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एपिसोड 3 “मां का आखिरी संदेश”

firoj saifi · Sci-Fi Horror · 17 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR
Chapter
3 of 4
Category
Sci-Fi Horror
Reading time
17 min
Words
3236
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

रात नहीं थी।

सुबह थी।

कम से कम घड़ी यही कह रही थी।

लेकिन ब्लैकवेल मैनर के अंदर सुबह जैसा कुछ भी नहीं था।

तीसरी मंजिल की टूटी हुई खिड़कियों से धुंध अंदर आ रही थी। हवेली के लंबे गलियारों में हवा ऐसे घूम रही थी जैसे कोई अदृश्य चीज लगातार उनके आसपास चक्कर लगा रही हो।

माया अपने हाथ में फोन पकड़े खड़ी थी।

स्क्रीन पर अभी भी वही संदेश खुला था।

**मां:**
**“माया, घर से निकल जाओ।”**

उसके नीचे दूसरा संदेश—

**“वह तुम्हारे पीछे है।”**

और फिर तीसरा—

**“मुझ पर भरोसा मत करना।”**

माया ने स्क्रीन को घूरते हुए धीरे से कहा,

“मां मर चुकी हैं।”

डेनियल उसके पास खड़ा था।

उसने कोई जवाब नहीं दिया।

एलियास कुछ दूर खड़ा था और एवलीन को देख रहा था।

एवलीन बिल्कुल शांत थी।

उसका चेहरा वही था जो माया ने अपने सपनों में देखा था।

लेकिन अब उसकी आंखों में कुछ बदल गया था।

वह माया की तरफ नहीं देख रही थी।

वह फोन की तरफ देख रही थी।

माया ने पूछा,

“तुम्हें पता है ये संदेश किसने भेजे हैं?”

एवलीन ने धीरे से सिर उठाया।

“हां।”

“कौन?”

“जिसे तुम्हारी मां ने मरने से पहले भी रोकने की कोशिश की।”

माया का दिल जोर से धड़का।

“मेरी मां ने तुम्हें देखा था?”

एवलीन ने कहा,

“नहीं।”

एक पल रुककर उसने जोड़ा—

“तुम्हारी मां ने मुझे बनाया था।”

माया का चेहरा सफेद पड़ गया।

“क्या मतलब?”

एवलीन ने कोई जवाब नहीं दिया।

अचानक हवेली की सबसे ऊपरी मंजिल से एक जोरदार आवाज आई।

**धड़ाम!**

सबने ऊपर देखा।

फिर दूसरी आवाज।

**धड़ाम!**

जैसे कोई भारी चीज फर्श पर घसीट रहा हो।

डेनियल ने तुरंत अपनी बंदूक निकाल ली।

“हमें यहां से निकलना होगा।”

एलियास ने सिर हिलाया।

“हां।”

“मुख्य दरवाजा खुला है।”

“वह दरवाजा असली नहीं है।”

डेनियल उसकी तरफ मुड़ा।

“क्या?”

एलियास ने कहा,

“अगर तुम उस दरवाजे से बाहर गए तो तुम वापस उसी जगह आ जाओगे।”

“तुम्हें कैसे पता?”

एलियास ने कुछ सेकंड उसकी आंखों में देखा।

फिर बोला,

“क्योंकि मैं ऐसा कर चुका हूं।”

---

## 1. वह रास्ता जो वापस वहीं ले आता था

तीनों मुख्य हॉल की ओर बढ़े।

माया सबसे आगे थी।

उसके पीछे डेनियल और एलियास।

एवलीन कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।

माया ने पीछे मुड़कर देखा।

“एवलीन?”

कोई जवाब नहीं।

“वह कहां गई?”

एलियास ने कहा,

“उसे ढूंढने की कोशिश मत करो।”

“क्यों?”

“क्योंकि कभी-कभी वह जो दिखती है, वह होती नहीं।”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“और कभी-कभी?”

