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भाग 16: व्लाद का दर्दभरा अतीत और उसका अभिशाप

Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 8 मिनट

शाम के धुंधलके में ओकवुड घाटी पर घना कोहरा एक बार फिर अपनी बर्फीली चादर फैलाने लगा था। ब्लैकवुड मैनर की विशाल इमारत उस धुंध के बीच किसी खामोश मज़ार की तरह खड़ी थी। नताशा के दिल में जल रही संशय और प्रेम की ज्वाला अब शांत हो चुकी थी। उसने थॉमस के उस पत्र को फाड़कर लाइब्रेरी की अंगीठी की जलती राख में फेंक दिया था। उसे अब किसी गुप्त समाज की धमकियों या षड्यंत्रों पर भरोसा नहीं था; उसकी आत्मा इस बात की गवाही दे चुकी थी कि व्लाद का प्रेम सच्चा था।
वह दबे पाँव मुख्य हॉल से होती हुई हवेली के उस पूर्वी हिस्से की तरफ बढ़ी जहाँ व्लाद का निजी कक्ष स्थित था—एक ऐसा कमरा जहाँ आम तौर पर किसी को जाने की इजाजत नहीं थी।
एकांत कक्ष और व्लाद का दर्द
कक्ष का भारी महोगनी दरवाजा आधा खुला हुआ था। अंदर केवल एक मोमबत्ती जल रही थी, जिसकी काँपती हुई पीली रोशनी दीवारों पर परछाइयों का एक डरावना और उदास नृत्य पेश कर रही थी।
नताशा ने धीरे से दरवाज़े को धकेला। अंदर का नज़ारा किसी भी इंसान का दिल पिघला देने के लिए काफी था।
व्लाद कमरे की विशाल खिड़की के पास खड़ा था, उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी। उसने अपने दोनों हाथ खिड़की के लोहे के फ्रेम पर टिका रखे थे और उसका सिर नीचे झुका हुआ था। उसके विशाल और ताकतवर शरीर में एक अजीब सी लाचारी झलक रही थी। कमरे का वातावरण इतना ठंडा था कि फर्श पर हल्की बर्फ जम चुकी थी।
"व्लाद..." नताशा ने बहुत धीमी और कोमल आवाज़ में पुकारा।
व्लाद ने सिर उठाकर खिड़की के काँच में नताशा के अक्स को देखा। उसकी गहरी भूरी आँखों में कोई लालिमा या गुस्सा नहीं था; वहाँ केवल सदियों का संचित दर्द और एक अगाध अकेलापन तैर रहा था।
"तुम गई नहीं, नताशा?" व्लाद ने बिना मुड़े कहा। उसकी आवाज़ में एक हल्की सी थकावट थी, जैसे वह सदियों के इस बोझ को ढोते-ढोते टूट चुका हो। "मैंने तुमसे कहा था कि शाम ढलने से पहले तुम स्वतंत्र हो। यह हवेली और मेरी यह छाया तुम्हारे जैसी मासूम रूह के लिए सही नहीं है।"
नताशा धीरे-धीरे चलकर व्लाद के बिल्कुल पास आ गई। उसने बिना किसी हिचकिचाहट के अपना हाथ आगे बढ़ाया और व्लाद की पीठ पर रखा। हमेशा की तरह उसका शरीर बर्फ की तरह ठंडा था, लेकिन नताशा को इस बार उस ठंडक से कोई डर नहीं लगा।
"मैं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगी, व्लाद," नताशा ने दृढ़ता से कहा। "मैंने उस पत्र को जला दिया है। मुझे किसी थॉमस या उसके गुप्त समाज की बातों पर भरोसा नहीं है। मुझे केवल आप पर और अपनी अंतरात्मा पर भरोसा है।"
व्लाद झटके से मुड़ा। उसकी आँखें नताशा के चेहरे पर टिक गईं। नताशा के इन शब्दों ने जैसे उस बेजान पिशाच के दिल में एक नई रोशनी भर दी हो।
तीन सौ साल पुराना खूनी इतिहास
व्लाद ने एक लंबी और ठंडी साँस ली। उसने नताशा का हाथ पकड़ा और उसे खिड़की के पास रखी एक पुरानी नक्काशीदार कुर्सी पर बिठाया। खुद वह सामने रखे एक संगमरमर की चौकी पर बैठ गया।
"अगर तुम रुकने का फैसला कर चुकी हो, नताशा," व्लाद ने बहुत ही शांत और गंभीर स्वर में कहा, "तो आज तुम्हें वह सब जानना होगा जो इस अभिशाप की असल वजह है। आज मैं तुम्हें अपना वह दर्दभरा अतीत बताऊंगा जिसे मैंने तीन सौ साल से अपने सीने में दफ़न कर रखा है।"
