Pretika › Sci-Fi Horror › THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR

एपिसोड 5 “सब्जेक्ट बी”

firoj saifi · Sci-Fi Horror · 14 मिनट

Writer
firoj saifi
Story
THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR
Chapter
5 of 5
Category
Sci-Fi Horror
Reading time
14 min
Words
2713
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

डेनियल की आंखें माया के पीछे जमी हुई थीं।

वह बोल नहीं पा रहा था।

उसने जो देखा था, उसे शब्दों में बदलना मुश्किल था।

माया उसके सामने खड़ी थी।

लेकिन उसके ठीक पीछे—

एक लंबी, काली आकृति।

चेहरा नहीं।

आंखें नहीं।

मुंह नहीं।

सिर्फ एक खाली, मानवीय आकार।

और उसके कंधे पर हाथ रखे खड़ी थी—

छह साल की बच्ची।

वही चेहरा।

वही आंखें।

वही मासूम मुस्कान।

माया ने डेनियल की तरफ देखा।

“क्या हुआ?”

डेनियल ने कोई जवाब नहीं दिया।

माया ने फिर पूछा—

“डेनियल?”

उसने धीरे से अपना हाथ बंदूक पर रखा।

“माया...”

“हां?”

“तुम्हारे पीछे कोई है।”

माया के चेहरे पर डर उतर आया।

“कौन?”

डेनियल ने जवाब नहीं दिया।

उसकी नजर बच्ची पर थी।

बच्ची मुस्कुरा रही थी।

फिर उसने अपनी उंगली होंठों पर रखी।

**श्श्श...**

और अचानक—

कमरे की सारी घड़ियां एक साथ बज उठीं।

**टन्... टन्... टन्...**

डेनियल ने घड़ी की तरफ देखा।

3:17।

माया ने धीरे से पीछे मुड़ना शुरू किया।

“मत मुड़ो!”

डेनियल चीखा।

लेकिन बहुत देर हो चुकी थी।

माया घूम गई।

वहां कुछ नहीं था।

सिर्फ खाली गलियारा।

माया ने डेनियल को देखा।

“वहां कोई नहीं है।”

डेनियल ने कांपती आवाज में कहा—

“था।”

“कौन?”

“मुझे नहीं पता।”

एलियास तेजी से उनके पास आया।

“हमें यहां से निकलना होगा।”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“तुम्हें सब पता है।”

एलियास रुक गया।

“क्या?”

“Subject B।”

एलियास का चेहरा बदल गया।

“तुमने यह नाम कहां सुना?”

माया ने अपनी हथेली दिखाई।

उसकी सिल्वर रिंग के नीचे त्वचा पर एक काला निशान बन चुका था।

**B**

“यह खुद बना है।”

एलियास पीछे हट गया।

“हे भगवान...”

माया ने उसका कॉलर पकड़ लिया।

“अब सच बोलो।”

“माया—”

“2004 में क्या हुआ था?”

एलियास चुप रहा।

“दो बच्चियां कौन थीं?”

चुप्पी।

“मैं कौन थी?”

चुप्पी।

“और Subject B कौन था?”

एलियास ने आंखें बंद कर लीं।

फिर उसने धीरे से कहा—

“तुम दोनों एक ही बच्ची थीं।”

माया का हाथ ढीला पड़ गया।

“क्या?”

एलियास ने कहा—

“या शायद... दो अलग हिस्से।”

डेनियल ने पूछा—

“ये कैसी बकवास है?”

एलियास ने कहा—

“ब्लैकवेल मैनर इंसानों को सिर्फ मारता नहीं है।”

उसने अंधेरे गलियारे की ओर देखा।

“यह उन्हें बांटता है।”

माया ने पूछा—

“मतलब?”

“यादें अलग।”

“और?”

“डर अलग।”

“और?”

एलियास की आवाज धीमी हो गई।

“आत्मा भी।”

कमरे में फिर वही ठंडी हवा चली।

माया ने पूछा—

“मेरी आत्मा के दो हिस्से?”

एलियास ने कहा—

“शायद।”

“शायद?”

“मैं निश्चित नहीं हूं।”

माया ने गुस्से से कहा—

“तुम्हें निश्चित होना चाहिए था!”

एलियास ने उसकी आंखों में देखा।

“मैंने कोशिश की थी।”

“क्या?”

