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एपिसोड 4 “वह बच्ची कौन थी?”
firoj saifi · Sci-Fi Horror · 14 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR
- Chapter
- 4 of 4
- Category
- Sci-Fi Horror
- Reading time
- 14 min
- Words
- 2640
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
कमरे में अचानक इतनी खामोशी छा गई कि माया को अपनी धड़कन भी किसी दूर जाती ट्रेन की तरह सुनाई देने लगी।
सामने वही बच्ची खड़ी थी।
छह साल की।
पतले सफेद कपड़े।
नंगे पैर।
भीगे हुए बाल, जो उसके चेहरे के दोनों तरफ चिपके हुए थे।
और सबसे डरावनी बात—
वह बच्ची बिल्कुल माया जैसी दिखती थी।
चेहरा।
आंखें।
होंठ।
यहां तक कि उसकी गर्दन के पास वह छोटा-सा निशान भी, जो माया के बचपन से था।
माया कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।
फिर उसके होंठ कांपे।
“तुम... कौन हो?”
बच्ची ने कोई जवाब नहीं दिया।
वह बस माया को देखती रही।
फिर बहुत धीरे से मुस्कुराई।
“तुम्हें सच में याद नहीं?”
माया के पीछे खड़े डेनियल ने अपनी टॉर्च उठाई।
“माया, पीछे हटो।”
बच्ची की आंखें तुरंत डेनियल पर चली गईं।
उसकी मुस्कान गायब हो गई।
“तुम फिर भी उसे बचाने आए हो।”
डेनियल का चेहरा सख्त हो गया।
“तुम मुझे जानती हो?”
बच्ची ने सिर थोड़ा टेढ़ा किया।
“मैं तुम्हें नहीं जानती।”
एक पल रुकी।
“लेकिन वह जानती थी।”
डेनियल की भौंहें सिकुड़ गईं।
“कौन?”
बच्ची ने माया की तरफ इशारा किया।
“वह।”
माया का गला सूख गया।
“मैंने तुम्हें कभी नहीं देखा।”
बच्ची ने धीरे से कहा—
“झूठ।”
फिर उसने फर्श पर उंगली से कुछ लिखना शुरू किया।
धूल पर।
एक शब्द।
**2004**
माया का शरीर जैसे पत्थर बन गया।
उसके हाथ में पकड़ी टॉर्च नीचे गिर गई।
रोशनी घूमती हुई फर्श पर पड़ी।
डेनियल तुरंत उसकी तरफ आया।
“माया?”
लेकिन माया बच्ची को देख रही थी।
“तुम... 2004 के बारे में जानती हो?”
बच्ची ने सिर हिलाया।
“क्योंकि मैं वहां थी।”
“कहां?”
“तुम्हारे साथ।”
माया ने एक कदम पीछे लिया।
“ये असंभव है।”
बच्ची ने मुस्कुराकर कहा—
“तुम्हारी मां ने भी यही कहा था।”
कमरे की दीवारों से अचानक हल्की-सी चरमराहट की आवाज आई।
जैसे पूरा कमरा सांस ले रहा हो।
एलियास ने तुरंत अपनी पुरानी नोटबुक निकाली।
उसकी आंखें उस बच्ची पर टिक गई थीं।
“हे भगवान...”
डेनियल ने उसकी तरफ देखा।
“क्या?”
एलियास ने जवाब नहीं दिया।
माया ने उसकी ओर मुड़कर देखा।
“तुम इसे पहचानते हो।”
एलियास चुप रहा।
“डॉ. वार्ड।”
उसकी आवाज इस बार कठोर थी।
“तुम इसे पहचानते हो।”
एलियास ने धीरे-धीरे सिर उठाया।
उसके चेहरे पर वह डर था जो माया ने उससे पहले कभी नहीं देखा था।
“हां।”
डेनियल ने पूछा—
“कौन है ये?”
एलियास ने बच्ची को देखते हुए कहा—
“यह वही बच्ची है जिसे हमने 2004 में ब्लैकवेल मैनर से बाहर निकाला था।”
माया की सांस रुक गई।
“क्या?”
एलियास ने आंखें बंद कर लीं।
“और वह बच्ची...”