नताशा ने चुपचाप सिर हिलाया।
व्लाद ने खिड़की के पार फैली ओकवुड घाटी की धुंध की तरफ देखते हुए बोलना शुरू किया:
"सन 1724 की बात है... तब यह ओकवुड घाटी कोई खौफनाक जगह नहीं थी, बल्कि एक खुशहाल और समृद्ध रियासत थी। मैं इस रियासत का सामंत (Count) हुआ करता था। मैं इंसानों के बीच रहता था, उनके दुखों को समझता था और अपनी प्रजा की रक्षा करता था। और उसी दौर में मेरी ज़िंदगी में आई—नतालिया।"
व्लाद के चेहरे पर नतालिया का नाम लेते ही एक हल्की सी, बेहद खूबसूरत मुस्कान तैर गई।
"नतालिया ओकवुड के एक साधारण वैद्य की बेटी थी। उसकी मासूमियत, उसकी हँसी और उसकी आँखों की चमक ने मेरे पत्थर जैसे दिल को पिघला दिया था। हमने शादी करने का फैसला किया। लेकिन हमारी यह खुशी ओकवुड के कुछ स्वार्थी और अंधविश्वासी लोगों को रास नहीं आई। थॉमस के पूर्वज—पादरी जोसेफ—ने अफवाह फैला दी कि नतालिया एक डायन है और वह अपनी खूबसूरती बनाए रखने के लिए काले जादू का सहारा लेती है।"
नताशा की साँसें थम गईं। वह व्लाद की हर एक बात को किसी जीवंत दृश्य की तरह अपने दिमाग में देख पा रही थी।
"एक खौफनाक रात," व्लाद की आवाज़ अब भारी और काँपती हुई होने लगी, "जब मैं रियासत के काम से बाहर गया हुआ था, जोसेफ और उसके गुप्त समाज के लोगों ने ब्लैकवुड मैनर पर हमला कर दिया। उन्होंने नतालिया को घसीटकर बागीचे के बीचों-बीच बने उस चौराहे पर खड़ा कर दिया और उस पर आग लगा दी।"
"ओह ईश्वर!" नताशा के मुँह से चीख निकल गई। उसने अपने हाथ से अपना मुँह ढक लिया।
"जब मैं वापस लौटा," व्लाद की आँखों में अचानक लालिमा उभर आई, लेकिन वह गुस्से की नहीं, बल्कि रोने न पाने के दर्द की थी, "तो केवल राख और धुआँ बचा था। नतालिया मेरी बाहों में दम तोड़ रही थी। उसके शरीर का हर हिस्सा झुलस चुका था, लेकिन उसकी आँखों में मेरे लिए वही बेइंतहा प्यार था। मरते-मरते उसने मुझसे कहा—'व्लाद, रोना मत... मैं लौटकर आऊंगी। रूहें कभी नहीं मरतीं, हम फिर मिलेंगे।'"
अभिशाप का जन्म (The Birth of the Curse)
व्लाद उठा और कमरे में टहलने लगा। उसकी चाल में वही खामोशी थी।
"नतालिया को खोने के गम में मैं पागल हो गया," व्लाद ने आगे कहा। "मैं उस जगह गया जहाँ प्राचीन काल के तांत्रिक ग्रंथों को दफ़न किया गया था। मैंने मौत को चुनौती देने का फैसला किया। मैंने एक खौफनाक काला अनुष्ठान किया जिसमें मैंने अपनी इंसानी रूह का सौदा उस अंधेरे की ताकतों से कर लिया। मैंने अमरता हासिल कर ली ताकि मैं नतालिया के लौटने तक जिंदा रह सकूँ।"
व्लाद नताशा के पास आकर रुका और नीचे झुककर उसकी आँखों में झाँकने लगा।
"लेकिन अमरता की कीमत बहुत भयानक थी, नताशा। मुझे पिशाच बना दिया गया। मुझे धूप से, इंसानी दुनिया से बेदखल कर दिया गया। और सबसे खौफनाक श्राप यह था कि हर सौ साल बाद जब पूर्णचंद्र अपने चरम पर होगा, नतालिया की रूह किसी नए शरीर में वापस आएगी। लेकिन अगर उस पूर्णचंद्र की रात को मैं उसके साथ अपनी रूह का पूर्ण मिलन न कर सका, तो वह शरीर फिर से मर जाएगा और मुझे अगले सौ साल तक फिर से अकेले इस तड़प में जीना होगा।"
नताशा का दिल दहल गया। उसने काँपते हुए पूछा, "यानी... यानी पिछली बार भी कोई आया था?"