“तुम्हें बचाने की।”

माया हंस पड़ी।

लेकिन उसकी हंसी में दर्द था।

“सब यही कहते हैं।”

वह पीछे हटी।

“मेरी मां भी यही कहती थी।”

एलियास ने कहा—

“तुम्हारी मां ने जो किया...”

“मेरी मां ने क्या किया?”

एलियास चुप हो गया।

माया ने उसकी ओर देखा।

“बोलो।”

“उसने Subject B को छोड़ दिया।”

माया की सांस रुक गई।

“कहां?”

एलियास ने धीरे से कहा—

“यहीं।”

---

### 2004

बारिश हो रही थी।

ब्लैकवेल मैनर की खिड़कियों पर पानी लगातार टकरा रहा था।

अंदर—

एक छोटी लड़की रो रही थी।

उसकी उम्र छह साल थी।

वह एक कमरे में अकेली बैठी थी।

कमरे की दीवार पर बड़े अक्षरों में लिखा था—

**SUBJECT A**

दरवाजा खुला।

माया की मां अंदर आई।

उसने बच्ची को देखा।

“माया।”

बच्ची ने सिर उठाया।

“मम्मी?”

मां उसके पास बैठ गई।

“तुम्हें डर लग रहा है?”

बच्ची ने सिर हिलाया।

“बहुत।”

मां ने उसे गले लगा लिया।

“बस कुछ देर।”

“फिर हम घर जाएंगे?”

मां की आंखों में आंसू आ गए।

“हां।”

लेकिन वह झूठ बोल रही थी।

दरवाजे के बाहर एलियास खड़ा था।

उसके हाथ में एक फाइल थी।

उसने मां से कहा—

“हमें जल्दी करना होगा।”

मां ने बच्ची को कसकर पकड़ा।

“तुमने कहा था कि कोई दूसरा रास्ता है।”

एलियास ने कहा—

“था।”

“अब?”

“अब नहीं।”

मां ने पूछा—

“दूसरी बच्ची?”

एलियास चुप हो गया।

“वह कहां है?”

एलियास ने नीचे देखा।

“Subject B अभी जागी नहीं है।”

“उसे कहां रखा है?”

एलियास ने जवाब दिया—

“नीचे।”

मां का चेहरा सफेद पड़ गया।

“तुमने उसे नीचे क्यों रखा?”

“क्योंकि वह जाग गई तो दोनों को अलग करना मुश्किल होगा।”

“वह बच्ची है!”

“नहीं।”

एलियास की आवाज कठोर थी।

“वह अब सिर्फ बच्ची नहीं है।”

मां ने उसे घूरा।

“तुम्हें उससे डर लगता है।”

एलियास ने पहली बार स्वीकार किया—

“हां।”

---

वर्तमान।

माया दीवार से लगी खड़ी थी।

उसके दिमाग में वही दृश्य बार-बार घूम रहा था।

दो बच्चियां।

एक कमरे में।

दूसरी नीचे।

और उसकी मां उनके बीच खड़ी थी।

“उसे नीचे क्यों रखा था?”

एलियास ने जवाब नहीं दिया।

माया ने पूछा—

“Subject B कहां है?”

“मुझे नहीं पता।”

“झूठ।”

“माया—”

“तुम्हें पता है।”

एलियास ने कहा—

“मैंने उसे आखिरी बार 2004 में देखा था।”

“कहां?”

“नीचे।”

“कहां नीचे?”

एलियास ने फर्श की ओर देखा।

“मैनर के नीचे एक और मैनर है।”

डेनियल ने भौंहें सिकोड़ लीं।

“क्या?”

“यह घर सिर्फ उतना नहीं है जितना हमें दिखाई देता है।”

एलियास ने दीवार पर हाथ रखा।

“इसके नीचे कमरे हैं।”

फिर फर्श पर।

“और उनके नीचे गलियारे।”

फिर उसने ऊपर देखा।

“और उनके ऊपर भी।”

डेनियल ने कहा—

“तुम कहना क्या चाहते हो?”

एलियास ने धीरे से कहा—

“ब्लैकवेल मैनर एक इमारत नहीं है।”

“तो?”

“यह एक जगह है।”

माया ने पूछा—

“किस तरह की जगह?”