एलियास ने कहा,

“कभी-कभी वह खुद भी नहीं जानती कि वह कौन है।”

वे हॉल में पहुंचे।

मुख्य दरवाजा सामने था।

इस बार वह खुला हुआ था।

बाहर हल्की धूप दिखाई दे रही थी।

पक्षियों की आवाजें भी आ रही थीं।

डेनियल ने कहा,

“देखा? बाहर रास्ता है।”

वह दरवाजे की तरफ बढ़ा।

एलियास ने उसे रोकने की कोशिश की।

“रुको।”

लेकिन डेनियल ने उसकी बात नहीं मानी।

उसने दरवाजे की चौखट पार की।

एक सेकंड।

दो सेकंड।

तीन सेकंड।

कुछ नहीं हुआ।

डेनियल ने पीछे मुड़कर देखा।

“आओ।”

माया आगे बढ़ी।

उसने दरवाजा पार किया।

और—

अगले ही पल वह फिर उसी हॉल में खड़ी थी।

उसके सामने वही सीढ़ियां।

वही टूटा हुआ झूमर।

वही दीवार।

और सामने—

वही दरवाजा।

माया पीछे मुड़ी।

डेनियल उसके पीछे खड़ा था।

उसका चेहरा पीला पड़ चुका था।

“हम बाहर नहीं गए।”

माया ने कहा,

“हम गए थे।”

“नहीं।”

डेनियल ने अपनी जेब से एक पत्थर निकाला।

“मैंने बाहर जाते समय यह पत्थर जमीन पर रखा था।”

उसने पत्थर फर्श पर रखा।

“अब देखो।”

माया ने नीचे देखा।

फर्श पर पहले से ही वैसा ही पत्थर पड़ा था।

दोनों पत्थर बिल्कुल एक जैसे।

माया की सांस अटक गई।

“यह कैसे...?”

एलियास ने कहा,

“हवेली तुम्हें वहीं लौटा देती है जहां से तुम निकले थे।”

माया ने पूछा,

“तो बाहर कैसे निकलेंगे?”

एलियास ने उत्तर दिया,

“जिस रास्ते से आए थे, उसी रास्ते से।”

डेनियल ने कहा,

“लेकिन रास्ता गायब हो चुका है।”

एलियास ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“तो?”

“रास्ता अभी भी है।”

उसने दीवार की तरफ इशारा किया।

“बस अब वह दीवार के पीछे है।”

---

## 2. मां की आवाज

माया ने अपना फोन फिर देखा।

मां के संदेश अभी भी स्क्रीन पर थे।

उसने जवाब टाइप किया।

**“मां, आप कौन हैं?”**

कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ।

फिर स्क्रीन पर तीन बिंदु दिखाई दिए।

कोई जवाब टाइप कर रहा था।

माया की उंगलियां कांपने लगीं।

फिर संदेश आया—

**“मैं वही हूं जिसने तुम्हें बचाने के लिए तुम्हें झूठ बताया।”**

माया की आंखों में आंसू आ गए।

उसने लिखा—

**“क्या आप सच में मां हैं?”**

इस बार जवाब तुरंत आया।

**“अगर मैं तुम्हारी मां नहीं हूं तो यह सवाल पूछने की जरूरत नहीं पड़ती।”**

माया ने फोन नीचे कर लिया।

डेनियल ने पूछा,

“क्या लिखा है?”

“वह कह रही हैं कि उन्होंने मुझसे झूठ बोला।”

एलियास अचानक पास आया।

“मुझे फोन दो।”

माया ने फोन उसे दे दिया।

एलियास ने संदेश पढ़े।

फिर उसने पूछा,

“यह नंबर किसका है?”

माया ने स्क्रीन देखी।

“मेरी मां का।”

एलियास ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“क्या मतलब?”

“यह नंबर तुम्हारी मां के नाम पर था। लेकिन नंबर किसी और के पास है।”

“किसके?”

एलियास ने जवाब देने से पहले फोन की स्क्रीन पर एक और संदेश देखा।

इस बार संदेश छोटा था।

**“कमरा 17।”**

फिर फोन बंद हो गया।

माया ने पावर बटन दबाया।

कुछ नहीं हुआ।

डेनियल ने पूछा,

“कमरा 17 क्या है?”

