Pretika › Haunted Places › मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
भाग 5: सदियों पुरानी डायरी और नताशा का नाम
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 9 मिनट
भोर की पहली ठंडी किरण जब ब्लैकवुड मैनर की ऊँची, रंगीन काँच वाली खिड़कियों से छनकर लाइब्रेरी के फर्श पर पड़ी, तो उस सुस्त अँधेरे में धूल के कण नाचते हुए से प्रतीत हुए। रात भर की वह खौफनाक आँधी, चमगादड़ों का वह बवंडर और व्लाद का वह खूनी रूप अब ओकवुड घाटी के घने कोहरे में ओझल हो चुका था। लेकिन उस रात का डर नताशा के दिल और दिमाग में किसी गहरी अमिट स्याही की तरह बैठ गया था।
नताशा ने रात भर आँखों में एक पल भी नींद नहीं डाली थी। वह अपने कमरे के एक कोने में दुबकी, सुबह की रोशनी का इंतज़ार करती रही थी। जैसे ही घड़ी ने सुबह के सात बजाए, उसने बिना एक पल गँवाए अपने कमरे का दरवाजा खोला और सीधे ग्रैंड लाइब्रेरी की तरफ कदम बढ़ा दिए। उसके भीतर अब डर से ज्यादा एक सुलगती हुई जिजीविषा और सच्चाई जानने की बेचैनी थी। वह जान चुकी थी कि भागने का कोई रास्ता नहीं है; इसलिए, इस दलदल से बाहर निकलने का एकमात्र उपाय इस हवेली के गहरे और काले राज़ों को बेनकाब करना था।
लाइब्रेरी का दरवाजा खोलते ही वही पुरानी किताबों, सूखी लकड़ी और हल्की सी धातु जैसी गंध उसके स्वागत में उठी। कमरा अभी भी शांत था। विशाल अलमारियाँ अपने सीने में सदियों के रहस्य दफ़न किए चुपचाप खड़ी थीं। नताशा सीधे उस गैलरी की तरफ बढ़ी जहाँ कल उसने 'क्रोनिकल्स ऑफ ब्लैकवुड' नाम की भारी पांडुलिपि देखी थी और वह रहस्यमयी पन्ना उसके हाथ लगा था।
उसने मेज़ पर रखे पीतल के लैंप को जलाया और उस भारी चमड़े की जिल्द वाली डायरी को अपनी तरफ खींचा, जिसे उसने कल शाम ठीक से नहीं खंगाला था। यह डायरी बाकी इतिहास की किताबों से अलग थी। इसकी जिल्द किसी गहरे काले और अज्ञात चमड़े की बनी थी, जिस पर जंग लगे लोहे के पट्टे कसे हुए थे।
नताशा ने काँपते हाथों से उस डायरी का ताला खोलने की कोशिश की, जो किसी जादुई या जटिल हुक से बंद था। जैसे ही उसने अपनी उंगलियों से उस हुक को छुआ, वह खुद-ब-खुद चटख आवाज़ के साथ खुल गया—मानो वह डायरी सिर्फ नताशा के स्पर्श का ही इंतज़ार कर रही हो।
पन्नों के बीच छिपा अतीत
नताशा ने जैसे ही डायरी का पहला पन्ना पलटा, उसकी साँसें अटक गईं।
पन्ने पीले पड़ चुके थे और उन पर स्याही के धब्बे थे, लेकिन लिखावट बेहद साफ और नफीस थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि वह लिखावट अंग्रेज़ी या लैटिन में नहीं, बल्कि बिल्कुल आधुनिक और स्पष्ट हिंदी में थी—मानो इसे किसी ऐसे शख्स ने लिखा हो जो भविष्य में झाँक सकता था।
पहला पन्ना पलटने पर उस पर सन 1724 की एक तारीख दर्ज थी।
"आज व्लाद ने फिर से उस वीराने में कदम रखा। उसका दिल पत्थर हो चुका है। उसकी आँखों में वही पुरानी तड़प है—नतालिया को खोने का दर्द। सौ साल बीत चुके हैं, लेकिन उसका यह श्राप खत्म नहीं हुआ। हर सौ साल बाद, प्रकृति उसे एक मौका देती है, एक ऐसा चेहरा लाती है जो बिल्कुल नतालिया जैसा होता है। लेकिन इस बार... इस बार खेल अलग होगा।"
नताशा की उंगलियाँ पन्नों पर थरथराने लगीं। उसने अगले पन्ने पलटे। जैसे-जैसे वह आगे बढ़ रही थी, समय की सुइयाँ जैसे पीछे की ओर घूम रही थीं।
हर एक पन्ने पर एक सदी का इतिहास दर्ज था। सन 1824, सन 1924, और अब... सन 2024 (यानी वर्तमान दशक)।
और फिर, नताशा की नजर एक ऐसे पन्ने पर पड़ी जिस पर हाल ही की तारीख और उसका अपना नाम लिखा हुआ था!
