Pretika › Sci-Fi Horror › THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR
एपिसोड 2 “तीसरी मंजिल का कमरा”
firoj saifi · Sci-Fi Horror · 17 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR
- Chapter
- 2 of 2
- Category
- Sci-Fi Horror
- Reading time
- 17 min
- Words
- 3358
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
माया पूरी रात सो नहीं पाई।
अगर वह रात वास्तव में रात थी।
ब्लैकवेल मैनर में समय सामान्य तरीके से नहीं चल रहा था।
हॉल की घड़ियां 3:17 पर रुकी थीं।
उनकी मोबाइल घड़ियां अलग-अलग समय दिखा रही थीं।
डेनियल की घड़ी 11:42 पर थी।
माया के फोन में 2:06।
और एलियास की कलाई घड़ी में—
3:17।
“यह घर हमारे समय के साथ खेल रहा है,” एलियास ने कहा।
वे तीनों मुख्य हॉल में बैठे थे। उनके पास एक छोटी लालटेन जल रही थी, जिसकी लौ बार-बार बिना हवा के कांप रही थी।
दरवाजा अभी भी गायब था।
डेनियल ने पत्थर की दीवार को कई बार जांचा।
“कोई छिपा हुआ रास्ता जरूर होगा।”
एलियास ने कहा,
“यह सिर्फ वास्तुकला नहीं है।”
“तो?”
“यह जगह अपने अंदर की जगह बदल सकती है।”
डेनियल ने उसे घूरा।
“मुझे लगता है आप कुछ जानते हैं।”
एलियास चुप रहा।
माया ने डायरी उसके सामने रख दी।
“अब कुछ मत छिपाइए।”
एलियास ने डायरी खोली।
कुछ पन्ने पढ़ने के बाद उसने कहा,
“तुम्हारी मां ने तुम्हें यहां से दूर रखने की कोशिश की थी।”
“क्यों?”
“क्योंकि उसे पता था कि तुम यहां वापस आओगी।”
माया का चेहरा सख्त हो गया।
“वापस?”
“हां।”
“मैं पहली बार यहां आई हूं।”
एलियास ने उसकी आंखों में देखा।
“तुम्हें ऐसा लगता है।”
माया कुछ बोलती, उससे पहले ऊपर से आवाज आई।
ठक।
तीनों ने ऊपर देखा।
फिर—
ठक।
जैसे कोई ऊपर की मंजिल पर धीरे-धीरे चल रहा हो।
डेनियल ने अपनी बंदूक निकाली।
“ऊपर कौन है?”
कोई जवाब नहीं।
फिर तीसरी बार आवाज आई।
ठक... ठक... ठक...
इस बार आवाज सीढ़ियों से आ रही थी।
जैसे कोई धीरे-धीरे नीचे उतर रहा हो।
एक कदम।
फिर दूसरा।
फिर तीसरा।
लेकिन सीढ़ियों पर कोई दिखाई नहीं दे रहा था।
फिर भी लकड़ी दबने की आवाज लगातार आती रही।
माया ने फुसफुसाकर कहा,
“वह नीचे आ रही है।”
डेनियल ने पूछा,
“कौन?”
माया ने जवाब नहीं दिया।
क्योंकि उसके सपने में भी यही हुआ था।
वह लड़की सीढ़ियों से उतरती थी।
हर बार।
लेकिन उसका चेहरा कभी दिखाई नहीं देता था।
अचानक आवाज बंद हो गई।
एलियास ने कहा,
“हमें तीसरी मंजिल पर जाना होगा।”
डेनियल ने उसकी तरफ देखा।
“आप अभी क्या कह रहे थे?”
“वह हमें वहां बुला रही है।”
“और अगर यह जाल हुआ?”
एलियास ने जवाब दिया,
“तो हम पहले ही जाल में हैं।”
---
तीसरी मंजिल की सीढ़ियां धूल से ढकी थीं।
दीवारों पर परिवार के पुराने चित्र लगे थे।
माया हर चित्र को ध्यान से देखती हुई आगे बढ़ रही थी।
फिर अचानक वह रुक गई।
एक चित्र में एक परिवार खड़ा था।
पिता।
मां।
दो बेटे।
एक बेटी।
और सबसे पीछे एक महिला।
माया का चेहरा पीला पड़ गया।
“यह औरत...”
डेनियल उसके पास आया।
“क्या हुआ?”
