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भाग 20: सूरज की पहली किरण और ब्लैकवुड मैनर का नया सवेरे
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट
ओकवुड घाटी पर उस खूनी 'ब्लड मून' और गैब्रिएल वैन होलेन के विध्वंसक आक्रमण के बाद जब रात का काला साम्राज्य सिमटने लगा, तो प्रकृति ने एक ऐसा दृश्य प्रस्तुत किया जिसे इस घाटी ने पिछले तीन सौ वर्षों में कभी नहीं देखा था। ब्लैकवुड मैनर के ऊपर छाया वह घना, कुटिल और बर्फीला कोहरा धीरे-धीरे छंटने लगा था। आसमान में सिंदूरी लाली की जगह अब एक शांत, सुनहरी और जीवंत भोर की किरणें बिखर रही थीं।
ग्रैंड हॉल और लाइब्रेरी के टूटे हुए दरवाजे और खिड़कियों से जब सूरज की पहली प्राकृतिक धूप अंदर आई, तो धूल के कणों के साथ-साथ सदियों से जमा वह अंधेरा भी जैसे हवा में घुल गया। वह रोशनी कोई साधारण धूप नहीं थी; वह इस बात का प्रतीक थी कि ब्लैकवुड मैनर पर मंडराने वाला वह शाप और व्लाद का वह अंतहीन अकेलापन आखिरकार टूट चुका था।
नताशा की नई सुबह और आंतरिक बदलाव
नताशा की आँखें धीरे-धीरे खुलीं। उसे ऐसा महसूस हुआ मानो वह किसी गहरी और सुहानी नींद से जागी हो। वह व्लाद की बाहों में सुरक्षित थी। उसके शरीर में एक अजीब सी ऊर्जा और सुकून था—वैसा सुकून जो उसने अपने पूरे जीवन में कभी महसूस नहीं किया था।
उसने अपना हाथ उठाया और अपने सीने पर रखा। उसके गले का वह लाल माणिक वाला हार अब गायब हो चुका था, लेकिन उसकी गर्माहट अभी भी उसकी त्वचा के भीतर रची-बसी थी। वह अब केवल एक साधारण लाइब्रेरियन नहीं रह गई थी; उसकी रूह उस अमर प्रेम और व्लाद की पिशाची दुनिया के साथ इस तरह से जुड़ चुकी थी कि अब मृत्यु या समय का कोई बंधन उस पर असर नहीं डाल सकता था।
व्लाद उसके पास ही लेटा हुआ था। सुबह की वह सुनहरी धूप जब व्लाद के चेहरे पर पड़ी, तो उसकी वह संगमरमर जैसी सफेद और बेजान त्वचा पर हल्की सी गर्माहट की चमक दिखाई दी। तीन सौ सालों में यह पहला मौका था जब व्लाद के चेहरे पर किसी मृत पिशाच का खौफ नहीं, बल्कि एक जीवित इंसान और एक सच्चे प्रेमी की शांति झलक रही थी।
व्लाद ने अपनी पलकें झपकाईं और अपनी गहरी भूरी आँखों से नताशा को देखा। उसके चेहरे पर एक हल्की, तृप्त करने वाली मुस्कान उभर आई।
"सुप्रभात, नताशा..." व्लाद की आवाज़ उस शांत सुबह में किसी संगीत जैसी गूँजी। उसकी आवाज़ का वह भारीपन अब गायब था; उसमें एक अनकहा अपनापन था।
नताशा ने मुस्कुराते हुए अपना सिर व्लाद के सीने पर रख दिया। "सुप्रभात, व्लाद... क्या यह सच है? क्या वह रात सचमुच बीत चुकी है?"
व्लाद ने अपना ठंडा हाथ नताशा के बालों में फिराया। "हाँ, नताशा। वह रात बीत चुकी है। और उसके साथ ही मेरा वह तीन सौ साल पुराना अंधकार भी हमेशा के लिए समाप्त हो गया है। अब यहाँ केवल हम हैं, और यह नया सवेरा है।"
ब्लैकवुड मैनर का बदला हुआ रूप
दोपहर ढलते-ढलते नताशा और व्लाद ने हवेली के भीतर का जायजा लिया। जो हवेली कभी बाहर से एक डरावना और वीरान मज़ार जैसी लगती थी, आज सूरज की रोशनी में उसकी भव्यता और प्राचीन वास्तुकला साफ दिखाई दे रही थी।
लाइब्रेरी की वे दीवारें जिन पर कभी डरावनी परछाइयाँ और जीवित होती हुई तस्वीरें नाचती थीं, अब शांत और स्थिर थीं। तहखाने का वह गुप्त दरवाजा, जो हमेशा एक खौफनाक ठंडक छोड़ता था, अब सामान्य तापमान पर आ चुका था। ऐसा लग रहा था मानो पूरी हवेली ने अपने ऊपर पड़े उस श्राप के बोझ को झाड़कर फेंक दिया हो।
लेकिन इस शांति के बीच, एक नई बात सामने आई।
नताशा जब लाइब्रेरी के उस कोने में पहुँची जहाँ 'क्रोनिकल्स ऑफ ब्लैकवुड' और वह पुरानी काली डायरी रखी थी, तो उसने देखा कि डायरी के पन्ने अब अपने आप पलट रहे थे। नताशा ने चौंककर उसे छुआ।
डायरी के आखिरी पन्नों पर जो भविष्यवाणियाँ और डरावने शब्द लिखे थे, वे धीरे-धीरे फीके पड़कर गायब हो रहे थे। उनकी जगह अब कुछ नए और सुनहरे अक्षर उभर रहे थे। नताशा ने झुककर उन नए अक्षरों को पढ़ा:
"चक्र पूरा हो चुका है। अंधेरा मिटा है, लेकिन इतिहास कभी पूरी तरह दफ़न नहीं होता। ब्लैकवुड मैनर की नींव में अभी भी कुछ ऐसे राज़ दफ़न हैं जो आने वाले दिनों में नए रास्तों को जन्म देंगे।"
नताशा का माथा ठनक गया। उसने डायरी व्लाद को दिखाई।
व्लाद ने उन पंक्तियों को पढ़ा। उसकी भौंहें थोड़ी सिकुड़ गईं। उसके चेहरे की वह शांति एक पल के लिए सतर्कता में बदल गई।
"इसका क्या मतलब है, व्लाद?" नताशा ने चिंता भरे स्वर में पूछा। "थॉमस और गैब्रिएल तो हार चुके हैं। फिर यह नया संदेश क्या कह रहा है?"
