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भाग 10: ओकवुड का गुप्त समाज और पुरानी चेतावनियाँ

Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 7 मिनट

ब्लैकवुड मैनर की ग्रैंड लाइब्रेरी के भारी ओक के दरवाज़े पर पड़ रहे वे ज़ोरदार धक्के किसी साधारण इंसान या आंधी-तूफान के नहीं थे। हर एक धड़धड़ाहट के साथ हवेली की पुरानी दीवारें और छत की कड़ियां तक हिल रही थीं। व्लाद वोल्कोव, जो पल भर पहले तक एक शांत और गहरी उदाسی में डूबा हुआ था, उसकी काया अचानक तनाव से तड़ित हो उठी। उसकी आँखें जो कुछ पल पहले सामान्य भूरी हो चुकी थीं, वे फिर से सुलगते हुए अंगारे जैसी लाल हो गईं। 
नताशा का दिल खौफ से एक बार फिर दहल उठा। उसने व्लाद की बांह को कसकर पकड़ लिया और काँपते हुए स्वर में पूछा, "यह कौन है, व्लाद? दरवाज़े पर कौन इतनी बेरहमी से पीट रहा है?" 
व्लाद ने नताशा की ओर देखा और उसके कंधे पर अपना बर्फ जैसा ठंडा हाथ रखते हुए बहुत ही कड़े और गंभीर स्वर में कहा, "वे लोग आ चुके हैं, नताशा... ओकवुड का वह गुप्त समाज। वे लोग जो सदियों से इस बात के इंतज़ार में बैठे हैं कि मेरा यह चक्र पूरा न हो सके।" 
ओकवुड का छायादार अतीत और वह गुप्त समाज
इससे पहले कि नताशा कुछ और समझ पाती, व्लाद ने लाइब्रेरी के एक गुप्त कोने की ओर इशारा किया, जहाँ किताबों की एक बड़ी अलमारी के पीछे एक संकरा रास्ता था। "वहाँ छुप जाओ, नताशा," व्लाद ने आदेश दिया। "चाहे कुछ भी हो जाए, जब तक मैं न कहूँ, बाहर मत निकलना। ये लोग सिर्फ मुझे नहीं, बल्कि इस हवेली के हर उस राज को मिटा देना चाहते हैं जो हमारे इतिहास से जुड़ा है." 
नताशा डर के मारे उस संकीर्ण कोटे में दुबक गई, लेकिन उसकी आँखें अलमारी की लकड़ी की दरारों से बाहर के हॉल और लाइब्रेरी के प्रवेश द्वार पर टिकी थीं। 
तभी एक कानफाड़ू धमाके के साथ लाइब्रेरी का वह भारी दरवाज़े का ताला टूटकर बिखर गया और दरवाज़ा अंदर की तरफ आ गिरा। धुएं और बाहर के कोहरे के बीच से तीन-चार साये अंदर दाखिल हुए। उन्होंने काले रंग के लंबे विंटेज कोट और चेहरे पर प्राचीन मुखौटे पहन रखे थे। उनके हाथों में भारी चाँदी की मशालें और अजीब से प्राचीन प्रतीक वाले खंजर चमक रहे थे। 
वे ओकवुड वैली के 'ऑर्डर ऑफ द सिल्वर क्रूसिबल' (गुप्त समाज) के सदस्य थे—वही लोग जिनके पूर्वजों ने तीन सौ साल पहले व्लाद और नतालिया को अलग करने के लिए आग जलाई थी। 
आगे चल रहे एक शख्स ने अपना मुखौटा हटाया। वह शहर का कोई साधारण बूढ़ा व्यक्ति नहीं लग रहा था, बल्कि उसकी आँखों में एक अजीब सी कट्टरता और क्रूरता थी। उसका नाम एल्डर थॉमस था, जो उस गुप्त समाज का मुखिया था। 
थॉमस ने अपनी भारी और कर्कश आवाज़ में कहा, "बाहर आ जाओ, व्लाद वोल्कोव! हम जानते हैं कि तुम यहीं हो। सौ साल का यह चक्र पूरा होने वाला है, और इस बार हम इतिहास को खुद को दोहराने नहीं देंगे! उस लड़की... उस नई नतालिया को हमारे हवाले कर दो, वरना इस हवेली को राख का ढेर बनने से कोई नहीं रोक सकता!" 
व्लाद का खौफनाक पलटवार
व्लाद लाइब्रेरी के बीचों-बीच, उस महोगनी मेज़ के सामने पूरी शान और खौफ के साथ खड़ा हो गया। उसका लंबा कोट हवा में लहरा रहा था, और उसके चेहरे पर एक खौफनाक, उपहास भरी मुस्कान तैर रही थी। 
"थॉमस..." व्लाद की आवाज़ गूँजी, जो किसी गड़गड़ाहट जैसी महसूस हो रही थी। "तुम्हारी पीढ़ियाँ बदल गईं, तुम्हारे चेहरे बदल गए, लेकिन तुम्हारा यह घटिया और कायरतापूर्ण स्वभाव आज भी नहीं बदला। तुम सोचते हो कि आग और चाँदी के इन टुकड़ों से तुम मुझे झुका लोगे?" 
थॉमस ने अपनी चाँदी की मशाल आगे बढ़ाई और चिल्लाया, "तुम एक अभिशप्त शैतान हो, व्लाद! तुमने इस घाटी को अपनी सनक का शिकार बना रखा है! वह लड़की सिर्फ एक बलि का बकरा है जिसे तुम अपने पापी अमरत्व को जिंदा रखने के लिए इस्तेमाल कर रहे हो! उसे बाहर लाओ!" 