“यह मेरी मां जैसी दिखती है।”
एलियास ने चित्र देखा।
“कौन?”
माया ने पीछे वाली महिला की तरफ इशारा किया।
एलियास चुप हो गया।
चित्र के नीचे वर्ष लिखा था—
1899।
डेनियल ने कहा,
“यह संभव नहीं है।”
माया ने चित्र को छुआ।
जैसे ही उसकी उंगली चित्र पर लगी, उसे अचानक एक तेज आवाज सुनाई दी।
एक लड़की चीख रही थी।
“दरवाजा मत खोलो!”
माया पीछे हट गई।
“तुमने भी सुना?”
डेनियल ने पूछा।
“हां।”
लेकिन एलियास कुछ नहीं बोल रहा था।
उसकी आंखें चित्र पर थीं।
“डॉक्टर?”
एलियास ने धीरे से कहा,
“यह चित्र परिवार का नहीं है।”
“तो?”
“यह चेतावनी है।”
माया ने चित्र को फिर देखा।
अब उसमें परिवार के पीछे खड़ी महिला का चेहरा बदल चुका था।
वह उसकी मां का चेहरा था।
माया ने हाथ पीछे खींच लिया।
चित्र के भीतर महिला की आंखें धीरे-धीरे घूमीं और सीधे माया पर टिक गईं।
फिर उसके होंठ हिले।
“भागो।”
माया चीख पड़ी।
चित्र दीवार से गिर गया।
डेनियल ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन चित्र का फ्रेम बर्फ जैसा ठंडा था।
उसने हाथ तुरंत पीछे खींच लिया।
एलियास ने कहा,
“अब वह तुम्हें पहचान चुकी है।”
---
तीसरी मंजिल के आखिर में एक लंबा गलियारा था।
गलियारे के अंत में सिर्फ एक दरवाजा था।
दरवाजे पर पुराने अक्षरों में लिखा था—
ई. बी.
माया ने दरवाजे की ओर कदम बढ़ाया।
एलियास ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“रुको।”
“क्यों?”
“यह एवलीन का कमरा है।”
माया ने दरवाजे को देखा।
“तो हमें यहीं आना था।”
“नहीं।”
“क्यों?”
एलियास ने कहा,
“क्योंकि 127 साल से यह कमरा बंद है।”
डेनियल ने पूछा,
“और अंदर क्या है?”
एलियास ने उत्तर दिया,
“जो कुछ भी है, वह बाहर नहीं आना चाहिए।”
उसी समय दरवाजे की दूसरी तरफ से धीमी आवाज आई।
एक बच्ची की।
“डॉक्टर वार्ड...”
एलियास पीछे हट गया।
उसकी आंखों में पहली बार असली डर दिखाई दिया।
आवाज फिर आई।
“आप वापस क्यों आए?”
डेनियल ने बंदूक उठा ली।
“आप इसे जानते हैं?”
एलियास ने सिर हिलाया।
“यह एवलीन नहीं है।”
माया ने पूछा,
“तो कौन है?”
दरवाजे के पीछे से धीमी हंसी सुनाई दी।
फिर आवाज आई—
“मुझे भूल गए?”
एलियास की आंखों में आंसू आ गए।
“नहीं...”
माया ने उसकी तरफ देखा।
“आप इसे पहले देख चुके हैं।”
एलियास ने कोई जवाब नहीं दिया।
माया ने दरवाजा खोल दिया।
---
कमरा पूरी तरह खाली था।
एक पुरानी लकड़ी की मेज।
एक टूटा हुआ आईना।
एक छोटी कुर्सी।
और कमरे के बीचोंबीच जमीन पर बना वही रहस्यमय निशान।
माया अंदर चली गई।
दीवार पर नाखूनों से कुछ लिखा हुआ था।
वह पास गई।
लिखा था—
“वह मेरा चेहरा पहनती है।”
माया पीछे हट गई।
तभी आईने में उसे अपना प्रतिबिंब दिखाई दिया।
लेकिन प्रतिबिंब उसके साथ नहीं हिला।
माया स्थिर खड़ी थी।
आईने में दिखाई देने वाली माया धीरे-धीरे मुस्कुराने लगी।
फिर उसने आईने के अंदर से अपना हाथ उठाया।
माया पीछे हट गई।
आईने में दूसरी माया ने होंठ हिलाए।
“तुम्हें अपनी मां के बारे में सच जानना है?”
