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सेक्सी प्रेत (23)

Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट

“REMOTE DELETE IN PROGRESS…”
लाल अक्षर स्क्रीन पर चमक रहे थे।
10% … 18% … 27%
शेखर चीखा —
“नेट बंद करो! अभी!”
राघव ने केबल खींची।
वाइ-फाइ राउटर दीवार से तोड़ दिया।
लैपटॉप बंद।
सन्नाटा।
तीनों की साँसें तेज़।

कबीर ने काँपते हाथों से सिस्टम दोबारा चालू किया।
स्क्रीन जली।
फोल्डर खोला।
आधे वीडियो गायब।
कुछ करप्ट।
लेकिन…
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अब भी था।
राघव लगभग चिल्लाया —
“बच गया!”
शेखर ने राहत की साँस ली।
“जिसने भी डिलीट किया… उसे पूरा समय नहीं मिला।”

कबीर ने स्क्रीन पर नंदिनी का चेहरा देखा।
जिंदा।
डरी हुई।
किसी को मदद के लिए देखती हुई।
उसकी आँखें जैसे सीधे कबीर से सवाल कर रही थीं —
“अब बचाओगे?”
कबीर के भीतर आग जल उठी।
“अब ये केस कोई नहीं रोक सकता।”

तभी—
बाहर इंजन स्टार्ट होने की आवाज़।
राघव बोला —
“कोई भाग रहा है!”
तीनों बाहर दौड़े।
गेट से एक काली SUV निकल रही थी।
बिना नंबर प्लेट।
शेखर चिल्लाया —
“पकड़ो!”

बारिश फिर शुरू।
सड़क फिसलन भरी।
शेखर की जीप स्टार्ट।
कबीर और राघव पीछे बैठे।
सायरन गूँजा।
SUV तेज़।
बहुत तेज़।
जैसे पहले से प्लान किया हो।

“कौन हो सकता है?” राघव बोला।
शेखर दाँत भींचकर —
“कोई अंदर का आदमी।”
“विक्रम जेल में है…
लेकिन उसके लोग बाहर हैं।”
कबीर बोला —
“वो नेटवर्क है… अकेला शिकार नहीं करता था।”

SUV मोड़ काटकर शहर की तरफ घुसी।
रात के दो बजे।
खाली सड़कें।
सिर्फ स्ट्रीटलाइट।
पानी की चमक।
जीप और SUV के बीच मौत का खेल।

अचानक—
SUV की खिड़की से कुछ बाहर फेंका गया।
शेखर चिल्लाया —
“नीचे झुको!”
धड़ाम!
स्मोक बम।
सफेद धुआँ।
कुछ दिखाई नहीं दिया।
जीप फिसली।
टायर चीखे।
किसी तरह बची।

“ये प्रोफेशनल हैं…” शेखर बोला।
“कोई आम गुंडा नहीं।”
कबीर की रीढ़ में सिहरन दौड़ी।
ये सिर्फ अपराध नहीं था।
ये संगठित था।
सोचा-समझा।
पावरफुल।

SUV अचानक पुरानी फैक्ट्री एरिया में मुड़ गई।
खंडहर।
टूटी इमारतें।
अंधेरा।
सायरन बंद।
अब सिर्फ इंजन की आवाज़।
शेखर फुसफुसाया —
“सावधान…”

SUV रुकी।
तीन आदमी उतरे।
चेहरे ढके।
एक के हाथ में बैग।
शायद हार्डडिस्क।
सबूत।
कबीर का खून खौल गया।
“वो लेकर भाग रहे हैं!”

पीछा।
दौड़।
गीली जमीन।
फिसलन।
फैक्ट्री के अंदर घुस गए।
लोहे की चादरों की आवाज़।
जंग की गंध।
अंधेरा।

अचानक—
एक आदमी ने रॉड से वार किया।
शेखर बाल-बाल बचा।
राघव गिर पड़ा।
कबीर ने उसे उठाया।
लड़ाई शुरू।
घूँसे।
धक्के।
भागमभाग।

कबीर ने बैग पकड़ा।
एक आदमी ने उसकी गर्दन दबोची।
“दे दे!”
कबीर हाँफता रहा।
तभी—
ठंडी हवा।
अचानक तापमान गिरा।
तीनों हमलावर ठिठक गए।

दीवार पर पानी रिसा।
गीले हाथों के निशान।
धीरे-धीरे।
उनकी तरफ बढ़ते हुए।
एक आदमी काँप गया —
“भ… भूत…”

धुंध बनी।
और उसमें से…
नंदिनी।
आज अलग।
पहले से ज्यादा तीखी।
आँखों में तूफान।
उसकी साड़ी हवा में नहीं…
गुस्से में फड़फड़ा रही थी।

उसने एक आदमी की तरफ देखा।
सिर्फ देखा।
वो चीख पड़ा।
जैसे किसी ने उसका गला दबा दिया हो।
दूसरा आदमी भागा।
दरवाज़ा अपने आप बंद।
धड़ाम!

कबीर चिल्लाया —
“नंदिनी! मत मारो!”
वो रुकी।
उसकी आँखें कबीर पर टिकीं।
वही सवाल —
“फिर कैसे बचेगा सच?”
कबीर बोला —
“हमें जिंदा गवाह चाहिए!”

उसने धीरे से हाथ हटाया।
हमलावर बेहोश होकर गिर गए।
जिंदा।
शेखर हथकड़ी लगाने लगा।
“अब ये बोलेंगे…”

कबीर ने बैग खोला।
अंदर कई हार्डडिस्क।
फाइलें।
नामों की लिस्ट।
लड़कियों की तस्वीरें।
और…
एक डायरी।
जिस पर लिखा था —
“V.M. Network”
शेखर की आवाज़ भारी हो गई —
“ये सिर्फ विक्रम नहीं…”
“पूरा गिरोह है…”

तभी—
कबीर ने पीछे देखा।
नंदिनी दूर खड़ी थी।
कमजोर।
जैसे ये सब करने में उसकी ताक़त खत्म हो गई हो।
वो मुस्कुराई।
हल्की।
थकी हुई।
फिर धीरे-धीरे धुंध में घुलने लगी।
कबीर दौड़ा —
“रुको!”
उसकी आवाज़ आई —
“जल्दी करो…
मेरे पास समय कम है…”
और वो गायब।
कबीर का दिल डूब गया।
क्या वो कमजोर हो रही है?
क्या उसकी ऊर्जा खत्म हो रही है?
अगर सच देर से आया…
तो क्या वो हमेशा के लिए चली जाएगी?
क्रमश:

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
सेक्सी प्रेत
Chapter
23 of 32
Category
Horror
Reading time
4 min
Words
654
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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