उसने माया की तरफ देखा।
“तुम थीं।”
कमरे में कुछ टूटने की आवाज हुई।
कांच?
या शायद कोई पुरानी हड्डी।
माया ने धीरे से कहा—
“नहीं।”
एलियास ने सिर हिलाया।
“मुझे पता है कि तुम क्या सोच रही हो।”
“नहीं।”
“माया—”
“नहीं!”
माया चिल्लाई।
उसकी आवाज कमरे की दीवारों से टकराई।
और फिर...
उसी आवाज की दूसरी प्रतिध्वनि आई।
लेकिन दूसरी आवाज माया की नहीं थी।
वह एक बच्ची की थी।
**“नहीं...”**
फिर दूसरी तरफ से—
**“नहीं...”**
फिर तीसरी तरफ से—
**“नहीं...”**
कुछ ही सेकंड में पूरा कमरा बच्चों की आवाजों से भर गया।
डेनियल ने अपनी बंदूक निकाल ली।
“सब शांत रहो!”
आवाजें अचानक बंद हो गईं।
लेकिन अब बच्ची वहां नहीं थी।
माया ने चारों तरफ देखा।
“वह कहां गई?”
एलियास ने धीरे से कहा—
“वह गई नहीं है।”
माया ने पूछा—
“तो?”
एलियास ने कमरे की दीवार की ओर इशारा किया।
वहां एक दरवाजा था।
जो कुछ सेकंड पहले वहां नहीं था।
दरवाजे पर पीतल की एक छोटी प्लेट लगी थी।
उस पर लिखा था—
**17-B**
माया के चेहरे से रंग उड़ गया।
“यह कमरा...”
एलियास ने कहा—
“Room 17 का दूसरा हिस्सा।”
डेनियल ने दरवाजे को देखा।
“तो फिर खोलते क्यों नहीं?”
एलियास ने तुरंत कहा—
“क्योंकि पिछली बार जब हमने इसे खोला था...”
वह रुक गया।
डेनियल ने पूछा—
“क्या हुआ था?”
एलियास ने धीरे से जवाब दिया—
“हम पांच लोग अंदर गए थे।”
उसने माया की ओर देखा।
“और बाहर सिर्फ एक बच्चा आया था।”
माया की आंखें फैल गईं।
“मैं?”
एलियास ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
माया का दिल जोर से धड़कने लगा।
“तो कौन?”
एलियास कुछ कह पाता उससे पहले दरवाजे के दूसरी तरफ से दस्तक हुई।
**ठक।**
सब जम गए।
फिर—
**ठक।**
तीसरी बार—
**ठक।**
डेनियल ने माया के सामने आकर बंदूक तान दी।
“कौन है?”
कोई जवाब नहीं।
फिर दरवाजे के नीचे से कुछ बाहर सरका।
एक पुराना कागज।
माया धीरे-धीरे नीचे झुकी।
कागज उठाया।
उस पर सिर्फ एक वाक्य लिखा था।
**“जिस बच्ची को तुम बाहर लेकर गई थीं... वह तुम नहीं थीं।”**
माया की उंगलियां कांपने लगीं।
“यह क्या है?”
एलियास ने कागज देखा।
और उसका चेहरा सफेद पड़ गया।
“यह मेरी लिखावट है।”
डेनियल ने उसकी ओर देखा।
“क्या?”
“यह मैंने लिखा था।”
“कब?”
एलियास ने जवाब दिया—
“17 अक्टूबर 2004।”
माया ने उसकी आंखों में देखा।
“तुमने तब यह क्यों लिखा?”
एलियास ने कुछ सेकंड तक उसे देखा।
फिर बोला—
“क्योंकि मुझे पता था कि जिस बच्ची को हम बाहर निकाल रहे थे... वह अकेली नहीं थी।”
---
### 17 अक्टूबर 2004
अचानक कमरे की सारी लाइटें बुझ गईं।
माया के कानों में तेज आवाज गूंजी।
जैसे हजारों लोग एक साथ फुसफुसा रहे हों।
फिर—
अंधेरा।
और उसके बाद एक दृश्य।
माया ने खुद को एक पुराने गलियारे में खड़ा पाया।
लेकिन वह अब वर्तमान में नहीं थी।
दीवारें नई थीं।
लकड़ी पर धूल नहीं थी।
मोमबत्तियां जल रही थीं।
कहीं दूर एक बच्ची रो रही थी।
“मम्मी...”