एलियास ने धीरे से कहा,

“मुझे नहीं पता।”

माया ने उसे घूरा।

“आप झूठ बोल रहे हैं।”

एलियास चुप रहा।

माया ने उसकी कॉलर पकड़ ली।

“आप यहां पहले आ चुके हैं। आपको इस घर के बारे में सब पता है। अब सच बताइए।”

एलियास ने उसकी पकड़ से खुद को छुड़ाया।

“कमरा 17 नाम का कोई कमरा नहीं है।”

“तो संदेश में क्यों लिखा है?”

“क्योंकि हवेली में ऐसे कमरे हैं जो दिखाई नहीं देते।”

डेनियल ने पूछा,

“कितने?”

एलियास ने कहा,

“मुझे नहीं पता।”

“आपने कहा था कि आप पहले यहां आ चुके हैं।”

“हां।”

“तो?”

एलियास ने धीरे से कहा—

“उस समय कमरा 17 था।”

माया ने पूछा,

“अब नहीं है?”

“अब शायद वह किसी और चीज में बदल चुका है।”

---

## 3. पुराना तहखाना

एलियास ने उन्हें हॉल के पीछे बने एक छोटे कमरे में ले गया।

वहां एक लकड़ी की अलमारी थी।

उसने अलमारी हटाई।

पीछे पत्थर की दीवार थी।

लेकिन दीवार के बीच एक छोटा सा लोहे का हैंडल था।

डेनियल ने उसे खींचा।

पत्थर का एक हिस्सा पीछे हट गया।

नीचे जाती हुई सीढ़ियां दिखाई दीं।

अंधेरा।

बहुत गहरा अंधेरा।

माया ने टॉर्च जलाई।

सीढ़ियां नीचे जाती थीं।

बहुत नीचे।

“यह रास्ता कहां जाता है?” उसने पूछा।

एलियास ने कहा,

“पुराने तहखाने में।”

“और वहां?”

“कमरा 17।”

डेनियल ने कहा,

“तो फिर चलते हैं।”

माया ने नीचे कदम रखा।

हर सीढ़ी के साथ हवा ठंडी होती गई।

कुछ दूर नीचे जाने के बाद माया को एक अजीब आवाज सुनाई दी।

जैसे कोई बहुत दूर बैठकर गाना गा रहा हो।

बहुत धीमी आवाज।

एक बच्ची की लोरी।

माया रुक गई।

“आप लोगों को सुनाई दे रहा है?”

डेनियल ने सिर हिलाया।

“हां।”

एलियास ने कहा,

“मत सुनो।”

“क्यों?”

“क्योंकि यह लोरी नहीं है।”

माया ने ध्यान से सुना।

अब शब्द साफ होने लगे।

**“सो जा... सो जा...”**

फिर अचानक आवाज बदल गई।

**“माया आ गई...”**

माया की रीढ़ में ठंड दौड़ गई।

डेनियल ने टॉर्च चारों तरफ घुमाई।

“कौन है?”

आवाज बंद हो गई।

फिर अंधेरे से किसी ने कहा—

**“डेनियल...”**

डेनियल जम गया।

माया ने उसकी तरफ देखा।

“क्या हुआ?”

उसका चेहरा बदल चुका था।

“यह मेरी बहन की आवाज है।”

माया ने पूछा,

“तुम्हारी बहन?”

डेनियल ने सिर झुका लिया।

“उसकी मौत तब हुई थी जब मैं सत्रह साल का था।”

अंधेरे से फिर आवाज आई।

**“भैया...”**

डेनियल एक कदम आगे बढ़ा।

माया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“मत जाओ।”

“वह है।”

“नहीं।”

“मैं उसकी आवाज पहचानता हूं।”

एलियास ने कठोर आवाज में कहा,

“डेनियल, अगर तुम आगे बढ़े तो वह तुम्हें वापस नहीं आने देगी।”

डेनियल रुक गया।

कुछ सेकंड तक अंधेरा शांत रहा।

फिर आवाज आई—

**“तुमने मुझे बचाया क्यों नहीं?”**

डेनियल की आंखों में आंसू आ गए।

माया ने उसे देखा।

उसने पहली बार महसूस किया कि डेनियल भी अपने अंदर एक पुराना डर लेकर चल रहा था।

लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कहती—

अंधेरे से किसी के दौड़ने की आवाज आई।

**धड़-धड़-धड़-धड़!**

वे तीनों पीछे हटे।

कुछ काला सीढ़ियों के नीचे से तेजी से ऊपर आया।

डेनियल ने गोली चला दी।

**धांय!**

आवाज पूरी सुरंग में गूंज गई।

कुछ गिरने की आवाज आई।

फिर सन्नाटा।

डेनियल ने टॉर्च नीचे की।

वहां कोई नहीं था।

सिर्फ एक पुरानी लाल रिबन पड़ी थी।

माया ने उसे उठाया।

उसकी उंगलियां ठंडी हो गईं।

उसने रिबन को पहचान लिया।

“यह मेरी है।”

डेनियल ने पूछा,

“क्या?”

