Pretika › Ghost Stories › 🪞 behind the mirror
एपिसोड 6 आठवाँ चेहरा
firoj saifi · Ghost Stories · 13 मिनट
- Writer
- firoj saifi
- Story
- 🪞 behind the mirror
- Chapter
- 6 of 8
- Category
- Ghost Stories
- Reading time
- 13 min
- Words
- 2530
- Language
- Hindi (हिंदी)
- Price
- Free to read
रात के ठीक **2 बजकर 13 मिनट** हुए थे।
पुराने अस्पताल की तीसरी मंज़िल पर खड़े Arjun को अचानक महसूस हुआ कि उसकी उंगलियाँ किसी बर्फ़ जैसे ठंडे हाथ ने पकड़ रखी हैं।
उसने नीचे देखा।
वह **Aarav** था।
लेकिन Aarav की आँखों में कुछ ऐसा था जिसे देखकर Arjun की सांस रुक गई।
आँखें उसकी थीं।
चेहरा उसका था।
हाथ भी उसका था।
लेकिन...
**परछाई उसकी नहीं थी।**
फर्श पर Aarav की shadow खड़ी नहीं थी।
वह घुटनों के बल बैठी थी।
और उसका सिर धीरे-धीरे Arjun की तरफ उठ रहा था।
Arjun पीछे हटना चाहता था, लेकिन Aarav की पकड़ मजबूत होती चली गई।
“भैया...”
Aarav की आवाज़ काँप रही थी।
“मुझे यहाँ से ले चलो।”
Arjun ने उसकी तरफ देखा।
“तुम Aarav हो?”
कुछ सेकंड तक खामोशी रही।
फिर Aarav मुस्कुराया।
“आपको अब भी शक है?”
Arjun ने हाथ छुड़ाने की कोशिश की।
तभी पीछे से वह लड़की बोली—
“उसे मत छुओ।”
Arjun ने पलटकर देखा।
वही लड़की।
लगभग बीस साल की।
लंबे काले बाल।
पीला चेहरा।
और आँखें...
अजीब तरह से जानी-पहचानी।
वह दीवार से लगी खड़ी थी।
“तुम कौन हो?”
Arjun ने पूछा।
लड़की ने धीरे से कहा—
“मैंने आपको बताया था।”
“मैं आपकी बहन हूँ।”
Kabir तुरंत आगे आया।
“झूठ।”
लड़की ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें कैसे पता?”
Kabir का चेहरा सफेद पड़ गया।
“क्योंकि...”
उसकी आवाज़ टूट गई।
“क्योंकि तुम्हारी मौत मेरी आँखों के सामने हुई थी।”
लड़की मुस्कुराई।
“मौत?”
उसने धीरे से अपना सिर झुकाया।
“या फिर... सिर्फ तुम्हारी याद में?”
अचानक अस्पताल की सारी लाइटें बंद हो गईं।
**टक।**
अंधेरा।
फिर कहीं दूर से एक बच्चे के रोने की आवाज़ आई।
एक...
दो...
तीन...
फिर सात बच्चों की आवाज़ें एक साथ।
“हम उन लोगों की याद हैं... जिन्हें तुम भूल चुके हो।”
Arjun ने कान बंद कर लिए।
लेकिन आवाज़ उसके कानों से नहीं...
उसके **दिमाग के अंदर** आ रही थी।
---
### 1
अंधेरे में Neil की आवाज़ सुनाई दी।
“Arjun!”
“Neil!”
“मैं यहाँ हूँ!”
“आवाज़ की तरफ आओ!”
अचानक एक कैमरे की फ्लैश चमकी।
**FLASH!**
एक सेकंड के लिए पूरा कमरा रोशनी से भर गया।
Arjun ने देखा—
कमरे की दीवारों पर दर्जनों तस्वीरें लगी थीं।
हर तस्वीर में...
एक ही चेहरा था।
**Arjun का।**
लेकिन हर तस्वीर में उसकी उम्र अलग थी।
एक तस्वीर में वह पाँच साल का था।
दूसरी में दस।
तीसरी में सत्रह।
चौथी में पच्चीस।
पाँचवीं में...