माया का दिल बैठ गया।
वह आवाज उसकी थी।
छह साल की माया की।
वह गलियारे में आगे बढ़ी।
दरवाजा खुला।
अंदर उसकी मां खड़ी थी।
युवा।
घबराई हुई।
उसके हाथ में वही सिल्वर रिंग थी जो अब माया के पास थी।
माया की मां किसी से कह रही थी—
“हमारे पास सिर्फ तीन मिनट हैं।”
सामने एलियास खड़ा था।
युवा एलियास।
उसके साथ चार लोग और थे।
उनमें से एक आदमी बार-बार घड़ी देख रहा था।
“3:14।”
दूसरे ने कहा—
“अगर वह 3:17 तक बाहर नहीं आई तो?”
एलियास ने कहा—
“तब दरवाजा बंद कर देना।”
माया की मां चिल्लाई—
“नहीं!”
एलियास ने उसकी ओर देखा।
“अगर दरवाजा खुला रहा तो वह बाहर आ जाएगी।”
मां ने कहा—
“वह बच्ची है।”
एलियास की आवाज ठंडी थी।
“नहीं।”
उसने दरवाजे के अंदर देखा।
“वह सिर्फ बच्ची नहीं है।”
माया का दिल धड़कना भूल गया।
अंदर कमरे के कोने में छह साल की माया बैठी थी।
घुटनों को पकड़कर।
रोते हुए।
मां उसकी ओर बढ़ी।
“माया।”
बच्ची ने ऊपर देखा।
“मम्मी... मुझे घर जाना है।”
मां उसके पास बैठ गई।
उसने बच्ची को गले लगा लिया।
“हम घर जाएंगे।”
फिर मां ने उसके कान में फुसफुसाया—
“लेकिन तुम्हें कुछ भूलना होगा।”
छोटी माया रोते हुए बोली—
“क्या?”
मां ने कहा—
“आज रात।”
माया ने सिर हिलाया।
“क्या हुआ?”
मां की आंखों में आंसू थे।
“तुम्हें कुछ याद नहीं रखना।”
तभी पीछे से एक आवाज आई।
बहुत गहरी।
बहुत धीमी।
**“उसे मत बताओ।”**
मां ने तुरंत पीछे देखा।
कमरे के अंधेरे कोने में कोई खड़ा था।
लंबा।
असामान्य रूप से लंबा।
चेहरा नहीं था।
सिर्फ एक काली आकृति।
छोटी माया ने उसे देखा।
और रोना बंद कर दिया।
उसने अपनी मां से पूछा—
“मम्मी... ये अंकल कौन हैं?”
मां का चेहरा डर से जम गया।
“उधर मत देखो।”
लेकिन बच्ची पहले ही उसे देख चुकी थी।
काली आकृति ने धीरे से हाथ उठाया।
और उसकी उंगली छोटी माया की तरफ थी।
“वह मेरी है।”
माया की मां खड़ी हो गई।
“नहीं।”
काली आकृति ने कहा—
“तुमने उसे यहां लाया।”
“मैं उसे बचाने लाई थी।”
“तुमने उसे चुना।”
“मैंने उसे बचाया।”
“तुमने उसे छुपाया।”
मां ने अपनी जेब से सिल्वर रिंग निकाली।
“आज के बाद वह तुम्हें याद नहीं करेगी।”
आकृति कुछ सेकंड चुप रही।
फिर हंसी।
“लेकिन मैं उसे याद रखूंगा।”
घड़ी की सुइयां आगे बढ़ीं।
**3:16**
एलियास ने दरवाजा खोला।
“अब!”
मां ने छोटी माया को उठाया।
“आंखें बंद करो!”
माया चिल्लाई—
“मम्मी!”
“आंखें बंद करो!”
