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भाग 15: प्यार और विश्वासघात की कश्मकश
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट
प्रतिबंधित खंड (Forbidden Wing) में थॉमस और उसके गुप्त समाज की करारी हार के बाद हवेली में एक अजीब सा, तनावपूर्ण सन्नाटा पसर गया था। हवा में अभी भी चाँदी के खंजर की वह तीखी, ओजोन जैसी महक और धुएँ के निशान बाकी थे। व्लाद के सीने पर लगा वह घाव यद्यपि पिशाच की अद्भुत आत्म-चिकित्सा शक्ति के कारण भर चुका था, लेकिन उस खंजर का प्रभाव व्लाद के आंतरिक ओज को सुन्न कर रहा था।
नताशा ने व्लाद को सम्भाला और दोनों धीरे-धीरे मुख्य हॉल में वापस आए। नताशा के गले में चमकता लाल माणिक वाला हार अब शांत हो चुका था, लेकिन उसकी गर्माहट नताशा की छाती पर अभी भी महसूस हो रही थी।
रात ढल रही थी और भोर की हल्की सफेदी ओकवुड घाटी की बर्फीली धुंध को चीरती हुई हवेली की ऊँची खिड़कियों पर अपने पाँव पसारने लगी थी। लेकिन इस शांति के पीछे एक नया बवंडर नताशा के मन में आकार ले रहा था—एक ऐसा बवंडर जो प्यार, शंका और विश्वासघात के महीन ताने-बाने से बुना गया था।
अतीत की डायरी का वह आखिरी पन्ना
सुबह के करीब छह बजे जब व्लाद विश्राम के लिए अपने गुप्त शयनकक्ष में चला गया, तब नताशा वापस ग्रैंड लाइब्रेरी पहुँची। उसके कदम स्वतः ही उस मेज़ की ओर बढ़ गए जहाँ 'क्रोनिकल्स ऑफ ब्लैकवुड' और वह सदियों पुरानी काली डायरी रखी थी।
नताशा ने काँपते हाथों से डायरी को उठाया। उसने उस मुड़े हुए पन्ने को निकाला और उसे रोशनी के करीब लाकर दोबारा ध्यान से पढ़ना शुरू किया। उस पत्र में लिखा था:
"व्लाद कोई मालिक नहीं, एक अभिशप्त शैतान है... वह हर सौ साल में एक बलि ढूंढता है ताकि अपनी अमरता के श्राप को ताज़ा कर सके। उसकी अगली बलि वही स्त्री होगी जिसकी शक्ल उसकी खोई हुई प्रेमिका 'नतालिया' से मिलती होगी..."
पहले जब नताशा ने यह पढ़ा था, तब वह खौफ से भरी हुई थी। लेकिन अब, जब वह व्लाद की आँखों में उस बेइंतहा मोहब्बत और सदियों का तड़प भरा दर्द देख चुकी थी, तब यह पत्र उसके मन में एक भयानक उलझन पैदा कर रहा था।
क्या व्लाद सचमुच उससे प्यार करता था, या फिर उसकी यह तमाम तड़प, यह सौम्यता और यह आकर्षण महज़ एक ढोंग था—अपनी अमरता के अगले सौ साल हासिल करने का एक खौफनाक नाटक? क्या वह नताशा की बलि चढ़ाकर खुद को नया जीवन देने वाला था?
"क्या प्यार इतना बड़ा छलावा हो सकता है?" नताशा ने खुद से फुसफुसाकर पूछा। उसकी आँखों में आँसू आ गए। एक तरफ उसका दिल कह रहा था कि व्लाद का प्यार सच्चा है, और दूसरी तरफ उसका तार्किक दिमाग चिल्ला-चिल्लाकर चेतावनी दे रहा था कि वह एक पिशाच के जाल में पूरी तरह फँस चुकी है।
एक अजनबी खत और नया मोड़
तभी, लाइब्रेरी की खिड़की का एक काँच अचानक मद्धम आवाज़ के साथ खड़खड़ाया। नताशा ने चौंककर खिड़की की तरफ देखा।
खिड़की के बाहर एक छोटा सा सफ़ेद कबूतर बैठा था, जिसके पाँव में एक धातु का छोटा सा नलीदार कैप्सूल बँधा हुआ था। नताशा ने सतर्कता से खिड़की खोली। कबूतर ने बिना डरे अपना पाँव आगे बढ़ा दिया। नताशा ने उस कैप्सूल में से एक मुड़ा हुआ कागज़ निकाला।
कागज़ खोलते ही उस पर एल्डर थॉमस की लिखावट नज़र आई। खत में लिखा था:
"नताशा... अगर तुम अभी भी जीवित हो और इस खत को पढ़ रही हो, तो मेरी बात ध्यान से सुनो। व्लाद तुम्हें अपनी मीठी बातों और सम्मोहन से अँधेरे में रख रहा है। वह तुम्हें नतालिया का पुनर्जन्म बताकर तुम्हारी रूह को छल रहा है। पूर्णचंद्र की आने वाली रात को वह तुम्हारा पूरा खून पीकर तुम्हें हवेली के उसी तहखाने में हमेशा के लिए दफ़न कर देगा। अगर तुम अपनी जान बचाना चाहती हो, तो आज शाम ढलने से पहले हवेली के पिछले बागीचे में बने पुराने कुएँ के पास आओ। हमारे पास व्लाद के उस अभिशाप को खत्म करने और तुम्हें आज़ाद कराने का एकमात्र ज़रिया है।"
खत पढ़कर नताशा का माथा ठनक गया। उसके हाथों में कागज़ थरथराने लगा।
एक तरफ व्लाद था, जिसने कल रात अपनी जान जोखिम में डालकर उसे गुप्त समाज के हमलों से बचाया था और जिसकी बाहों में नताशा को सदियों पुराने जुड़ाव का अहसास हुआ था। दूसरी तरफ थॉमस और यह खत था, जो यह दावा कर रहा था कि नताशा केवल एक बलि का मोहरा है।
विश्वासघात का यह संशय नताशा के दिल को आरे की तरह काट रहा था। किस पर भरोसा करे? उस पिशाच पर जिससे उसका दिल जुड़ चुका था, या उस गुप्त समाज पर जो दावा तो इंसानियत की रक्षा का कर रहा था, लेकिन उनके तौर-तरीके खौफनाक थे?