"आज वह आ गई। ब्लैकवुड मैनर की देहरी पर उसने कदम रखा। उसका नाम नताशा है। उसके बाल, उसकी चाल, उसकी आँखों की वह चमक—बिल्कुल नतालिया जैसी। व्लाद की बेचैनी अब खत्म होने वाली है। लेकिन क्या नताशा इस अंधेरे को अपना पाएगी? या वह भी पिछली बार की तरह हवेली के गलियारों में ही दम तोड़ देगी?"
नताशा का सिर चकराने लगा। वह पीछे हटकर मेज़ के सहारे खड़ी हो गई। उसका कमरा, उसकी यह नौकरी, यहाँ तक कि उसका यहाँ आना—यह सब कोई संयोग नहीं था। यह एक ऐसा जाल था जिसे सदियों पहले बुन लिया गया था, और वह अनजाने में इस मकड़जाल के बिल्कुल बीचों-बीच आ फंसी थी।
नतालिया की कहानी
उस डायरी में आगे के पन्नों में एक दर्दनाक प्रेम कहानी दर्ज थी।
तीन सौ साल पहले, ओकवुड घाटी में व्लाद कोई खूनी राक्षस नहीं, बल्कि एक सम्मानित और प्रतापी सामंत (Count) हुआ करता था। उसे घाटी की ही एक साधारण लेकिन सुंदर युवती नतालिया से बेइंतहा मोहब्बत हो गई थी। दोनों का प्यार परवान चढ़ा, लेकिन उस दौर के अंधविश्वासी गाँववालों और एक कट्टर पादरी ने व्लाद पर काला जादू करने और पिशाच (Vampire) होने का इल्जाम लगा दिया।
एक खौफनाक रात, गाँववालों ने ब्लैकवुड मैनर पर हमला बोल दिया। उन्होंने नतालिया को व्लाद से अलग करने के लिए उसे ज़िंदा आग के हवाले कर दिया। व्लाद अपनी तमाम ताकतों के बावजूद नतालिया को नहीं बचा पाया। मरते-मरते नतालिया ने व्लाद की बाहों में दम तोड़ दिया था।
अपने प्यार को खोने के गम और गुस्से में पागल हो चुके व्लाद ने एक प्राचीन और काले अनुष्ठान का सहारा लिया, जिससे उसने अमरता तो हासिल कर ली, लेकिन साथ ही उसे एक ऐसा श्राप मिल गया—जिसके तहत हर सौ साल बाद उसे अपने उसी खोए हुए प्यार की तलाश करनी होगी, और जब तक वह उसे पूरी तरह अपने वश में नहीं कर लेता, उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलेगी।
"नतालिया का पुनर्जन्म..." नताशा के मुँह से काँपते हुए शब्द निकले। "और वह पुनर्जन्म... मैं हूँ?"
यह विचार ही उसके पूरे शरीर में सिहरन पैदा करने के लिए काफी था। क्या वह सच में किसी सदियों पुरानी मरी हुई औरत का साया या उसका अक्स थी? क्या उसका अपना कोई वजूद नहीं था?
व्लाद का अचानक प्रकट होना
"सच्चाई हमेशा कड़वी होती है, नताशा..."
अचानक लाइब्रेरी के उस गहरे सन्नाटे को चीरती हुई व्लाद की मखमली और भारी आवाज़ गूँजी।
नताशा ने झटके से पीछे मुड़कर देखा। लाइब्रेरी के मुख्य अंधेर कोने से व्लाद धीरे-धीरे बाहर निकल रहा था। दिन की हल्की रोशनी उसके चेहरे पर पड़ रही थी, जिससे उसकी त्वचा किसी मरे हुए संगमरमर की मूर्ति जैसी सफेद और बेजान लग रही थी, लेकिन उसकी आँखें किसी शिकारी की तरह तेज थीं। उसने आज भी वही काला कोट पहन रखा था।
"तुम... तुम कब से वहाँ खड़े हो?" नताशा की आवाज़ में डर और गुस्से का अजीब सा मिश्रण था।
व्लाद ने मुस्कुराने की कोशिश की, लेकिन उसके चेहरे पर एक गहरी उदासी छाई हुई थी। उसने कहा, "मैं हमेशा यहीं होता हूँ, नताशा। इस हवेली का हर कोना, हर दीवार और हर किताब मेरी साँसों से जुड़ी है। और खासकर तुम... जब से तुमने इस डायरी को खोला है, तुम्हारी हर धड़कन मुझे सुनाई दे रही है।"
नताशा ने उस काली डायरी को बंद किया और गुस्से से काँपते हुए कहा, "यह क्या मज़ाक है, मि. वोल्कोव? या यह कोई बहुत बड़ा षड्यंत्र है? आपने मुझे यहाँ किसी लाइब्रेरियन के रूप में नहीं, बल्कि अपने अतीत के पागलपन को दोहराने के लिए बुलाया है! मैं नतालिया नहीं हूँ! मैं नताशा हूँ! मेरी अपनी एक ज़िंदगी है, मेरी अपनी पहचान है!"
