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भाग 8: जीवित होती हवेली की पुरानी तस्वीरें

Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 6 मिनट

ब्लैकवुड मैनर की उस ग्रैंड लाइब्रेरी के भीतर 'ब्लड मून' की खूनी और सिंदूरी रोशनी बिखरी हुई थी। समय जैसे उस एक पल में आकर थम सा गया था। व्लाद वोल्कोव की ठंडी उंगलियाँ नताशा की कलाई पर कस चुकी थीं, और उसकी लाल धधकती आँखें नताशा की चेतना को पूरी तरह अपने वश में करने का प्रयास कर रही थीं। हवा में एक अजीब सा खिंचाव था, मानो ओकवुड घाटी की पूरी ताक़त उस कमरे में आकर सिमट गई हो।
नताशा का दिल भीतर से चीख रहा था, लेकिन उसके शरीर की सारी प्रतिक्रियाएँ मानो सुन्न पड़ चुकी थीं। वह व्लाद के उस अगाध और खौफनाक आकर्षण के सामने खुद को बेबस महसूस कर रही थी। लेकिन तभी, उस सन्नाटे को चीरती हुई एक अजीब सी खड़खड़ाहट लाइब्रेरी की दीवारों से आने लगी।
दीवारों पर टंगे चित्रों का जागना
नताशा ने अपनी भारी होती पलकों को उठाने की कोशिश की और अपनी नज़र लाइब्रेरी की ऊँची दीवारों पर डाली। उन दीवारों पर सदियों पुराने तैल चित्र (Oil Paintings) टंगे हुए थे—वो पूर्वज, वो पुराने दरबारी और सामंत, जिन्हें व्लाद के खानदान का हिस्सा कहा जाता था।
अचानक, उन पुरानी और धूल से भरी पेंटिंग्स में एक अस्वाभाविक हलचल शुरू हो गई।
तस्वीरों में बने लोगों के चेहरे बदलने लगे। उनके स्थिर और मृत नैन-नक्शों में जीवन का संचार होने लगा। जिन आँखों को सिर्फ पेंट और कैनवास माना जा रहा था, वे अब वास्तव में झपक रही थीं। उन तस्वीरों में खड़े लोग अपनी जगहों पर मुड़-मुड़कर नताशा और व्लाद की तरफ देखने लगे। उनके चेहरों पर एक खौफनाक मुस्कान और अजीब सी उत्सुकता तैर रही थी।
सबसे डरावना दृश्य तब दिखा जब ठीक नताशा के सामने वाली दीवार पर टंगे उस मुख्य चित्र पर उसकी नज़र पड़ी—वह चित्र जिसमें व्लाद के साथ उसकी प्रेमिका नतालिया खड़ी थी।
तस्वीर के भीतर, नतालिया की पेंटिंग ने अपनी जगह से थोड़ा सा हिलकर अपनी गर्दन मोड़ी। उसकी आँखों के कोरों से लाल रंग की एक बूंद—ठीक खून के कतरे जैसी—कैनवास से बाहर निकलकर नीचे टपक पड़ी।
"यह... यह क्या हो रहा है?" नताशा के मुँह से काँपते हुए शब्द निकले। उसकी आवाज़ में डर की पराकाष्ठा थी।
व्लाद ने भी अपनी पकड़ थोड़ी ढीली की और मुड़कर दीवारों की तरफ देखा। उसके चेहरे पर कोई हैरानी नहीं थी, बल्कि एक गहरा ठहराव था। उसने बहुत ही धीमी आवाज़ में कहा, "यह हवेली सिर्फ ईंट और गारे से नहीं बनी है, नताशा। इसके भीतर सदियों का इतिहास साँस लेता है। ये दीवारें, ये तस्वीरें... ये सब इस बात की गवाह हैं कि इस घर ने कितनों को चाहा है और कितनों को खोया है।"
आंतरिक संघर्ष और टूटी हुई दीवार
तस्वीरों के जीवित होने और दीवारों से आती उन फुसफुसाहटों ने नताशा के दिमाग पर जो दबाव बना रखा था, उसने अचानक एक विपरीत प्रतिक्रिया को जन्म दिया। वह सम्मोहन, जो व्लाद की आँखों के ज़रिए उसकी रूह पर हावी हो रहा था, अचानक टूटने लगा।
नताशा ने अपनी पूरी ताक़त समेटी और ज़ोर से झटका देकर अपनी कलाई व्लाद की पकड़ से छुड़ा ली। वह पीछे हट गई और हाँफते हुए मेज़ का सहारा लिया।