वह बूढ़ा था।
बहुत बूढ़ा।
Arjun धीरे-धीरे तस्वीरों के पास गया।
उसने आखिरी तस्वीर को छुआ।
उस पर तारीख लिखी थी—
**17 OCTOBER 2041**
Arjun के हाथ काँपने लगे।
“ये क्या है?”
Neil उसके पीछे खड़ा था।
“तुम्हें ये तस्वीर पहले से पता थी?”
“नहीं।”
“फिर इसे देखकर तुम इतने डर क्यों रहे हो?”
Arjun ने तस्वीर से नजर नहीं हटाई।
“क्योंकि...”
उसने धीरे से कहा—
“ये तारीख अभी आई ही नहीं है।”
Neil चुप हो गया।
तभी पीछे से आवाज़ आई।
“आएगी।”
दोनों पलटे।
वह लड़की उनके सामने खड़ी थी।
“अगर तुम आठवाँ चेहरा बनने से पहले बाहर नहीं निकले...”
वह रुक गई।
“तो ये तारीख आएगी।”
Arjun ने पूछा—
“आठवाँ चेहरा क्या है?”
लड़की ने उसकी आँखों में देखा।
“तुम।”
“मैं?”
“हाँ।”
“लेकिन मैं तो सातवाँ प्रयोग था।”
लड़की हल्के से हँसी।
“वही तो गलती है।”
“किसकी?”
“तुम्हारे पिता की।”
---
### 2
Kabir ने अचानक लड़की का हाथ पकड़ लिया।
“बस!”
लड़की ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें अभी भी लगता है कि तुम उसे बचा सकते हो?”
Kabir ने उसे दीवार से धक्का दिया।
“तू है कौन?”
लड़की की मुस्कान गायब हो गई।
उसकी आँखों में अचानक गहरा अंधेरा उतर आया।
“मैं?”
उसने धीरे से कहा—
“मैं वह हूँ जिसे Devendra ने पहली बार mirror के पीछे देखा था।”
Kabir पीछे हट गया।
“नहीं...”
“हाँ।”
“ये संभव नहीं है।”
“तुम्हारे लिए नहीं।”
उसने अपना हाथ आगे बढ़ाया।
उसकी हथेली पर एक पुराना निशान था।
एक गोल निशान।
बिल्कुल वैसा...
जैसा Arjun की हथेली पर था।
Arjun ने अपना हाथ देखा।
फिर लड़की का।
दोनों निशान एक जैसे थे।
“ये निशान...”
लड़की ने कहा—
“एक दरवाज़ा है।”
“किसका?”
“उस दुनिया का...”
उसने दीवार की तरफ देखा।
“जहाँ से कोई वापस नहीं आता।”
फिर उसने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
“सिवाय उन लोगों के... जिनकी यादें अभी जिंदा हों।”
---
### 3
अचानक कमरे के बीचोंबीच एक दरार दिखाई दी।
पहले फर्श पर।
फिर दीवार पर।
फिर छत पर।
दरारों के अंदर से हल्की नीली रोशनी निकलने लगी।
Neil पीछे हट गया।
“ये क्या है?”
Kabir बोला—
“Mirror world.”
Arjun ने उसकी तरफ देखा।
“तुमने कहा था वो जगह बंद हो चुकी है।”
Kabir ने सिर हिलाया।
“मैं गलत था।”
“कितने सालों से?”
Kabir ने जवाब नहीं दिया।
“कितने सालों से, Kabir?”
Kabir की आँखों में आँसू आ गए।
“तेरह।”
Arjun का चेहरा सख्त हो गया।
“तेरह साल?”
“हाँ।”
“और तुम जानते थे?”
“मैंने कोशिश की थी तुम्हारे पिता को रोकने की।”
“फिर?”
Kabir ने सिर झुका लिया।
“मैं डर गया।”
“किससे?”
Kabir ने धीरे से सामने की दरार की ओर इशारा किया।
“उससे।”
अचानक दरार के अंदर से एक आवाज़ आई।
बहुत गहरी।
बहुत धीमी।
“**Kabir...**”
Kabir का चेहरा जम गया।
आवाज़ फिर आई।
“**तुम अभी भी डरे हुए हो।**”
Kabir ने आँखें बंद कर लीं।
“नहीं...”