एलियास ने कहा—

“जहां मृत लोग, यादें और समय एक ही चीज बन जाते हैं।”

---

अचानक फर्श के नीचे से किसी बच्ची के रोने की आवाज आई।

माया जम गई।

“वह नीचे है।”

डेनियल ने पूछा—

“कौन?”

माया ने कहा—

“Subject B।”

एलियास ने तुरंत कहा—

“नहीं!”

“मैं उसे ढूंढूंगी।”

“अगर तुम नीचे गईं तो वापस नहीं आओगी।”

माया ने उसकी आंखों में देखा।

“शायद मैं पहले ही वापस नहीं आई।”

डेनियल ने कहा—

“मैं तुम्हारे साथ चलूंगा।”

माया ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“क्यों?”

“अगर यह जगह मुझे चाहती है, तो तुम्हें नहीं जाना चाहिए।”

डेनियल ने कड़वी हंसी के साथ कहा—

“तुम्हें लगता है मैं तुम्हें अकेले जाने दूंगा?”

माया ने कुछ नहीं कहा।

डेनियल उसके पास आया।

“हम साथ जाएंगे।”

एलियास ने कहा—

“तो फिर एक नियम याद रखना।”

डेनियल ने पूछा—

“क्या?”

“अगर नीचे तुम्हें अपनी कोई याद दिखाई दे... उसे मत छूना।”

माया ने पूछा—

“क्यों?”

एलियास ने कहा—

“क्योंकि वह याद नहीं होगी।”

---

फर्श के बीच में एक पतली दरार दिखाई दी।

फिर दूसरी।

फिर तीसरी।

अचानक पत्थर का पूरा हिस्सा नीचे धंस गया।

एक सीढ़ी दिखाई दी।

नीचे अंधेरा।

इतना गहरा कि टॉर्च की रोशनी भी कुछ फीट बाद गायब हो गई।

माया ने नीचे देखा।

उसे लगा जैसे कोई उसे देख रहा है।

फिर आवाज आई—

“माया...”

वह आवाज उसकी अपनी थी।

“माया... नीचे आओ।”

डेनियल ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“मत सुनो।”

माया ने कहा—

“वह मेरी आवाज है।”

एलियास बोला—

“यही सबसे खतरनाक हिस्सा है।”

तीनों नीचे उतरने लगे।

पहली सीढ़ी।

दूसरी।

तीसरी।

चौथी।

हर सीढ़ी के साथ हवा ठंडी होती जा रही थी।

दसवीं सीढ़ी पर पहुंचते ही माया ने दीवार पर कुछ देखा।

एक बच्चे की ड्राइंग।

दो लड़कियां।

एक घर।

और एक लंबा काला आदमी।

नीचे लिखा था—

**हम तीनों दोस्त हैं।**

माया रुक गई।

“ये मैंने बनाया था।”

एलियास ने कहा—

“नहीं।”

“क्या?”

“यह तुमने नहीं बनाया था।”

माया ने ड्राइंग को देखा।

“तो किसने?”

एलियास ने कहा—

“Subject B ने।”

अगली दीवार पर दूसरी ड्राइंग थी।

इस बार दो बच्चियां हाथ पकड़े खड़ी थीं।

बीच में एक महिला।

और पीछे एक विशाल काली आकृति।

नीचे लिखा था—

**मम्मी ने कहा था कि वह हमें ढूंढ नहीं पाएगा।**

माया की आंखों में आंसू आ गए।

“वह कौन है?”

एलियास ने कहा—

“तुम्हारी मां।”

“और वह?”

माया ने काली आकृति की तरफ इशारा किया।

एलियास ने कहा—

“जिसे तुम ब्लैकवेल कहते हो।”

---

सीढ़ियां खत्म हुईं।

सामने एक लंबा गलियारा था।

दीवारों पर दर्जनों दरवाजे।

हर दरवाजे पर एक नंबर।

17-A।

17-B।

17-C।

17-D।

माया ने पूछा—

“इतने सारे कमरे?”

एलियास ने कहा—

“ये कमरे नहीं हैं।”

“फिर?”

“प्रयोग।”

डेनियल ने उसे देखा।

“तुमने यहां प्रयोग किए?”

एलियास चुप रहा।

“कितने बच्चों पर?”

“मैंने नहीं—”

“कितने?”

एलियास ने आंखें झुका लीं।

“सत्रह।”

माया का चेहरा सख्त हो गया।

“सत्रह बच्चे?”

