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भाग 19: ब्लड मून की खूनी किरणें और अंतिम मिलन
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 9 मिनट
ओकवुड घाटी के ऊपर आसमान में तना हुआ वह 'ब्लड मून' अब अपने पूर्ण और सबसे डरावने रूप में आ चुका था। आसमान का कोना-कोना और ओकवुड का वह घना जंगल किसी गहरे सिंदूरी और खूनी लाल रंग में रंग चुका था। ब्लैकवुड मैनर की ऊँची, रंगीन काँच वाली खिड़कियों से जब वह खूनी चाँदनी अंदर छनकर आ रही थी, तो पूरी हवेली का अंदरूनी हिस्सा किसी यज्ञ की वेदी या कब्रिस्तान जैसा प्रतीत हो रहा था।
ग्रैंड लाइब्रेरी के भीतर हवा थम सी गई थी। नताशा के गले में वह लाल माणिक वाला हार अब केवल चमक नहीं रहा था, बल्कि उसकी धड़कनें स्पष्ट रूप से सुनाई दे रही थीं—धक-धक... धक-धक... मानों वह हार किसी जीवित प्राणी की तरह साँस ले रहा हो।
व्लाद वोल्कोव उस विशाल खिड़की के सामने खड़ा था, जिसकी ओर सीधे उस खूनी चाँद की रोशनी पड़ रही थी। उसके शरीर पर उस चाँदनी का प्रभाव साफ देखा जा सकता था—उसकी पिशाची ताकत अपनी चरम सीमा पर थी। उसकी आँखें पूरी तरह लाल अंगारे की तरह सुलग रही थीं, लेकिन उन आँखों में कोई क्रूरता नहीं, बल्कि एक गहरा ठहराव और एक अटूट संकल्प था।
हवेली के भीतर का तूफ़ान और अंदरूनी शांति
नताशा धीरे-धीरे चलकर व्लाद के करीब पहुँची। उसके पैरों की आहट उस सन्नाटे में गूँज रही थी। उसने अपना हाथ व्लाद के ठंडे हाथ पर रखा। हमेशा की तरह वह बर्फ जैसी ठंडक थी, लेकिन इस बार नताशा की हथेलियों की गर्माहट ने उस ठंडक को अपने भीतर समाहित कर लिया था।
"व्लाद..." नताशा की आवाज़ बहुत शांत और दृढ़ थी। "वह समय आ गया है, है ना? वह चक्र जिसके लिए आपने सदियों का यह खौफनाक अंधेरा झेला है।"
व्लाद ने अपनी नजरें खिड़की से हटाकर नताशा के चेहरे पर टकाईं। उसकी लाल आँखें धीरे-धीरे थोड़ी शांत हुईं, और उसकी आवाज़ उस मखमली गूँज के साथ बाहर आई: "हाँ, नताशा। पूर्णचंद्र अपने केंद्र पर है। सदियों का यह अभिशाप... यह अकेलापन... आज रात या तो हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा, या फिर हम दोनों इस हवेली की मिट्टी में हमेशा के लिए दफ़न हो जाएंगे।"
"हम दफ़न नहीं होंगे, व्लाद," नताशा ने विश्वास के साथ कहा। उसने अपना दूसरा हाथ व्लाद के सीने पर रखा, जहाँ उसका दिल धड़कता था—या नहीं धड़कता था। "मैंने डर को बहुत पहले पीछे छोड़ दिया है। मैं जानती हूँ कि मैं कौन हूँ और मेरा यह सफर कहाँ तक है। अगर यह मेरा और आपका अंतिम मिलन है, तो मैं इस अंधेरे को अपनी पूरी रूह से अपनाने के लिए तैयार हूँ।"
व्लाद के चेहरे पर एक ऐसी अलौकिक और असीम शांति उभरी जो उसने तीन सौ साल में कभी महसूस नहीं की थी। उसने अपना एक हाथ नताशा की कमर के गिर्द रखा और दूसरे हाथ से उसके बालों को सहलाया।
"तुम नतालिया की सिर्फ परछाई नहीं हो, नताशा..." व्लाद ने उसके कान के पास फुसफुसाते हुए कहा। "तुम उससे भी कहीं ज्यादा ताकतवर हो। तुमने इस पिशाच के दिल में एक बार फिर इंसानियत की धड़कन जगा दी है।"
दोनों के बीच की वह दूरी, जो कभी डर और भ्रम की वजह से बनी थी, अब पूरी तरह मिट चुकी थी। वे दोनों एक-दूसरे की बाहों में उस खूनी चाँदनी के साये में खड़े थे, मानों दुनिया की बाकी सारी ताकतें, वे गुप्त समाज, और वह वैम्पायर हंटर कहीं दूर किसी दूसरी दुनिया में अस्तित्वहीन हो चुके हों।
बाहर मंडराता अंतिम खतरा: गैब्रिएल का प्रलयकारी हमला
लेकिन यह शांति बहुत देर तक टिकने वाली नहीं थी।
अचानक, ब्लैकवुड मैनर के मुख्य प्रवेश द्वार पर किसी भारी विस्फोटक या वज्रपात जैसी भयानक आवाज़ गूँजी।
धड़ऽऽऽ...!