व्लाद के होठों की मुस्कान गायब हो गई। उसकी लाल आँखें पूरी तीव्रता से चमक उठीं। "वह कोई बलि नहीं है... वह मेरी है!" व्लाद की दहाड़ के साथ ही लाइब्रेरी का तापमान शून्य से भी कई डिग्री नीचे गिर गया। 
कमरे की तमाम मोमबत्तियाँ और बाहर से आ रही मशालें एक झटके में नीली और फिर पूरी तरह बुझ गईं। पूरा कमरा गाढ़े और impenetrable अंधेर में डूब गया। उस अंधेरे के बीच केवल व्लाद की लाल आँखें चमक रही थीं। 
गुप्त समाज के सदस्यों के बीच खलबली मच गई। वे चिल्लाने लगे और अपनी मशालें जलाने की कोशिश करने लगे। लेकिन इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, एक अदृश्य और तेज हवा का बवंडर पूरे कमरे में घूम गया। 
धड़!
एक सदस्य हवा में उछलकर सीधे दूर जा गिरा। दूसरे के हाथ से चाँदी का खंजर छूटकर फर्श पर जा बजा। व्लाद किसी अदृश्य परछाई की तरह उनके बीच से गुजरा—उसकी गति इतनी तेज थी कि इंसानी आँखें उसे देख भी नहीं पा रही थीं। 
थॉमस का चेहरा खौफ से सफेद पड़ गया। उसने काँपते हाथों से अपनी मशाल को व्लाद की ओर किया, लेकिन व्लाद एक पल में उसके ठीक सामने प्रकट हो गया। 
व्लाद ने थॉमस की गर्दन को हवा में ही दबोच लिया। उसकी उंगलियों की पकड़ में लोहे जैसी ताकत थी। 
"सुन लो, थॉमस," व्लाद ने थॉमस के कान के पास बहुत ही धीमी, ठंडी और भयानक आवाज़ में कहा। "अगर तुमने या तुम्हारे इस मूर्ख समाज ने फिर कभी ब्लैकवुड मैनर की देहरी पर कदम रखने की कोशिश की, तो इस बार मैं सिर्फ हवा से नहीं खेलूँगा। इस हवेली की नींव तुम्हारे खून से सींची जाएगी!" 
व्लाद ने एक ज़ोरदार झटका देकर थॉमस को दूर फेंक दिया। थॉमस ज़मीन पर गिर पड़ा और खाँसते हुए अपने साथियों को चिल्लाकर बोला, "पीछे हटो!... यह अभी अपनी पूरी ताकत में है!... हम अगली पूर्णचंद्र की रात को लौटेंगे!" 
घबराए हुए वे सभी सदस्य तुरंत उठे और टूटे हुए दरवाज़े से बाहर भाग खड़े हुए। 
चेतावनी और एक नया सच
LIBRARY का कमरा एक बार फिर शांत हो गया। केवल बाहर से आती कोहरे की ठंडी हवा की सरसराहट ही बाकी थी। 
नताशा अपनी छुपने की जगह से बाहर निकली। उसका पूरा शरीर डर के मारे काँप रहा था। उसने देखा कि व्लाद अभी भी वहीं खड़ा है, उसकी साँसें थोड़ी भारी थीं और उसकी आँखों की लालिमा धीरे-धीरे कम हो रही थी। 
नताशा दौड़कर व्लाद के पास आई और घबराए हुए स्वर में पूछा, "व्लाद... क्या तुम ठीक हो? वे लोग कौन थे? वे बार-बार उस चक्र और बलि की बात क्यों कर रहे थे?"
व्लाद ने नताशा की तरफ देखा। उसके चेहरे पर अब वह खौफनाक रूप नहीं था, बल्कि एक गहरी चिंता और वेदना थी। उसने नताशा के काँपते हुए हाथों को अपने ठंडे हाथों में थाम लिया। 
"वे ओकवुड के वे लोग हैं जो सदियों से इस भ्रम में जी रहे हैं कि वे मुझे मिटा सकते हैं," व्लाद ने धीमी आवाज़ में कहा। "लेकिन असली खतरा वे नहीं हैं, नताशा... असली खतरा वह वक्त है जो बहुत तेजी से बीत रहा है। ब्लड मून की उस रात के बाद से हमारे पास बहुत कम समय बचा है। या तो तुम पूरी तरह से इस अंधेरे को अपना कर मेरी हमसफर बनोगी, या फिर वे लोग तुम्हें मुझसे छीनकर हमेशा के लिए खत्म कर देंगे." 
नताशा ने व्लाद की आँखों में झाँका। उसे अब व्लाद से कोई डर महसूस नहीं हो रहा था, बल्कि उसके मन में एक अजीब सा अहसास था—वह जान चुकी थी कि व्लाद का यह सारा गुस्सा और यह खौफ केवल उसे बचाने के लिए था। 
लेकिन इस सबके बीच, नताशा के दिल में एक बड़ा सवाल अभी भी गूँज रहा था—क्या वह सच में व्लाद के उस पुराने प्यार का पुनर्जन्म थी? या यह सब उस गुप्त समाज और व्लाद के बीच का कोई बहुत बड़ा खेल था जिसका मोहरा वह बन चुकी थी?
क्रमशः

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
Chapter
10 of 30
Category
Haunted Places
Reading time
7 min
Words
1291
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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