“नहीं।”

“तो?”

एलियास ने कहा—

“सत्रह प्रयास।”

डेनियल ने पूछा—

“किस चीज को बाहर निकालने के?”

एलियास ने जवाब नहीं दिया।

माया ने कहा—

“मेरे अंदर से।”

एलियास ने धीरे से सिर उठाया।

“हां।”

माया कुछ सेकंड तक उसे देखती रही।

फिर उसने पूछा—

“मेरे अंदर क्या था?”

एलियास ने कहा—

“एक उपस्थिति।”

“कहां से आई?”

“यही नहीं पता।”

“किसने डाली?”

“किसी ने नहीं।”

“फिर?”

एलियास ने कहा—

“वह तुम्हारे साथ पैदा हुई थी।”

माया पीछे हट गई।

“नहीं।”

“माया—”

“नहीं।”

उसकी आंखों में आंसू आ गए।

“मेरी मां ने मुझे इसलिए यहां नहीं लाया था कि मैं haunted थी।”

एलियास ने धीरे से कहा—

“नहीं।”

“तो?”

“वह यहां इसलिए आई थी क्योंकि उसे पता चला था कि तुम्हारे अंदर जो है... वह तुमसे पहले भी मौजूद था।”

माया ने पूछा—

“कहां?”

एलियास ने सबसे आखिरी दरवाजे की ओर देखा।

**17-B**

“उसके अंदर।”

---

दरवाजा बंद था।

माया उसके सामने खड़ी हो गई।

दरवाजे पर खरोंचें थीं।

अंदर से आवाज आ रही थी।

एक बच्ची रो रही थी।

“माया...”

माया ने हाथ आगे बढ़ाया।

डेनियल ने कहा—

“रुको।”

“वह अंदर है।”

“हमें पता नहीं वह क्या है।”

“मुझे पता है।”

“क्या?”

माया ने दरवाजे को देखा।

“वह मेरी दूसरी आधी है।”

डेनियल ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“और अगर वह तुम्हारी दूसरी आधी नहीं हुई तो?”

माया ने कहा—

“तो शायद मैं भी माया नहीं हूं।”

डेनियल कुछ नहीं बोल पाया।

माया ने दरवाजा खोला।

---

कमरे के अंदर एक छोटी लड़की बैठी थी।

पीठ उनकी ओर।

बाल कंधों तक।

सफेद कपड़े।

वही छह साल की उम्र।

माया ने धीरे से कहा—

“तुम Subject B हो?”

बच्ची ने सिर हिलाया।

“हां।”

“तुम कौन हो?”

बच्ची धीरे-धीरे मुड़ी।

माया की सांस रुक गई।

क्योंकि बच्ची का चेहरा बिल्कुल उसकी तरह था।

लेकिन उसकी आंखों में गुस्सा था।

“तुमने मुझे छोड़ दिया।”

माया ने कहा—

“मैंने नहीं।”

“तुम्हारी मां ने।”

“मेरी मां ने मुझे भी छोड़ दिया।”

बच्ची मुस्कुराई।

“नहीं।”

वह खड़ी हुई।

“उसने तुम्हें बाहर भेज दिया।”

“और तुम्हें?”

“मुझे यहां छोड़ दिया।”

माया की आंखों से आंसू गिरने लगे।

“क्यों?”

बच्ची ने कहा—

“क्योंकि उसे लगा था कि अगर हम दोनों अलग हो गए...”

वह माया के बिल्कुल सामने आ गई।

“तो वह उसे कैद कर सकती है।”

“किसे?”

बच्ची ने धीरे से पीछे देखा।

कमरे की दीवार पर एक काला निशान था।

“उसे।”

अचानक पूरा कमरा अंधेरे में डूब गया।

एक भारी सांस की आवाज आई।

**ह्ह्ह्ह्ह्ह...**

डेनियल ने टॉर्च घुमाई।

कुछ नहीं।

फिर बच्ची ने माया का हाथ पकड़ लिया।

“वह जाग गया।”

माया ने पूछा—

“कौन?”

बच्ची ने फुसफुसाकर कहा—

“वही जिसने तुम्हें बनाया।”

माया जम गई।

“मेरी मां ने मुझे बनाया था?”

बच्ची ने सिर हिलाया।

“नहीं।”

“फिर कौन?”

