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भाग 11: पहला कड़ा अहसास और व्लाद की रहस्यमयी चेतावनी
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 6 मिनट
ओकवुड वैली के गुप्त समाज—'ऑर्डर ऑफ द सिल्वर क्रूसिबल'—के सदस्यों के अचानक हुए इस खौफनाक हमले और उनके बीच हुई उस तीव्र झड़प के बाद, ब्लैकवुड मैनर की ग्रैंड लाइब्रेरी में एक भारी और दमघोंटू सन्नाटा पसर गया था। हवा में अभी भी उस प्राचीन चाँदी के खंजर और मशालों की जली हुई गंध तैर रही थी।
नताशा का पूरा शरीर इस संघर्ष के बाद शिथिल पड़ चुका था। उसने अपनी आँखें बंद कर ली थीं और उसके मन में केवल एक ही सवाल बार-बार घूम रहा था—क्या यह जीवन सचमुच उसका अपना है, या वह किसी सदियों पुरानी कहानी का महज़ एक मोहरा मात्र बनकर रह गई है?
सन्नाटे के बीच उठी सुलगती चिंगारी
व्लाद लाइब्रेरी के उस टूटे हुए मुख्य दरवाज़े के पास चुपचाप खड़ा था। उसकी नजरें बाहर उस घने कोहरे और अंधेरे की तरफ टिकी हुई थीं जहाँ से वे लोग आए थे। उसके लंबे कोट का पल्ला हल्की हवा में उड़ रहा था, और उसका चेहरा किसी पत्थर की मूरत की तरह सख्त और अडिग था।
नताशा धीरे-धीरे आगे बढ़ी और काँपते हुए स्वर में बोली, "व्लाद... वे लोग कौन थे और वे बार-बार उस चक्र के पूरा होने की बात क्यों कर रहे थे? क्या उनका मकसद सिर्फ मुझे तुमसे अलग करना है, या इस हवेली के पीछे कोई और भी बहुत बड़ा राज छिपा है?"
व्लाद ने अपनी गर्दन थोड़ी सी मोड़ी और अपनी गहरी, शांत आँखों से नताशा की तरफ देखा। उसकी लालिमा पूरी तरह छट चुकी थी, और उसकी आँखें अब किसी गहरे और शांत समुद्र जैसी लग रही थीं।
"वे लोग डरते हैं, नताशा," व्लाद की भारी और मखमली आवाज़ उस सन्नाटे को चीरती हुई गूँजी। "वे उस सच से डरते हैं जिसे वे कभी समझ नहीं पाए। तीन सौ साल पहले भी उनके पूर्वजों ने यही गलती की थी—उन्होंने अज्ञानता और अंधविश्वास के डर में आकर उस आग को जन्म दिया था जिसे बुझाने में सदियाँ बीत गईं। थॉमस और उसका वह गुप्त समाज यह कभी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा कि मेरा यह अधूरा अध्याय पूरा हो।"
"लेकिन मुझे इस सबकी सजा क्यों मिल रही है?" नताशा की आँखों में आँसू छलक आए। उसने अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा, "मैं तो सिर्फ एक लाइब्रेरियन के रूप में इस हवेली में आई थी! मेरा आपके उस अतीत से, उस नतालिया से क्या लेना-देना है?"
व्लाद ने अपनी जगह छोड़ी और बहुत ही धीमी गति से चलकर नताशा के बिल्कुल करीब आ गया। उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया और बहुत कोमलता से नताशा के कंधे पर रखा। हमेशा की तरह उसका स्पर्श बर्फ जैसा ठंडा था, लेकिन इस बार उस ठंडक में किसी खौफ के बजाय एक अजीब सा सुकून और अपनापन छुपा हुआ था।
"लेना-देना है, नताशा," व्लाद ने बहुत नपे-तुले शब्दों में कहा। "इस कायनात में कोई भी चीज़ इत्तेफाक से नहीं होती। तुम्हारा इस घाटी में आना, इस हवेली की देहरी पर कदम रखना, और उस डायरी के पन्नों का तुम्हारे हाथों से खुलना—यह सब उस नियति का हिस्सा है जिसे बदला नहीं जा सकता। तुम उस अक्स से कहीं आगे निकल चुकी हो।"
पहला कड़ा अहसास और आंतरिक बदलाव
व्लाद के उन शब्दों ने नताशा के दिल के भीतर किसी गहरी छुपे हुए अहसास को जगा दिया। उसने महसूस किया कि पिछले कुछ दिनों में उसका यह डर धीरे-धीरे एक अजीब से आकर्षण में बदल रहा था। वह जो व्लाद को एक राक्षस और खूनी समझकर भागने के सपने देखती थी, अब उसी व्लाद की आँखों में अपने लिए वह सदियों पुराना दर्द और बेइंतहा चाहत साफ देख पा रही थी।
क्या यह किसी सम्मोहन का असर था? या फिर सचमुच उसकी रूह उस अतीत के धागों से इस कदर बंध चुकी थी कि वह चाहकर भी खुद को अलग नहीं कर सकती थी?