व्लाद ने डायरी को बंद किया और खिड़की के बाहर ओकवुड घाटी की तरफ देखा। घाटी का कोहरा पूरी तरह साफ नहीं हुआ था; दूर पहाड़ों के पीछे एक धुंधली सी रेखा अभी भी बाकी थी।
"थॉमस और गैब्रिएल इस खेल के सिर्फ छोटे मोहरे थे, नताशा," व्लाद ने गंभीर स्वर में कहा। "ओकवुड का वह गुप्त समाज सिर्फ एक स्थानीय संगठन नहीं था। उनकी जड़ें सदियों पुरानी उस व्यवस्था से जुड़ी हैं जिसने तीन सौ साल पहले इस घाटी में इस अभिशाप को जन्म दिया था। भले ही हमने इस रात की जंग जीत ली हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे पूरी तरह मिट चुके हैं।"
घाटी से आती एक नई गूँज
शाम होने को थी। आसमान में एक बार फिर से सूरज ढलने के साथ हल्के बैंगनी और नीले बादल छाने लगे थे।
तभी, ब्लैकवुड मैनर के मुख्य लोहे के गेट पर किसी के धीरे से दस्तक देने की आवाज़ आई। वह कोई जोरदार धड़काव या हमला नहीं था, बल्कि एक शिष्ट और रहस्यमयी खनक थी—जैसे कोई बिन बुलाया मेहमान हवेली की देहरी पर खड़ा हो।
नताशा और व्लाद ने एक-दूसरे की तरफ देखा।
"मैं देखता हूँ," व्लाद ने कहा और लंबे कदमों से मुख्य हॉल की तरफ बढ़ा।
नताशा भी उसके पीछे-पीछे मुख्य द्वार तक आई। व्लाद ने हवेली का वह टूटा हुआ मुख्य दरवाजा खोला, जिसे पिछली रात गैब्रिएल ने तोड़ दिया था (वह अब अपनी जगह पर ठीक हो रहा था)।
गेट के बाहर कोई व्यक्ति खड़ा था। वह न तो थॉमस जैसा कट्टर था और न ही गैब्रिएल जैसा शिकारी। उसने एक लंबा, आधुनिक और सुरुचिपूर्ण कोट पहन रखा था। उसके चेहरे पर एक शांत, आत्मविश्वासी मुस्कान थी, और उसके हाथ में एक पुराना चमड़े का ब्रीफकेस था।
उस व्यक्ति ने अपनी टोपी थोड़ी ऊपर उठाई और बहुत ही सधे हुए स्वर में कहा, "नमस्कार, मि. वोल्कोव... और सुश्री नताशा। मुझे उम्मीद है कि मेरा आना इस शांत सवेरे में कोई खलल नहीं डाल रहा है।"
व्लाद की आँखें उस अजनबी को देखकर सिकुड़ गईं। उसकी पिशाची इंद्रियों ने भाप लिया कि यह शख्स साधारण इंसानों या गुप्त समाज के सदस्यों से बिल्कुल अलग था।
"तुम कौन हो, और ब्लैकवुड मैनर की देहरी पर तुम्हारी क्या मर्जी है?" व्लाद की आवाज़ में एक सर्द चेतावनी थी।
अजनबी मुस्कुराया। उसने अपना ब्रीफकेस हल्का सा उठाया और कहा, "मेरा नाम विक्टर रॉथ्सचाइल्ड है। और मैं यहाँ किसी युद्ध के लिए नहीं, बल्कि एक बहुत बड़े सौदे और एक ऐसे सच के साथ आया हूँ जो व्लाद वोल्कोव के अतीत के उन पन्नों को खोलेगा जिन्हें आज तक किसी ने नहीं पढ़ा।"
नताशा ने व्लाद के करीब आकर विक्टर की तरफ देखा। ओकवुड घाटी की इस नई शाम में, एक नया और खामोश तूफान ब्लैकवुड मैनर की देहरी पर दस्तक दे चुका था।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 20 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 7 min
- Words
- 1215
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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