Pretika › Horror › सेक्सी प्रेत

सेक्सी प्रेत (26)

Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट

सुबह के आठ बजे।
शहर जाग चुका था।
लेकिन आज हवा अलग थी।
अख़बारों की हेडलाइन चीख रही थीं —
“हाई-प्रोफाइल सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट का खुलासा”
“वरिष्ठ अफसर गिरफ्तार”
“गुप्त वीडियो और डायरी बरामद”
टीवी चैनलों पर बहस।
सोशल मीडिया पर तूफान।
#JusticeForNandini
ट्रेंड कर रहा था।
कबीर खिड़की के पास खड़ा था।
हाथ में चाय।
लेकिन मन में शांति नहीं।
उसे सिर्फ एक बात खाए जा रही थी —
नंदिनी नहीं आई।
पूरी रात।
एक बार भी नहीं।

फोन बजा।
राघव।
“भाई… तूने कर दिया।”
“क्या?”
“तेरा आर्टिकल वायरल हो गया।”
“पूरे देश में।”
“लोग सड़कों पर उतर रहे हैं।”
कबीर ने लैपटॉप खोला।
उसकी स्टोरी —
“वे लोग जो लड़कियों को फाइल समझते थे”
नीचे लाखों व्यू।
हजारों कमेंट।
लोग गुस्से में।
सिस्टम हिल रहा था।

पर जीत का एहसास नहीं था।
बस खालीपन।
उसने धीरे से कहा —
“काश… वो देख पाती…”

उसी वक्त—
हल्की ठंडी हवा।
पर्दा हिला।
कबीर का दिल उछला।
“नंदिनी?”
सन्नाटा।
कुछ नहीं।
सिर्फ हवा।
वो और बेचैन हो गया।

थाने में अफरा-तफरी थी।
पत्रकार।
कैमरे।
राजनेता।
सब केस की जानकारी मांग रहे थे।
शेखर ने कबीर को अंदर खींचा।
“तू पागल है क्या?”
“पूरा नेटवर्क खोल दिया!”
“ऊपर से फोन आ रहे हैं!”
कबीर मुस्कुराया —
“डर लग रहा है?”
“बहुत।”
“मुझे भी।”
दोनों हँस पड़े।

राघवन और विक्रम कोर्ट ले जाए जा रहे थे।
हथकड़ी में।
भीड़ चिल्ला रही थी —
“फाँसी दो!”
“दरिंदों को सज़ा दो!”
विक्रम का चेहरा सफेद।
राघवन की अकड़ टूट चुकी थी।
अब वो सिस्टम वाला शेर नहीं…
डरा हुआ आदमी था।

कबीर ने उनकी आँखों में देखा।
सोचा —
ये वही लोग हैं…
जिन्हें देखकर लड़कियाँ काँपती थीं।
आज ये खुद काँप रहे हैं।
यही असली न्याय है।

कोर्ट में सुनवाई शुरू।
वीडियो सबूत चलाया गया।
पूरा हॉल सन्न।
नंदिनी स्क्रीन पर जिंदा थी।
डरी हुई।
मदद मांगती हुई।
कबीर की आँखें भर आईं।
“देखो…” वो मन में बोला,
“तुम्हारी आवाज़ अब सब सुन रहे हैं…”

जज ने सख्त आवाज़ में कहा —
“ये मामला फास्ट-ट्रैक कोर्ट में चलेगा।”
“सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में।”
भीड़ में तालियाँ।
इतिहास बन रहा था।

पर तभी—
कबीर को अजीब-सी सिहरन हुई।
ठंडी।
बहुत ठंडी।
जैसे कोई बहुत दूर से बुला रहा हो।
“क…बी…र…”
उसने गर्दन घुमाई।
आवाज़ बहुत हल्की थी।

वो कोर्ट से बाहर भागा।
पीछे के कॉरिडोर में।
जहाँ कोई नहीं था।
वहाँ…
दीवार के पास धुंध।
बहुत हल्की।
लगभग गायब।
नंदिनी।

लेकिन…
वो पहले जैसी नहीं थी।
सिर्फ चेहरा।
बाकी शरीर धुआँ।
जैसे बुझती लौ।
कबीर का दिल टूट गया।
“तुम… ठीक हो?”
वो मुस्कुराई।
कमजोर।
“तुमने… कर दिखाया…”
“सब… जान गए…”

“लेकिन तुम गायब हो रही हो…”
“हाँ…”
“जब सच सामने आता है… हम जैसे कारण खत्म हो जाते हैं…”
“हम बंधे होते हैं दर्द से…”
“जब दर्द हल्का होता है… हम भी हल्के हो जाते हैं…”
कबीर की आँखों से आँसू बह निकले।
“मत जाओ…”

वो पास आई।
पहली बार…
उसका हाथ कबीर के गाल को छू पाया।
ठंडा नहीं।
हल्का गर्म।
जैसे सच में इंसान हो।
“डरो मत…”
“मैं खत्म नहीं हो रही…”
“बस… मुक्त हो रही हूँ…”

“फिर मिलोगी?”
वो हँसी।
“अगर याद करोगे… तो…”

अचानक—
कॉरिडोर की लाइटें बुझीं।
और दूर से शोर आया।
शेखर भागता हुआ आया —
“कबीर!”
“क्या हुआ?”
“गवाहों में से एक मर गया!”
“सुसाइड जैसा दिख रहा है…”
कबीर सन्न।
“मतलब…?”
“नेटवर्क अभी जिंदा है।”

नंदिनी की आँखों में फिर वही चमक लौटी।
“देखा…”
“लड़ाई खत्म नहीं हुई…”
“मैं अभी नहीं जा सकती…”
उसकी आकृति थोड़ी ठोस हुई।
जैसे ऊर्जा वापस आ गई हो।

कबीर समझ गया।
जब तक अन्याय है…
वो रहेगी।
वो सिर्फ बदले की आत्मा नहीं…
न्याय की छाया है।

वो पीछे हटी।
“तैयार रहो…”
“अगला वार बड़ा होगा…”
“जो ऊपर बैठा है… वो अब सीधे हमला करेगा…”

अचानक—
कबीर के फोन पर मैसेज आया।
अनजान नंबर।
सिर्फ एक फोटो।
उसके घर की।
लाइव।
और नीचे लिखा था —
“Hero मत बनो… वरना अगली आत्मा तुम्हारी होगी।”
कबीर की रीढ़ जम गई।
ये अब निजी हो चुका था।
लड़ाई उसके घर तक आ गई थी।
और कहीं पीछे…
नंदिनी की आवाज़ गूँजी —
“अब असली युद्ध शुरू हुआ है…”

क्रमश:

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
सेक्सी प्रेत
Chapter
26 of 32
Category
Horror
Reading time
4 min
Words
677
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

← पिछला भाग  ·  अगला भाग →

सेक्सी प्रेत · सभी भाग →

और कहानियाँ · More stories