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भाग 7: ब्लड मून और ओकवुड वैली के खौफनाक किस्से
Yogesh Kumar Maurya · Haunted Places · 6 मिनट
तहखाने के उस खौफनाक अंधेरे से निकलकर नताशा जब वापस ग्रैंड लाइब्रेरी में पहुँची, तब तक शाम की परछाइयाँ ब्लैकवुड मैनर की खिड़कियों पर अपनी लंबी उंगलियाँ फैलाने लगी थीं। ओकवुड घाटी पर धीरे-धीरे एक अजीब सा, खून की तरह लाल और गहरा सन्नाटा छाने लगा था। आज आसमान में एक ऐसा चंद्रमा उगने वाला था, जिसे सदियों से इस घाटी के लोग 'ब्लड मून' (खूनी चाँद) के नाम से जानते थे—वह रात जब इंसानी दुनिया और परछाइयों की दुनिया के बीच की दीवार सबसे ज्यादा कमज़ोर हो जाती है।
नताशा ने लाइब्रेरी की बड़ी महोगनी मेज़ पर बैठकर अपनी साँसों को सामान्य करने की कोशिश की। उसके हाथ अभी भी तहखाने में देखे गए उस खाली ताबूत और नतालिया की उस पुरानी पेंटिंग के खौफ से काँप रहे थे। व्लाद के शब्द और उसका बर्फीला स्पर्श उसके भीतर एक अनजानी सी बेचैनी पैदा कर रहे थे। लेकिन अब डरने का वक्त नहीं था; उसे उस अभिशाप और 'ब्लड मून' के उस रहस्य को समझना था जो व्लाद की अमरता और उसके वजूद से जुड़ा हुआ था।
ओकवुड वैली के पन्नों में छिपा खौफनाक इतिहास
नताशा ने लाइब्रेरी की उन अलमारियों की ओर रुख किया जिन पर ओकवुड घाटी के स्थानीय इतिहास और पुराने दस्तावेजों का संग्रह रखा था। धूल से सनी एक मोटी किताब को उसने बाहर निकाला, जिस पर जिल्द की जगह काले चमड़े का इस्तेमाल किया गया था। किताब का शीर्षक था—“ओकवुड वैली: द वैली ऑफ शैडोज़ एंड ब्लड” (छाया और खून की घाटी)।
उस किताब के पन्ने पलटने पर नताशा को ऐसे कई खुलासे मिले जो शहर के लोगों से छुपाकर रखे गए थे।
किताब के अनुसार, ओकवुड वैली कोई सामान्य भौगोलिक क्षेत्र नहीं था। यह एक ऐसा स्थान था जहाँ सदियों पहले दो अलग-अलग दुनियाओं के बीच एक खूनी समझौता हुआ था। व्लाद वोल्कोव, जो कभी इस घाटी का सबसे प्रतापी और शक्तिशाली सामंत हुआ करता था, उसने अपनी ज़मीन और लोगों की रक्षा के लिए एक प्राचीन ताकत से सौदा किया था। लेकिन जब इंसानों के लालच और अविश्वास ने उसकी प्रेमिका नतालिया को जिंदा जला दिया, तो उस समझौते ने एक खौफनाक रूप ले लिया।
पेजों पर आगे लिखा था:
"व्लाद अब इंसान नहीं रहा था। उसने मौत को हरा दिया था, लेकिन इसके बदले में उसे एक ऐसा श्राप मिला जो हर सौ साल बाद पूर्णचंद्र की उस लाल रात—यानी 'ब्लड मून' के दिन—अपनी चरम सीमा पर पहुँच जाता है। उस रात व्लाद की शक्तियाँ सबसे अधिक होती हैं, और अपनी अमरता को अगले सौ वर्षों के लिए बनाए रखने के लिए उसे उस स्त्री के खून की आवश्यकता होती है जो उसकी पूर्व प्रेमिका का पुनर्जन्म हो।"
नताशा की आँखें फटी की फटी रह गईं। “अगले सौ वर्षों के लिए अमरता... और वह स्त्री... यानी मैं?”
किताब के आखिरी पन्ने पर खून से कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं, जो हाल ही के किसी शख्स ने जोड़ी थीं—संभवतः व्लाद ने खुद:
"ब्लड मून की रात ही वह घड़ी है जब चक्र पूरा होगा। या तो वह पूरी तरह मेरी होगी, या इस हवेली की दीवारों में हमेशा के लिए विलीन हो जाएगी।"
खिड़की के बाहर बदलता आसमान
नताशा ने किताब को ज़ोर से बंद कर दिया। उसके माथे पर पसीने की बूंदें चमक उठीं। उसने खिड़की की तरफ देखा। रंगीन काँच के पार से आसमान का रंग धीरे-धीरे नीले से बदलकर गहरे सिंदूरी और लाल रंग में ढल रहा था। ओकवुड घाटी के ऊपर वह डरावना 'ब्लड मून' उभर चुका था, जिसकी किरणें जब हवेली की काली मीनारों पर पड़ रही थीं, तो पूरी इमारत किसी खून में डूबी हुई प्रतीत हो रही थी।
हवेली के भीतर का तापमान अचानक तेजी से गिरने लगा। कमरे में रखे लैंप की लौ नीली पड़ गई और मद्धम हो गई।
तभी हवेली के गलियारों में किसी के चलने की भारी, सधी हुई और नपी-तुली आवाज़ गूँजने लगी—थप... थप... थप...