माया ने कहा,

“यह रिबन मुझे बचपन में मां ने दी थी।”

---

## 4. कमरा 17

तहखाने के आखिर में लोहे का एक दरवाजा था।

उस पर जंग लगी हुई थी।

ऊपर लिखा था—

**17**

माया ने दरवाजा छुआ।

दरवाजा अपने आप खुल गया।

अंदर कोई सामान नहीं था।

सिर्फ चार दीवारें।

एक मेज।

एक कुर्सी।

और सामने एक पुराना टेप रिकॉर्डर।

माया ने रिकॉर्डर को देखा।

“यह यहां कैसे आया?”

एलियास ने कहा,

“इसे मत चलाना।”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“क्यों?”

“क्योंकि यह रिकॉर्डिंग मैंने 2004 में बनाई थी।”

माया कुछ सेकंड चुप रही।

“आपकी?”

एलियास ने सिर हिलाया।

“हां।”

डेनियल ने पूछा,

“इसमें क्या है?”

एलियास ने जवाब नहीं दिया।

माया ने रिकॉर्डर उठा लिया।

उसने प्ले बटन दबा दिया।

पहले सिर्फ शोर सुनाई दिया।

फिर एक पुरुष की आवाज।

एलियास की।

**“17 अक्टूबर 2004। समय—रात 3:17। हम ब्लैकवेल मैनर के कमरे 17 में हैं।”**

माया ने एलियास की तरफ देखा।

रिकॉर्डिंग में आवाज जारी थी।

**“हमने पाया है कि यहां किसी व्यक्ति की आत्मा नहीं है। यहां कुछ और है।”**

फिर पीछे से किसी महिला की चीख सुनाई दी।

रिकॉर्डिंग में एलियास चिल्लाया—

**“दरवाजा बंद करो!”**

कुछ गिरने की आवाज।

फिर किसी बच्चे के रोने की आवाज।

और फिर—

एक महिला की आवाज।

बहुत धीमी।

**“उसे मत आने देना।”**

माया ने रिकॉर्डर रोक दिया।

“यह किसकी आवाज थी?”

एलियास ने कहा,

“तुम्हारी मां की।”

माया ने रिकॉर्डर उसके हाथ से छीन लिया।

“मेरी मां 2004 में यहां थीं?”

एलियास चुप रहा।

माया ने चीखकर पूछा,

“मेरी मां यहां थीं?”

“हां।”

“और आपने मुझे कभी नहीं बताया?”

“तुम्हारी मां ने मना किया था।”

“क्यों?”

एलियास ने कहा,

“क्योंकि वह जानती थीं कि अगर तुम्हें सच पता चल गया, तो तुम यहां जरूर आओगी।”

माया की आंखों में आंसू थे।

“मेरी मां इस घर में क्या कर रही थीं?”

एलियास ने कहा,

“तुम्हें बचाने।”

“मुझसे तो तब तक वह मिली भी नहीं थीं।”

एलियास ने धीरे से उसकी तरफ देखा।

“माया... तुम पैदा होने से पहले ही इस घर से जुड़ चुकी थीं।”

कमरे में सन्नाटा छा गया।

---

## 5. तस्वीर

माया ने मेज पर पड़ी एक तस्वीर उठाई।

उसमें पांच लोग थे।

एलियास।

एक महिला।

दो पुरुष।

और एक छोटी बच्ची।

माया की सांस रुक गई।

“यह बच्ची कौन है?”