माया की सांस अटक गई।
“तुम कौन हो?”
प्रतिबिंब ने कहा—
“तुम्हारी मां ने मुझे यहां बंद किया था।”
कमरे की हवा अचानक बर्फ जैसी ठंडी हो गई।
डेनियल ने माया को पीछे खींचा।
लेकिन आईने में मौजूद लड़की अब मुस्कुरा रही थी।
“वह तुमसे प्यार करती थी।”
माया चिल्लाई,
“झूठ!”
प्रतिबिंब बोला—
“उसने तुम्हें बचाने के लिए झूठ बोला।”
“मेरी मां ने तुम्हें क्यों बंद किया?”
“क्योंकि उसने समझा था कि वह मुझे रोक सकती है।”
“तुम कौन हो?”
प्रतिबिंब ने अपना चेहरा आईने के बिल्कुल पास ला दिया।
“मैं वह हूं, जो तुम्हारे जन्म से पहले तुम्हारे भीतर थी।”
माया का चेहरा सफेद पड़ गया।
“तुम झूठ बोल रही हो।”
“तुम्हारी मां ने तुम्हें कभी अपने पिता के बारे में नहीं बताया, है न?”
माया चुप हो गई।
“क्योंकि तुम्हारे पिता की मृत्यु नहीं हुई थी।”
डेनियल ने माया की तरफ देखा।
“माया, इसकी बात मत सुनो।”
प्रतिबिंब ने हंसते हुए कहा,
“तुम्हारे पिता इसी घर में हैं।”
फिर आईने की सतह पर दरार पड़ी।
चटाक।
एक दरार।
फिर दूसरी।
फिर पूरा आईना जाल की तरह टूटने लगा।
एलियास चिल्लाया—
“पीछे हटो!”
लेकिन देर हो चुकी थी।
आईने के अंदर से एक काला हाथ बाहर निकला।
उसने माया की कलाई पकड़ ली।
माया चीखी।
डेनियल ने उसका हाथ खींचा।
एलियास ने जेब से एक छोटी चांदी की वस्तु निकाली और जमीन पर बने निशान के बीच फेंक दी।
अचानक पूरा कमरा तेज रोशनी से भर गया।
काला हाथ पीछे खिंच गया।
आईना टूटकर जमीन पर गिर गया।
कमरे में सन्नाटा छा गया।
माया जमीन पर बैठी कांप रही थी।
डेनियल उसके पास था।
“तुम ठीक हो?”
माया ने धीरे से सिर हिलाया।
फिर उसने अपनी कलाई देखी।
वहां पांच उंगलियों के निशान थे।
लेकिन वे सामान्य उंगलियों के निशान नहीं थे।
वे बहुत लंबे थे।
और काले पड़ रहे थे।
माया ने अपनी कलाई रगड़ी।
“यह निशान मिट क्यों नहीं रहा?”
एलियास ने कहा,
“क्योंकि यह त्वचा पर नहीं बना।”
“तो?”
“यह तुम्हारी आत्मा पर बना है।”
---
एलियास फर्श पर बैठ गया।
उसके हाथ कांप रहे थे।
माया ने पूछा,
“आपने क्या किया?”
“उसे कुछ देर के लिए रोका है।”
“किसे?”
एलियास ने पहली बार पूरी सच्चाई बताने का फैसला किया।
“साल 2004 में मैं यहां पांच लोगों के साथ आया था।”
“तब क्या हुआ था?”
“हमने समझा था कि हवेली में एक आत्मा है।”
उसने सिर उठाया।
“लेकिन वह आत्मा नहीं थी।”
“फिर?”
“वह एक ऐसी चीज थी, जिसका कोई इंसानी नाम नहीं था।”
डेनियल ने पूछा,
“वह क्या चाहती है?”
एलियास ने माया की ओर देखा।
“एक शरीर।”
माया का चेहरा सफेद पड़ गया।
“किसका?”
एलियास ने कहा—
“तुम्हारा।”
कमरे में सन्नाटा छा गया।
माया ने धीरे से पूछा,
“आपको कैसे पता?”
एलियास ने अपनी जेब से एक पुराना कागज निकाला।
उस पर कई नाम लिखे थे।
सबसे नीचे माया का नाम था।
उसके आगे जन्मतिथि।
और उसके नीचे एक वाक्य—
“वाहक तैयार है।”
माया ने कागज छीन लिया।
“यह किसने लिखा?”