"हाँ," व्लाद ने सिर झुकाते हुए कहा। "सन 1824 और सन 1924 में भी ऐसे चेहरे आए थे। लेकिन हर बार थॉमस के गुप्त समाज ने हमारे बीच शक का ज़हर घोल दिया, या फिर वे लड़कियाँ मेरे पिशाच रूप से डरकर भागने की कोशिश में अपनी जान गँवा बैठीं। मैं हर बार हार गया, नताशा... हर बार मैंने अपनी नतालिया को अपनी बाहों में दम तोड़ते देखा है।"
सत्य की स्वीकृति और अंतिम संकल्प
नताशा की आँखों से आँसुओं का सैलाब बह निकला। वह समझ चुकी थी कि व्लाद कोई क्रूर राक्षस नहीं था; वह तो सदियों के एक ऐसे चक्रव्यूह में फँसा हुआ एक बदनसीब प्रेमी था जो हर सौ साल बाद अपनी मोहब्बत को अपनी आँखों के सामने खोने के लिए मजबूर किया जाता था।
नताशा कुर्सी से उठी और उसने व्लाद के दोनों ठंडे हाथों को अपने हाथों में कसकर थाम लिया।
"इस बार ऐसा नहीं होगा, व्लाद!" नताशा ने अपनी पूरी रूह से कहा। उसकी आवाज़ में एक ऐसी अटूट शक्ति थी जिसने उस ठंडे कमरे की हवा को गरमा दिया। "मैं डरकर नहीं भागूंगी। मैं कोई बलि का मोहरा नहीं हूँ, और न ही मैं इस बार तुम्हें अकेले तड़पने दूँगा। हम इस चक्र को तोड़ेंगे!"
व्लाद ने नताशा की तरफ देखा। उसकी आँखों से एक नीले रंग का आंसु का कतरा निकलकर नताशा के हाथ पर गिर पड़ा—एक पिशाच का पहला आंसु जो तीन सौ साल बाद निकला था।
"पूर्णचंद्र की रात कल है, नताशा," व्लाद ने बहुत ही धीमे और भावुक स्वर में कहा। "कल रात थॉमस और उसकी पूरी सेना अपनी पूरी ताकत के साथ इस हवेली पर हमला करेगी। वे हमारे इस मिलन को रोकने के लिए अपनी जान की बाज़ी लगा देंगे।"
"उन्हें आने दो," नताशा ने गले में पहने उस लाल माणिक वाले हार को छूते हुए कहा। "हमारा प्यार इस बार इस अभिशाप से बड़ा साबित होगा।"
कमरे का माहौल अब पूरी तरह बदल चुका था। बाहर ओकवुड घाटी में हवा का जोर बढ़ रहा था, जो यह बता रहा था कि आने वाली रात न केवल इस हवेली के लिए, बल्कि व्लाद और नताशा के सदियों पुराने इस सफर के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होने वाली थी।
क्रमशः

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
Chapter
16 of 30
Category
Haunted Places
Reading time
8 min
Words
1484
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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