व्लाद का प्रकटन और मन का संशय
"तुम परेशान दिख रही हो, नताशा..."
अचानक पीछे से व्लाद की ठंडी, भारी आवाज़ आई।
नताशा ने झटके से खत को अपनी जैकेट की जेब में छुपाया और मुड़ी। व्लाद दरवाजे के पास खड़ा था। दिन की रोशनी में उसका चेहरा थोड़ा थका हुआ लग रहा था, और उसकी गहरी भूरी आँखों में नताशा के लिए एक अनजानी सी फ़िक्र थी।
"मैं... मैं ठीक हूँ, व्लाद," नताशा ने अपनी आवाज़ को स्थिर रखने की कोशिश करते हुए कहा। "बस कुछ पुरानी पांडुलिपियों को समझ रही थी।"
व्लाद धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ा। उसके हर कदम के साथ कमरे में वही बर्फीली हवा फैल रही थी। वह नताशा के बिल्कुल पास आकर रुका और उसकी आँखों में सीधे झाँकने लगा।
"तुम झूठ बोल रही हो," व्लाद ने बहुत धीमी और सुरीली आवाज़ में कहा। उसने अपना ठंडा हाथ बढ़ाकर नताशा के गाल को छुआ। "तुम्हारी धड़कनें बहुत तेज़ हैं, और तुम्हारी आँखों में एक डर... और एक शक तैर रहा है। क्या तुम अब भी मुझसे डरती हो?"
नताशा ने व्लाद की आँखों में देखा। उन आँखों में गहराई थी, दर्द था, लेकिन क्या उनमें कोई साज़िश भी छिपी थी?
"व्लाद..." नताशा ने हिम्मत जुटाकर पूछा, "क्या यह सच है कि पूर्णचंद्र की रात को तुम्हारा यह चक्र पूरा होगा? क्या... क्या तुम्हें जिंदा रहने के लिए मेरी बलि देनी होगी?"
व्लाद का हाथ नताशा के गाल पर स्थिर हो गया। उसके चेहरे की रंगत अचानक बदल गई। उसकी आँखों में गुस्से के बजाय एक गहरा, तोड़ा न जा सकने वाला दर्द उभर आया।
"बलि?" व्लाद ने एक कड़वी मुस्कान के साथ कहा। "क्या तुम्हें सचमुच लगता है कि मैं तुम्हें नुकसान पहुँचा सकता हूँ? नताशा, तीन सौ साल से मैं इस दुनिया में एक ज़िंदा लाश बनकर घूम रहा हूँ। अमरता मेरे लिए कोई वरदान नहीं, एक सजा है। अगर मुझे अपनी अमरता के लिए तुम्हारा एक कतरा खून भी बहाना पड़े, तो मैं उस अमरता को हँसते-हँसते ठुकरा दूँगा।"
व्लाद ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और खिड़की की तरफ मुड़ गया। "अगर तुम्हें लगता है कि मैं तुम्हारा इस्तेमाल कर रहा हूँ, तो तुम स्वतंत्र हो। आज शाम जब कोहरा गहराएगा, मैं तुम्हें रोके बिना इस हवेली से जाने दूँगा।"
व्लाद के इन शब्दों ने नताशा के दिल पर सीधे चोट की। व्लाद की आवाज़ में जो सच्चाई और बेबसी थी, उसे कोई भी इंसान या पिशाच नाटक करके नहीं दिखा सकता था।
कश्मकश का मोड़
व्लाद बिना कुछ और कहे लाइब्रेरी से बाहर निकल गया, और नताशा वहीं अकेली खड़ी रह गई।
उसकी जेब में रखा थॉमस का खत अब उसे एक बहुत बड़ी साज़िश का हिस्सा लगने लगा था। उसे अहसास हुआ कि थॉमस और उसका गुप्त समाज व्लाद को मारने के लिए नताशा के मन में शक का बीज बो रहे थे। वे नताशा को एक मोहरे की तरह इस्तेमाल करना चाहते थे ताकि व्लाद की एकाग्रता टूट सके और वे उसे आसानी से खत्म कर सकें।
लेकिन शाम का वक्त करीब आ रहा था। नताशा को अब फैसला करना था।
क्या वह शाम को पिछले बागीचे में जाकर थॉमस से मिले और उनकी सच्चाई का पर्दाफाश करे? या फिर व्लाद के पास जाकर उसे इस खत के बारे में सब कुछ बता दे?
कश्मकश की इस घड़ी में नताशा ने अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनने का फैसला किया। वह जानती थी कि प्यार में संदेह की कोई जगह नहीं होती, और जिस व्लाद ने हर मोड़ पर उसकी रक्षा की थी, उस पर विश्वास करना ही उसका एकमात्र सच था।
लेकिन क्या थॉमस और उसका समाज केवल खत भेजकर शांत बैठने वाले थे? या शाम ढलते ही ओकवुड वैली में एक और खूनी रात का आगाज़ होने वाला था?
क्रमश:
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 15 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 7 min
- Words
- 1372
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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