“तुम्हारी मां ने।”
“मेरी मां इस सब में शामिल थीं?”
“वह इसे रोकने की कोशिश कर रही थीं।”
“और आपने?”
एलियास ने नजरें झुका लीं।
“मैंने उन्हें असफल होते देखा।”
---
अचानक नीचे से किसी के दौड़ने की आवाज आई।
धड़-धड़-धड़-धड़।
डेनियल ने दरवाजे की तरफ देखा।
“कोई नीचे है।”
एलियास ने तुरंत कहा,
“यह संभव नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि हम तीनों के अलावा इस घर में कोई नहीं है।”
फिर नीचे से एक आवाज आई।
माया की मां की आवाज।
“माया!”
माया जम गई।
आवाज दोबारा आई।
“माया, नीचे आओ।”
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
“यह मेरी मां हैं।”
डेनियल ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“नहीं।”
“लेकिन यह उनकी आवाज है।”
“मुझे पता है।”
नीचे से फिर आवाज आई।
इस बार बिल्कुल साफ—
“माया, मुझे बचाओ।”
माया ने आंखें बंद कर लीं।
“मां...”
तभी डेनियल ने उसका कंधा पकड़ लिया।
“माया, सुनो।”
“क्या?”
“तुम्हारी मां तुम्हें कभी ‘माया’ कहकर नहीं बुलाती थीं।”
माया रुक गई।
डेनियल ने कहा,
“वह तुम्हें हमेशा ‘मायू’ कहती थीं।”
माया की आंखें फैल गईं।
नीचे से रोने की आवाज अचानक बंद हो गई।
फिर एक महिला की धीमी हंसी सुनाई दी।
“बहुत अच्छा, डेनियल।”
अंधेरे हॉल में किसी के कदमों की आवाज आई।
एक।
दो।
तीन।
फिर एक महिला धीरे-धीरे सीढ़ियों के नीचे दिखाई दी।
सफेद कपड़े।
लंबे काले बाल।
चेहरा झुका हुआ।
माया ने फुसफुसाकर कहा—
“मां...?”
महिला ने धीरे-धीरे सिर उठाया।
वह माया की मां नहीं थी।
वह वही लड़की थी, जो माया के सपनों में आती थी।
एवलीन ब्लैकवेल।
उसका चेहरा पीला था।
आंखों में आंसू थे।
और उसके गले पर गहरे काले निशान थे।
उसने माया की तरफ देखा।
“तुम आखिर आ ही गई।”
माया की आंखों से आंसू निकल आए।
“तुम कौन हो?”
एवलीन ने जवाब दिया—
“मैं वह हूं, जिसने 127 साल से उसे तुम्हारे आने से रोका है।”
माया ने पूछा,
“किसे?”
एवलीन ने धीरे से ऊपर देखा।
मकान की छत की तरफ।
फिर बोली—
“तुम्हारी मां ने उसे कैद किया था।”
एक पल की खामोशी।
फिर एवलीन की आवाज कांपने लगी।
“लेकिन अब वह आजाद हो रही है।”
माया ने पूछा,
“तुम मेरी मदद कर रही हो या मुझे यहां बुलाकर फंसा रही हो?”
एवलीन ने अपनी गर्दन पर बने निशानों को छुआ।
“अगर मैं तुम्हें फंसाना चाहती, तो तुम्हें चेतावनी नहीं देती।”
“तुम्हें मेरी मां के बारे में क्या पता है?”
“तुम्हारी मां ने मुझे मारा नहीं था। उन्होंने मुझे इस घर से बांध दिया था।”
“क्यों?”
“क्योंकि मैं अकेली थी, जो उसे पहचान सकती थी।”
“उसे?”
एवलीन ने कहा,
“वह कोई भूत नहीं है। वह एक भूख है।”
माया ने कुछ समझने की कोशिश की।
“भूख?”
“वह डर, यादों और चेहरों से जीवित रहती है। वह पहले तुम्हारी मां के पास गई। फिर उसने तुम्हारे पिता का चेहरा पहना। फिर उसने तुम्हारे सपनों में प्रवेश किया।”
माया का दिल जोर से धड़कने लगा।
“मेरे पिता जिंदा हैं?”
