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सेक्सी प्रेत (24)

Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट

सुबह के चार बजे।
फैक्ट्री के बाहर पुलिस की गाड़ियाँ।
नीली-लाल लाइटें घूम रही थीं।
बारिश थम चुकी थी।
लेकिन हवा अब भी ठंडी थी।
अजीब ठंडी।
जैसे कोई अदृश्य मौजूदगी अब भी आसपास हो।
कबीर ने आख़िरी बार पीछे मुड़कर देखा।
उसी जगह…
जहाँ नंदिनी खड़ी थी।
अब सिर्फ खाली धुंध।
वो सच में कमजोर हो रही थी।
ये विचार उसे अंदर तक हिला गया।

थाने में टेबल पर सबूतों का ढेर लगा था।
हार्डडिस्क।
कैमरे।
डायरी।
नामों की लिस्ट।
शेखर ने डायरी खोली।
पहला पन्ना।
तारीखें।
नाम।
राशि।
राघव बोला —
“ये क्या है?”
शेखर बोला —
“रेट लिस्ट।”
कमरा सन्न।
“मतलब… लड़कियाँ खरीदी-बेची जाती थीं…”

पन्ने पलटे।
कुछ नाम लाल स्याही से घिरे थे।
VIP।
राजनीतिज्ञ।
बिल्डर।
एक टीवी चैनल मालिक।
और…
एक नाम देखकर शेखर रुक गया।
“कमिश्नर चौहान…”
कबीर चौंका —
“पुलिस कमिश्नर?!”
“हाँ।”
“मतलब…”
“मतलब… सिस्टम खुद गंदा है।”

सन्नाटा।
सिर्फ पंखे की आवाज़।
अब समझ आया —
फाइलें इतनी जल्दी कैसे डिलीट हुईं।
रेड की खबर पहले कैसे पहुँचती थी।
विक्रम हमेशा कैसे बच जाता था।
क्योंकि ऊपर से सुरक्षा मिलती थी।

कबीर कुर्सी से उठा।
“तो अब?”
शेखर बोला —
“अब ये केस मेरे हाथ से निकल जाएगा।”
“ऊपर जाएगा।”
“और शायद… दब जाएगा।”
“हम कुछ नहीं कर पाएँगे।”
कबीर की नसें तन गईं।
“नहीं।”
“इस बार नहीं।”

“तुम क्या करोगे?” राघव बोला।
कबीर की आँखों में वही पुरानी आग लौटी।
“पब्लिक।”
“जब सिस्टम सड़े… तो सच जनता तक पहुँचाओ।”
“स्टोरी लिखूँगा।”
“पूरा नेटवर्क।”
“नामों सहित।”
शेखर हँसा —
“तुम्हें मार दिया जाएगा।”
“डर अब खत्म हो चुका है।”

अचानक—
थाने की लाइट झपकी।
तापमान गिरा।
तीनों एक-दूसरे को देखने लगे।
कबीर धीरे बोला —
“वो आई है…”
धुंध।
टेबल के पास।
नंदिनी।
लेकिन आज…
पहले जैसी साफ नहीं।
आधा शरीर पारदर्शी।
जैसे धुआँ।

“तुम ठीक हो?” कबीर फुसफुसाया।
वो मुस्कुराई।
“समय… कम है…”
उसकी आवाज़ दूर से आती लग रही थी।
“हर बार जब मैं ताक़त लगाती हूँ…”
“मैं मिटती जा रही हूँ…”
कबीर का दिल बैठ गया।
“मत आओ फिर… आराम करो…”
वो हँसी।
“मृत लोग आराम नहीं करते…”

उसने डायरी की तरफ इशारा किया।
“ये सब… अकेले नहीं थे…”
“मेरी मौत वाली रात…”
“एक और आदमी था…”
“सबसे खतरनाक…”
कबीर चौंका —
“कौन?”
“जिसे सब ‘सर’ कहते थे…”

तभी—
डायरी का आख़िरी पन्ना खुद-ब-खुद पलटा।
स्याही फैल गई।
और एक नाम उभरा।
धीरे-धीरे।
जैसे किसी ने अभी लिखा हो।
‘S.R.’
शेखर बोला —
“ये तो…”
वो रुक गया।
चेहरा सफेद।
“स्पेशल ब्रांच का हेड…”

कमरे में डर फैल गया।
मतलब—
जो जाँच करता है…
वही अपराधी है।
अब समझ आया —
क्यों इतने साल कोई केस खुला नहीं।

नंदिनी की आवाज़ काँपी —
“वो मुझे देख रहा है…”
“उसे पता चल गया है…”
“वो तुम्हें नहीं छोड़ेगा…”
अचानक—
थाने के बाहर ब्रेक की आवाज़।
तीन काली गाड़ियाँ।
दरवाज़े खुले।
सूट-बूट वाले लोग।
हथियारबंद।

शेखर फुसफुसाया —
“स्पेशल टास्क फोर्स…”
“लेकिन मैंने तो नहीं बुलाया…”
दरवाज़ा खुला।
एक लंबा आदमी अंदर आया।
साफ सूट।
ठंडी आँखें।
चेहरा बिना भाव।
“केस हमें सौंप दीजिए, इंस्पेक्टर।”

“आप कौन?” शेखर बोला।
उसने कार्ड दिखाया।
“एस. राघवन।”
S.R.
कबीर का खून जम गया।
यही है।
वही।

उसने मेज पर रखी हार्डडिस्क उठाई।
“ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।”
“आप लोग अब घर जाइए।”
मतलब साफ था।
सबूत जब्त।
केस खत्म।
सच दफ़न।

कबीर चिल्लाया —
“ये सबूत कोर्ट में जाएंगे!”
राघवन मुस्कुराया।
“आप पत्रकार हैं न?”
“ज़्यादा बहादुरी सेहत के लिए ठीक नहीं।”
सीधी धमकी।

अचानक—
कमरे में ठंडी हवा चली।
फाइलें उड़ने लगीं।
लाइटें बंद।
राघवन की गर्दन के पास गीले हाथ का निशान उभरा।
वो पलटा।
पहली बार उसके चेहरे पर डर दिखा।
“ये… क्या…”

नंदिनी उसके पीछे खड़ी थी।
आँखों में आग।
कबीर समझ गया —
अगर अभी वो हमला करेगी…
तो सब खत्म।
वो चीखा —
“नंदिनी! रुको!”

वो उसकी तरफ देखी।
कमजोर।
लेकिन गुस्से से भरी।
“ये… असली राक्षस है…”
“इसे जिंदा छोड़ना… गलत होगा…”
कमरे में सन्नाटा।
कबीर के सामने फिर वही सवाल।
न्याय… या बदला?

राघवन ने बंदूक निकाल ली।
सीधा कबीर पर तान दी।
“सबूत दो… वरना अभी…”
और उसी पल—
नंदिनी ने हाथ उठाया।
बंदूक हवा में काँपने लगी।
ट्रिगर अपने आप दबने वाला था।
कमरा जमी हुई साँसों में अटका।
अगला सेकंड तय करेगा —
कौन बचेगा।
कौन मरेगा।
क्रमश:

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
सेक्सी प्रेत
Chapter
24 of 32
Category
Horror
Reading time
4 min
Words
696
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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