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भाग 14: चाँदी का खंजर और पूर्वजों का श्राप
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट
ब्लैकवुड मैनर के उस प्राचीन और रहस्यमयी प्रतिबंधित खंड (Forbidden Wing) के बाहर गूँजने वाली हथौड़ों की वे भारी आवाज़ें अब और अधिक भयानक हो चुकी थीं। संगमरमर की उन काली दीवारों के बीच गूँजता हर एक वार ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हवेली की नींव को अंदर से झकझोर रहा हो। हवा में ठंडी तासीर के साथ-साथ अब जलती हुई मशालों और प्राचीन रासायनिक द्रव्यों की अजीब सी चुभने वाली गंध भी फैलने लगी थी।
नताशा के गले में वह चाँदी का हार और उसमें जड़ा लाल माणिक लगातार एक हल्की सी ऊष्मीय चमक बिखेर रहा था, मानों वह किसी आने वाले भीषण संघर्ष के लिए अपनी ऊर्जा को संचित कर रहा हो। व्लाद वोल्कोव के चेहरे पर अब कोई शांत भाव नहीं था; उसकी जगह एक ऐसे प्रलयकारी और अडिग संकल्प ने ले ली थी जो सदियों के दर्द और गुस्से का परिणाम था।
प्रतिबंधित खंड के द्वार पर खूनी टक्कर
"वे आ पहु पहुँचे हैं, व्लाद!" नताशा ने अपनी साँस पर नियंत्रण रखते हुए कहा, उसकी आवाज़ में डर के बजाय एक दृढ़ता थी।
व्लाद ने नताशा की ओर देखा और उसके कंधे पर अपना ठंडा हाथ रखकर आश्वासन दिया, "डरना मत, नताशा। ये दीवारें सदियों पुरानी हैं, और इन्हें पार करना इन कायरों के लिए इतना आसान नहीं होगा। लेकिन अगर वे अंदर आ भी गए, तो उन्हें यह याद रखना होगा कि वे किसकी ज़मीन पर खड़े हैं।"्
तभी, एक कानफाड़ू धमाके के साथ प्रतिबंधित खंड का वह मुख्य लकड़ी का प्राचीन दरवाजा अंदर की तरफ टूटकर बिखर गया। दरवाजे के टुकड़ों के साथ ही धुएँ और कोहरे का एक घना गुबार कमरे में फैल गया। उस धुएँ के बीच से ओकवुड वैली के गुप्त समाज—'ऑर्डर ऑफ द सिल्वर क्रूसिबल'—के सदस्य एक-एक करके अंदर दाखिल हुए।
उनके आगे चल रहा था एल्डर थॉमस। उसके चेहरे पर जीत की एक क्रूर मुस्कान थी, और उसके हाथ में एक ऐसा खंजर चमक रहा था जो पूरी तरह शुद्ध प्राचीन चाँदी से बना था और उस पर अजीब सी लाक्षणिक आकृतियाँ खुदी हुई थीं—वह था 'सिल्वर डैगर ऑफ द एंसेस्टर्स' (पूर्वजों का चाँदी का खंजर), जिसके बारे में मान्यता थी कि उसकी एक खरोंच भी किसी अमर पिशाच की आत्मा को हमेशा के लिए तहखाने में कैद कर सकती है।
चाँदी का खंजर और पिशाच की ताकत
थॉमस ने अपनी जलती हुई मशाल को आगे बढ़ाते हुए कहा, "खेल खत्म हो गया, व्लाद वोल्कोव! सदियों से तुमने इस घाटी को अपनी काली परछाइयों से डरा रखा है। आज रात, इस पूर्णचंद्र के उगने से पहले, हम इस चक्र को हमेशा के लिए तोड़ देंगे और इस नई नतालिया को मुक्त कराकर इस शाप का अंत कर देंगे!"
व्लाद अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिला। उसके लंबे कोट का पल्ला हवा में लहरा रहा था, और उसकी आँखें पूरी तरह से लाल अंगारे की तरह धधक उठीं। उसने एक गहरी, गूँजती हुई हँसी के साथ कहा, "तुम लोग हमेशा से इतिहास के एक छोटे से हिस्से को देखकर पूरी किताब समझने की भूल करते आए हो, थॉमस। तुम सोचते हो कि यह चाँदी का टुकड़ा और ये आग की मशालें मुझे मिटा देंगी? यह सिर्फ तुम्हारा भ्रम है!"