एलियास ने कुछ पढ़ना शुरू किया।
दीवारों पर बने चिन्ह चमकने लगे।
हवा अचानक इतनी तेज हो गई कि मोमबत्तियां बुझ गईं।
काली आकृति आगे बढ़ी।
उसका हाथ छोटी माया के चेहरे के पास पहुंचा।
मां ने उसे पीछे खींच लिया।
और उसी क्षण—
**3:17**
घड़ी रुक गई।
पूरे मैनर में एक चीख गूंजी।
ऐसी चीख जो इंसान की नहीं थी।
फर्श फट गया।
दीवारें हिलने लगीं।
और काली आकृति अचानक छोटी माया के शरीर से टकराई।
एक तेज सफेद चमक हुई।
फिर—
सब कुछ शांत।
---
माया ने अचानक आंखें खोल दीं।
वह वर्तमान में वापस थी।
वह फर्श पर पड़ी थी।
डेनियल उसके ऊपर झुका हुआ था।
“माया!”
उसने आंखें खोलीं।
“क्या हुआ?”
डेनियल ने उसका हाथ पकड़ा।
“तुम लगभग दो मिनट तक बेहोश थीं।”
माया उठकर बैठ गई।
उसने एलियास की ओर देखा।
“तुमने मुझसे झूठ बोला।”
एलियास चुप रहा।
“मैं 2004 में यहां थी।”
“हां।”
“मेरी मां भी थी।”
“हां।”
“और वह चीज भी।”
एलियास ने धीरे से सिर हिलाया।
“हां।”
माया की आवाज टूट गई।
“लेकिन तुमने कहा था कि 2004 में तुम यहां आए थे और तुम्हारे साथ पांच लोग थे।”
एलियास ने कहा—
“मैंने यह नहीं कहा था कि वे सभी इंसान थे।”
डेनियल उसकी तरफ मुड़ा।
“क्या मतलब?”
एलियास ने अपना बैग खोला।
उसमें से एक पुरानी तस्वीर निकाली।
वही तस्वीर।
जिसे माया पहले देख चुकी थी।
लेकिन इस बार उसने तस्वीर के पीछे लिखा हुआ देखा।
उसने पहले ध्यान नहीं दिया था।
वहां एक तारीख थी।
**18 अक्टूबर 2004**
और नीचे—
**“SUBJECT A — RECOVERED.”**
माया ने पूछा—
“Subject A?”
एलियास ने कहा—
“हमने उस रात दो बच्चों को देखा था।”
माया की सांस रुक गई।
“दो?”
“हां।”
“कौन?”
एलियास ने तस्वीर पर उंगली रखी।
“एक तुम।”
माया ने पूछा—
“और दूसरी?”
एलियास ने धीरे से कहा—
“तुम्हारी बहन।”
कमरा जैसे घूम गया।
“मेरी... बहन?”
डेनियल ने तुरंत माया की ओर देखा।
“माया, तुम्हारी कोई बहन थी?”
माया ने सिर हिलाया।
“नहीं।”
एलियास ने कहा—
“तुम्हारी मां ने यही चाहा था कि तुम्हें ऐसा ही याद रहे।”
माया की आंखों में आंसू आ गए।
“उसने मुझसे मेरी बहन क्यों छुपाई?”
एलियास ने जवाब नहीं दिया।
तभी पीछे से एक आवाज आई।
बच्ची की।
“क्योंकि मैं मर गई थी।”
सबने पलटकर देखा।
वही छह साल की बच्ची दरवाजे के पास खड़ी थी।
माया उसे घूरती रही।
“तुम...”
बच्ची ने कहा—
“मैं तुम्हारी बहन नहीं हूं।”
माया ने एक कदम आगे बढ़ाया।
“तो कौन हो?”
बच्ची मुस्कुराई।
“मैं वह हूं जो तुम्हारे अंदर थी।”
माया का चेहरा सफेद पड़ गया।
डेनियल ने बंदूक उठाई।
“माया, पीछे हटो।”
बच्ची ने उसकी तरफ देखा।
“तुम हमेशा यही कहते हो।”
डेनियल रुक गया।
“क्या?”
