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सेक्सी प्रेत (19)
Yogesh Kumar Maurya · Horror · 4 मिनट
अंधेरा।
काँच टूटने की आवाज़ अभी भी कानों में गूँज रही थी।
कमरे में बारूद और धूल की गंध भर गई थी।
राघव ज़मीन पर पड़ा हाँफ रहा था।
कबीर दीवार पकड़कर खड़ा था।
और नंदिनी…
गायब।
फिर से।
पर इस बार
उसकी मौजूदगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
जैसे हवा में उसकी बेचैनी अटकी हो।
“तुमने सुना…?”
राघव की आवाज़ काँपी।
“हाँ,”
कबीर बोला।
“विक्रम…”
दोनों के बीच
ये नाम पत्थर की तरह गिरा।
भारी।
डरावना।
जिंदा।
“वो मर गया था… ऐसा सुना था,”
कबीर बोला।
राघव ने कड़वी हँसी हँसी।
“ऐसे लोग इतनी आसानी से नहीं मरते।”
“कहाँ है वो?”
“यहीं शहर में…”
“बड़ा आदमी बन गया है।”
कबीर ने देखा—
राघव की आँखों में डर से ज्यादा
घृणा थी।
खुद से।
सीढ़ियों से उतरते हुए
हवेली असामान्य रूप से शांत थी।
अब कोई फुसफुसाहट नहीं।
कोई हवा नहीं।
जैसे…
नंदिनी भी इंतज़ार कर रही हो।
किसी फैसले का।
नीचे हॉल में पहुँचकर
राघव ने जेब से पुराना फोन निकाला।
“मैंने सालों पहले उसका नाम मिटा दिया था,”
वो बोला।
“आज फिर ढूँढना पड़ेगा।”
“क्यों?”
कबीर ने पूछा।
“क्योंकि अगर वो जिंदा है…”
“तो नंदिनी की आत्मा कभी शांत नहीं होगी।”
राघव ने गहरी साँस ली।
“उस रात… हम चार थे।”
“मैं।”
“विक्रम।”
“साहिल।”
“मनीष।”
“साहिल एक्सीडेंट में मर गया।”
“मनीष विदेश भाग गया।”
“और विक्रम…”
उसने आँखें बंद कीं।
“सबसे घटिया वही था।”
“क्या किया था उसने?”
कबीर ने धीरे से पूछा।
राघव की आवाज़ फटी—
“वो खेल समझ रहा था…”
“हँस रहा था…”
“नंदिनी चीख रही थी…”
“और वो वीडियो बना रहा था…”
कबीर की मुट्ठी कस गई।
खून खौल उठा।
“वीडियो?”
उसने पूछा।
“हाँ…”
“ब्लैकमेल करने के लिए।”
“उसने कहा था —
अगर किसी ने मुँह खोला तो ये वायरल कर दूँगा।”
कमरे की हवा भारी हो गई।
“तो तुम सब डर गए…”
कबीर बोला।
“हाँ,”
राघव फुसफुसाया।
“और डर ने उसे मार दिया।”
अचानक—
कबीर का फोन वाइब्रेट हुआ।
अनजान नंबर।
दोनों ने एक-दूसरे को देखा।
कबीर ने रिसीव किया।
“हेलो?”
कुछ सेकंड चुप्पी।
फिर…
धीमी हँसी।
पुरुष की।
रेंगती हुई।
“कहानी लिख रहे हो… कबीर?”
कबीर का दिल रुक गया।
“कौन?”
“जिसकी कहानी है…”
राघव फुसफुसाया—
“स्पीकर…”
कबीर ने स्पीकर ऑन किया।
“हवेली में बहुत घूम लिए तुम दोनों…”
आवाज़ आई।
“पुरानी बातें कुरेदोगे… तो बदबू आएगी।”
“विक्रम…”
राघव दाँत भींचकर बोला।
दूसरी तरफ हँसी।
“ओहो… इंस्पेक्टर साहब भी हैं…”
“इतने साल बाद भी ज़िंदा हो?”
“तू बच नहीं पाएगा,”
राघव गरजा।
“बचना? मैं तो मज़े में हूँ।”
“बड़ा बिज़नेसमैन हूँ… समाजसेवी… अखबारों में फोटो छपती है मेरी।”
“और तुम? अभी भी उसी पुराने केस में अटके हो?”
कबीर का खून खौल गया।
“नंदिनी को याद है?”
कबीर बोला।
कुछ सेकंड चुप्पी।
फिर हल्की आवाज़—
“ओह… वो?”
“बड़ी ड्रामेबाज़ लड़की थी…”
कबीर चीख पड़ा—
“चुप!”
फोन से अचानक
हल्की फुसफुसाहट आई।
नंदिनी की।
बहुत धीमी।
“यही है…”
कबीर काँप गया।
वो लाइन में थी।
उसके साथ।
विक्रम बोला—
“देखो… पुरानी बातों में मत पड़ो।
जो हुआ… हो गया।
लड़की खुद ही कूद गई थी।”
राघव चिल्लाया—
“झूठ!”
“साबित कर दो,”
विक्रम हँसा।
“कोई सबूत है?”
दोनों चुप।
तभी…
हवेली की सारी खिड़कियाँ
एक साथ खुल गईं।
हवा का तेज़ झोंका।
फोन से चीख की आवाज़ आई।
स्त्री की।
जैसे किसी ने विक्रम के कान में चिल्लाया हो।
“आआआआह— ये क्या— कौन है—”
लाइन कट।
कमरे में सन्नाटा।
कबीर ने धीरे से कहा—
“वो उसके पास है…”
राघव ने सिर उठाया।
“नंदिनी…”
कबीर ने महसूस किया—
वो अब सिर्फ़ हवेली तक सीमित नहीं थी।
उसका दायरा बढ़ रहा था।
वो अब…
शिकार ढूँढ रही थी।
“अगर वो उसे मार देगी…”
राघव बोला।
“तो?”
कबीर ने पूछा।
“तो सच कभी सामने नहीं आएगा।”
दोनों समझ गए—
नंदिनी का गुस्सा जायज़ है।
पर न्याय के लिए
विक्रम का ज़िंदा रहना ज़रूरी है।
कम से कम… अभी।
“हमें उसे ढूँढना होगा,”
कबीर बोला।
“पहले।”
“उससे पहले कि नंदिनी पहुँचे।”
“या वो भाग जाए।”
राघव ने सिर हिलाया।
“आज रात।”
“अभी।”
दोनों हवेली से बाहर निकले।
आसमान काला।
बिजली चमकी।
दूर शहर की रोशनी।
और उसी पल—
कबीर ने पीछे मुड़कर देखा।
ऊपर वाली खिड़की में…
नंदिनी खड़ी थी।
शांत।
पर आँखों में आग।
उसने सिर्फ़ एक इशारा किया—
“जल्दी…”
और गायब।
(क्रमशः जारी…)
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- सेक्सी प्रेत
- Chapter
- 19 of 32
- Category
- Horror
- Reading time
- 4 min
- Words
- 687
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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