व्लाद के इतना कहते ही कमरे का तापमान अचानक शून्य से भी कई डिग्री नीचे गिर गया। फव्वारे के पास रखा वह सूखा हुआ लाल कुंड अचानक खदबदाने लगा, और उसके भीतर से ठंडी हवा का एक ऐसा बवंडर उठा जिसने गुप्त समाज के सदस्यों के हाथों से मशालें छीनकर बुझा दीं।
कमरा एक पल के लिए पूरी तरह अंधेरे में डूब गया। केवल थॉमस के हाथ में पकड़े उस चाँदी के खंजर से एक अजीब सी नीली, सिहरन पैदा करने वाली रोशनी निकल रही थी।
नताशा की सुरक्षा और अंदरूनी संघर्ष
अंधेरे के उस बवंडर के बीच, गुप्त समाज के दो सदस्य अचानक आगे बढ़े और उन्होंने सीधे नताशा की तरफ छलांग लगा दी। उनका मकसद नताशा को व्लाद से अलग करना और उस चाँदी के खंजर के साये में उसे कैद करना था।
"नताशा!" व्लाद की दहाड़ गूँजी।
लेकिन इससे पहले कि व्लाद उन तक पहुँचता, नताशा ने खुद को कमजोर नहीं पड़ने दिया। उसके गले में पड़े उस लाल माणिक वाले हार से अचानक एक तेज रोशनी फूटी, जिसने उन दोनों हमलावरों को पीछे धकेल दिया। नताशा ने एक भारी लोहे के स्टैंड को उठाकर अपनी रक्षा के लिए सामने कर लिया।
थॉमस ने इस मौके का फायदा उठाया। वह तेजी से व्लाद की तरफ बढ़ा और अपने हाथ में पकड़े उस चाँदी के खंजर को सीधे व्लाद के सीने में उतारने की कोशिश की।
"व्लाद, संभलो!" नताशा चीख पड़ी।
व्लाद ने पलक झपकते ही फुर्ती दिखाई। उसने थॉमस का हाथ हवा में ही दबोच लिया। चाँदी के उस खंजर के छूने से व्लाद की त्वचा पर से धुएँ की एक हल्की सी लकीर उठी, जिससे उसे दर्द का अहसास हुआ, लेकिन उसकी ताकत के आगे थॉमस का वह प्रहार कमजोर पड़ गया।
व्लाद ने अपनी लाल आँखों से सीधे थॉमस की आँखों में देखा। उसकी आवाज़ में एक ऐसा सम्मोहन और खौफ था कि थॉमस के हाथ काँपने लगे।
"तुमने मेरे सब्र की परीक्षा बहुत लंबी ले ली है, थॉमस," व्लाद ने बहुत ठंडे और कठोर स्वर में कहा। "यह हवेली, यह घाटी और यह रूह... सब कुछ मेरी है। तुम्हारे इन हथियारों में इतनी ताकत नहीं है जो हमारे इस बंधन को तोड़ सके।"
एक ज़ोरदार झटके के साथ व्लाद ने थॉमस को हवा में उछाला और वह चाँदी का खंजर थॉमस के हाथ से छूटकर दूर संगमरमर के फर्श पर जा गिरा। थॉमस और उसके बाकी बचे साथी खौफ से काँपते हुए पीछे हटने लगे।
पीछे हटने को मजबूर हुआ गुप्त समाज
"यह... यह अभी अंत नहीं है!" थॉमस ने खाँसते हुए अपने साथियों को संभाला और दरवाजे की तरफ भागते हुए चिल्लाया। "पूर्णचंद्र अभी पूरी तरह लाल नहीं हुआ है! जब वह रात अपने चरम पर होगी, तब हम अपनी पूरी ताकत के साथ लौटेंगे!"
गुप्त समाज के वे सभी सदस्य टूटे हुए दरवाज़े से अपनी जान बचाकर अंधेरे गलियारों की तरफ भाग खड़े हुए।
प्रतिबंधित खंड का वह कमरा एक बार फिर शांत हो गया। केवल व्लाद की भारी साँसें और बाहर बहती हवा की सरसराहट सुनाई दे रही थी। व्लाद के सीने पर उस चाँदी के खंजर के छूने से जो जख्म हुआ था, वह धीरे-धीरे अपने आप भरने लगा था, लेकिन उसकी थकान उसके चेहरे पर साफ झलक रही थी।
नताशा दौड़कर व्लाद के पास आई। उसने अपने काँपते हाथों से व्लाद के चेहरे को छुआ और चिंतित स्वर में पूछा, "व्लाद... क्या तुम ठीक हो? वह खंजर... उससे तुम्हें चोट लगी है!"
व्लाद ने नताशा के हाथ को अपने ठंडे हाथों में थामा और एक हल्की सी, सुकून भरी मुस्कान उसके होठों पर उभर आई।
"मैं ठीक हूँ, नताशा," व्लाद ने बहुत कोमलता से कहा। "जब तक तुम मेरे साथ हो, मुझे कोई भी खंजर पूरी तरह हरा नहीं सकता। लेकिन थॉमस ने सही कहा... पूर्णचंद्र की वह आखिरी रात अब बहुत करीब है। जब वह चाँद पूरी तरह खूनी रंग में रंगेगा, तब हमें इस तहखाने और इस हवेली के सबसे बड़े सच का सामना करना होगा।"
नताशा ने दृढ़ता से सिर हिलाया। उसे अब इस बात का पूरा यकीन हो चुका था कि चाहे कितनी भी ताकतें आ जाएँ, वह व्लाद को अकेला नहीं छोड़ेगी। उनका यह अमर प्रेम अब किसी एक इंसान या पिशाच की कहानी नहीं, बल्कि दो रूहों का एक ऐसा अटूट सफर बन चुका था जिससे पीछे हटने का कोई रास्ता नहीं था।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 14 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 7 min
- Words
- 1233
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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