नताशा का दिल जोर-जोर से धड़कने लगा। वह समझ चुकी थी कि व्लाद आ रहा है। ब्लड मून की इस खौफनाक रात में, व्लाद की ताकत अपने चरम पर थी, और उसका यह लाइब्रेरी में आना कोई इत्तेफाक नहीं था।
दरवाज़ा धीरे से खुला—बिना किसी आवाज़ के, जैसे हवा के किसी झोंके ने उसे धकेल दिया हो।
व्लाद उस चौखट पर खड़ा था। ब्लड मून की खूनी रोशनी उसके पीछे से आ रही थी, जिससे उसकी लंबी और गहरी काया एक खौफनाक दानव जैसी प्रतीत हो रही थी। उसने आज कोई काला कोट नहीं पहना था, बल्कि एक शाही और प्राचीन वस्त्र धारण किया था, जिस पर चांदी के तारों से नक्काशी की गई थी। उसके बाल थोड़े बिखरे हुए थे और उसकी आँखें पूरी तरह से लाल अंगारे की तरह धधक रही थीं।
व्लाद का सामना
व्लाद ने लाइब्रेरी में कदम रखा। उसके हर एक कदम के साथ कमरे की हवा और अधिक ठंडी और भारी होती गई।
"तुम इतिहास के पन्ने बहुत टटोल रही हो, नताशा," व्लाद की भारी, मखमली और गूँजती हुई आवाज़ ने सन्नाटे को चीर दिया। उसकी आवाज़ में एक अजीब सा ठहराव और नशा था। "लेकिन किताबें कभी भी उस सच को बयान नहीं कर सकतीं जो दो दिलों के बीच बीता हो।"
नताशा ने अपनी जगह से उठकर मेज़ का सहारा लिया। उसने काँपते हुए लेकिन दृढ़ स्वर में कहा, "यह कोई प्रेम कहानी नहीं है, मि. वोल्कोव! यह एक सनक है... एक खौफनाक कैद है जिसमें आपने मुझे फँसा रखा है! मैं नतालिया नहीं हूँ! मैं अपना भविष्य खुद तय करूँगी!"
व्लाद के चेहरे पर एक दर्दनाक और हल्की सी क्रूर मुस्कान उभर आई। वह धीरे-धीरे नताशा की तरफ बढ़ने लगा।
"नतालिया या नताशा... नाम बदलने से रूह की पहचान नहीं बदलती, नताशा," व्लाद उसके बिल्कुल करीब आ गया। उसकी ठंडी साँसें अब नताशा के चेहरे को छू रही थीं। "आज ब्लड मून है। आसमान में चाँद अपने पूरे शबाब पर है। सदियों का यह चक्र आज रात पूरा होने वाला है।"
व्लाद ने अपना हाथ आगे बढ़ाया और नताशा की कलाई को अपनी ठंडी उंगलियों से पकड़ लिया। उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि नताशा चाहकर भी हिल नहीं पा रही थी, लेकिन उस पकड़ में दर्द या नफरत नहीं, बल्कि एक अजीब सी लाचारी और सदियों की प्यास थी।
"मैं तुम्हें हर दिन चाहता था, नताशा," व्लाद ने बहुत धीमी और सुरीली आवाज़ में कहा, जो सीधे नताशा के दिमाग में गूँज रही थी। "और आज रात... यह इंतज़ार हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।"
कमरे की दीवारें और किताबें थरथराने लगीं। बाहर चमगादड़ों का झुंड एक बार फिर से चीखते हुए खिड़कियों पर टकराने लगा। नताशा की चेतना सुन्न पड़ने लगी। व्लाद की लाल आँखों का वह सम्मोहन उसके प्रतिरोध को धीरे-धीरे तोड़ रहा था।
क्या नताशा आज रात इस अमर पिशाच के सामने पूरी तरह घुटने टेक देगी? या ब्लड मून की इस रात में कोई अनहोनी होने वाली है?
क्रमशः
- Writer
- Yogesh Kumar Maurya
- Story
- मि. वैम्पायर वांट मी एवरी डे
- Chapter
- 7 of 30
- Category
- Haunted Places
- Reading time
- 6 min
- Words
- 1116
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
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