एवलीन ने उत्तर देने से पहले माया की आंखों में देखा।
“तुम्हारे पिता कभी इस घर से बाहर नहीं गए।”
अचानक पूरी हवेली की सारी खिड़कियां एक साथ टूट गईं।
हवा का भयानक झोंका अंदर आया।
लाइटें बुझ गईं।
अंधेरे में किसी बहुत गहरी, बहुत पुरानी आवाज ने कहा—
“माया...”
माया ने ऊपर देखा।
तीसरी मंजिल की खिड़की में एक विशाल काली परछाईं खड़ी थी।
वह धीरे-धीरे अपना चेहरा खिड़की से बाहर लाई।
और फिर—
उसने माया का चेहरा अपना लिया।
एवलीन चीखी—
“मत देखो!”
लेकिन माया देर कर चुकी थी।
काली परछाईं मुस्कुरा रही थी।
और उसके मुंह से माया की अपनी आवाज निकली—
“मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही थी।”
माया के पैरों के नीचे फर्श हिलने लगा।
दीवारों पर लगे चित्र एक-एक करके गिरने लगे।
हर चित्र में अब माया का चेहरा था।
कहीं वह बच्ची थी।
कहीं बूढ़ी।
कहीं उसकी आंखें बंद थीं।
और एक चित्र में वह अपनी मां के साथ खड़ी थी।
माया ने उस चित्र को देखा।
उसकी मां के हाथ में वही चांदी की अंगूठी थी।
लेकिन चित्र के पीछे एक तीसरा व्यक्ति भी खड़ा था।
एक आदमी।
उसका चेहरा अंधेरे में छिपा था।
माया ने टॉर्च उठाकर चित्र पर रोशनी डाली।
आदमी का चेहरा धीरे-धीरे साफ हुआ।
वह माया के पिता थे।
माया ने कांपते हुए कहा,
“पापा...”
चित्र में उसके पिता ने आंखें खोल दीं।
फिर उन्होंने होंठ हिलाए।
“मुझे बाहर निकालो।”
डेनियल ने माया को पीछे खींचा।
“उस चित्र को मत छूना।”
लेकिन माया ने उसकी बात नहीं मानी।
उसने चित्र को दीवार से उतार लिया।
जैसे ही उसने फ्रेम पकड़ा, उसके कानों में हजारों आवाजें गूंजने लगीं।
उसकी मां की आवाज।
उसके पिता की आवाज।
एवलीन की आवाज।
और सबसे नीचे एक ऐसी आवाज, जो किसी इंसान की नहीं थी।
“तुम्हें चुनना होगा।”
माया ने आंखें बंद कर लीं।
“क्या चुनना होगा?”
“अपनी मां को बचाना या अपने पिता को।”
माया ने चीखकर कहा,
“मेरी मां मर चुकी हैं!”
आवाज हंसी।
“मृत्यु और कैद में फर्क होता है।”
अचानक चित्र के भीतर माया की मां दिखाई दीं।
वह किसी अंधेरे कमरे में बंद थीं।
उनके हाथ दीवार से बंधे थे।
उनके पीछे काली परछाईं खड़ी थी।
माया की मां ने सीधे उसकी तरफ देखा।
“मायू, मेरी बात सुनो। किसी पर भरोसा मत करना।”
माया रो पड़ी।
“मां!”
चित्र के भीतर उसकी मां ने सिर हिलाया।
“यहां तक कि मुझ पर भी नहीं।”
फिर चित्र में काली परछाईं ने उनकी गर्दन पकड़ ली।
माया ने चित्र जमीन पर पटक दिया।
फ्रेम टूट गया।
उसी क्षण हवेली का मुख्य दरवाजा अपने आप खुल गया।
बाहर सुबह हो चुकी थी।
लेकिन जब माया ने बाहर देखा—
वहां गांव नहीं था।
सिर्फ एक विशाल काला जंगल था।
पेड़ इतने ऊंचे थे कि उनकी शाखाएं आकाश को ढक रही थीं। जमीन पर धुंध फैली थी और दूर कहीं घंटी बज रही थी।
डेनियल ने घड़ी देखी।
उसकी घड़ी अब भी 3:17 पर थी।
एलियास ने कांपती आवाज में कहा,
“हम यहां सिर्फ एक रात नहीं रहे।”
माया ने उसकी तरफ देखा।
“तो?”
