जगह पसंद नहीं…”
राघव बोला —
“यहीं सब शुरू हुआ था…”
अंदर घुसते ही…
तापमान गिर गया।
सांस से धुआँ निकलने लगा।
चाँद की रोशनी टूटी खिड़कियों से अंदर आ रही थी।
हर जगह स्ट्रेचर।
जंग लगे औज़ार।
खून के सूखे धब्बे।
जैसे अस्पताल नहीं…
कसाईखाना हो।
दीवारों पर नंबर लिखे थे।
SUBJECT 08
SUBJECT 11
SUBJECT 14
हर कमरे में जंजीरें।
कुर्सियाँ।
पट्टियाँ।
कबीर की मुट्ठियाँ भींच गईं।
“ये लोग इंसान नहीं थे…”
नंदिनी धीरे से रुकी।
एक दरवाज़े के सामने।
उसकी आवाज़ काँप गई —
“यहीं…”
“यहीं मुझे बाँधा था…”
कबीर ने दरवाज़ा खोला।
अंदर लोहे की कुर्सी।
हथकड़ी।
और फर्श पर खरोंच —
HELP
बार-बार लिखा हुआ।
राघव ने दूसरी फाइल खोली।
“मिल गया…”
“Subject 00…”
“पहला प्रयोग…”
तीनों उसकी तरफ मुड़े।
“नाम — अज्ञात”
“स्थिति — आक्रामक”
“परिणाम — शरीर नष्ट, चेतना सक्रिय”
शेखर फुसफुसाया —
“यानी… वो पहला था…”
राघव —
“और सबसे खतरनाक…”
“वो मरना ही नहीं चाहता था…”
अचानक—
पूरी बिल्डिंग में सायरन बज उठा।
भूंऊऊऊऊऊऊ…
लाल लाइटें जल गईं।
पुराना अलार्म सिस्टम चालू।
जैसे किसी ने स्वागत किया हो।
और फिर…
आवाज़।
चारों तरफ से।
“घर… वापस… आ गए…”
ठंडी।
गहरी।
गूँजती हुई।
कबीर का दिल धड़क उठा।
“वो यहीं है…”
फर्श से काला धुआँ उठने लगा।
धीरे-धीरे।
एक जगह इकट्ठा हुआ।
आकृति बनी।
लंबी।
टेढ़ी।
मानव जैसी… पर इंसान नहीं।
छाया-भक्षक।
पहले से बड़ा।
पहले से घना।
“तुम… मुझे ढूँढते हुए आए…”
वो हँसा।
“अब… तुम यहीं रहोगे…”
दीवारें काँपीं।
दरवाज़े बंद।
भागने का रास्ता खत्म।
कबीर ने चिल्लाया —
“मशीन कहाँ है?!”
राघव बोला —
“नीचे बेसमेंट!”
तीनों भागे।
पीछे से वो चीज़ दीवारों पर रेंगती हुई पीछा कर रही थी।
जैसे शिकारी।
सीढ़ियाँ टूटी।
लोहे की।
नीचे अंधेरा।
हर कदम पर धातु की आवाज़।
टन्न… टन्न…
पीछे हँसी।
“भागो…”
“डरते रहो…”
“मुझे ताकत दो…”
बेसमेंट में बड़ा हॉल।
बीच में विशाल मशीन।
तारों का जाल।
स्क्रीन।
पुराने मॉनिटर।
लिखा —
FEAR EXTRACTION UNIT
राघव चिल्लाया —
“यही है!”
नंदिनी ने धीमे कहा —
“यही मुझे बाँधती थी…”
उसकी आँखों में आँसू थे।
“यही मेरी चीखें पीती थी…”
कबीर का गुस्सा फूट पड़ा।
“आज ये खत्म होगी!”
छाया-भक्षक पीछे आ गया।
पूरा हॉल अंधेरा।
“मुझे खत्म करोगे…”
“तो ये भी खत्म…”
उसने नंदिनी की तरफ इशारा किया।
“हम जुड़े हैं…”
कबीर सन्न।
“क्या मतलब?”
राघव ने स्क्रीन देखी।
“ओह नो…”
“उनकी आत्माएँ मशीन से लिंक हैं…”
“एक हटेगा… तो दूसरा भी…”
काउंटडाउन अपने आप शुरू।
60… 59… 58…
मशीन एक्टिव।
ऊर्जा खिंचने लगी।
नंदिनी दर्द से चीखी।
छाया-भक्षक हँसा।
“निर्णय लो…”
कबीर की आँखों के सामने दो रास्ते।
👉 मशीन बंद करो — राक्षस ज़िंदा
👉 मशीन चालू रखो — नंदिनी भी खत्म
उसका दिल टूट रहा था।
नंदिनी ने मुस्कुराकर कहा —
“डरो मत…”
“मैं मुक्त होना चाहती हूँ…”
25 (क्लिफहैंगर)
काउंटडाउन —
10…
9…
8…
छाया-भक्षक उसकी तरफ बढ़ा।
नंदिनी धीरे-धीरे पारदर्शी।
कबीर मशीन के बटन पर हाथ रखे।
पसीना।
आँसू।
और एक निर्णय…
जो सब कुछ बदल देगा।
3… 2… 1…
अंधेरा।
धमाका।
और पूरी बिल्डिंग हिल गई।
क्रमश:
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- सेक्सी प्रेत
- Chapter
- 30 of 32
- Category
- Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 760
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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