पूरी हवेली उस धमाके से अंदर तक कांप उठी। मुख्य हॉल की पुरानी खिड़कियों के शीशे एक झटके में चकनाचूर होकर फर्श पर बिखर गए। हवा का एक तेज और बर्फीला झोंका अंदर घुस आया, जिसके साथ ही जलती हुई गंध और राख का गुबार फैल गया।
व्लाद और नताशा ने झटके से पीछे मुड़कर देखा।
मुख्य द्वार का वह भारी महोगनी कपाट, जिसे सदियों से कोई नहीं तोड़ पाया था, अब टुकड़ों में बिखर चुका था। उस टूटे हुए दरवाजे के फ्रेम के बीचों-बीच खड़ा था—गैब्रिएल वैन होलेन।
उसके हाथ में एक भारी, प्राचीन तोप जैसी दिखने वाली क्रॉस-बो थी, जिसके सिरे से अभी भी बारूद का धुआँ निकल रहा था। उसके पीछे एल्डर थॉमस और गुप्त समाज के कुछ बचे हुए सदस्य अपनी चाँदी की मशालें लिए खड़े थे। गैब्रिएल के चेहरे पर खून और गुस्से के निशान थे, और उसकी नीली आँखें पूरी तरह पागलपन की हद तक चमक रही थीं।
"खेल खत्म हो गया, व्लाद वोल्कोव!" गैब्रिएल की कर्कश और गूँजती हुई आवाज़ पूरे हॉल में गूँज उठी। "वह खून और वह अमरता का चक्र आज रात यहीं टूटेगा! इस हवेली को राख बनाने से अब कोई ताकत नहीं रोक सकती!"
आखिरी जंग: प्रकाश और अंधकार का टकराव
व्लाद ने नताशा को अपनी पीठ के पीछे सुरक्षित किया। उसके चेहरे की शांत और भावुक मुद्रा एक पल में एक भयंकर और प्रलयकारी योद्धा के रूप में बदल गई। उसकी आँखें खून की तरह लाल हो गईं और उसके शरीर से एक ऐसी अदृश्य ऊर्जा बाहर निकलने लगी जिससे कमरे का तापमान शून्य से भी कई गुना नीचे चला गया।
"तुम बाज नहीं आओगे, गैब्रिएल," व्लाद की आवाज़ गड़गड़ाहट जैसी थी। "तुम अपनी उस छोटी सी ज़िंदगी के अहंकार में यह भूल चुके हो कि तुम किसके सामने खड़े हो।"
गैब्रिएल हँसा। उसकी हँसी में कोई इंसानियत नहीं थी। उसने अपनी क्रॉस-बो को सीधा व्लाद की छाती पर साधा। उस तीर के सिरे पर कोई साधारण नोक नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ा, शुद्ध चाँदी का संन्यासी त्रिशूल नुमा खंजर बंधा हुआ था जिस पर अनगिनत पवित्र मंत्र खुदे हुए थे।
"यह त्रिशूल सीधे तुम्हारी उस आत्मा को चीर देगा, व्लाद!" गैब्रिएल चिल्लाया। "और वह लड़की... वह भी इस आग में तुम्हारे साथ ही भस्म होगी!"
गैब्रिएल ने ट्रिगर दबा दिया।
ष्सूँय... की एक तीखी आवाज़ के साथ वह पवित्र चाँदी का तीर बिजली की रफ्तार से सीधे व्लाद की तरफ बढ़ा।
"व्लाद!" नताशा की चीख निकल पड़ी।
लेकिन व्लाद अपनी जगह से हिला तक नहीं। जैसे ही वह तीर उनके बेहद करीब पहुँचा, नताशा के गले में चमकने वाले उस लाल माणिक वाले हार ने एक बार फिर से अपनी पूरी शक्ति के साथ विस्फोट जैसी रोशनी छोड़ दी।
वह लाल रोशनी कोई साधारण चमक नहीं थी; वह तीन सौ साल के उस दर्द, उस प्रेम और उस अटूट विश्वास का प्रकटीकरण थी। उस रोशनी का गोला इतना विशाल था कि उसने पूरे हॉल को अपनी चपेट में ले लिया।
जब वह चाँदी का तीर उस लाल रोशनी के दायरे में आया, तो वह हवा में ही रुक गया। पवित्र मंत्रों से लैस वह शक्तिशाली तीर उस माणिक की ऊर्जा को सहन नहीं कर पाया और देखते-देखते हवा में ही पिघलकर राख में बदल गया!