"मुشे छोड़ दो!" नताशा चीखी। उसकी आवाज़ उस विशाल लाइब्रेरी में गूँज उठी। "मैं तुम्हारी इस हवेली का खिलौना नहीं हूँ! न ये पुरानी तस्वीरें, न ये खूनी चाँद और न ही तुम्हारी यह अमरता... इनमें से कोई भी चीज़ मुझे गुलाम नहीं बना सकती! मैं नताशा हूँ, और मैं अपनी मर्ज़ी की मालकिन हूँ!"
व्लाद अपनी जगह पर स्थिर खड़ा रहा। उसकी लाल आँखें धीरे-धीरे अपनी सामान्य गहरी भूरी रंगत में लौटने लगीं। उसके चेहरे पर गुस्से के बजाय एक अजीब सा आश्चर्य और हल्की सी प्रशंसा के भाव उभर आए।
उसने धीरे से अपने कदम पीछे हटाए और कहा, "इंसानों में कम ही लोग ऐसे होते हैं जो इस खौफ के सामने खड़े होने की हिम्मत रखते हैं, नताशा। ज्यादातर लोग तो पहली ही रात में अपना मानसिक संतुलन खो बैठते हैं या भागने की कोशिश में अपनी जान गँवा बैठते हैं। लेकिन तुम... तुम हर बार एक नई आग के साथ खड़ी हो जाती हो।"
"क्योंकि मैं तुम्हारी तरह मरी हुई नहीं हूँ, मि. वोल्कोव!" नताशा ने अपनी साँसों को संभालते हुए कहा। "तुम्हारी यह अमरता एक अभिशाप है, और तुम अपने इस अकेलेपन को मिटाने के लिए किसी बेकसूर को अपनी इस सड़ी हुई दुनिया में खींचना चाहते हो!"
चित्रों का रहस्य और चेतावनी
जैसे ही नताशा ने यह कहा, दीवारों पर टंगे उन चित्रों की हलचल और तेज़ हो गई। लेकिन अब वे डरावने नहीं, बल्कि चेतावनी देते हुए प्रतीत हो रहे थे। एक के बाद एक कई तस्वीरें अपनी फ्रेम से नीचे गिरकर फर्श पर टूटने लगीं। हर टूटे हुए फ्रेम के साथ एक पुरानी डायरी का पन्ना हवा में उड़ने लगा।
नताशा ने झुककर उनमें से एक पन्ने को उठाया। उस पर लिखा था:
"जो कोई भी इस हवेली के इतिहास को बदलने की कोशिश करेगा, उसे अतीत की परछाइयों का सामना करना पड़ेगा। व्लाद का प्यार एक वरदान नहीं, बल्कि वह आग है जिसमें सब कुछ भस्म हो जाता है।"
व्लाद ने उन बिखरे हुए पन्नों को देखा और एक गहरी, दर्द से भरी साँस ली। "तुम समझती हो कि यह सिर्फ मेरा एकापन है? नहीं, नताशा। यह वह कीमत है जो मैंने सदियों पहले चुकाई थी। जब तक यह चक्र पूरा नहीं होता, न तो मुझे मुक्ति मिलेगी और न ही इस हवेली को शांति।"
ब्लड मून की वह खूनी रोशनी अब धीरे-धीरे कम होने लगी थी। आसमान में बादल फिर से छाने लगे थे, और ओकवुड घाटी का घना कोहरा एक बार फिर से खिड़कियों के शीशों को अपनी चादर में लपेटने लगा था।
रात का वह खतरनाक पहर अपनी ढलान पर था, लेकिन नताशा जान चुकी थी कि यह तो महज़ एक शुरुआत थी। हवेली की वे जीवित होती तस्वीरें और वे पुराने राज़ इस बात का सुराग दे रहे थे कि व्लाद के अतीत में कुछ ऐसा छिपा था जिसे आज तक किसी ने पूरी तरह नहीं जाना था।
क्या नताशा उस छिपे हुए सच तक पहुँच पाएगी? क्या व्लाद के उस अभिशाप को तोड़ने का कोई और रास्ता भी था?
क्रमशः

Writer
Yogesh Kumar Maurya
Story
मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
Chapter
8 of 30
Category
Haunted Places
Reading time
6 min
Words
1008
Language
Hindi (हिंदी)
Price
Free to read

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