एलियास ने तस्वीर देखी।

उसका चेहरा बदल गया।

“इसे यहां नहीं होना चाहिए।”

माया ने तस्वीर पलटी।

पीछे लिखा था—

**“माया — उम्र 6 वर्ष।”**

डेनियल ने कहा,

“लेकिन यह तस्वीर तो 2004 की है।”

माया ने एलियास की तरफ देखा।

“मैं 2004 में छह साल की थी।”

“हां।”

“तो मैं यहां थी?”

एलियास ने सिर झुका लिया।

“हां।”

माया पीछे हट गई।

“मुझे कुछ याद क्यों नहीं?”

“तुम्हारी मां ने तुम्हारी यादें मिटवा दी थीं।”

माया ने जैसे शब्दों का अर्थ ही नहीं समझा।

“क्या?”

“तुम्हारी कुछ यादें बहुत खतरनाक थीं।”

“किसने मिटाईं?”

एलियास ने कहा,

“तुम्हारी मां ने।”

माया ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

उसने आंखें बंद कर लीं।

और तभी—

एक दृश्य उसकी आंखों के सामने चमका।

वह छह साल की थी।

उसी हवेली में।

तीसरी मंजिल पर।

उसकी मां उसके सामने घुटनों के बल बैठी थी।

मां रो रही थी।

उसने माया के चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ रखा था।

और कह रही थी—

**“जो कुछ आज रात देखोगी, उसे कभी याद मत करना।”**

छोटी माया रो रही थी।

“मां, मुझे डर लग रहा है।”

मां ने उसे गले लगाया।

“डरो मत।”

पीछे कोई दरवाजा खुला।

मां ने पलटकर देखा।

उसके चेहरे पर डर था।

फिर उसने माया को एक चांदी की अंगूठी पहनाई।

“इसे कभी मत उतारना।”

दृश्य टूट गया।

माया वर्तमान में लौट आई।

वह फर्श पर गिर गई।

डेनियल ने उसे संभाला।

“क्या हुआ?”

माया ने अपनी उंगली देखी।

उसकी चांदी की अंगूठी वहीं थी।

वही अंगूठी जो संदूक में मिली थी।

वह धीरे से बोली—

“मैं यहां पहले आ चुकी हूं।”

---

## 6. मां का आखिरी सच

अचानक कमरे में रखी पुरानी टेलीफोन मशीन बजने लगी।

**ट्र्र्र्र्र्रिंग...**

सब चौंक गए।

फोन पुराना था।

उसमें कोई तार नहीं था।

फिर भी वह बज रहा था।

माया ने फोन उठाया।

“हैलो?”

दूसरी तरफ उसकी मां की आवाज थी।

इस बार आवाज साफ थी।

“माया।”

माया की आंखों से आंसू बहने लगे।

“मां?”

“मेरे पास ज्यादा समय नहीं है।”

“आप जिंदा हैं?”

दूसरी तरफ कुछ सेकंड की खामोशी।

फिर जवाब आया—

“मैं नहीं जानती।”

माया ने सांस रोक ली।

“आपने मुझसे झूठ क्यों बोला?”

“क्योंकि सच तुम्हें मार सकता था।”

“मुझे यहां क्यों लाया गया?”

“मैंने तुम्हें यहां नहीं लाया।”

“फिर कौन?”

फोन के दूसरी तरफ से मां की आवाज कांपी।

“वह।”

माया ने पूछा,

“वह कौन है?”

कुछ सेकंड तक सिर्फ सांसों की आवाज आई।

फिर मां ने कहा—

**“जिसे तुम एवलीन समझ रही हो।”**

माया जम गई।

उसने फोन धीरे-धीरे नीचे किया।

डेनियल ने पूछा,

“क्या कहा?”

माया ने जवाब नहीं दिया।

फोन से मां की आवाज फिर आई—

“माया, ध्यान से सुनो। एवलीन पर भरोसा मत करना।”

माया ने फोन कान से लगाया।

“लेकिन वह मुझे बचा रही है।”

मां ने कहा—

“नहीं।”

फिर अचानक आवाज बदल गई।

जैसे फोन के दूसरी तरफ कोई और आ गया हो।

एक भारी, धीमी आवाज—

**“बहुत देर हो चुकी है।”**

माया ने फोन गिरा दिया।

फोन फर्श पर गिरते ही बंद हो गया।

एलियास ने कहा,

“हमें तुरंत यहां से निकलना होगा।”

लेकिन दरवाजा बंद हो चुका था।

डेनियल ने उसे खोलने की कोशिश की।

नहीं खुला।

माया ने पीछे देखा।

कमरे की दीवार पर एक नई लिखावट दिखाई दे रही थी।

किसी ने ताजा खून से लिखा था—

**“मां झूठ बोल रही है।”**

माया पीछे हट गई।

फिर उसके पीछे किसी ने धीरे से कहा—

“हां।”

वह पलटी।

एवलीन वहां खड़ी थी।

लेकिन अब उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था।

माया ने पूछा,

“तुम कौन हो?”