एलियास ने कहा—
“हम यहां सात दिन से हैं।”
माया ने अपना फोन निकाला।
स्क्रीन पर तारीख देखकर उसके हाथ कांपने लगे।
वह तारीख थी—
24 अक्टूबर।
और उसी क्षण उसके फोन पर एक नया संदेश आया।
भेजने वाला—
मां।
संदेश में सिर्फ चार शब्द थे—
“माया, घर से निकल जाओ।”
फिर दूसरा संदेश आया।
“वह तुम्हारे पीछे है।”
और तीसरा—
“मुझ पर भरोसा मत करना।”
माया ने धीरे-धीरे स्क्रीन से नजर उठाई।
उसके सामने एवलीन खड़ी थी।
एवलीन मुस्कुरा रही थी।
लेकिन इस बार—
उसकी आंखें माया की मां जैसी थीं।
माया ने पीछे हटते हुए पूछा,
“तुम कौन हो?”
एवलीन ने सिर झुकाया।
उसकी आवाज बदल गई।
अब वह उसकी मां की आवाज थी।
“मायू, तुमने मुझे बहुत देर तक इंतज़ार कराया।”
डेनियल ने बंदूक उठाई।
“माया, पीछे हटो।”
एवलीन ने उसकी तरफ देखा।
“डेनियल, तुम अब भी सोचते हो कि हर डर के पीछे इंसानी कारण होता है?”
डेनियल का चेहरा कठोर हो गया।
“तुम्हें मेरा नाम कैसे पता?”
एवलीन मुस्कुराई।
“क्योंकि मैं तुम्हारे भीतर भी रह चुकी हूं।”
डेनियल की उंगलियां बंदूक पर कस गईं।
एलियास अचानक घुटनों के बल गिर पड़ा।
उसकी नाक से खून बहने लगा।
माया उसके पास दौड़ी।
“डॉक्टर!”
एलियास ने कांपते हुए कहा,
“भागो... अभी...”
“लेकिन बाहर जंगल है।”
“जंगल से डरना मत।”
“तो किससे डरूं?”
एलियास ने ऊपर देखा।
तीसरी मंजिल की खिड़की में अब काली परछाईं नहीं थी।
वह उनके पीछे खड़ी थी।
माया ने धीरे-धीरे मुड़ना शुरू किया।
डेनियल चिल्लाया,
“मत मुड़ना!”
लेकिन माया ने उसकी बात नहीं सुनी।
उसने पीछे देखा।
वहां कोई नहीं था।
सिर्फ दीवार पर एक नया निशान बना था।
खून से लिखा हुआ—
“पहला चेहरा मिल गया।”
माया ने अपनी कलाई देखी।
काले उंगलियों के निशान अब उसकी बांह तक फैल चुके थे।
उसकी त्वचा के नीचे कुछ हिल रहा था।
जैसे कोई भीतर से बाहर आने की कोशिश कर रहा हो।
अचानक हवेली के भीतर से बच्चे के रोने की आवाज आई।
फिर एक पुरुष की आवाज।
“माया, मैं तुम्हारा पिता हूं।”
फिर उसकी मां की आवाज।
“मायू, मैं तुम्हारी मां हूं।”
फिर डेनियल की आवाज।
“माया, मेरी तरफ देखो।”
माया ने आंखें बंद कर लीं।
तीनों आवाजें एक साथ बोल रही थीं।
और उनके पीछे वह गहरी, पुरानी आवाज फुसफुसा रही थी—
“तुम्हें सिर्फ एक चेहरा चुनना है।”
एवलीन ने माया का हाथ पकड़ लिया।
उसका हाथ बर्फ जैसा ठंडा था।
“अगर तुमने गलत चेहरा चुना, तो वह तुम्हारे शरीर में प्रवेश कर जाएगी।”
माया ने पूछा,
“सही चेहरा कौन सा है?”