नताशा ने अपनी आँखें उठाकर सीधे व्लाद की आँखों में देखा। उसने अपनी आवाज़ में एक अजीब सी दृढ़ता लाते हुए कहा, "अगर यह मेरा भाग्य है... अगर मुझे इस अंधेरे का सामना करना ही है, तो मुझे सच जानना है, व्लाद। मुझे वह पूरा सच बताओ जो इस हवेली के तहखाने और इन किताबों के पन्नों के पीछे छिपा है।"
व्लाद के चेहरे पर एक हल्की सी, संतोषजनक मुस्कान उभर आई। उसके नुकीले कैनाइन दाँत मद्धम रोशनी में एक पल के लिए चमके।
"सच बहुत भयानक है, नताशा," व्लाद ने कहा, और उसका हाथ नताशा के कंधे से खिसककर उसकी कलाई पर आ गया। "एक बार जब तुम उस सच को पूरी तरह जान लोगी, तो तुम्हारे लिए इस हवेली से कभी वापस लौटना मुमकिन नहीं होगा। तुम पूरी तरह मेरी हो जाओगी... हर दिन, हर पल के लिए।"
"मैं पहले ही तुम्हारी कैद में हूँ, व्लाद," नताशा ने बिना किसी डर के कहा। "अब मुझे इस कैद से कोई डर नहीं लगता।"
रात की चेतावनी और नया खतरा
व्लाद ने नताशा की कलाई को हल्के से दबाया, और ठीक उसी क्षण हवेली की बड़ी घड़ी ने रात के दस बजाए।
टंग... टंग... टंग...
घड़ी की गूँज के साथ ही बाहर ओकवुड घाटी के मौसम ने एक बार फिर खौफनाक करवट ली। आसमान में जो बादल छंटे हुए थे, वे अचानक और अधिक घने और काले होकर उमड़ पड़े। हवा में एक अजीब सी सरसराहट तेज हो गई—मानो सैकड़ों चमगादड़ और अदृश्य परछाइयाँ एक बार फिर ब्लैकवुड मैनर को घेरने के लिए निकल पड़ी हों।
व्लाद ने खिड़की की तरफ देखा, उसकी आँखें एक बार फिर से चेतावनी के भाव से भर गईं।
"वक्त बहुत कम बचा है, नताशा," व्लाद ने गंभीर स्वर में कहा। "थॉमस और उसका समाज शांत नहीं बैठेगा। वे जानते हैं कि अगला पूर्णचंद्र ही इस चक्र का आखिरी मौका है। तुम्हें अब बहुत सतर्क रहना होगा। इस हवेली की कोई भी दीवार या कोई भी कमरा अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।"
नताशा ने दृढ़ता से सिर हिलाया। उसने महसूस किया कि अब वह केवल एक डरने वाली युवती नहीं थी, बल्कि वह इस खौफनाक और अमर प्रेम की कहानी का एक मुख्य हिस्सा बन चुकी थी—एक ऐसा हिस्सा जिसे व्लाद हर दिन, हर पल अपनी बाहों में सुरक्षित रखना चाहता था।
लेकिन उस रात जब नताशा अपने कमरे में सोने गई, तो उसे अहसास हुआ कि खतरा सिर्फ बाहर के गुप्त समाज से नहीं था, बल्कि हवेली के भीतर की उन दीवारों से भी था जो धीरे-धीरे उसके अपने ही अतीत और व्लाद के भविष्य के बीच की दूरी को मिटा रही थीं।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 11 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 6 min
- Words
- 1049
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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