“**तुमने मुझे छोड़ा था।**”
“नहीं!”
“**लेकिन मैंने तुम्हें नहीं छोड़ा।**”
दरार के अंदर से एक हाथ बाहर आया।
काला।
लंबा।
मानव हाथ से कहीं ज्यादा लंबी उंगलियाँ।
Kabir पीछे गिर पड़ा।
Arjun ने उसे खींचकर पीछे किया।
लेकिन वह हाथ अचानक हवा में रुक गया।
और उसकी उंगली...
सीधे Arjun की तरफ उठ गई।
“**आठवाँ।**”
अंधेरे में आवाज़ गूँजी।
“**पूरा करो।**”
---
### 4
Arjun को अचानक तेज सिरदर्द हुआ।
उसके सामने सब धुंधला हो गया।
फिर...
एक कमरा।
एक मेज।
एक पुराना tape recorder।
और उसके पिता।
**Devendra Sharma.**
वह कैमरे के सामने बैठे थे।
चेहरा थका हुआ।
आँखों के नीचे काले घेरे।
उनके सामने सात mirrors रखे थे।
उन्होंने रिकॉर्डिंग शुरू की।
“अगर कोई ये tape सुन रहा है...”
उन्होंने कुछ सेकंड रुककर कहा—
“तो इसका मतलब है कि Experiment Seven असफल नहीं हुआ।”
Arjun की सांस रुक गई।
“Experiment Seven... सफल हुआ।”
Devendra ने कैमरे के सामने झुककर कहा—
“लेकिन हमने जो सोचा था, उसके बिल्कुल उलट।”
उन्होंने पीछे देखा।
“Mirror ने किसी आत्मा को नहीं बुलाया।”
“Mirror ने...”
उनकी आवाज़ धीमी हो गई।
“एक जीव को जन्म दिया।”
Arjun ने स्क्रीन की तरफ देखा।
Devendra आगे बोले—
“वह जीव शरीर नहीं खाता।”
“वह खून नहीं पीता।”
“वह इंसान के अंदर की सबसे कीमती चीज़ खाता है।”
एक लंबी खामोशी।
“**यादें।**”
Recording में अचानक आवाज़ बदल गई।
जैसे कोई दूसरे कमरे से बोल रहा हो।
“और जब उसकी भूख बढ़ती है...”
Devendra ने धीरे से कैमरे की ओर देखा।
“वह सिर्फ यादें नहीं खाता।”
“वह चेहरा भी ले लेता है।”
स्क्रीन काली हो गई।
फिर एक आखिरी लाइन सुनाई दी—
“**आठवाँ चेहरा उसका अपना होगा।**”
Recording खत्म।
---
### 5
Arjun ने आँखें खोलीं।
वह फिर अस्पताल में था।
Neil उसके पास बैठा था।
Kabir दीवार के पास खड़ा था।
Aarav गायब था।
और लड़की...
वह उसके बिल्कुल सामने बैठी थी।
“तुम ठीक हो?”
Arjun ने उसे घूरा।
“तुमने मुझे ये सब क्यों दिखाया?”
“क्योंकि अब तुम्हारे पास समय कम है।”
“किसलिए?”
“याद करने के लिए।”
“क्या?”
वह लड़की उसके करीब आई।
“तुम्हें याद करना होगा कि तुम पैदा होने से पहले कहाँ थे।”
Arjun हँस पड़ा।
“कोई पैदा होने से पहले कहाँ हो सकता है?”
लड़की ने कहा—
“Mirror के पीछे।”
Arjun की हँसी रुक गई।
“मैं वहाँ था?”
“हाँ।”
“कब?”
“जब तुम्हारे पिता ने पहला experiment किया था।”
Arjun के दिमाग में अचानक एक दृश्य चमका।
एक छोटा बच्चा।
एक कमरे में बंद।
उसके सामने mirror।
और mirror के दूसरी तरफ...
