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भाग 13: हवेली का प्रतिबंधित खंड (Forbidden Wing)
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट
अटारी के उस गुप्त कक्ष के बाहर खिड़की पर पड़ी वह टक्कर और कोहरे के बीच से आती चाँदी की मशालों की रोशनी ने पल भर में माहौल को पूरी तरह बदल दिया था। ब्लैकवुड मैनर की प्राचीन दीवारों के भीतर एक बार फिर से खतरे की घंटियाँ बज उठी थीं। ओकवुड वैली का वह गुप्त समाज—'ऑर्डर ऑफ द सिल्वर क्रूसिबल'—अब हवेली के बाहरी घेरे को तोड़कर अंदर दाखिल होने की फिराक में था।
नताशा के गले में वह चाँदी का हार चमक रहा था, जिसमें जड़ा लाल माणिक मानों उसकी अपनी धड़कनों के साथ ताल मिला रहा था। व्लाद की आँखें गुस्से से सुलग उठी थीं। उसने बिना एक भी पल गंवाए नताशा का हाथ पकड़ा और कहा, "यहाँ रुकना अब सुरक्षित नहीं है। वे लोग हवेली के मुख्य दरवाज़े को पार कर चुके हैं। मेरे साथ आओ।"
प्रतिबंधित खंड का गुप्त मार्ग
व्लाद नताशा को अटारी के एक कोने में ले गया जहाँ एक पुरानी, धूल से सनी भारी अलमारी रखी थी। व्लाद ने अपनी उंगलियों से अलमारी के पीछे बने एक गुप्त लीवर को खींचा। एक भारी घरघराहट के साथ वह अलमारी अपनी जगह से खिसक गई और उसके पीछे एक अंधेरी, संकरी सुरंग जैसी सीढ़ी दिखाई देने लगी।
"यह क्या है?" नताशा ने चौंककर पूछा।
"यह इस हवेली का सबसे गोपनीय हिस्सा है—प्रतिबंधित खंड (Forbidden Wing)," व्लाद ने तेजी से सीढ़ियों की तरफ कदम बढ़ाते हुए कहा। "इस हिस्से के बारे में ओकवुड के इतिहास में भी कोई ज़िक्र नहीं है। यहाँ केवल वे राज दफ़न हैं जो मेरे अस्तित्व और इस अमरता के शुरुआती दिनों से जुड़े हैं।"
दोनों ने उस संकीर्ण सुरंग में प्रवेश किया और व्लाद ने पीछे से गुप्त दरवाजे को बंद कर दिया। बाहर की आवाजें अब धीमी हो चुकी थीं, लेकिन हवा में ठंडक और भी ज्यादा बढ़ गई थी। सीढ़ियाँ खत्म होने के बाद वे एक ऐसे लंबे गलियारे में निकले जिसकी दीवारें काले संगमरमर की बनी थीं।
यहाँ की हवा में सदियों पुरानी शराब, मोम और एक अजीब सी सुवासित लकड़ी की महक थी। गलियारे की दोनों तरफ बड़ी-बड़ी तस्वीरें टंगी थीं, लेकिन ये वे तस्वीरें नहीं थीं जो मुख्य हॉल में थीं। इन तस्वीरों में वे चेहरे थे जो इंसानी इतिहास की किताबों में कभी दर्ज ही नहीं हुए—वे प्राचीन पिशाच और सामंत जो व्लाद के परिवार और उसकी वंशीय परंपरा का हिस्सा रहे थे।
प्रतिबंधित खंड के भीतर छिपे राज़
नताशा उस गलियारे से गुजरते हुए हर एक तस्वीर को बड़े गौर से देख रही थी। उसे ऐसा लग रहा था मानो ये दीवारें उससे कुछ कहना चाहती हों।
"व्लाद, हम यहाँ क्यों आए हैं?" नताशा ने अपनी साँस को नियंत्रित करते हुए पूछा। "थॉमस और उसका समाज हमें ढूँढ रहा है। क्या वे इस गुप्त खंड तक पहुँच सकते हैं?"
