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सेक्सी प्रेत (27)
Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट
फोन की स्क्रीन अभी भी जल रही थी।
वही फोटो।
कबीर का घर।
लाइव।
खिड़की के बाहर उसकी बालकनी।
मतलब —
कोई वहीं था।
अभी।
यहीं।
उसका गला सूख गया।
दिल धक-धक नहीं…
धम-धम कर रहा था।
ये धमकी नहीं थी।
ये निगरानी थी।
“शेखर…”
उसने धीरे से कहा।
“मेरे घर पर कोई है।”
शेखर तुरंत समझ गया।
“चल।”
दोनों दौड़ पड़े।
जीप स्टार्ट हुई।
सायरन नहीं।
शांति से।
क्योंकि अगर वो लोग सच में प्रोफेशनल थे…
तो आवाज़ उन्हें भगा देगी।
रास्ते भर कबीर खिड़की से बाहर देखता रहा।
हर बाइक संदिग्ध।
हर कार संदिग्ध।
हर चेहरा दुश्मन।
उसे पहली बार समझ आया —
डर कैसा होता है जब मौत तुम्हारा पता जानती हो।
तभी—
ठंडी हवा।
जीप के अंदर।
जबकि शीशे बंद थे।
वो समझ गया।
“नंदिनी…”
सामने सीट पर हल्की धुंध।
फिर उसका चेहरा।
“वो अकेले नहीं है…”
उसने फुसफुसाया।
“तीन लोग…”
“एक छत पर…”
“दो नीचे…”
शेखर सिहर गया।
“तू… उससे बात कर रहा है?”
“हाँ।”
“अब मुझे आदत हो गई है।”
जीप घर से 200 मीटर दूर रुकी।
सब लाइट बंद।
शेखर ने पिस्तौल निकाली।
“धीरे चलेंगे।”
कबीर ने सिर हिलाया।
गली अंधेरी थी।
स्ट्रीट लाइट खराब।
अजीब सन्नाटा।
जैसे कोई देख रहा हो।
ऊपर…
बालकनी पर हल्की हरकत।
नंदिनी की आवाज़ —
“वो रहा…”
अचानक—
छत से चमक।
स्नाइपर!
“नीचे!” शेखर चिल्लाया।
धाँय!!!
गोली दीवार में धँसी।
कंक्रीट टूट गया।
कबीर जमीन पर गिर पड़ा।
दिल रुक सा गया।
ये मज़ाक नहीं था।
ये सीधा कत्ल था।
शेखर ने कवर फायर किया।
“भाग अंदर!”
दोनों घर में घुसे।
दरवाजा बंद।
साँसें तेज।
“किस लेवल के लोग हैं ये…”
शेखर बुदबुदाया।
“सरकारी ट्रेनिंग लगती है।”
कबीर समझ गया —
ऊपर बहुत बड़ा हाथ है।
अंदर सब बिखरा हुआ।
ड्रॉअर खुले।
लैपटॉप गायब।
फाइलें गायब।
मतलब —
सिर्फ मारना नहीं…
डेटा चाहिए था।
सच्चाई चाहिए थी।
तभी पीछे से आवाज़।
कदमों की।
कोई घर के अंदर था।
शेखर ने इशारा किया — चुप।
दोनों धीरे-धीरे किचन की ओर बढ़े।
एक आदमी।
काला मास्क।
हाथ में चाकू।
कबीर की मेज पर रखी डायरी पलट रहा था।
वही डायरी…
नंदिनी वाली।
अगर ये ले जाते…
सबूत खत्म।
नंदिनी अचानक उसके पीछे प्रकट हुई।
उसके कान में फुसफुसाई।
आदमी कांप गया।
“क… कौन है…?”
लाइट झपकने लगी।
बर्तन गिरने लगे।
वो घबरा गया।
“भूत…!”
उसी पल—
शेखर ने उसे पकड़ लिया।
धक्का।
घूंसा।
आदमी जमीन पर।
हथकड़ी।
“बोल कौन भेजा है?”
चुप।
शेखर ने जोर से मारा।
“बोल!”
आदमी हाँफते हुए बोला —
“हम… कॉन्ट्रैक्ट पर हैं…”
“नाम नहीं जानते…”
“बस कोड नेम…”
“सर… ‘डायरेक्टर’…”
कबीर सन्न।
“डायरेक्टर?”
आदमी बोला —
“सब उसी के ऑर्डर पर…”
“पुलिस… मीडिया… सब कंट्रोल…”
“जो बोलता है… गायब…”
अचानक—
उस आदमी के मुँह से झाग निकला।
शेखर चिल्लाया — “ओए!”
पर देर हो चुकी थी।
सायनाइड कैप्सूल।
मर गया।
कबीर का खून ठंडा।
ये लोग फिल्मी विलेन नहीं।
असली नेटवर्क है।
नंदिनी धीरे से बोली —
“मैंने उसे देखा है…”
“पहले…”
“मेरी फाइल में…”
“वो ऊपर बैठा था…”
“सबको बेचता था…”
“मुझे भी…”
कबीर की मुट्ठी भींच गई।
“कौन है वो?”
उसने आँखें बंद कीं।
फिर बोली —
“मैं चेहरा याद करने की कोशिश कर रही हूँ…”
तभी—
लैपटॉप का बैकअप ड्राइव कबीर को मिला।
उसने खोला।
एक नया मेल।
अनजान आईडी।
सब्जेक्ट —
“Final Warning”
अंदर सिर्फ एक लाइन —
“अगली बार प्रेत तुम्हें नहीं बचा पाएगा।”
कबीर ने गहरी साँस ली।
अब डर खत्म।
गुस्सा बचा।
“अब मैं भागूँगा नहीं…”
“अब मैं शिकार नहीं…”
“शिकारी बनूँगा।”
नंदिनी मुस्कुराई।
“यही चाहिए था…”
अचानक—
नंदिनी की आँखें फैल गईं।
“रुको…”
“मैं देख रही हूँ…”
“कोई… बहुत पास है…”
“कोई… इंसान नहीं…”
“कुछ और…”
घर की सारी लाइटें बुझ गईं।
और दीवार पर…
खून से लिखा उभरा —
“तुमने गलत दरवाज़ा खोल दिया है…”
कबीर और शेखर जमे खड़े थे।
क्योंकि ये काम इंसान का नहीं था।
और पहली बार…
नंदिनी भी डर गई थी।
क्रमश:
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- सेक्सी प्रेत
- Chapter
- 27 of 32
- Category
- Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 632
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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