बच्ची ने कहा—
“पीछे हटो।”
फिर उसने डेनियल के मृत बहन वाले स्वर में कहा—
“लेकिन तुम उसे बचा नहीं पाओगे।”
डेनियल का चेहरा बदल गया।
“सारा...”
माया ने उसकी ओर देखा।
“डेनियल?”
बच्ची ने धीरे से मुस्कुराया।
“अब समझे?”
डेनियल की आंखों में आंसू आ गए।
“तुम मेरी बहन की आवाज में क्यों बोल रही हो?”
बच्ची ने जवाब दिया—
“क्योंकि ब्लैकवेल हर इंसान के अंदर छुपे हुए सबसे बड़े डर को जानता है।”
फिर वह माया के पास आई।
“तुम्हारा डर क्या है?”
माया ने कहा—
“मुझे नहीं पता।”
बच्ची ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया—
“तुम्हारा सबसे बड़ा डर यह नहीं है कि तुम्हारी मां ने तुमसे झूठ बोला।”
“तो क्या है?”
बच्ची ने कहा—
“कि शायद उसने सच बोला था।”
माया की सांस रुक गई।
---
अचानक दीवार पर लगी पुरानी घड़ी चलने लगी।
**टिक।**
सबने ऊपर देखा।
**टिक।**
सुइयां आगे बढ़ीं।
3:15
3:16
माया पीछे हट गई।
“नहीं...”
एलियास ने कहा—
“सब लोग बाहर निकलो।”
डेनियल ने पूछा—
“कहां?”
एलियास ने दरवाजे की ओर इशारा किया।
“जहां भी रास्ता मिले।”
घड़ी—
**3:17**
पर पहुंच गई।
और उसी क्षण...
पूरे मैनर में सभी दरवाजे एक साथ खुल गए।
सैकड़ों दरवाजे।
गलियारे में।
दीवारों में।
छत में।
फर्श में।
हर तरफ।
हर दरवाजे के पीछे अंधेरा।
फिर हर दरवाजे के अंदर से एक ही आवाज आई—
**“माया...”**
एक।
फिर दूसरी।
फिर तीसरी।
फिर सैकड़ों।
**“माया...”**
**“माया...”**
**“माया...”**
माया ने अपने कान बंद कर लिए।
“बस!”
लेकिन आवाजें और तेज हो गईं।
फिर एक दरवाजे से उसकी मां बाहर आई।
वही चेहरा।
वही कपड़े।
वही आंखें।
माया की आंखों से आंसू बहने लगे।
“मम्मी...”
डेनियल ने उसका हाथ पकड़ लिया।
“रुको!”
लेकिन माया आगे बढ़ चुकी थी।
उसकी मां ने हाथ फैलाया।
“माया।”
“आप जिंदा हैं?”
मां ने कहा—
“नहीं।”
माया रुक गई।
“फिर आप यहां कैसे?”
मां ने कहा—
“मैं यहां नहीं हूं।”
“तो?”
मां की आंखें काली होने लगीं।
“यह तुम्हारी याद है।”
माया पीछे हट गई।
“तुम कौन हो?”
मां ने मुस्कुराकर कहा—
“मैं वह हूं जिसे तुमने सबसे ज्यादा याद किया।”
माया ने समझ लिया।
“तुम वो नहीं हो।”
मां का चेहरा अचानक विकृत होने लगा।
आंखें खाली।
मुंह जरूरत से ज्यादा चौड़ा।
त्वचा पर काली दरारें।
और फिर—
उसने कहा—
**“लेकिन अब तुम्हें फर्क नहीं पड़ेगा।”**
डेनियल ने गोली चला दी।
धमाका पूरे मैनर में गूंजा।
आकृति पीछे गिरी।
लेकिन जमीन पर खून नहीं था।
सिर्फ काला धुआं।
धुआं फर्श पर फैलता गया।
और फिर उसने एक आकार बनाया।
एक दरवाजा।
माया उस दरवाजे को देखती रही।
उस पर वही निशान था—
जो उसकी मां की अंगूठी पर था।
एलियास ने फुसफुसाकर कहा—
“हे भगवान...”
माया ने पूछा—
“क्या?”
