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सेक्सी प्रेत (22)
Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट
सुबह हो चुकी थी।
पर रात अभी खत्म नहीं हुई थी।
कम से कम कबीर के भीतर तो नहीं।
पूरी रात की भागदौड़, चीखें, पुलिस, हथकड़ी, एम्बुलेंस की लाइटें —
सब अभी भी उसके दिमाग में घूम रही थीं।
वो थाने के बाहर खड़ा था।
आसमान धुंधला।
हल्की ठंड।
और भीतर एक अजीब खालीपन।
राघव ने कॉफी का कप पकड़ाया।
“सोया नहीं?”
कबीर हँसा।
“सोना भूल गया हूँ।”
अंदर से आवाज़ आई —
“इंस्पेक्टर बुला रहे हैं।”
दोनों अंदर गए।
शेखर टेबल पर फाइलें फैलाए बैठा था।
चेहरा गंभीर।
“विक्रम बोलने लगा है।”
कबीर की भौंह उठी।
“क्या?”
“डर गया है।”
“उसने आधा सच कबूल कर लिया।”
“आधा?”
“कहता है — उस रात लड़की गाड़ी में बैठी थी… खुद आई थी।”
राघव चिल्लाया —
“झूठ!”
शेखर बोला —
“सिस्टम में यही चलता है।
वो ‘कंसेंट’ साबित करने की कोशिश करेगा।”
कमरे में सन्नाटा।
कबीर की मुट्ठी कस गई।
“तो?”
“तो हमें सबूत चाहिए।”
“लाश पुरानी है।
फॉरेंसिक कमजोर है।
गवाह कोई नहीं।”
शेखर ने सीधा उसकी आँखों में देखा —
“तुम्हारी कहानी अदालत में नहीं चलेगी।”
कबीर बोला —
“मेरे पास सच है।”
“सच नहीं… सबूत चाहिए।”
ये शब्द हथौड़े की तरह लगे।
थाने से बाहर निकलते वक्त कबीर के मन में एक ही सवाल था —
अगर सबूत नहीं मिला…
तो?
विक्रम छूट जाएगा।
फिर हँसेगा।
फिर किसी और लड़की को…
उसने सिर झटक दिया।
नहीं।
इस बार नहीं।
घर लौटकर उसने लैपटॉप खोला।
नंदिनी की फाइल।
पुराने अख़बार।
तीन साल पहले की खबर।
“कॉलेज छात्रा लापता”
बस दो कॉलम।
छोटी सी खबर।
जैसे किसी ने जानबूझकर छोटा रखा हो।
कबीर बुदबुदाया —
“तुम्हारी कहानी दबा दी गई थी…”
“अब नहीं दबेगी।”
तभी…
कमरे में वही ठंडी हवा चली।
पर्दे हिले।
लाइट हल्की झपकी।
कबीर बिना देखे बोला —
“तुम आ गई…”
धीमी आवाज़ —
“तुम मुझे भूल नहीं सकते…”
वो मुड़ा।
नंदिनी।
आज शांत।
चेहरा फीका।
जैसे रात की लड़ाई ने उसे भी थका दिया हो।
“वो छूट जाएगा…” उसने कहा।
“नहीं।”
“सिस्टम उसे बचा लेगा।”
“नहीं।”
“तुम्हारे पास क्या है?”
कबीर चुप।
वो सच कह रही थी।
कुछ नहीं था।
अचानक —
नंदिनी ने उसका हाथ पकड़ा।
ठंडा स्पर्श।
लेकिन इस बार डर नहीं लगा।
बस गहरी उदासी।
“मेरे साथ चलो…”
कमरा घूमने लगा।
दीवारें धुंधली।
और…
कबीर ने खुद को एक दूसरी जगह पाया।
पुराना गोदाम।
टूटी कुर्सी।
फर्श पर खून।
नंदिनी काँपती हुई।
विक्रम और उसके दो आदमी।
मोबाइल से वीडियो।
हँसी।
गंदी हँसी।
कबीर चीख पड़ा —
“बस!”
“मैं ये नहीं देख सकता!”
नंदिनी बोली —
“यही सबूत है…”
“वो वीडियो बनाता था…”
“हर बार…”
कबीर की आँखें फैल गईं।
“मतलब… कहीं रिकॉर्ड होगा?”
“हाँ…”
“उसके पास… या उसके घर…”
कमरा वापस आ गया।
नंदिनी गायब।
लेकिन कबीर का दिल तेज़ धड़क रहा था।
“राघव!”
उसने फोन मिलाया।
“विक्रम का पुराना ऑफिस… स्टोररूम… सब चेक करना होगा।”
“क्यों?”
“क्योंकि दरिंदे अपनी ट्रॉफी संभाल कर रखते हैं।”
शाम।
कबीर, राघव और शेखर।
तीनों विक्रम के पुराने फार्महाउस पहुँचे।
सील टूटी।
अंदर अंधेरा।
धूल।
सन्नाटा।
जैसे समय रुक गया हो।
शेखर बोला —
“अगर कुछ मिला… केस पलट जाएगा।”
स्टोररूम का ताला तोड़ा।
अंदर बक्से।
पुराने हार्डडिस्क।
सीडी।
कैमरे।
राघव ने एक ड्राइव उठाई।
“ये क्या है?”
शेखर ने लैपटॉप लगाया।
फाइल खुली।
वीडियो।
पहला क्लिप।
दूसरा।
तीसरा।
हर क्लिप में अलग लड़की।
रोती हुई।
कबीर की साँस अटक गई।
फिर —
एक फाइल।
नाम: N_17.mp4
सब रुक गए।
क्लिक।
स्क्रीन पर नंदिनी।
जिंदा।
डरी हुई।
कबीर की आँखों में आँसू आ गए।
“मिल गया…”
शेखर फुसफुसाया —
“अब ये बचेगा नहीं…”
अचानक—
लैपटॉप ब्लैक।
सभी फाइलें गायब।
स्क्रीन पर मैसेज —
“ACCESS DENIED”
“REMOTE DELETE IN PROGRESS”
शेखर चीखा —
“किसी ने सिस्टम हैक किया है!”
बाहर से गाड़ी की आवाज़।
कोई भाग रहा था।
कबीर दौड़ा।
दरवाज़े पर ठंडी हवा का झोंका।
और…
धीरे से फुसफुसाहट —
“जल्दी करो…”
नंदिनी की आवाज़।
समय खत्म हो रहा था।
क्रमश:
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- सेक्सी प्रेत
- Chapter
- 22 of 32
- Category
- Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 634
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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