व्लाद एक भारी लकड़ी के दरवाजे के सामने रुका और अपनी जेब से एक पुरानी चाबी निकालकर ताला खोला। उसने कहा, "वे इस हवेली के पत्थरों को तोड़ सकते हैं, नताशा, लेकिन वे इस प्रतिबंधित खंड के रास्ते कभी नहीं ढूंढ पाएंगे। यह जगह केवल उस खून और उस रूह के लिए खुली है जो इसके काबिल हो।"
दरवाजा खुला और वे एक विशाल, भव्य कक्ष में दाखिल हुए। यह कमरा किसी प्राचीन राजा के दरबार जैसा था। बीचों-बीच एक बड़ा सा संगमरमर का फव्वारा था, जिसमें पानी की जगह एक सूखा हुआ लाल रंग का कुंड बना हुआ था। कमरे की दीवारों पर अनगिनत पुरानी पांडुलिपियाँ और काले चमड़े की किताबें सजी थीं।
व्लाद ने कमरे में रखी एक पुरानी मोमबत्ती जलाई, जिससे पूरे कमरे में हल्की पीली और रहस्यमयी रोशनी फैल गई।
"यहीं पर सब कुछ शुरू हुआ था, नताशा," व्लाद ने उस कुंड के पास खड़े होकर कहा। उसकी आवाज़ में एक गहरा दर्द और कसक थी। "तीन सौ साल पहले, जब मुझे वह अभिशाप मिला था, तब मैंने अपने इंसानी वजूद को इसी कमरे में छोड़कर उस अंधेरे को गले लगाया था। गाँववालों ने नतालिया को मुझसे छीना था, लेकिन वे इस बात से अनजान थे कि मौत इस खेल का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है।"
नताशा का आंतरिक साक्षात्कार और अतीत की यादें
नताशा ने कमरे के बीच में रखे उस कुंड के पास जाकर नीचे झाँका। अचानक, उस सूखे कुंड के भीतर उसे पानी की हल्की सी हलचल दिखाई दी। जैसे ही उसने अपनी नजरें उसमें डालीं, पानी का वह तल एक आईने की तरह साफ हो गया और उसमें एक दृश्य उभर आया—
वह दृश्य तीन सौ साल पुराना था। उसी ब्लैकवुड मैनर का बागीचा था। चारों तरफ आग की लपटें उठ रही थीं, और एक युवती—बिल्कुल नताशा जैसी दिखने वाली नतालिया—व्लाद की बाहों में दम तोड़ रही थी। उसकी आँखों में कोई डर नहीं था, बल्कि एक वादा था—“मैं लौटकर आऊंगी, व्लाद... इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में, लेकिन हम फिर मिलेंगे।”
नताशा का सिर चकरा गया। उसके मुँह से चीख निकलते-निकलते बची। उसने पीछे हटना चाहा, लेकिन व्लाद ने तुरंत आगे बढ़कर उसे अपनी बाहों में थाम लिया।
"अब तुम्हें यकीन हो गया ना?" व्लाद ने बहुत धीमी और भीनी आवाज़ में नताशा के कान के पास कहा। उसकी ठंडी साँसें नताशा की गर्दन पर पड़ रही थीं। "तुम सिर्फ मेरी कल्पना नहीं हो, नताशा। तुम वह सच्चाई हो जिसके लिए मैंने सदियों का यह खौफनाक अंधेरा झेला है।"
नताशा ने अपनी आँखें बंद कर लीं। उसके भीतर का सारा विरोध, सारे तर्क और आधुनिक दुनिया के सारे भ्रम उस पल में टूटकर बिखर चुके थे। उसे अब इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता था कि दुनिया उसे क्या कहेगी या वे गुप्त समाज के लोग क्या सोचते हैं। उसका दिल और उसकी रूह इस बात को पूरी तरह स्वीकार कर चुकी थी कि उसका यह वजूद व्लाद के साथ जन्म-जन्मांतर से जुड़ा हुआ है।
"हाँ, व्लाद..." नताशा ने काँपते हुए होठों से कहा, अपनी आँखें खोलकर सीधे व्लाद की लाल होती आँखों में देखा। "मुझे अब कोई डर नहीं है। जो सच है, वह सामने आ चुका है।"
बाहर मंडराता खतरा और अंतिम चक्र
व्लाद के चेहरे पर एक ऐसी सुकून भरी और असीम खुशी की मुस्कान उभरी जो सदियों से किसी ने नहीं देखी थी। उसने अपना एक हाथ नताशा के गाल पर रखा और उसके माथे को चूमा। उस पल, उस प्रतिबंधित खंड की सारी ठंडी हवा जैसे एक मीठी उष्णता में बदल गई।
लेकिन यह शांति बहुत देर तक टिकने वाली नहीं थी।
अचानक, उस गुप्त कक्ष की भारी दीवारों के पार से किसी भारी हथौड़े के वार जैसी आवाज़ गूँजी।
धड़!... धड़!...
ओकवुड का वह गुप्त समाज—थॉमस और उसके साथी—हवेली के गुप्त रास्तों को तलाशते हुए प्रतिबंधित खंड के ठीक बाहरी दरवाزे तक पहुँच चुके थे। उनकी चाँदी की मशालों की गंध उस बंद कमरे तक आने लगी थी।
व्लाद के चेहरे का सुकून पल भर में एक कठोर और भयंकर गुस्से में बदल गया। उसने नताशा को अपनी बाहों से थोड़ा अलग किया और अपने लंबे कोट के बटन बंद करते हुए कहा, "लगता है वे लोग अपनी मौत को खुद दावत दे रहे हैं। पूर्णचंद्र की वह रात अब बस कुछ ही घंटे दूर है, नताशा। और उस रात से पहले, मुझे इन कचरे को इस हवेली से हमेशा के लिए साफ करना होगा।"
नताशा ने व्लाद का हाथ कसकर पकड़ लिया। उसकी आँखों में अब डर के बजाय एक अनजानी सी ताकत थी। "मैं तुम्हारे साथ हूँ, व्लाद। अब हम दोनों मिलकर इस अभिशाप और इस डर का सामना करेंगे।"
व्लाद ने एक बार प्यार से नताशा की तरफ देखा और मुड़कर उस गुप्त दरवाजे की तरफ बढ़ा, जिसके बाहर दुश्मनों का वह खौफनाक सैलाब उनका इंतज़ार कर रहा था।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 13 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 7 min
- Words
- 1248
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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