एवलीन ने उसकी आंखों में देखा।
“जिसे तुम सबसे ज्यादा प्यार करती हो।”
माया ने सामने खड़े डेनियल को देखा।
फिर एलियास को।
फिर हवेली की अंधेरी खिड़की को।
उसके भीतर अचानक एक पुरानी याद जागी।
बचपन में उसकी मां ने उसे एक बार आईने के सामने खड़ा किया था।
उसने माया के माथे पर चांदी की अंगूठी से एक निशान बनाया था।
फिर कहा था—
“अगर कभी तुम्हें लगे कि मैं तुम्हारी मां नहीं हूं, तो मेरी आंखों में मत देखना।”
माया ने एवलीन की आंखों में देखा।
वे आंखें उसकी मां जैसी थीं।
लेकिन उनमें मां का प्यार नहीं था।
उनमें भूख थी।
माया ने झटके से अपना हाथ छुड़ा लिया।
“तुम वह नहीं हो।”
एवलीन का चेहरा अचानक विकृत हो गया।
उसकी त्वचा पर दरारें पड़ने लगीं।
उसके बाल हवा में उठ गए।
और उसके मुंह से एक साथ कई आवाजें निकलीं—
“तुमने मुझे पहचान लिया।”
एलियास ने जमीन पर चांदी का चिह्न बनाया।
डेनियल ने माया को खींचकर पीछे किया।
हवेली की दीवारें कांपने लगीं।
ऊपर की खिड़कियों से काला धुआं बाहर निकलने लगा।
जंगल के भीतर से सैकड़ों कदमों की आवाज आने लगी।
कोई उनकी ओर बढ़ रहा था।
या शायद बहुत सारे लोग।
माया ने देखा कि पेड़ों के बीच सफेद कपड़ों में कई आकृतियां खड़ी थीं।
उनमें से हर एक का चेहरा अलग था।
लेकिन सभी की आंखें एक जैसी थीं।
काली।
खाली।
और माया पर टिकी हुई।
एलियास ने चिल्लाकर कहा,
“हमें जंगल के पुराने चर्च तक पहुंचना होगा!”
डेनियल ने पूछा,
“वहां क्या है?”
“ब्लैकवेल परिवार का पहला मुहर-कक्ष।”
“और अगर हम वहां नहीं पहुंचे?”
एलियास ने माया की कलाई की तरफ देखा।
“तो अगली बार जब घड़ी 3:17 पर रुकेगी, वह तुम्हारे भीतर होगी।”
माया ने पीछे हवेली की ओर देखा।
तीसरी मंजिल की खिड़की में अब उसकी मां खड़ी थीं।
वह रो रही थीं।
उनके होंठ हिल रहे थे।
माया ने दूर से पढ़ने की कोशिश की।
वह कह रही थीं—
“मायू, भागो।”
लेकिन उसी क्षण उनकी आंखें काली हो गईं।
और उनके पीछे खड़ी परछाईं ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया।
माया ने डेनियल का हाथ पकड़ लिया।
तीनों जंगल की ओर दौड़ पड़े।
पीछे हवेली का दरवाजा धीरे-धीरे बंद हो रहा था।
दरवाजा बंद होने से पहले भीतर से आखिरी आवाज आई—
“माया... अगली बार तुम अकेली लौटोगी।”
दरवाजा बंद हो गया।
जंगल में धुंध और घनी हो गई।
दूर चर्च की घंटी बजी।
एक बार।
दो बार।
तीन बार।
फिर हर घड़ी की तरह वह भी 3:17 पर रुक गई।
माया ने अपनी कलाई पर फैलते काले निशानों को देखा।
उन निशानों के बीच अब एक नया शब्द उभर रहा था—
“वाहक।”
और उसी क्षण उसके फोन पर चौथा संदेश आया।
भेजने वाला—
माया स्वयं।
संदेश में लिखा था—
“मैं हवेली से बाहर नहीं आई।”
माया ने फोन गिरा दिया।
डेनियल ने पूछा,
“क्या हुआ?”
माया ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में डर था।
“हम तीन लोग जंगल में भाग रहे हैं।”
“हां।”
“तो फिर मेरा संदेश किसने भेजा?”
पीछे से किसी ने धीरे से उत्तर दिया—
“मैंने।”
माया, डेनियल और एलियास एक साथ मुड़े।
पेड़ों के बीच माया खड़ी थी।
वही चेहरा।
वही कपड़े।
वही चांदी की अंगूठी।
लेकिन उसकी आंखें पूरी तरह काली थीं।
उसने मुस्कुराकर कहा—
“तुम लोग बहुत धीरे भागते हो।”
एपिसोड 2 समाप्त.
THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR · सभी भाग →
और कहानियाँ · More stories
- Horror, mystery · firoj saifi
- “अंधेरे में कोई है” · firoj saifi
- जिस रात मौत जागी · firoj saifi