कमरे के कोने से आवाज आई।

गहरी।

मानवीय।

लेकिन उसमें हजारों आवाजें मिली हुई थीं।

**“मैंने।”**

डेनियल ने गोली चला दी।

धमाका।

लेकिन गोली दीवार से टकराकर वापस नहीं आई।

वह हवा में रुक गई।

फिर धीरे-धीरे नीचे गिर गई।

डेनियल की आंखें फैल गईं।

“यह क्या...”

काली आकृति दीवार से बाहर निकलने लगी।

पहले हाथ।

फिर कंधे।

फिर सिर।

चेहरा अभी भी नहीं था।

माया ने बच्ची का हाथ कसकर पकड़ लिया।

“भागो!”

बच्ची ने कहा—

“कहां?”

“ऊपर!”

बच्ची ने सिर हिलाया।

“ऊपर अब है ही नहीं।”

माया ने पीछे देखा।

दरवाजा गायब था।

दीवार बंद थी।

डेनियल ने दीवार पर मुक्का मारा।

“माया!”

एलियास पीछे हट गया।

“यह हमें अंदर खींच चुका है।”

माया ने पूछा—

“अब क्या करें?”

एलियास ने कहा—

“अब कुछ नहीं।”

काली आकृति आगे बढ़ी।

माया के सामने आकर रुक गई।

फिर पहली बार उसने हाथ उठाया।

उसकी हथेली पर वही निशान था—

**17**

माया की रिंग जलने लगी।

बच्ची चीखी—

“मत देखो उसकी आंखों में!”

माया ने कहा—

“उसकी आंखें हैं ही नहीं।”

बच्ची ने फुसफुसाया—

“हैं।”

काली आकृति ने अपना सिर उठाया।

और अचानक उसके चेहरे पर दो आंखें खुल गईं।

काली।

गहरी।

अंतहीन।

माया ने उन्हें देख लिया।

दुनिया रुक गई।

---

वह फिर छह साल की थी।

ब्लैकवेल मैनर के बाहर खड़ी।

बारिश।

मां उसका हाथ पकड़े हुए।

दूसरी तरफ वही बच्ची।

Subject B।

लेकिन अब माया को कुछ याद आया।

वह बच्ची उसकी बहन नहीं थी।

वह उसकी परछाई थी।

उसका डर।

उसका गुस्सा।

उसकी सारी वो यादें जिन्हें उसकी मां ने उससे अलग कर दिया था।

माया ने अपनी मां से पूछा था—

“मम्मी, अगर मैं उसे छोड़ दूंगी तो क्या होगा?”

मां रोते हुए बोली थी—

“तुम पूरी हो जाओगी।”

छोटी माया ने पूछा—

“और वह?”

मां ने कुछ नहीं कहा।

छोटी माया ने फिर पूछा—

“वह मर जाएगी?”

मां ने आंखें बंद कर लीं।

और कहा—

“हां।”

फिर छोटी माया ने एक फैसला लिया था।

उसने अपनी सिल्वर रिंग उतारी।

और Subject B को दे दी।

“इसे पहन लो।”

Subject B ने पूछा—

“क्यों?”

छोटी माया ने कहा—

“ताकि मैं तुम्हें भूल न जाऊं।”

अचानक याद टूट गई।

---

माया ने आंखें खोलीं।

वह फिर Room 17-B में थी।

Subject B उसके सामने खड़ी थी।

लेकिन अब उसके हाथ में सिल्वर रिंग थी।

माया ने अपनी उंगली देखी।

उसकी रिंग गायब थी।

बच्ची ने कहा—

“अब याद आया?”

माया की आंखों में आंसू थे।

“तुम मेरी याद हो।”

बच्ची ने कहा—

“नहीं।”

“फिर?”

बच्ची मुस्कुराई।

“मैं तुम्हारी वो जिंदगी हूं... जिसे तुम्हारी मां ने जीने नहीं दिया।”

माया आगे बढ़ी।

“तुम्हारा नाम क्या है?”

बच्ची ने कहा—

“तुम्हीं ने रखा था।”

“क्या?”

बच्ची ने फुसफुसाया—

**“एवा।”**

माया के चेहरे पर अचानक पहचान की चमक आई।

“एवा...”

पीछे एलियास ने यह नाम सुना।

उसके हाथ से नोटबुक गिर गई।

डेनियल ने पूछा—

“क्या हुआ?”