एक और बच्चा।
वह बच्चा बिल्कुल उसी जैसा दिख रहा था।
Arjun ने आँखें खोल दीं।
“मैं अकेला नहीं था।”
लड़की ने धीरे से कहा—
“नहीं।”
“मेरे साथ कौन था?”
लड़की ने जवाब नहीं दिया।
Arjun ने फिर पूछा—
“कौन था?”
वह उसके कान के पास झुकी।
“**मैं।**”
---
### 6
अचानक पूरा अस्पताल हिलने लगा।
शीशे टूटने लगे।
दरवाज़े अपने आप बंद हो गए।
Neil चिल्लाया—
“हमें यहाँ से निकलना होगा!”
Kabir ने मुख्य दरवाज़े की तरफ दौड़ लगाई।
लेकिन दरवाज़े के सामने...
एक mirror था।
एक विशाल mirror।
पूरी दीवार जितना बड़ा।
उसमें चार लोग दिखाई दे रहे थे।
Arjun।
Neil।
Kabir।
और लड़की।
लेकिन...
**Aarav दिखाई नहीं दे रहा था।**
Arjun ने mirror को ध्यान से देखा।
“वो कहाँ है?”
लड़की ने कहा—
“कौन?”
“Aarav!”
“कौन Aarav?”
Arjun ने उसकी तरफ घूरा।
“मेरा भाई!”
लड़की कुछ सेकंड चुप रही।
फिर बोली—
“तुम्हारा कोई भाई नहीं है।”
Arjun का चेहरा बदल गया।
“झूठ।”
“तुम्हारे पिता ने तुम्हें बताया था कि Aarav था।”
“वह था!”
“तुम्हें याद है?”
Arjun कुछ कह नहीं पाया।
“उसका जन्मदिन?”
खामोशी।
“उसकी पसंदीदा चीज़?”
Arjun ने आँखें बंद कीं।
कुछ याद नहीं आया।
“उसकी आवाज़?”
कुछ नहीं।
“उसका चेहरा?”
Arjun ने mirror की तरफ देखा।
और पहली बार...
उसे महसूस हुआ...
वह Aarav का चेहरा याद नहीं कर पा रहा था।
उसका शरीर काँप गया।
“नहीं...”
वह mirror के करीब गया।
“नहीं।”
उसने mirror पर हाथ रखा।
“मैंने उसे देखा है।”
लड़की ने कहा—
“देखना और याद रखना... दो अलग चीज़ें हैं।”
---
### 7
Mirror की सतह पर अचानक लहरें उठीं।
जैसे पानी हो।
फिर अंदर से एक चेहरा बाहर आया।
**Aarav का चेहरा।**
वह चिल्ला रहा था।
“भैया!”
Arjun ने पूरी ताकत से mirror को पकड़ा।
“Aarav!”
“मुझे बाहर निकालो!”
“मैं आ रहा हूँ!”
“भैया!”
Aarav ने अपना हाथ mirror के अंदर से बाहर निकाला।
Arjun ने उसे पकड़ लिया।
लेकिन उसी क्षण...
लड़की चिल्लाई—
“मत खींचो!”
Arjun ने उसकी बात नहीं मानी।
उसने Aarav को बाहर खींच लिया।
Aarav फर्श पर गिर पड़ा।
कुछ सेकंड तक कोई आवाज़ नहीं हुई।
फिर Aarav उठकर बैठा।
“भैया...”
Arjun ने उसे गले लगा लिया।
“मैंने तुम्हें पा लिया।”
Aarav रो रहा था।
लेकिन Kabir दूर खड़ा था।
उसके चेहरे पर डर था।
बहुत गहरा डर।
Arjun ने पूछा—
“क्या हुआ?”
Kabir ने काँपती उंगली से mirror की तरफ इशारा किया।
“Arjun...”
“क्या?”
“उसमें...”
Arjun ने mirror की तरफ देखा।
Aarav उसमें दिखाई दे रहा था।
Arjun भी।
Neil भी।
Kabir भी।
लड़की भी।
लेकिन...
Mirror के अंदर **एक और Aarav** खड़ा था।
वह मुस्कुरा रहा था।
और उसके पीछे...