एलियास पीछे हट गया।
“यह दरवाजा पहले कभी नहीं खुला।”
माया ने कहा—
“अब खुलेगा।”
डेनियल ने उसका हाथ पकड़ा।
“तुम अंदर नहीं जाओगी।”
माया ने उसकी तरफ देखा।
“मुझे जाना होगा।”
“क्यों?”
माया ने दरवाजे की तरफ देखा।
“क्योंकि दूसरी तरफ मेरी मां है।”
एलियास ने कहा—
“नहीं।”
माया ने उसकी ओर देखा।
एलियास की आंखों में डर था।
“दूसरी तरफ तुम्हारी मां नहीं है।”
“तो कौन है?”
एलियास ने कहा—
“वह।”
अंधेरे से एक आवाज आई।
एक बच्ची की।
लेकिन इस बार आवाज माया की थी।
**“माया...”**
माया ने धीरे से सिर उठाया।
दरवाजे के दूसरी तरफ छह साल की माया खड़ी थी।
लेकिन इस बार उसके साथ कोई और भी था।
एक और बच्ची।
बिल्कुल उसी उम्र की।
बिल्कुल उसी चेहरे वाली।
दोनों हाथ पकड़े खड़ी थीं।
माया की सांस रुक गई।
दोनों बच्चियों ने एक साथ उसकी तरफ देखा।
और एक साथ कहा—
**“तुम गलत बच्ची को बाहर लेकर गई थीं।”**
दरवाजा अपने आप बंद हो गया।
अंधेरा।
फिर भीतर से एक आखिरी चीख आई—
**“मम्मी ने हमें अलग नहीं किया था...”**
कुछ सेकंड की खामोशी।
फिर—
**“उसने हम दोनों को यहां छोड़ दिया था।”**
और उसी क्षण माया की सिल्वर रिंग गर्म होकर जलने लगी।
उस पर एक नया शब्द उभर आया।
**SUBJECT B**
माया ने उसे देखा।
उसका चेहरा भय से जम गया।
क्योंकि उसी समय—
डेनियल की जेब में रखा पुराना फोन बजने लगा।
स्क्रीन पर कोई नंबर नहीं था।
सिर्फ एक नाम लिखा था—
**MAYA — 2004**
डेनियल ने कांपते हाथों से फोन उठाया।
दूसरी तरफ से छह साल की बच्ची की आवाज आई—
**“डेनियल... दरवाजा मत खोलना।”**
डेनियल ने पूछा—
“क्यों?”
कुछ सेकंड तक सिर्फ सांसों की आवाज आती रही।
फिर बच्ची ने फुसफुसाकर कहा—
**“क्योंकि इस बार जो बाहर आएगा...”**
लाइन कट गई।
फोन की स्क्रीन पर एक आखिरी संदेश चमका—
**“वह माया नहीं होगी।”**
उसी क्षण पीछे खड़ी माया ने धीरे से पूछा—
“डेनियल... तुम फोन पर किससे बात कर रहे थे?”
डेनियल ने उसकी तरफ देखा।
फिर फोन की स्क्रीन की तरफ।
फिर वापस माया की तरफ।
उसके हाथ कांप रहे थे।
क्योंकि स्क्रीन पर नया संदेश आ चुका था।
**“उसके पीछे मत देखना।”**
डेनियल ने धीरे-धीरे अपनी नजर माया के पीछे उठाई।
वहां कोई खड़ा था।
लंबा।
बिना चेहरे के।
और उसके कंधे पर हाथ रखे खड़ी थी—
छह साल की दूसरी माया।
उसने डेनियल की तरफ देखा।
और मुस्कुराकर अपनी उंगली होंठों पर रख दी।
**“श्श्श...”**
माया ने पूछा—
“क्या हुआ?”
डेनियल कुछ नहीं बोला।
क्योंकि उसके पीछे खड़ी वह काली आकृति अब धीरे-धीरे माया के बिल्कुल पास आ चुकी थी।
और पहली बार...
उसने चेहरा बनाया।
वह चेहरा माया की मां का था।
फिर उसने बहुत धीरे से कहा—
**“अब तुम्हें याद आएगा कि असली माया कौन थी।”**
**एपिसोड 4 समाप्त।**
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