एवलीन ने कहा,

“मैंने तुम्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचाया।”

“मेरी मां ने कहा कि तुम पर भरोसा मत करना।”

एवलीन की आंखों में दर्द आ गया।

“तुम्हारी मां जानती थीं कि मैं क्या हूं।”

“क्या हो तुम?”

एवलीन ने जवाब दिया—

**“मैं वह दरवाजा हूं जिसे तुम्हारी मां ने बंद किया था।”**

माया समझ नहीं पाई।

एवलीन आगे बढ़ी।

“और तुम वह चाबी हो जिससे वह दरवाजा दोबारा खुल सकता है।”

---

## 7. वह चीज

अचानक तहखाने की पूरी दीवार कांपने लगी।

धूल छत से गिरने लगी।

डेनियल ने माया को पीछे खींचा।

“यह क्या हो रहा है?”

एलियास ने घड़ी देखी।

**3:17।**

उसने कहा,

“वह जाग गई।”

“कौन?”

एलियास ने कहा—

“वही जिसके बारे में हम बात कर रहे हैं।”

फर्श में दरार पड़ गई।

पहले एक छोटी सी दरार।

फिर वह फैलती गई।

दरार के अंदर से काला धुआं निकलने लगा।

माया ने महसूस किया कि उसकी चांदी की अंगूठी गर्म हो रही है।

इतनी गर्म कि उसकी उंगली जलने लगी।

वह चीखी।

अचानक अंगूठी पर एक निशान चमका।

वही निशान जो हवेली के दरवाजे पर था।

एवलीन ने उसे देखा और चीख उठी—

“उसे अंगूठी उतारने दो!”

माया ने अंगूठी खींचने की कोशिश की।

लेकिन वह उंगली से निकल नहीं रही थी।

काला धुआं धीरे-धीरे उसके चारों ओर फैल गया।

उस धुएं में एक चेहरा बनने लगा।

पहले आंखें।

फिर नाक।

फिर मुंह।

और फिर—

माया का अपना चेहरा।

वह चेहरा मुस्कुराया।

और बोला—

**“तुम्हें याद आ गया।”**

माया की आंखें फैल गईं।

“क्या?”

चेहरे ने कहा—

**“उस रात तुमने मुझे खुद बुलाया था।”**

माया चीख पड़ी—

“नहीं!”

“तुमने दरवाजा खोला था।”

“नहीं!”

“तुम्हारी मां ने सिर्फ तुम्हारी यादें मिटाईं।”

चेहरा उसके और करीब आया।

**“सच नहीं।”**

माया रोते हुए पीछे हटती गई।

“तो सच क्या है?”

काले चेहरे ने फुसफुसाया—

**“तुम्हारी मां ने मुझे तुमसे अलग किया था।”**

अचानक पूरी हवेली में घंटियां बजने लगीं।

एक साथ।

सैकड़ों घंटियां।

एवलीन चिल्लाई—

“माया, अपनी आंखें बंद करो!”

माया ने आंखें बंद कर लीं।

लेकिन आवाज अब उसके सिर के अंदर आ रही थी।

**“माया...”**

**“माया...”**

**“माया...”**

फिर किसी ने उसके कान के पास फुसफुसाया—

**“मुझे याद करो।”**

और अचानक—

सब कुछ शांत हो गया।

---

## 8. आखिरी दृश्य

माया ने आंखें खोलीं।

तहखाना गायब था।

वह अपने पुराने घर में थी।

उसके सामने उसकी मां बैठी थी।

माया सिर्फ छह साल की थी।

मां उसके बाल सहला रही थी।

“तुम्हें यह रात याद नहीं रहेगी।”

छोटी माया ने पूछा,

“क्यों?”

