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सेक्सी प्रेत (12)

Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट

कभी-कभी
सबसे बड़ा गवाह इंसान नहीं होता।
ना आँखें।
ना यादें।
बल्कि…
कैमरा।
क्योंकि इंसान झूठ बोल सकता है।
कैमरा नहीं।
और आज रात
किसी कैमरे ने वो देखने वाला था
जिसे देखना शायद किसी को नहीं चाहिए था।

सुबह से ही शहर में अफ़वाहों का बाज़ार गर्म था।
तीन लोग अस्पताल में।
एक मौत।
एक लापता।
और पाँचों का एक कॉमन कनेक्शन।
पुराना केस।
पुरानी लड़की।
पुरानी रात।
अब लोग नाम लेने लगे थे—
“नंदिनी…”
पहली बार
वो “प्रेत” नहीं,
इंसान बन रही थी।
कबीर ने अख़बार मोड़ा।
उसके अंदर अजीब संतोष था।
नाम वापस आ रहा था।
पहचान लौट रही थी।
पर साथ ही…
खतरा भी बढ़ रहा था।

फोन बजा।
राघव।
“तुरंत थाने आओ।”
“क्या हुआ?”
“ऊपर से टीम आई है… साइबर, फॉरेंसिक… सब।”
“क्यों?”
राघव रुका।
फिर बोला—
“वो लोग साबित करना चाहते हैं
कि ये सब ‘भूत-प्रेत’ नहीं…
बल्कि तुम्हारा स्टंट है।”
कबीर हल्का मुस्कुराया।
“तो साबित करने दो।”

थाना आज अलग दिख रहा था।
नई गाड़ियाँ।
लैपटॉप।
केबल्स।
मॉनिटर।
एक टेक्निकल टीम।
डीएसपी त्रिपाठी फिर मौजूद।
आज उसके चेहरे पर डर कम…
अहंकार ज़्यादा था।
“आज फैसला हो जाएगा,”
उसने कहा।
“कैसा फैसला?”
कबीर ने पूछा।
“या तो भूत पकड़ा जाएगा…
या तुम्हारा झूठ।”

कंट्रोल रूम में
पूरा सेटअप तैयार।
थाने के हर कोने में नए कैमरे लगाए गए।
हवेली के बाहर भी।
ड्रोन तक।
त्रिपाठी बोला—
“आज अगर कुछ है…
तो कैमरे में आएगा।”
कबीर ने धीरे से कहा—
“और अगर आ गया तो?”
त्रिपाठी चुप।

शाम।
आसमान पर काले बादल।
बिजली की चमक।
अजीब-सी बेचैनी।
जैसे मौसम भी देखना चाहता हो।
कबीर हवेली लौटा।
अंदर घुसते ही वही महक।
वो जान गया।
छाया पास है।

“आज वो तुम्हें पकड़ने आए हैं,”
कबीर बोला।
छाया खिड़की के पास खड़ी थी।
चाँदनी उसके आर-पार जा रही थी।
“आत्मा को कोई पकड़ नहीं सकता,”
वो बोली।
“पर वो तुम्हें झूठ साबित करना चाहते हैं।”
वो मुस्कुराई।
“तो सच को खुद बोलने दो।”

रात 11:40
थाना।
सब स्क्रीन देख रहे थे।
लाइव फीड।
कहीं कुछ नहीं।
सिर्फ़ खाली गलियारे।
त्रिपाठी ने हँसकर कहा—
“देखा? कुछ नहीं है।”
राघव चुप।
कबीर भी।
क्योंकि…
उसे पता था।
वो आएगी।
जब चाहेगी।

11:57
अचानक—
एक कैमरा झपका।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
स्क्रीन पर हल्की स्टैटिक।
टेक्नीशियन बोला—
“सर… सिग्नल डिस्टर्ब हो रहा है…”
“चेक करो!”
और तभी—
हवेली वाला कैमरा खुद एक्टिव हुआ।
किसी ने छुआ भी नहीं था।
सबकी नज़र उसी पर टिक गई।

स्क्रीन पर—
हवेली का बरामदा।
खाली।
हवा।
परदे।
फिर…
धीरे-धीरे धुंध।
सब साँस रोके।
और धुंध के बीच—
एक आकृति।
सफ़ेद।
लंबे बाल।
धीरे-धीरे चलते हुए।
पूरी स्पष्ट।
कोई एडिट नहीं।
कोई कट नहीं।
लाइव।

कमरे में सन्नाटा।
टेक्नीशियन फुसफुसाया—
“ये… कैसे…”
त्रिपाठी की गर्दन अकड़ गई।
“ज़ूम करो!”
कैमरा खुद-ब-खुद ज़ूम होने लगा।
जैसे कोई उसे कंट्रोल कर रहा हो।
चेहरा साफ़।
आँखें सीधे लेंस में।
जैसे वो…
कैमरे को देख रही हो।

और फिर—
असंभव हुआ।
स्क्रीन पर छाया के होंठ हिले।
आवाज़ नहीं थी।
पर सबने पढ़ा—
“याद है मुझे?”
अचानक—
सिस्टम क्रैश।
सारी स्क्रीन ब्लैक।
सारे मॉनिटर बंद।
पूरे थाने की लाइट चली गई।
अँधेरा।

कुछ सेकंड बाद लाइट आई।
सब घबराए।
सिस्टम रीस्टार्ट।
फुटेज चेक।
पर…
रिकॉर्डिंग फाइल खुली।
और उसमें—
पूरी घटना सेव थी।
स्पष्ट।
HD।
कोई गड़बड़ी नहीं।
कोई ट्रिक नहीं।

त्रिपाठी की आवाज़ काँपी।
“ये… ये फेक है…”
टेक्नीशियन बोला—
“सर, इसमें एडिटिंग का एक भी फ्रेम नहीं है…”
“तो फिर ये क्या है?!”
कोई जवाब नहीं।
कानून के पास
हर सवाल का जवाब होता है।
पर आज…
पहली बार नहीं था।

उसी वक्त—
एक कॉन्स्टेबल भागता आया।
“सर! अस्पताल से कॉल—”
“क्या हुआ?”
“जो आदमी भर्ती था… सुरेश…”
“हाँ?”
“वो… मर गया।”
कमरे में सन्नाटा।
“कैसे?”
राघव बोला।
“सीसीटीवी में दिखा—
वो खुद उठकर खिड़की की ओर गया…
किसी से बात कर रहा था…”
“किससे?”
कॉन्स्टेबल फुसफुसाया—
“वहीं… सफ़ेद औरत से…”

हवेली में—
कबीर बरामदे में खड़ा था।
छाया सामने।
आज उसकी चमक अलग थी।
जैसे वो और मज़बूत हो गई हो।
“तुमने कैमरे में क्यों आने दिया खुद को?”
कबीर ने पूछा।
वो बोली—
“अब उन्हें बहाना नहीं मिलेगा।”
“अब?”
“अब सच छुप नहीं पाएगा।”
“और अगला?”
छाया ने शहर की ओर देखा।
धीरे से कहा—
“अब आखिरी गवाह…”
हवा में वही इत्र।
ठंड बढ़ी।
और कबीर समझ गया—
अभी ये खत्म नहीं हुआ।
अभी एक नाम बाकी है।
सबसे बड़ा नाम।
जिसने सब शुरू किया था।

(क्रमशः जारी…)

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
सेक्सी प्रेत
Chapter
12 of 32
Category
Horror
Reading time
4 min
Words
715
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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