सैकड़ों चेहरे थे।
सब बिना आँखों के।
सब बिना मुँह के।
और सबसे पीछे...
वह लंबा faceless creature खड़ा था।
उसने अपना हाथ उठाया।
और mirror के अंदर से लिखा—
**8**
फिर...
**9**
फिर...
**10**
Arjun पीछे हट गया।
“ये क्या गिन रहा है?”
लड़की ने बहुत धीमी आवाज़ में कहा—
“चेहरे।”
---
### 8
Aarav अचानक चिल्लाया।
“भैया!”
Arjun ने उसकी तरफ देखा।
Aarav के चेहरे पर दर्द था।
“मुझे बचाओ!”
“क्या हुआ?”
Aarav ने अपना चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया।
“वो... मेरे अंदर है।”
“कौन?”
“वो आदमी...”
“कौन आदमी?”
Aarav ने सिर उठाया।
उसकी आँखें अब पूरी तरह काली थीं।
“**तुम्हारे पिता।**”
Arjun जम गया।
Aarav ने मुस्कुराकर कहा—
“उन्होंने हमें कभी बचाया ही नहीं।”
Kabir ने पीछे हटते हुए कहा—
“नहीं...”
Aarav ने उसकी तरफ देखा।
“तुम्हें तो सब पता था।”
Kabir की आँखों से आँसू निकल आए।
“मैंने कोशिश की थी।”
“तुमने दरवाज़ा खोला था।”
“मैं मजबूर था।”
“तुमने उसे अंदर आने दिया।”
Kabir चिल्लाया—
“मैंने तुम्हें नहीं मारा!”
Aarav ने धीरे से कहा—
“लेकिन तुमने मुझे बंद जरूर किया।”
Arjun ने Kabir की तरफ देखा।
“क्या कह रहा है ये?”
Kabir चुप रहा।
“क्या किया था तुमने?”
Kabir की आँखें झुक गईं।
“मैंने...”
वह रुक गया।
“मैंने Experiment Seven की रात mirror को बंद किया था।”
“अंदर कौन था?”
Kabir ने जवाब दिया—
“तुम।”
Arjun की सांस अटक गई।
“और Aarav?”
Kabir ने उसकी तरफ देखा।
“वो बाहर था।”
Arjun धीरे-धीरे पीछे हट गया।
“तो मैं mirror के अंदर था?”
“हाँ।”
“कितने समय तक?”
Kabir ने कुछ नहीं कहा।
“कितने साल?”
“तेरह।”
---
### 9
Arjun की दुनिया घूमने लगी।
तेरह साल।
जिस जिंदगी को वह अपनी समझता था...
वह शायद उसकी थी ही नहीं।
उसकी यादें।
उसका घर।
उसकी माँ।
उसका भाई।
सब कुछ...
किसी और ने बनाया हो सकता था।
लड़की उसके पास आई।
“अब समझे?”
Arjun ने पूछा—
“तुम कौन हो?”
“मैं तुम्हारी बहन नहीं हूँ।”
Arjun ने उसकी आँखों में देखा।
“फिर?”
वह मुस्कुराई।
“मैं तुम्हारी **पहली याद** हूँ।”
अचानक Arjun के सामने बचपन का एक दृश्य आया।
एक बच्चा।
वह बच्चा mirror के सामने खड़ा था।
उसके साथ एक छोटी लड़की थी।
वह लड़की उसका हाथ पकड़े हुए थी।
“डरो मत।”
बच्चा पूछता है—
“तुम कौन हो?”
लड़की मुस्कुराती है।
“मैं तुम्हारी बहन हूँ।”
दृश्य बदल गया।
Devendra कमरे में आया।
उसने लड़की को देखा।
उसका चेहरा डर से भर गया।
“तुम बाहर कैसे आई?”
लड़की मुस्कुराई।
“आपने दरवाज़ा खोला था।”
Devendra पीछे हट गया।
“तुम इंसान नहीं हो।”
लड़की ने कहा—
“लेकिन आपका बेटा है।”
Devendra ने Arjun की तरफ देखा।
फिर लड़की की तरफ।
और पहली बार...