एलियास पीछे हट गया।

“नहीं...”

माया ने उसकी तरफ देखा।

“तुम एवा को जानते हो।”

एलियास ने कहा—

“एवा 2004 में मर गई थी।”

बच्ची ने उसकी तरफ देखा।

“नहीं।”

एलियास की आंखें फैल गईं।

एवा ने कहा—

“मैं कभी बच्ची थी ही नहीं।”

कमरे की दीवारों पर दरारें फैलने लगीं।

माया ने पूछा—

“तो तुम कौन हो?”

एवा ने मुस्कुराकर कहा—

“मैं वही हूं जिसे तुमने अपने अंदर बंद किया था।”

माया का चेहरा जम गया।

“मैंने?”

एवा ने सिर हिलाया।

“हां।”

फिर उसने माया की ओर हाथ बढ़ाया।

“तुमने मुझे यहां कैद किया।”

“क्यों?”

“क्योंकि तुम उससे डरती थीं।”

“किससे?”

एवा ने पीछे खड़ी काली आकृति की ओर देखा।

“उससे नहीं।”

वह माया के कान के पास आई।

और फुसफुसाई—

**“तुम खुद उससे नहीं डरती थीं...”**

एक पल।

**“तुम उससे प्यार करती थीं।”**

माया की आंखें फैल गईं।

काली आकृति ने पहली बार हंसना शुरू किया।

और उसकी हंसी के साथ पूरा ब्लैकवेल मैनर कांप उठा।

ऊपर कहीं एक घड़ी टूटी।

फिर दूसरी।

फिर तीसरी।

हर घड़ी पर एक ही समय था—

**3:17**

और तभी माया की मां की आवाज पूरे मैनर में गूंजी—

**“माया! अगर तुम उसे पहचान गई हो... तो अब तुम्हें यह भी याद रखना होगा कि तुमने उसे क्यों चुना था।”**

माया ने चीखकर पूछा—

“मम्मी! मैंने किसे चुना था?”

कुछ सेकंड तक कोई जवाब नहीं आया।

फिर अंधेरे से आवाज आई—

**“मुझे।”**

माया के सामने खड़ी काली आकृति ने अपना हाथ बढ़ाया।

उसकी उंगलियां माया के चेहरे तक पहुंचीं।

और इस बार...

माया पीछे नहीं हटी।

उसने उसका हाथ पकड़ लिया।

पूरे कमरे में बिजली जैसी सफेद रोशनी फैल गई।

एवा चीखी—

“माया! उसे मत छूना!”

लेकिन देर हो चुकी थी।

माया और उस आकृति के बीच जैसे कोई अदृश्य दरवाजा खुल गया।

और उस दरवाजे के पार...

एक घर दिखाई दिया।

एक परिवार।

एक छोटी लड़की।

एक आदमी।

एक औरत।

और बीच में—

एक छह साल की माया।

लेकिन वह माया ब्लैकवेल मैनर में नहीं थी।

वह किसी और जगह थी।

और उसके सामने खड़ा आदमी...

काली आकृति नहीं था।

वह एक सामान्य इंसान था।

उसने छोटी माया के सिर पर हाथ रखा और कहा—

**“तुम्हें ब्लैकवेल कभी नहीं जाना चाहिए था।”**

फिर स्क्रीन जैसी वह याद अचानक टूट गई।

माया चीखते हुए जमीन पर गिर पड़ी।

उसके सामने एवा घुटनों के बल बैठी थी।

लेकिन अब एवा छह साल की बच्ची नहीं थी।

उसका चेहरा बदल रहा था।

वह बड़ी हो रही थी।

आंखें बदल रही थीं।

चेहरा माया जैसा नहीं...

माया की मां जैसा होता जा रहा था।

और उसने कहा—

**“अब तुम्हें अपने असली पिता को याद करना होगा।”**

माया ने कांपते हुए पूछा—

“मेरे पिता... कौन हैं?”

एवा ने मुस्कुराकर जवाब दिया—

**“वही आदमी जिसने पहली बार ब्लैकवेल को इंसान बनाया था।”**

अंधेरा।

और आखिरी आवाज—

**“और वह अभी जिंदा है।”**

**एपिसोड 5 समाप्त।**

← पिछला भाग

THE HAUNTING OF BLACKWELL MANOR · सभी भाग →

और कहानियाँ · More stories