मां ने कहा,

“क्योंकि अगर तुम्हें याद रही, तो वह तुम्हें ढूंढ लेगा।”

“कौन?”

मां ने जवाब नहीं दिया।

दरवाजे के पीछे से किसी बच्ची की आवाज आई—

**“माया...”**

छोटी माया ने दरवाजे की तरफ देखा।

मां ने उसे अपनी बाहों में कसकर पकड़ लिया।

“उसकी तरफ मत देखना।”

लेकिन छोटी माया ने फिर भी दरवाजे की तरफ देखा।

दरवाजे की दरार के पीछे एक लड़की खड़ी थी।

एवलीन।

लेकिन एवलीन के पीछे एक और आकृति थी।

बहुत लंबी।

बहुत पतली।

चेहरा नहीं।

सिर्फ दो सफेद आंखें।

माया की मां ने अपनी बेटी के कान बंद कर दिए।

और फुसफुसाई—

**“मैं तुम्हें कभी नहीं बता पाऊंगी कि वह असल में कौन है।”**

दृश्य अचानक टूट गया।

माया वर्तमान में वापस आ गई।

वह तहखाने में फर्श पर पड़ी थी।

डेनियल उसके पास बैठा था।

एलियास कुछ दूर खड़ा था।

लेकिन एवलीन गायब थी।

माया ने घबराकर पूछा,

“एवलीन कहां है?”

कोई जवाब नहीं दिया।

डेनियल ने धीरे से कहा,

“वह चली गई।”

माया उठने लगी।

तभी उसकी नजर कमरे की दीवार पर गई।

वहां एक नई तस्वीर टंगी थी।

माया ने उसे उठाया।

तस्वीर में उसकी मां थी।

उसके साथ छोटी माया थी।

और उनके पीछे—

एवलीन खड़ी थी।

लेकिन तस्वीर के कोने में एक और चेहरा था।

वही चेहरा जो माया ने धुएं में देखा था।

तस्वीर के पीछे कुछ लिखा था।

माया ने पलटा।

सिर्फ एक वाक्य—

**“जिसे तुम मां कहती थीं, उसने तुम्हें बचाया नहीं था।”**

नीचे एक तारीख लिखी थी।

**17 अक्टूबर 2004।**

और उसके नीचे—

**“उसने तुम्हें चुना था।”**

माया ने तस्वीर हाथ से गिरा दी।

उसी क्षण उसकी मां का नंबर फिर फोन पर चमका।

इस बार कोई संदेश नहीं आया।

सिर्फ कॉल।

माया ने कांपते हाथ से कॉल उठाई।

दूसरी तरफ कुछ सेकंड तक खामोशी रही।

फिर उसकी मां की आवाज आई।

बहुत धीमी।

बहुत थकी हुई।

**“माया...”**

माया ने कहा,

“मां, मुझे सच बताइए।”

दूसरी तरफ उसकी मां रोने लगी।

फिर बोली—

**“तुम मेरी बेटी नहीं हो।”**

माया की सांस रुक गई।

फोन उसके हाथ से गिरते-गिरते बचा।

और उसी क्षण तहखाने के अंधेरे कोने से किसी बच्चे की हंसी सुनाई दी।

**“अब इसे सब याद आ जाएगा...”**

माया ने धीरे-धीरे पीछे देखा।

अंधेरे में एक छोटी बच्ची खड़ी थी।

छह साल की।

वही कपड़े।

वही चेहरा।

वही आंखें।

माया का बचपन।

उसकी अपनी छह साल की परछाईं।

बच्ची मुस्कुराई।

और बोली—

**“मां ने तुम्हें बताया नहीं...”**

एक कदम आगे बढ़ी।

**“कि उस रात ब्लैकवेल मैनर में...”**

दूसरा कदम।

**“तुम अकेली नहीं आई थीं।”**

तीसरा कदम।

बच्ची माया के बिल्कुल सामने आ गई।

उसने अपना सिर थोड़ा टेढ़ा किया।

और फुसफुसाई—

# **“मेरे साथ कौन आया था... याद है?”**

अंधेरा।

**एपिसोड 3 समाप्त।**

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