व्लाद धीरे-धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा। उसकी चाल में वही खामोशी और अस्वाभाविक लोच थी। उसने बहुत ही शांत आवाज़ में कहा, "पहचान? पहचान तो सिर्फ इस जिस्म का एक छलावा है, नताशा। रूहें कभी नहीं बदलतीं। तीन सौ साल पहले जब नतालिया इस दुनिया से गई थी, तब उसने मुझसे वादा किया था कि वह लौटकर आएगी... मेरे पास, इसी ब्लैकवुड मैनर में।"
"मैं कोई वादा करके नहीं मरी!" नताशा चीखी। "यह सब आपका वहम है! एक बीमार सनक है जो आपको सदियों से खाए जा रही है!"
व्लाद नताशा के बिल्कुल करीब आ गया। उसके शरीर से आने वाली बर्फ जैसी ठंडक ने नताशा को घेर लिया। व्लाद ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और नताशा के गाल को छूना चाहा।
नताशा ने झटके से उसका हाथ झटक दिया। "दूर रहिए मुझसे! अगर आपने मुझे यहाँ किसी कैद की तरह रखा, तो मैं दुनिया को सच बता दूंगी!"
व्लाद की आँखों में क्षण भर के लिए गुस्से की एक लाल चमक कौंधी, लेकिन अगले ही पल वह शांत हो गया। उसने एक गहरी साँस ली, जिससे हवा में सूखी पत्तियों और पुरानी रोशनाई की महक फैल गई।
"दुनिया?" व्लाद ने ठंडी हँसी हंसते हुए कहा। "कौन सी दुनिया, नताशा? इस कोहरे की घाटी के बाहर जो दुनिया है, वह सिर्फ स्वार्थी और अंधी इंसानों की भीड़ है। वे उस चीज़ से डरते हैं जिसे वे समझ नहीं सकते। और जहाँ तक बात कैद की है... तो तुमने इस हवेली की देहरी पर कदम अपनी मर्ज़ी से रखा था। अब यहाँ से लौटने का रास्ता सिर्फ एक ही है..."
व्लाद ने झुककर नताशा की आँखों में सीधे देखा। उसकी आवाज़ अब इतनी धीमी और सम्मोहक हो चुकी थी कि नताशा की चेतना सुन्न पड़ने लगी।
"...या तो तुम मेरी बनकर इस अमरता के अंधेरे को अपना लो, या फिर इस हवेली की दीवारों में हमेशा के लिए दफ़न हो जाओ।"
कमरे का तापमान अचानक और नीचे गिर गया। नताशा को ऐसा लगा मानो उसके पैरों के नीचे की ज़मीन खिसक रही हो। व्लाद का वह सम्मोहन, उसकी वह आँखें, और उस डायरी में लिखी भविष्यवाणियाँ—सब कुछ मिलकर नताशा के तार्किक मन को पूरी तरह कुचल रहा था।
क्या वह सचमुच व्लाद के उस पुराने प्यार का साया थी? क्या उसका अंत भी उस अज्ञात नतालिया की तरह होना तय था?
इन सवालों के जवाब तलाशने से पहले ही, हवेली की बड़ी घड़ी ने दोपहर के बारह बजाए। उस घड़ी की गूँज के साथ ही बाहर मौसम ने फिर से करवट ली—आसमान में अचानक काले बादल घिर आए और ओकवुड घाटी में एक बार फिर से घना कोहरा उतरने लगा, जो यह बता रहा था कि रात बहुत जल्दी और बहुत खतरनाक रूप में लौटने वाली है।
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 5 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 9 min
- Words
- 1631
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे · सभी भाग →
और कहानियाँ · More stories
- द किंग ऑफ़ हेल (The King Of Hell) · Yogesh Kumar Maurya
- जिस घर में रात के बाद कोई ज़िंदा नहीं रहता · Yogesh Kumar Maurya
- दरवाज़े के उस पार , Season 1 · firoj saifi
- सेक्सी प्रेत · Yogesh Kumar Maurya