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भाग 12: नताशा का अतीत और व्लाद के साथ उसका पुराना कनेक्शन
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट
ओकवुड वैली के गुप्त समाज के उस हमले के बाद ब्लैकवुड मैनर की हवाओं में एक अजीब सा तनाव घुल चुका था। रात के सन्नाटे में हवेली की दीवारें और भी ज्यादा रहस्यमयी लग रही थीं। लाइब्रेरियन की मेज़ पर बैठी नताशा के मन में विचारों का एक ऐसा बवंडर चल रहा था जो थमने का नाम नहीं ले रहा था। थॉमस और उसके समाज के वे शब्द—“वह लड़की सिर्फ एक बलि का बकरा है जिसे तुम अपने पापी अमरत्व को जिंदा रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हो”—बार-बार उसके कानों में गूँज रहे थे।
लेकिन उन धमकियों से ज्यादा नताशा के दिल में एक गहरा और अनसुलझा सवाल था—उसका अपना अतीत और व्लाद के साथ उसका यह पुराना कनेक्शन। क्या वह सचमुच केवल तीन सौ साल पुरानी किसी मृत प्रेमिका का एक चेहरा भर थी, या फिर उसकी अपनी आत्मा का कोई ऐसा कोना था जो इस हवेली और इस पिशाच के साथ जन्म-जन्मांतर से जुड़ा हुआ था?
सबसे ऊपरी मंजिल का वह गुप्त कक्ष (The Attic Chamber)
आधी रात का वक्त हो चुका था। लाइब्रेरी का काम समेट ही रही नताशा को अचानक ऐसा लगा मानो हवेली की सबसे ऊपरी मंजिल—यानी उस प्राचीन टॉवर से कोई उसे पुकार रहा हो। वह आवाज़ कानों से नहीं, बल्कि सीधे उसके दिल से आ रही थी।
नताशा ने बिना किसी डर के अपनी जगह छोड़ी और ग्रैंड लाइब्रेरी से बाहर निकलकर मुख्य सीढ़ियों की तरफ बढ़ गई। उसने उन घुमावदार, संकरी सीढ़ियों को पार किया जो सामान्यतः बंद रहती थीं और सीधे हवेली के सबसे ऊंचे हिस्से—अटारी (Attic) की ओर जाती थीं।
यहाँ की हवा बिल्कुल अलग थी। यहाँ धूल की परत और पुरानी लकड़ी की महक के साथ ओकवुड घाटी की बर्फीली हवा की ठंडक घुली हुई थी। टॉवर के बीचों-बीच एक भारी लकड़ी का दरवाज़ा था जिस पर कोई ताला नहीं लगा था, बल्कि वह हल्का सा खुला हुआ था। अंदर से सुनहरी और मद्धम मोमबत्ती की रोशनी बाहर आ रही थी।
नताशा ने धड़कते दिल से उस दरवाजे को थोड़ा और धक्का दिया।
कमरे के अंदर का नज़ारा किसी जादुई दुनिया जैसा था। यह जगह हवेली के बाकी हिस्सों की तरह खौफनाक या डरावनी नहीं थी, बल्कि यहाँ एक अजीब सा सुकून और ठहराव था। चारों तरफ पुरानी पेंटिंग्स, अलमारियों में सजे हुए हस्तनिर्मित आभूषण, रेशमी और मखमली लिबास, और बीचों-बीच एक प्राचीन लकड़ी का बॉक्स रखा था।
और उस बॉक्स के पास खड़ा था—व्लाद वोल्कोव।
व्लाद ने आज अपना लंबा काला कोट नहीं पहना था। उसकी सफेद शर्ट के बटन खुले हुए थे और उसके चेहरे पर एक ऐसी शांति थी जिसे नताशा ने पहले कभी नहीं देखा था।
अतीत के संदूकों से बाहर आते सच
व्लाद ने मुड़कर नताशा को देखा। उसकी आँखों में कोई लाल चमक या क्रूरता नहीं थी, बल्कि एक गहरा, पारदर्शी अपनापन था।
"मुझे पता था कि तुम आओगी, नताशा," व्लाद की मखमली और शांत आवाज़ उस छोटे से कमरे में गूँजी। "इस हवेली के कोने-कोने में मेरा अतीत बिखरा है, लेकिन यह कमरा... यह वह जगह है जहाँ नतालिया और मैंने अपने जीवन के सबसे हसीन पल बिताए थे।"
नताशा धीरे-धीरे कमरे के अंदर दाखिल हुई। उसके पैर उस प्राचीन लकड़ी के फर्श पर बिना किसी आवाज़ के पड़ रहे थे। उसने कमरे में रखी चीज़ों को छुआ। अजीब बात यह थी कि उन पर जमी धूल के बावजूद नताशा को ऐसा लग रहा था मानो वह इन सारी चीज़ों को बहुत अच्छी तरह जानती हो। बचपन में उसके द्वारा देखी गई कुछ धुंधली यादें अचानक उसकी आँखों के सामने तैरने लगीं—एक घाटी, एक पुराना पुल, और एक साया जो हमेशा उसके सपनों में पहरा देता था।
"व्लाद..." नताशा की आवाज़ काँप उठी। "बचपन से मुझे हमेशा ऐसा क्यों लगता था कि मैं शहर की भीड़भाड़ से ताल्लुक नहीं रखती? क्यों मुझे हमेशा उस वीरान घाटी और इस हवेली के सपने आते थे? क्या... क्या यह सब सच है?"