गैब्रिएल और थॉमस का खौफ
गैब्रिएल की आँखें फटी की फटी रह गईं। उसका मुँह खुला का खुला रह गया। "यह... यह नामुमकिन है! वह चाँदी का तीर... वह ऐसे कैसे राख हो सकता है?!"
थॉमस और उसके साथी डर के मारे पीछे हटने लगे। उनके हाथों से मशालें छूटकर फर्श पर गिरने लगीं। वे समझ चुके थे कि यह लड़ाई किसी साधारण पिशाच और इंसानों की नहीं थी; यह दो अलग-अलग दुनियाओं की ताकतों का वह मिलन था जिसे कोई भी बाहरी ताकत हरा नहीं सकती थी।
व्लाद ने हवा में अपना हाथ आगे बढ़ाया। उसकी पिशाची ताकत ने गैब्रिएल को जमीन से हवा में उठा लिया। गैब्रिएल का दम घुटने लगा, उसके हाथ से वह भारी क्रॉस-बो छूटकर नीचे गिर गई।
"तुमने मेरी और नताशा की दुनिया में दखल देकर बहुत बड़ी भूल की है, गैब्रिएल," व्लाद की आवाज़ उस हॉल की हर दीवार से टकराकर गूँज रही थी। "यह घाटी, यह हवेली और यह रूह... हमारी है।"
व्लाद ने एक ज़ोरदार झटका दिया, और गैब्रिएल हवा में उड़ते हुए सीधे मुख्य द्वार के बाहर उस बर्फीले बागीचे में जा गिरा। वह बेहोश होकर बर्फ में गिर पड़ा। थॉमस और उसके बाकी बचे साथी अपने इस सबसे घातक शिकारी को गिरते देख दहशत में आ गए। वे "शैतान... यह शैतान है!" चिल्लाते हुए रात के अंधेरे और कोहरे में अपनी जान बचाकर भाग खड़े हुए।
पूर्णचंद्र का चरम और रूहों का पूर्ण मिलन
हवेली के भीतर एक बार फिर से सन्नाटा छा गया।
मुख्य द्वार के टूटे हुए हिस्से से वह खूनी लाल चाँदनी सीधे लाइब्रेरी और ग्रैंड हॉल के फर्श पर आ रही थी। ब्लड मून अब अपने बिल्कुल केंद्र में था—अपनी पूरी भव्यता और प्रलयकारी सुंदरता के साथ।
व्लाद ने मुड़कर नताशा की तरफ देखा। उसकी आँखों की लालिमा अब शांत हो चुकी थी और उसकी गहरी भूरी आँखें पूरी तरह से एक प्रेमी की आँखों में बदल चुकी थीं। उसने अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए।
नताशा ने बिना एक पल गंवाए आगे बढ़कर खुद को व्लाद की बाहों में सौंप दिया।
जैसे ही नताशा ने व्लाद को गले लगाया, उसके गले का वह लाल माणिक वाला हार टूटकर हवा में बिखर गया, और उसकी सारी ऊर्जा उन दोनों के शरीर के भीतर समा गई। उस पल, नताशा को ऐसा महसूस हुआ मानो उसकी अपनी आत्मा और व्लाद की आत्मा के बीच की सारी दीवारें हमेशा के लिए टूट चुकी हों।
समय थम चुका था। ओकवुड घाटी का वह घना कोहरा अचानक छंटने लगा था, और आसमान में जो खूनी चाँद था, उसकी रंगत धीरे-धीरे एक शांत और पवित्र सुनहरी रोशनी में बदलने लगी थी—मानो सदियों पुराना वह शाप, वह दर्द और वह अभिशाप अंततः अपनी पूर्णमुक्ति को प्राप्त हो चुका हो।
व्लाद ने नताशा के माथे पर अपना होंठ रखा। उसकी ठंडी त्वचा में अब जीवन की वह गर्माहट महसूस हो रही थी जो तीन सौ साल पहले खो गई थी।
"मेरा इंतज़ार खत्म हुआ, नताशा..." व्लाद की आवाज़ उसके कान में गूँजी, जिसमें अब कोई दर्द नहीं, बल्कि असीम शांति और अमर प्रेम का संगीत था। "अब हम हमेशा के लिए एक हो चुके हैं... हर दिन, हर पल, हर जन्म के लिए।"
नताशा ने अपनी आँखें बंद कर लीं और व्लाद की बाहों में खुद को पूरी तरह छोड़ दिया। ब्लैकवुड मैनर की वे दीवारें, जो कभी डर और खौफ की गवाह हुआ करती थीं, अब इस अमर प्रेम और पुनर्जन्म की इस महागाथा की सबसे बड़ी साक्षी बन चुकी थीं।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 19 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 9 min
- Words
- 1689
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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