उसने अपनी बंदूक निकाली।
दृश्य टूट गया।
Arjun ने आँखें खोल दीं।
“मेरे पिता ने तुम्हें मारने की कोशिश की थी।”
लड़की ने सिर हिलाया।
“हाँ।”
“क्यों?”
“क्योंकि उन्हें डर था कि मैं तुम्हें सब कुछ याद करा दूँगी।”
“क्या?”
वह उसके बिल्कुल सामने आ गई।
“कि तुम असली Arjun नहीं हो।”
---
### 10
अस्पताल की घड़ी अचानक चलने लगी।
**2:13**
**2:14**
**2:15**
समय आगे बढ़ रहा था।
पहली बार।
Mirror की सतह पर दरार आई।
लड़की ने कहा—
“अब हमें जाना होगा।”
“कहाँ?”
“जहाँ तुम्हारा असली चेहरा रखा है।”
Arjun ने पूछा—
“कहाँ?”
लड़की ने अस्पताल के फर्श पर बने एक छोटे से निशान की ओर इशारा किया।
वही गोल निशान।
हथेली जैसा।
Arjun ने अपना हाथ उस पर रखा।
फर्श खुल गया।
नीचे सीढ़ियाँ थीं।
बहुत गहरी।
नीचे से ठंडी हवा आ रही थी।
और...
बच्चों की आवाज़ें।
“आओ...”
“आओ...”
“तुम्हारा चेहरा नीचे है...”
Neil ने कैमरा उठाया।
“मैं साथ आ रहा हूँ।”
Kabir ने कहा—
“नहीं।”
“क्यों?”
“क्योंकि नीचे जाने के बाद...”
Kabir की आवाज़ काँप गई।
“वापसी नहीं होती।”
Arjun ने उसकी तरफ देखा।
“मुझे अपना चेहरा वापस चाहिए।”
और वह सीढ़ियों से नीचे उतर गया।
लड़की उसके पीछे।
Neil उसके बाद।
Kabir सबसे पीछे।
Aarav...
कुछ सेकंड वहीं खड़ा रहा।
फिर उसने mirror की तरफ देखा।
Mirror में उसका दूसरा चेहरा मुस्कुरा रहा था।
Aarav ने धीरे से कहा—
“अब मेरी बारी है।”
और वह भी नीचे उतर गया।
---
सीढ़ियाँ खत्म हुईं।
सामने एक विशाल कमरा था।
दीवारों पर...
**सैकड़ों mirrors।**
हर mirror में अलग Arjun।
कहीं बच्चा।
कहीं बूढ़ा।
कहीं घायल।
कहीं रोता हुआ।
कहीं हँसता हुआ।
और बीच में...
एक खाली frame।
उस frame के अंदर कोई चेहरा नहीं था।
लड़की ने कहा—
“यही है।”
Arjun ने पूछा—
“क्या?”
“तुम्हारा असली चेहरा।”
“लेकिन इसमें कुछ नहीं है।”
लड़की मुस्कुराई।
“अभी नहीं।”
अचानक कमरे के सारे mirrors एक साथ टूट गए।
**CRASH!**
अंधेरे में वह faceless creature दिखाई दिया।
इस बार...
उसका चेहरा था।
और वह चेहरा देखकर Arjun के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह चेहरा...
**Arjun का था।**
Creature ने मुस्कुराकर कहा—
“बहुत देर कर दी।”
Arjun पीछे हट गया।
Creature ने अपना हाथ उठाया।
“तेरह साल से मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रहा हूँ।”
Arjun ने पूछा—
“तुम कौन हो?”
Creature की मुस्कान और चौड़ी हो गई।
“मैं?”
उसने Arjun की तरफ कदम बढ़ाया।
“**मैं वही हूँ जिसे तुमने अपने अंदर बंद किया था।**”
और अगले ही पल...
पूरे कमरे की सारी लाइटें बंद हो गईं।
अंधेरे में सिर्फ एक आवाज़ गूँजी—
**“अब आठवाँ चेहरा पूरा होगा।”**
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