व्लाद उस लकड़ी के संदूकों के पास से उठा और धीरे-धीरे नताशा के करीब आया। उसने अपने ठंडे हाथों से नताशा के हाथों को अपने हाथों में थाम लिया। इस बार वह ठंडक नताशा को डरा नहीं रही थी, बल्कि उसके भीतर एक अजीब सी उष्णता पैदा कर रही थी।
"क्योंकि तुम्हारी रूह कभी इस हवेली से बाहर गई ही नहीं थी, नताशा," व्लाद ने बहुत ही कोमल स्वर में कहा। "तीन सौ साल पहले जब आग ने नतालिया के जिस्म को जलाया था, तब उसकी आखिरी साँस में एक वादा था—कि वह इस अधूरे सफर को पूरा करने के लिए वापस आएगी। रूहें अपना पता कभी नहीं भूलतीं, नताशा। तुम सिर्फ उसकी शक्ल नहीं हो... तुम वही आत्मा हो जो नए रूप और नए नाम के साथ इस चक्र को पूरा करने लौटी है।"
आत्मा का अटूट बंधन (The Soul Bond)
नताशा की आँखों से आँसू छलक आए। वह खुद को संभाल नहीं पा रही थी। तार्किक और आधुनिक दुनिया से ताल्लुक रखने वाली नताशा के लिए इन बातों को स्वीकार करना आसान नहीं था, लेकिन उसका दिल और उसकी अपनी यादें गवाही दे रही थीं कि व्लाद झूठ नहीं कह रहा था।
"लेकिन व्लाद..." नताशा ने अपने आँसू पोंछते हुए कहा, "थॉमस और वह गुप्त समाज... वे कहते हैं कि यह सब एक अमरता का खेल है, एक बलि है। क्या यह सच है कि तुम्हें जिंदा रहने के लिए मेरे खून की जरूरत है?"
व्लाद के चेहरे पर एक दर्दनाक मुस्कान उभर आई। उसने अपना दूसरा हाथ उठाया और नताशा के गाल को बहुत नरमी से छुआ।
"इंसान हमेशा उस चीज़ से डरता है जिसे वह समझ नहीं सकता," व्लाद ने कहा। "मुझे जिंदा रहने के लिए इंसानी खून की भूख नहीं है, नताशा। वह तो सिर्फ कहानियाँ हैं जो डरपोक लोगों ने गढ़ी हैं। असली भूख... असली प्यास तो इस बात की है कि मेरा यह दिल सदियों से वीरान पड़ा है। जब तुम मेरे करीब होती हो, तो मुझे ऐसा महसूस होता है कि मेरा वह बीता हुआ कल वापस लौट आया है।"
व्लाद ने संदूकों में रखे उस प्राचीन लकड़ी के बॉक्स को खोला और उसके अंदर से एक चमकती हुई चीज़ बाहर निकाली। वह एक खूबसूरत चाँदी का हार था, जिसके बीचों-बीच एक लाल माणिक (Ruby) जड़ा हुआ था—वही हार जो उस 300 साल पुरानी पेंटिंग में नतालिया के गले में लटका हुआ था।
व्लाद ने उस हार को उठाया और नताशा के गले में पहना दिया। जैसे ही वह ठंडा हार नताशा की त्वचा से छुआ, उसके पूरे शरीर में एक बिजली सी दौड़ गई। उसके दिमाग में अचानक सदियों पुरानी यादों का एक सैलाब उमड़ पड़ा—वह देख सकती थी कि कैसे व्लाद और वह इस घाटी में कभी बेइंतहा मोहब्बत किया करते थे।
आने वाले तूफान की आहट
"अब यह पहचान पूरी हो चुकी है," व्लाद ने नताशा की आँखों में देखते हुए कहा। "पूर्णचंद्र की वह रात अब बहुत नजदीक है। जिस दिन वह चाँद पूरी तरह खूनी रंग में रंगेगा, उस दिन इस चक्र का अंतिम चरण शुरू होगा। या तो हम हमेशा के लिए एक हो जाएंगे, या फिर..."
व्लाद अपनी बात पूरी नहीं कर पाया, क्योंकि तभी उस अटारी के बाहर की खिड़की पर किसी भारी चीज़ के टकराने की आवाज़ आई।
धड़!
कमरे का तापमान एक झटके में शून्य से नीचे गिर गया। खिड़की के बाहर, उस घने कोहरे के बीच से कुछ साये मंडराते हुए दिखाई दिए। वे ओकवुड के गुप्त समाज के लोग थे, जो अब हवेली के अंदर तक सेंध लगाने की कोशिश कर रहे थे। उनके हाथों में जलती हुई चाँदी की मशालें थीं जिनकी रोशनी उस कोहरे को चीर रही थी।
व्लाद की आँखें एक बार फिर से लाल हो गईं। उसने नताशा को अपनी बाहों की सुरक्षा में लेते हुए कहा, "लगता है वे लोग अब और इंतजार करने के मूड में नहीं हैं। लेकिन नताशा, याद रखना... चाहे कुछ भी हो जाए, मैं तुम्हें कभी खुद से अलग नहीं होने दूंगा।"
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 12 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 7 min
- Words
- 1291
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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